बैंकिंग प्रणाली का विनियामक

बैंक राष्‍ट्रीय वित्‍तीय प्रणाली की नींव होते हैं। बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा एवं सुदृढता को सुनिश्चित करने और वित्‍तीय स्थिरता को बनाए रखने तथा इस प्रणाली के प्रति जनता में विश्‍वास जगाने में केंद्रीय बैंक महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

अधिसूचनाएं


अप्रैल 01, 2020
केवाईसी पर मास्टर निदेश (एमडी) में संशोधन
मार्च 30, 2020
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का समामेलन – एसएलबीसी / यूटीएलबीसी संयोजक और अग्रणी बैंक का दायित्व सौंपना
मार्च 28, 2020
निजी क्षेत्र में लघु वित्त बैंकों के लाइसेंसिंग के लिए दिशानिर्देश’, 27 नवंबर 2014 – मौजूदा मानदंडों में संशोधन
मार्च 27, 2020
चलनिधि मानकों पर बासल III ढांचा - निवल स्थिर निधीयन अनुपात (एनएसएफआर)
प्राथमिक व्यापारियों के लिए स्थायी चलनिधि सुविधा
बैंक दर में परिवर्तन
बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 24 - सांविधिक चलनिधि अनुपात (एसएलआर) बनाए रखना- सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ)
भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 42(1) – दैनिक न्यूनतम आरक्षित नकदी बनाए रखने की अपेक्षाओं में परिवर्तन
आरक्षित नकदी निधि अनुपात (सीआरआर) बनाए रखना
यूएपीए, 1967 की धारा 51-क का कार्यान्वयन – यूएनएससी की 1267/1989 आईएसआईएल (दाएश) और अल-कायदा प्रतिबंध सूची में अद्यतन करना - एक व्यक्ति को हटाना
मार्च 23, 2020
वृहत एक्स्पोजर ढांचा
मार्च 17, 2020
बैंकों द्वारा दीर्घावधि बॉन्ड जारी करना- इंफ्रास्ट्रक्चर और किफ़ायती आवास के लिए वित्तपोषण
बैंकों के निवेश संविभाग के वर्गीकरण, मूल्यांकन और परिचालन के लिए विवेकपूर्ण मानदंड – एमटीएम हानि का विभाजन (स्प्रेडिंग) और निवेश अस्थिरता रिज़र्व (आईएफ़आर) का सृजन
मार्च 06, 2020
यूएपीए, 1967 की धारा 51-ए का कार्यान्वयन – 1267 सूची में तीन संस्थाओं को जोड़ना
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