विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम


विदेशी मुद्रा प्रबंध (भुगतान माध्यम तथा गैर-कर्ज़ लिखतों की रिपोर्टिंग) विनियमावली, 2019

भारतीय रिज़र्व बैंक
विदेशी मुद्रा विभाग
केंद्रीय कार्यालय
मुंबई

अधिसूचना सं.फेमा.395/2019-आरबी

17 अक्तूबर 2019

विदेशी मुद्रा प्रबंध (भुगतान माध्यम तथा गैर-कर्ज़ लिखतों की रिपोर्टिंग) विनियमावली, 2019

विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा-47 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए तथा विदेशी मुद्रा प्रबंध (गैर-कर्ज़ लिखत) नियमावली, 2019 के परिणामस्वरूप भारतीय रिज़र्व बैंक, भारत के बाहर के निवासी व्यक्ति द्वारा भारत में किए जाने वाले निवेश के लिए उपयोग में लाए जाने वाले भुगतान माध्यम तथा रिपोर्टिंग अपेक्षाओं के संबंध में निम्नलिखित विनियमावली बनाता है, अर्थात:

1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ:-

ए) यह विनियमावली विदेशी मुद्रा प्रबंध (भुगतान माध्यम तथा गैर-कर्ज़ लिखतों की रिपोर्टिंग) विनियमावली, 2019 कहलाएगी।

बी) यह विनियमावली भारत के सरकारी राजपत्र में उसके प्रकाशन की तारीख से लागू होगी ।

2. परिभाषाएँ

इन विनियमों में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो:

ए) "अधिनियम" का तात्पर्य विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) से है;

बी) “नियमों” का तात्पर्य विदेशी मुद्रा प्रबंध (गैर-कर्ज़ लिखत) नियमावली, 2019 से है;

सी) इस विनियमावली में प्रयुक्त किंतु अलग से परिभाषित न किए गए शब्दों और अभिव्यक्तियों के अर्थ क्रमश: वही होंगे जो संबन्धित अधिनियम अथवा नियमों में उन्हें दिये गए हैं।

3. भुगतान माध्यम एवं बिक्रीगत आय का विप्रेषण :

नियमों की अनुसूची बिक्रीगत आय के विप्रेषण एवं भुगतान माध्यम के संबंध में अनुदेश
I. अनुसूची-I

(भारत के बाहर के निवासी व्यक्ति द्वारा किसी भारतीय कंपनी के इक्विटि लिखतों की खरीद अथवा बिक्री)
ए. भुगतान माध्यम

(1) प्रतिफल राशि का भुगतान विदेश से बैंकिंग चैनल के माध्यम से आवक विप्रेषण के रूप में अथवा विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) विनियमावली, 2016 के अनुसरण में बनाए रखे गए एनआरई/ एफ़सीएनआर(बी)/ एस्क्रो खातों में धारित की गई निधियों से किया जाएगा।

स्पष्टीकरण: प्रतिफल राशि में निम्नलिखित शामिल होंगे :

(i) किसी भारतीय कंपनी द्वारा निवेशक को उसके द्वारा देय किसी राशि (निधि) के बदले जारी किए गए इक्विटी शेयर;

(ii) इक्विटी लिखतों का स्वैप ।

(2) भारत के बाहर के निवासी व्यक्ति को इस प्रकार के निवेश पर प्रतिफल की प्राप्ति की तारीख से साठ दिनों के भीतर इक्विटी लिखतें जारी की जाएंगी।

स्पष्टीकरण: ऊपर उल्लिखित आंशिक रूप से प्रदत्त इक्विटी शेयरों के मामले में, 60 दिनों की अवधि की गणना प्रत्येक मांग-भुगतान (कॉल पेमेंट) की प्राप्ति की तारीख से की जाएगी।

(3) जहां इस तरह की इक्विटी लिखतें प्रतिफल प्राप्ति की तारीख से साठ दिनों के भीतर जारी नहीं की जाती हैं, उन मामलों में, उल्लिखित साठ दिन पूरे होने की तारीख से पंद्रह दिनों के भीतर उक्त प्रतिफल राशि संबंधित व्यक्ति को बैंकिंग चैनलों के माध्यम से जावक विप्रेषण के रूप में अथवा उसके एनआरई / एफसीएनआर(बी) खातों में जमा करने के माध्यम से, जैसा भी मामला हो, वापस की जाए ।

(4) इस अनुसूची के तहत इक्विटी लिखतें जारी करने वाली किसी भारतीय कंपनी द्वारा विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा बनाए रखे गए विदेशी मुद्रा खाते) विनियमावली 2016 के अनुसरण में भारत में किसी प्राधिकृत व्यापारी के पास विदेशी मुद्रा खाता खोला जा सकता है ।

बी. बिक्रीगत आय का विप्रेषण

इक्विटी लिखतों की बिक्रीगत आय (लागू करों की कटौती के पश्चात) को भारत से बाहर विप्रेषित किया जा सकता है अथवा उसे संबंधित व्यक्ति के एनआरई / एफसीएनआर (बी) खाते में जमा किया जा सकता है ।
II. अनुसूची-II

(विदेशी संविभाग (पोर्टफोलियो) निवेशकों द्वारा निवेश)
ए. भुगतान माध्यम

(1) प्रतिफल राशि का भुगतान विदेश से बैंकिंग चैनल के माध्यम से आवक विप्रेषण के रूप में अथवा विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) विनियमावली, 2016 के अनुसरण में बनाए रखे गए विदेशी मुद्रा खाते और / अथवा विशेष अनिवासी रुपया (एसएनआरआर) खाते में धारित की गई निधियों से किया जाएगा।

बशर्ते कि एसएनआरआर खाते में धारित राशियों का उपयोग घरेलू म्यूचुअल फंड की यूनिटों में निवेश के अलावा निवेश-माध्यमों (इन्वेस्टमेंट वेहिकल) की यूनिटों में निवेश करने हेतु नहीं किया जाएगा ।

(2) विदेशी मुद्रा खाते और एसएनआरआर खाते का उपयोग केवल और अनन्य रूप से इस अनुसूची के तहत लेनदेन के लिए किया जाएगा।

बी. बिक्री से प्राप्त आय का विप्रेषण

इक्विटी लिखतों और घरेलू म्यूचुअल फ़ंड की बिक्रीगत आय (लागू करों की कटौती के पश्चात) को भारत से बाहर विप्रेषित किया जा सकता है अथवा उसे संबंधित विदेशी संविभाग निवेशक (एफ़पीआई) के विदेशी मुद्रा खाते अथवा एसएनआरआर खाते में जमा किया जा सकता है।

घरेलू म्यूचुअल फ़ंड के अलावा किसी निवेश माध्यम (इन्वेस्टमेंट वेहिकल) की यूनिटों की बिक्रीगत आय (लागू करों की कटौती के पश्चात) को भारत से बाहर विप्रेषित किया जा सकता है ।
III. अनुसूची-III

(अनिवासी भारतीय (एनआरआई) अथवा प्रवासी भारतीय नागरिक (ओसीआई) द्वारा प्रत्यावर्तनीय आधार पर निवेश)
ए. भुगतान माध्यम

(1) प्रतिफल राशि का भुगतान विदेश से बैंकिंग चैनल के माध्यम से आवक विप्रेषण के रूप में अथवा विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) विनियमावली, 2016 के अनुसरण में बनाए रखे गए अनिवासी बाह्य (एनआरई) खाते में धारित की गई निधियों से किया जाएगा।

(2) बशर्ते कि ऐसे अनिवासी बाह्य (एनआरई) खाते को एनआरई (पीआईएस) खाते के रूप में नामित किया जाएगा एवं उक्त नामित खाते का उपयोग केवल और अनन्य रूप से इस अनुसूची के तहत अनुमत लेनदेन के लिए किया जाएगा।

(3) घरेलू म्यूचुअल फंडों की यूनिटों में निवेशों का भुगतान विदेश से बैंकिंग चैनल के माध्यम से आवक विप्रेषण के रूप में अथवा एनआरई / एफ़सीएनआर (बी) खातों में धारित निधियों से किया जाएगा।

(4) राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) में अभिदान हेतु भुगतान विदेश से बैंकिंग चैनल के माध्यम से आवक विप्रेषण के रूप में अथवा एनआरई / एफ़सीएनआर (बी)/ एनआरओ खातों में धारित निधियों से किया जाएगा।

बी. बिक्रीगत आय का विप्रेषण

इक्विटी लिखतों की बिक्रीगत आय (लागू करों की कटौती के पश्चात) को भारत से बाहर विप्रेषित किया जा सकता है अथवा उसे संबंधित व्यक्ति के एनआरई (पीआईएस) खाते में जमा किया जा सकता है।

म्यूचुअल फ़ंडों की यूनिटों तथा राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) में अभिदान की बिक्रीगत आय (लागू करों की कटौती के पश्चात) को भारत से बाहर विप्रेषित किया जा सकता है अथवा उसे एनआरआई/ ओसीआई निवेशक के विकल्प पर संबंधित व्यक्ति के एनआरई (पीआईएस) / एफ़सीएनआर (बी)/ एनआरओ खातों में जमा किया जा सकता है।
IV. अनुसूची-IV

(एनआरआई अथवा ओसीआई द्वारा अप्रत्यावर्तनीय आधार पर निवेश)
1. अनिवासी भारतीय व्यक्ति (एनआरआई) या भारत के प्रवासी नागरिक (ओसीआई) द्वारा अप्रत्यावर्तनीय आधार पर किसी भारतीय कंपनी अथवा यूनिटों अथवा किसी एलएलपी की पूंजी में अंशदान के माध्यम से की गई इक्विटी लिखतों की खरीद अथवा बिक्री ।

ए. भुगतान माध्यम

प्रतिफल राशि का भुगतान विदेश से बैंकिंग चैनल के माध्यम से आवक विप्रेषण के रूप में अथवा विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) विनियमावली, 2016 के अनुसरण में बनाए रखे गए अनिवासी बाह्य (एनआरई) / एफ़सीएनआर (बी)/ एनआरओ खातों में धारित की गई निधियों से किया जाएगा।

बी. बिक्री से / परिपक्वता पर प्राप्त आय

(1) किसी एलएलपी की इक्विटी लिखतों अथवा यूनिटों अथवा विनिवेश की बिक्री से / परिपक्वता पर प्राप्त आय (करों की कटौती के पश्चात) को केवल निवेशक के एनआरओ खाते में क्रेडिट किया जाएगा, भले ही प्रतिफल राशि का भुगतान किसी भी प्रकार के खाते से किया गया हो;

(2) किसी भारतीय कंपनी की इक्विटी लिखतों में निवेश की गई राशि अथवा किसी एलएलपी की पूंजी में किए गए अंशदान का प्रतिफल और उस पूंजी में आगे चल कर हुई मूल्यवृद्धि की राशि का भारत से बाहर प्रत्यावर्तन करने की अनुमति नहीं है।

1. किसी फ़र्म अथवा किसी स्वामित्व प्रतिष्ठान में निवेश

ए. भुगतान माध्यम

प्रतिफल राशि का भुगतान विदेश से बैंकिंग चैनल के माध्यम से आवक विप्रेषण के रूप में अथवा विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) विनियमावली, 2016 के अनुसरण में बनाए रखे गए अनिवासी बाह्य (एनआरई) /एफ़सीएनआर (बी)/ एनआरओ खातों में धारित की गई निधियों से किया जाएगा।

बी. बिक्री से / परिपक्वता पर प्राप्त आय

(1) विनिवेश से प्राप्त आय को केवल संबन्धित व्यक्ति के एनआरओ खाते में जमा किया जाएगा, भले ही प्रतिफल राशि का भुगतान किसी भी प्रकार के खाते से किया गया हो।

(2) किसी फ़र्म अथवा किसी स्वामित्व प्रतिष्ठान की पूंजी में अंशदान हेतु किए गए निवेश की राशि और उस पूंजी में आगे चल कर हुई मूल्यवृद्धि की राशि का भारत से बाहर प्रत्यावर्तन करने की अनुमति नहीं है ।
V. अनुसूची-V

(अन्य अनिवासी निवेशकों द्वारा निवेश)
ए. भुगतान माध्यम

प्रतिफल राशि का भुगतान विदेश से बैंकिंग चैनल के माध्यम से आवक विप्रेषण के रूप में किया जा सकता है।

बी. बिक्री से / परिपक्वता पर प्राप्त आय की जमा / विप्रेषण

(1) बिक्री / परिपक्वता पर प्राप्त आय (लागू करों की कटौती के पश्चात) को भारत से बाहर विप्रेषित किया जा सकता है।
VI. अनुसूची-VI

(सीमित देयता भागीदारी में निवेश)
ए. भुगतान माध्यम

किसी निवेशक द्वारा किसी एलएलपी की पूंजी में अंशदान हेतु भुगतान विदेश से बैंकिंग चैनल के माध्यम से आवक विप्रेषण के रूप में अथवा विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) विनियमावली, 2016 के अनुसरण में बनाए रखे गए अनिवासी बाह्य (एनआरई) अथवा एफ़सीएनआर (बी) खातों में धारित की गई निधियों से किया जाएगा।

बी. विनिवेश से प्राप्त आय का विप्रेषण

विनिवेश से प्राप्त आय को भारत से बाहर विप्रेषित किया जा सकता है अथवा उसे संबन्धित व्यक्ति के अनिवासी बाह्य (एनआरई)/ एफ़सीएनआर(बी) खातों में जमा किया जा सकता है।
VII. अनुसूची-VII

(विदेशी उद्यम पूंजी निवेशक द्वारा निवेश)
ए. भुगतान माध्यम

(1) प्रतिफल राशि का भुगतान विदेश से बैंकिंग चैनल के माध्यम से आवक विप्रेषण के रूप में अथवा विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) विनियमावली, 2016 के अनुसरण में बनाए रखे गए विदेशी मुद्रा खाते और / अथवा विशेष अनिवासी रुपया (एसएनआरआर) खाते में धारित की गई निधियों से किया जाएगा।

(2) विदेशी मुद्रा खाते और एसएनआरआर खाते का उपयोग केवल और अनन्य रूप से इस अनुसूची के तहत लेनदेन के लिए किया जाएगा।

बी. बिक्री से / परिपक्वता पर प्राप्त आय का विप्रेषण

प्रतिभूतियों की बिक्री/ परिपक्वता पर प्राप्त आय (करों की कटौती के पश्चात) को भारत से बाहर विप्रेषित किया जा सकता है अथवा उसे संबन्धित विदेशी उद्यम पूंजी निवेशक (एफ़वीसीआई) के विदेशी मुद्रा खाते अथवा विशेष अनिवासी रुपया (एसएनआरआर) खाते में जमा किया जा सकता है।
VIII. अनुसूची-VIII

(भारत के बाहर के निवासी व्यक्ति द्वारा किसी निवेश माध्यम में निवेश)
ए. भुगतान माध्यम

प्रतिफल राशि का भुगतान विदेश से बैंकिंग चैनल के माध्यम से आवक विप्रेषण के रूप में अथवा किसी विशेष प्रयोजन माध्यम (एसपीवी) के शेयरों को स्वैप कर के अथवा विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) विनियमावली, 2016 के अनुसरण में बनाए रखे गए अनिवासी बाह्य (एनआरई) / एफ़सीएनआर (बी) खातों में धारित की गई निधियों से किया जाएगा।

बी. बिक्री से / परिपक्वता पर प्राप्त आय का विप्रेषण

यूनिटों की बिक्री / परिपक्वता पर प्राप्त आय (लागू करों की कटौती के पश्चात) को भारत से बाहर विप्रेषित किया जा सकता है अथवा उसे संबन्धित व्यक्ति के अनिवासी बाह्य (एनआरई) / एफ़सीएनआर(बी) खातों में जमा किया जा सकता है।
IX. अनुसूची-X

(भारतीय निक्षेपागार रसीदों का निर्गम)
ए. भुगतान माध्यम

अनिवासी भारतीय व्यक्ति (एनआरआई) अथवा प्रवासी भारतीय नागरिक (ओसीआई) विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) विनियमावली, 2016 के अनुसरण में बनाए रखे गए अपने अनिवासी बाह्य (एनआरई)/ एफ़सीएनआर(बी) खातों में धारित निधियों का उपयोग करते हुए भारतीय निक्षेपागार रसीदों (आईडीआर) में निवेश कर सकते हैं ।

बी. बिक्री से / परिपक्वता पर प्राप्त आय का विप्रेषण

भारतीय निक्षेपागार रसीदों (आईडीआर) का निर्गमकर्ता कंपनी के अंतर्निहित (अंडरलाईंग) इक्विटी शेयरों के रूप में मोचन/ रूपान्तरण करना विदेशी मुद्रा प्रबंध (किसी विदेशी प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) विनियमावली, 2004 का अनुपालन माना जाएगा।

3.2 किसी भारतीय स्टार्ट-अप कंपनी द्वारा परिवर्तनीय नोटों का निर्गम :

कोई स्टार्ट-अप कंपनी, जो भारत से बाहर के निवासी किसी व्यक्ति को परिवर्तनीय नोट निर्गमित करती है, तो वह प्रतिफल राशि आवक विप्रेषण के रूप में बैंकिंग चैनल के माध्यम से अथवा विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) विनियमावली, 2016 के अनुसरण में संबन्धित व्यक्ति द्वारा बनाए रखे गए अनिवासी बाह्य (एनआरई) / एफ़सीएनआर (बी) / एस्क्रो खातों से डेबिट के माध्यम से प्राप्त कर सकती है। पुनर्भुगतान अथवा बिक्री पर प्राप्त आय को भारत से बाहर विप्रेषित किया जा सकता है अथवा उसे विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) विनियमावली, 2016 के अनुसरण में संबन्धित व्यक्ति द्वारा खोले/ रखे गए अनिवासी बाह्य (एनआरई) / एफ़सीएनआर (बी) खातों में जमा किया जा सकता है ।

4. रिपोर्टिंग संबंधी अपेक्षाएँ

भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा भारत में किए गए किसी भी प्रकार के निवेश के संबंध में रिपोर्टिंग अपेक्षाएँ निम्नानुसार होंगी :

(1) फॉर्म विदेशी मुद्रा – सकल अनंतिम विवरणी (एफसी-जीपीआर): कोई भारतीय कंपनी, जो भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति को इक्विटी लिखतें जारी करती है, और जहां इस प्रकार के निर्गम को नियमावली के तहत परिभाषित प्रत्यक्ष विदेशी निवेश माना जाता है, तो इस प्रकार के निर्गम को इक्विटी लिखत जारी किए जाने की तारीख से अधिकतम तीस दिनों के भीतर फॉर्म एफसी-जीपीआर में रिपोर्ट किया जाए। तेल क्षेत्रों में जारी किए जाने वाले “भागीदारी-हितों / राइट्स” संबंधी निर्गमों की रिपोर्टिंग भी फॉर्म एफसी-जीपीआर में की जाए ।

(2) विदेशी देयताओं व आस्तियों (एफएलए) पर वार्षिक विवरणी: कोई भारतीय कंपनी, जिसने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्त किया है, अथवा कोई सीमित देयता भागीदारी (एलएलपी), जिसने मौजूदा वर्ष सहित पिछले वर्ष में अपनी पूंजी में अंशदान के माध्यम से निवेश प्राप्त किया है, वह प्रत्येक वर्ष के जुलाई माह की 15 तारीख को अथवा इससे पहले भारतीय रिजर्व बैंक को फॉर्म-एफएलए प्रस्तुत करें ।

स्पष्टीकरण : इस प्रयोजन हेतु वर्ष अप्रैल से मार्च तक माना जाएगा ।

(3) फॉर्म विदेशी मुद्रा – शेयरों का अंतरण (एफसी-टीआरएस):

(ए) फॉर्म एफसीटीआरएस को नियमावली के अनुसरण में इक्विटी लिखतों के निम्नलिखित व्यक्तियों (संस्थाओं) के बीच किए जाने वाले अंतरण हेतु दायर किया जाएगा :

  1. भारत के बाहर का निवासी कोई व्यक्ति, जो किसी भारतीय कंपनी में प्रत्यावर्तनीय आधार पर इक्विटी लिखतें धारित करता हो तथा भारत के बाहर का निवासी कोई व्यक्ति जो गैर-प्रत्यावर्तनीय आधार पर इक्विटी लिखतें धारित करता हो; तथा

  2. भारत के बाहर का निवासी कोई व्यक्ति जो किसी भारतीय कंपनी में प्रत्यावर्तनीय आधार पर इक्विटी लिखतें धारित करता हो तथा भारत का निवासी कोई व्यक्ति,

रिपोर्टिंग का दायित्व निवासी अंतरणकर्ता / अंतरिती पर अथवा भारत के बाहर के निवासी व्यक्ति, जो गैर-प्रत्यावर्तनीय आधार पर इक्विटी लिखत धारित करता हो, जैसा भी मामला हो, पर होगा ।

टिप्पणी : गैर-प्रत्यावर्तनीय आधार पर इक्विटी लिखतें धारित करने वाले भारत के बाहर के निवासी व्यक्ति तथा भारत के निवासी व्यक्ति के बीच नियमावली के अनुसरण में बिक्री के माध्यम से किए गए इक्विटी लिखतों के अंतरण को फॉर्म एफसी-टीआरएस में रिपोर्ट करने की आवश्यकता नहीं है ।

(बी) भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा किसी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में इक्विटी लिखतों के अंतरण को ऐसे व्यक्ति द्वारा फॉर्म एफसी-टीआरएस में रिपोर्ट किया जाएगा।

(सी) नियमावली के नियम 9(6) में निर्धारित इक्विटी लिखतों के हस्तांतरण को भुगतान की प्रत्येक शृंखला के प्राप्त होने पर फॉर्म एफसी-टीआरएस में रिपोर्ट किया जाएगा। रिपोर्टिंग का दायित्व निवासी अंतरंकर्ता/ अंतरिती पर होगा ।

(डी) तेल के क्षेत्रों में “भागीदारी-हितों / अधिकारों” के अंतरण की रिपोर्टिंग फॉर्म एफसी-टीआरएस में की जाएगी ।

इक्विटी लिखतों के अंतरण अथवा निधियों की प्राप्ति / विप्रेषण, जो भी पहले हो, से साठ दिनों के भीतर फॉर्म एफसीटीआरएस प्रस्तुत करना होगा।

(4) फॉर्म- कर्मचारी स्टॉक विकल्प (ईसॉप): कोई भारतीय कंपनी, जो भारत के बाहर के निवासी उन व्यक्तियों, जो उसके कर्मचारी / निदेशक अथवा कर्मचारी/ उसकी होल्डिंग कंपनी / संयुक्त उद्यम / पूर्ण स्वामित्व वाली समुद्रपारीय सहायक कंपनी / सहायक-कंपनियों के निदेशक हैं, के लिए यदि कर्मचारी स्टॉक विकल्प (ईसॉप) जारी करती है, तो वह इस प्रकार के कर्मचारी स्टॉक विकल्प (ईसॉप) जारी करने की तारीख से 30 दिनों के भीतर फॉर्म – ईसॉप प्रस्तुत करेगी ।

(5) फॉर्म- निक्षेपागार रसीद विवरणी (डीआरआर): घरेलू अभिरक्षक निक्षेपागार प्राप्ति योजना, 2014 के अनुसरण में जारी निक्षेपागार रसीदों के निर्गम/ हस्तांतरण की रिपोर्ट निर्गम की समाप्ति के 30 दिन के भीतर फॉर्म डीआरआर में करेंगे ।

(6) फॉर्म एलएलपी (I): कोई सीमित देयता भागीदारी (एलएलपी) यदि अपनी पूंजी में अंशदान तथा लाभ शेयरों के अधिग्रहण हेतु के रूप में प्रतिफल राशि प्राप्त करती है, तो प्रतिफल राशि की प्राप्ति की तारीख से 30 दिनों के भीतर उसे फॉर्म एलएलपी (I) प्रस्तुत करना होगा ।

(7) फॉर्म एलएलपी (II): किसी निवासी और अनिवासी के बीच (अथवा इसके विपरीत) पूंजी अंशदान अथवा लाभ-शेयरों के विनिवेश/ अंतरण का विवरण निधियों की प्राप्ति के 60 दिनों के भीतर फॉर्म-एलएलपी (II) में प्रस्तुत किया जाए। रिपोर्टिंग का दायित्व निवासी हस्तांतरणकर्ता / हस्तांतरिती का होगा।

(8) एलईसी (एफआईआई): प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक भारत में स्टॉक एक्सचेंज में विदेशी संविभाग निवेशकों (एफपीआई) द्वारा इक्विटी लिखतों की खरीद / हस्तांतरण से संबन्धित विवरण रिजर्व बैंक को फॉर्म-एलईसी (एफआईआई) में प्रस्तुत करेंगे ।

(9) एलईसी (एनआरआई) : प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक भारत में स्टॉक एक्सचेंज में अनिवासी भारतीयों अथवा प्रवासी भारतीय नागरिकों द्वारा इक्विटी लिखतों की खरीद / अंतरण से संबन्धित विवरण रिजर्व बैंक को फॉर्म-(एनआरआई) में प्रस्तुत करेंगे ।

(10) फॉर्म इन-वी: किसी ऐसे निवेश माध्यम (इंवेस्टमेंट वेहिकल), जिसने भारत से बाहर के निवासी किसी व्यक्ति को अपनी यूनिटें जारी की हैं, को उन यूनिटों को जारी करने की तारीख से 30 दिनों के भीतर फॉर्म इन-वी प्रस्तुत करना होगा।

(11) डाउनस्ट्रीम निवेश

ए. किसी अन्य भारतीय संस्था में डाउनस्ट्रीम निवेश करने वाली भारतीय एंटीटी अथवा निवेश माध्यम, जिस निवेश को नियमों के अनुसार निवेश प्राप्तकर्ता भारतीय संस्था के लिए अप्रत्यक्ष विदेशी निवेश माना जाता है, वह नए / मौजूदा उद्यमों में निवेश के तौर-तरीकों के साथ (विस्तार कार्यक्रम के साथ/ उसके बिना) इस प्रकार के निवेश के 30 दिनों के भीतर औद्योगिक सहायता सचिवालय, डीपीआईआईटी को अधिसूचित करेगी, चाहे इक्विटी लिखत आबंटित न की गई हों।

बी. फॉर्म डीआई: किसी अन्य भारतीय एंटीटी में डाउनस्ट्रीम निवेश करने वाली भारतीय संस्था या निवेश माध्यम, जिस निवेश को नियमावली के नियम-22 के अनुसार निवेश प्राप्तकर्ता भारतीय एंटीटी के लिए अप्रत्यक्ष विदेशी निवेश माना जाता है, वह इक्विटी लिखतों के आबंटन की तारीख से 30 दिनों के अंदर रिज़र्व बैंक को फॉर्म डीआई प्रस्तुत करेगी ।

(12) फॉर्म परिवर्तनीय नोट (सी एन):

ए. भारतीय स्टार्ट-अप कंपनी, जो भारत से बाहर के निवासी किसी व्यक्ति को परिवर्तनीय नोट जारी करती है, उसे इस प्रकार के निर्गम के 30 दिन के अंदर फॉर्म सी एन प्रस्तुत करना होगा।

बी. भारत का निवासी कोई व्यक्ति जो भारतीय स्टार्ट-अप कंपनी द्वारा जारी किए गए परिवर्तनीय नोटों का, चाहे हस्तांतरणकर्ता या हस्तांतरिती हो, वह इस प्रकार के हस्तांतरण के 30 दिनों के भीतर भारत से बाहर के निवासी व्यक्ति को या उस व्यक्ति से, जैसा भी मामला हो, इस प्रकार के हस्तांतरण के संबंध में विवरण फार्म सीएन में रिपोर्ट करेगा।

बशर्ते कि इस संबंध में ऐसी रिपोर्टिंग के प्रपत्र, अवधि और प्रस्तुति के तरीके का निर्धारण रिज़र्व बैंक द्वारा किया गया हो ।

बशर्ते कि जब तक इन विनियमों में विशेष रूप से कुछ अलग नहीं बताया गया हो, सभी प्रकार की रिपोर्टिंग प्राधिकृत व्यापारी बैंक के माध्यम से या उसके द्वारा, जैसी भी स्थिति हो, की जाएगी।

5. रिपोर्टिंग में विलंब

उपर्युक्त विनियम-4 में प्रावधान की गई रिपोर्टों की फाइलिंग के लिए जिम्मेदार व्यक्ति / एंटीटी रिपोर्टिंग में किसी प्रकार का विलंब होने पर केंद्र सरकार के परामर्श से रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित किए जाने वाले विलंब प्रस्तुति शुल्क के भुगतान के लिए उत्तरदायी होगी।

(अजय कुमार मिश्र)
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक


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