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बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) नीति – अप्रयुक्त ईसीबी प्राप्तियों को मीयादी जमाराशियों के रूप में नियोजित किए जाने की अवधि में छूट

आरबीआई/2021-22/16
ए. पी. (डीआईआर सीरीज़) परिपत्र सं. 01

07 अप्रैल 2021

सेवा में

समस्त श्रेणी-I प्राधिकृत व्यापारी बैंक

महोदया / महोदय,

बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) नीति – अप्रयुक्त ईसीबी प्राप्तियों को मीयादी जमाराशियों के रूप में नियोजित किए जाने की अवधि में छूट

कृपया विकासात्मक और विनियामकीय नीतियों पर गवर्नर द्वारा 07 अप्रैल 2021 को दिए गए वक्तव्य के पैरा 12 का संदर्भ लें। इस संबंध में “बाह्य वाणिज्यिक उधार, व्यापार ऋण और संरचित बाध्यताएँ” विषय पर 26 मार्च 2019 के मास्टर निदेश सं. 5 के पैरा 4.2 की ओर प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I (ए. डी. श्रेणी-I) बैंकों का ध्यान आकृष्ट किया जाता है जिसके अनुसार ईसीबी उधारकर्ताओं को यह अनुमति दी गयी है कि वे ईसीबी प्राप्तियों को कुल मिलाकर 12 महीनों की अवधि के लिए भारत के ए. डी. श्रेणी-I बैंकों में मीयादी जमा के रूप में नियोजित कर सकते हैं।

2. हितधारकों, जिनमें उद्योग संघ भी शामिल हैं, द्वारा किए जा रहे अनुरोधों के आधार पर, और कोविड-19 महामारी के प्रकोप से परेशान ईसीबी उधारकर्ताओं को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से, एकबारगी उपाय के तौर पर उपर्युक्त प्रावधान में ढील देने का निर्णय लिया गया है। तदनुसार, 01 मार्च 2020 या उससे पहले आहरित की गयी ईसीबी प्राप्तियाँ जो अप्रयुक्त हैं, उन्हें आगे से भारत के ए. डी. श्रेणी-I बैंकों में मीयादी जमा के रूप में 01 मार्च 2022 तक की अतिरिक्त अवधि के लिए नियोजित किया जा सकता है।

3. उक्त ईसीबी नीति के अन्य सभी प्रावधान पूर्ववत हैं। ए. डी. श्रेणी-I बैंकों को चाहिए कि वे इस परिपत्र की विषय-वस्तु को अपने सभी घटकों/ग्राहकों की जानकारी में लाएं।

4. इन परिवर्तनों को शामिल करते हुए 26 मार्च 2019 के उपर्युक्त मास्टर निदेश सं. 5 को अद्यतन बनाया जा रहा है।

5. इस परिपत्र में निहित निदेश विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 10 (4) और 11(2) के अंतर्गत और किसी भी अन्य विधि के अंतर्गत अपेक्षित किसी अनुमति/ अनुमोदन, यदि कोई हो, पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना जारी किये गये हैं।

भवदीय

अजय कुमार मिश्र
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक


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