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विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 के अंतर्गत रिपोर्टिंग – बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) से संबंधित विवरणियाँ

भा.रि.बैंक/2025-26/253
ए.पी. (डीआईआर सीरीज़) परिपत्र सं. 25

30 मार्च 2026

सभी प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी I बैंक,

महोदया/ महोदय,

विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 के अंतर्गत रिपोर्टिंग – बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) से संबंधित विवरणियाँ

प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी I बैंक का ध्यान दिनांक 30 सितंबर 2022 के ए.पी. (डीआईआर सीरीज़) परिपत्र सं.16 और मास्टर निदेश - विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 के अंतर्गत रिपोर्टिंग के भाग V और XIII की ओर आकृष्ट किया जाता है।

2. समीक्षा के बाद, बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) से संबंधित विवरणियों के संदर्भ में मौजूदा निदेशों में निम्नलिखित परिवर्तन किए गए हैं:

(i) फॉर्म ईसीबी 1 और संशोधित फॉर्म ईसीबी 1 (जिसे विदेशी मुद्रा प्रबंध (उधार लेना तथा उधार देना) (प्रथम संशोधन) विनियमावली, 2026 की अधिसूचना से पहले क्रमशः फॉर्म ईसीबी और संशोधित फॉर्म ईसीबी के नाम से जाने जाता था) को ऐसे विवरणियों के रूप में माना जाएगा जिनमें उधार प्रवाह दर्ज नहीं होते हैं। इन फॉर्मों को विलंब से प्रस्तुत करने पर विलंब प्रस्तुतीकरण शुल्क की गणना तदनुसार की जाएगी;

(ii) एलएसएफ राशि प्रति रिटर्न के अनुसार है। इसलिए, ऋण पंजीकरण संख्या (एलआरएन) के तहत प्रस्तुत किए गए फॉर्म ईसीबी 2 विवरणी के प्रत्येक विलंबित प्रस्तुतीकरण को एक अलग घटना के रूप में माना जाएगा और तदनुसार एलएसएफ के निश्चित घटक की गणना कि जाएगी;

(iii) नामित एडी श्रेणी-I बैंक पात्र उधारकर्ता से प्राप्त विवरणी (सभी पहलुओं में पूर्ण) को उचित प्रमाणन के साथ रिज़र्व बैंक को उसकी प्राप्ति की तारीख से सात कैलेंडर दिनों के भीतर प्रस्तुत करेंगे;

(iv) एलएसएफ, जहां कहीं भी लागू हो, रिज़र्व बैंक से विवरणी प्राप्त होने की स्वीकृति के ई-मेल के बाद, एनईएफटी या आरटीजीएस के माध्यम से रिज़र्व बैंक के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय में देय होगा। इस संबंध में विस्तृत निदेश उक्त पावती ई-मेल में निहित होंगे; तथा

(v) विवरणियों के देरी से प्रस्तुति के मामले में, नामित एडी श्रेणी-I बैंक अपने ग्राहकों/घटकों द्वारा लागू एलएसएफ के भुगतान की निगरानी करेंगे।

3. ये निदेश 01 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगे।

4. प्राधिकृत व्यापारी बैंक इस परिपत्र की विषयवस्तु से अपने ग्राहकों / संबंधित घटकों को अवगत कराएँ।

5. इस परिपत्र में निहित निदेश विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम (फेमा), 1999 (1999 का 42) की धारा 10(4), 11(1) और 11(2) के अंतर्गत जारी किए गए हैं और ये किसी अन्य विधि/ कानून के अंतर्गत अपेक्षित अनुमति/ अनुमोदन, यदि कोई हों, पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालते हैं।

भवदीय,

(डॉ. आदित्य गेहा)
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक


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