शहरी बैंकिंग

शायद यह भूमिका हमारे कार्यकलापों का सबसे अधिक अघोषित पहलू है, फिर भी यह सबसे महत्वपूर्ण है। इसमें अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों के लिए ऋण उपलब्धता सुनिश्चित करना, देश की वित्तीय मूलभूत सुविधा के निर्माण के लिए डिज़ाइन किए गए संस्थानों की स्थापना करना, वहनीय वित्तीय सेवाओं की पहुंच में विस्तार करना और वित्तीय शिक्षा और साक्षरता को बढ़ावा देना शामिल है।

प्रेस प्रकाशनी


बीदर महिला अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लि., बीदर - बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 (एएसीएस) की धारा 35 ए के अंतर्गत सभी समावेशी निर्देशों को बढ़ाया जाना

3 सितम्बर 2019

बीदर महिला अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लि., बीदर - बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949
(एएसीएस) की धारा 35 ए के अंतर्गत सभी समावेशी निर्देशों को बढ़ाया जाना

जन साधारण के सूचनार्थ एतद्द्वारा सूचित किया जाता है कि भारतीय रिज़र्व बैंक इस बात से सहमत है कि लोक हित में बीदर महिला अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लि., बीदर, कर्नाटक को जारी दिनांक 21 फरवरी 2019 के निर्देश की परिचालन अवधि को बढ़ाना आवश्यक है।

तदनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक, बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 (एएसीएस) की धारा 35 ए की उपधारा (1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए एतदद्वारा निदेश देता है कि बीदर महिला को-ऑपरेटिव बैंक लि., को दिनांक 21 फरवरी 2019 के जारी निर्देश, जिसकी वैधता 31 अगस्त 2019 तक थी, को 01 सितम्बर 2019 से 29 फरवरी 2020 तक अगले छह माह की अवधि के लिए बढ़ा दिया गया है, जो समीक्षाधीन है।

संदर्भाधीन निर्देश के अन्य निबंधन एवं शर्तें अपरिवर्तित रहेंगी। भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी निर्देशों का यह अर्थ नहीं लगाया जाना चाहिए कि इस बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द किया गया है। बैंक की वित्तीय स्थिति में जब तक सुधार नहीं हो जाता तब तक, बैंक प्रतिबंधों के अधीन बैंकिंग कारोबार जारी रखेगा। भारतीय रिज़र्व बैंक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इन निर्देश में संशोधन करने पर विचार कर सकता है।

योगेश दयाल  
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2019-2020/595

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