मौद्रिक नीति

आर्थिक नीति के अंतिम उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए मौद्रिक नीति केंद्रीय बैंक के नियंत्रण में ब्याज दरों, मुद्रा आपूर्ति और ऋण की उपलब्धता जैसे परिमाणों को विनियमित करने के लिए मौद्रिक साधनों के उपयोग को सूचित करती।

प्रेस प्रकाशनी


बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 - (सहकारी सोसायटियों पर यथालागू) की धारा 35ए के अंतर्गत निदेश – पद्मश्री डॉ. विठ्ठलराव विखे पाटिल को-ऑपरेटिव बैंक लि., नासिक, महाराष्ट्र – अवधि बढ़ाई गई

17 सितंबर 2019

बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 - (सहकारी सोसायटियों पर यथालागू) की धारा 35ए के अंतर्गत
निदेश – पद्मश्री डॉ. विठ्ठलराव विखे पाटिल को-ऑपरेटिव बैंक लि., नासिक, महाराष्ट्र –
अवधि बढ़ाई गई

भारतीय रिज़र्व बैंक ने लोकहित में बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 (सहकारी सोसायटियों पर यथालागू) की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए की उपधारा (1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए पद्मश्री डॉ. विठ्ठलराव विखे पाटिल को-ऑपरेटिव बैंक लि.,नासिक, महाराष्ट्र को 19 मई 2018 की कार्य समाप्ति से निदेश जारी किया था। अ‍ब भारतीय रिजर्व बैंक ने इस निदेश की अवधि को 18 सितंबर 2019 से 17 मार्च 2020 तक अगले छः महीने के लिए बढ़ा दिया है, जो समीक्षाधीन है। निदेश की एक प्रति जनता के अवलोकनार्थ बैंक के परिसर में प्रदर्शित की गयी है। भारतीय रिज़र्व बैंक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इन निदेशों में संशोधन किए जाने पर विचार कर सकता है । भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी निदेशों का यह अर्थ नहीं लगाया जाना चाहिए कि इस बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द किया गया है । बैंक की वित्तीय स्थिति में जब तक सुधार नहीं हो जाता तब तक, बैंक प्रतिबंधों के अधीन बैंकिंग कारोबार जारी रखेगा ।

योगेश दयाल  
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2019-2020/717

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