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भारतीय रिज़र्व बैंक ने विनायक कैपसेक प्राइवेट लिमिटेड पर मौद्रिक दंड लगाया

5 फरवरी 2026

भारतीय रिज़र्व बैंक ने विनायक कैपसेक प्राइवेट लिमिटेड पर मौद्रिक दंड लगाया

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने 4 फरवरी 2026 के आदेश द्वारा, विनायक कैपसेक प्राइवेट लिमिटेड (कंपनी) पर भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी 'शेयरधारिता प्राप्त करने अथवा नियंत्रण' संबंधी कतिपय निदेशों के अननुपालन के लिए 1 लाख (एक लाख रुपये मात्र) का मौद्रिक दंड लगाया है। यह दंड, भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 58बी(5)(एए) के साथ पठित धारा 58जी(1)(बी) के प्रावधानों के अंतर्गत भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए लगाया गया है।

आरबीआई और कंपनी के बीच किए गए पत्राचार से ज्ञात हुआ कि, अन्य बातों के साथ-साथ, कंपनी ने आरबीआई के निदेशों का अनुपालन नहीं किया है। इसी आधार पर कंपनी को एक नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उससे पूछा गया कि आरबीआई के निदेशों के अनुपालन में विफलता के लिए उस पर दंड क्यों न लगाया जाए। नोटिस पर कंपनी के उत्तर और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, आरबीआई ने, अन्य बातों के साथ-साथ, यह पाया कि कंपनी के विरुद्ध निम्नलिखित आरोप सिद्ध हुआ है, जिसके लिए मौद्रिक दंड लगाया जाना आवश्यक है:

कंपनी अपनी चुकता इक्विटी पूंजी के 26 प्रतिशत से अधिक की शेयरधारिता में परिवर्तन के लिए आरबीआई से पूर्व लिखित अनुमति प्राप्त करने में विफल रही थी।

यह कार्रवाई, विनियामकीय अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य कंपनी द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या करार की वैधता पर सवाल करना नहीं है। इसके अलावा, इस मौद्रिक दंड को लगाने से आरबीआई द्वारा कंपनी के विरुद्ध की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

(ब्रिज राज)   
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2025-2026/2046

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