अधिसूचनाएं

डेबिट कार्ड के लेनदेन के लिए मर्चेन्ट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) संरचना

आरबीआई/2011-12/625
डीपीएसएस सीओ पीडी सं. 2361/02.14.003/ 2011-12

28 जून, 2012

क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों सहित सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के
अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक/मुख्य कार्यपालक अधिकारी/
शहरी सहकारी बैंक/राज्य को-ऑपरेटिव बैंक/
जिला केंद्रीय सहकारी बैंक/प्राधिकृत कार्ड भुगतान नेटवर्क

महोदया / महोदय,

डेबिट कार्ड के लेनदेन के लिए मर्चेन्ट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) संरचना

डेबिट और क्रेडिट कार्ड से होने वाले लेनदेनों पर मर्चेन्ट डिस्काउंट रेट ( एमडीआर ) भारत में अभी तक एक  समान रही है। डेबिट कार्ड एक सुरक्षित उत्पाद है क्योंकि कार्ड का उपयोग ग्राहक के खाते में उपलब्ध राशि  से जुड़ा हुआ है। दूसरी ओर क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता बैंक  के असुरक्षित क्रेडिट उत्पाद पोर्टफोलियो का हिस्सा हैं। क्रेडिट कार्ड का उपयोग जारीकर्ता बैंक द्वारा स्वीकृत क्रेडिट सीमा से जुड़ा हुआ है और इसमें क्रेडिट जोखिम का तत्व जुड़ा होता है। अत: इन दो उत्पादों की अलग-अलग प्रकृति को देखते हुए डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड के लिए एक समान एमडीआर होना  तर्कसंगत  नहीं है। इसके अलावा, यह देखा गया है कि डेबिट कार्डों का ज़्यादातर उपयोग एटीएम से नकदी निकालने के लिए किया जाता है।

2. इस परिदृश्य के मद्देनजर, यह आवश्यक हो गया है कि कम एमडीआर के माध्यम से डेबिट कार्ड के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए, विषेशतौर पर छोटे व्यापारियों/सेवा प्रदाताओं और छोटे स्थानों पर। इस कदम से सभी श्रेणियों और सभी प्रकार के व्यापारी,  कार्ड स्वीकृति के लिए बुनियादी सुविधा स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित होंगे और कम मूल्य के लेनदेनों की स्वीकृति को भी प्रोत्साहन मिलेगा । इसके अतिरिक्त अभिग्रहण करने वाले बैंकों (acquiring banks) के मामले में, निवेश से मिलने वाले प्रतिफल ( आरओआई ) के संबंध में गारंटी के कुछ तत्व का होना आवश्यक है ताकि  कि वे कार्ड स्वीकृति के लिए बुनियादी सुविधाओं  को मजबूत बना सकें । निम्नतर एमडीआर के नेटवर्क प्रभावों के कारण लेनदेन की मात्रा में होने वाली संभावित वृद्धि से अभिग्रहण करने वाले बैंकों को पर्याप्त मात्रा में निवेश पर प्रतिफल मिलेगा।

3. तदनुसार, हितधारकों के परामर्श से यह निर्णय लिया गया है कि डेबिट कार्ड के माध्यम से किए जाने वाले लेनदेनों के लिए एमडीआर की सीमा निम्नलिखित अनुसार निर्धारित की जाए:

(क) 2000 रुपये तक की राशि के लिए लेनदेन की राशि के 0.75 प्रतिशत से अधिक नहीं;

(ख) 2000 रुपये से अधिक की राशि के लिए लेनदेन की राशि के 1 प्रतिशत से अधिक नहीं।

4. यह निर्देश भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम,2007 (2007 का अधिनियम 51) की धारा 18 के अंतर्गत जारी किया गया है और यह 1 जुलाई 2012 से प्रभावी होगा।

5. कृपया इस परिपत्र की प्राप्ति की सूचना दें और अनुपालन सुनिश्चित करें।

भवदीय

(विजय चुग)
मुख्य महाप्रबंधक


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