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nesce >> FAQs - Display
Date: 07/05/2018
अचल संपत्ति की खरीद

(7 मई 2018 की स्थिति के अनुसार अद्यतन किया गया है)

भाग I

निवासी व्यक्तियों द्वारा भारत से बाहर अचल संपत्ति की खरीद

“अक्सर पूछे जानेवाले प्रश्न’ नामक यह शृंखला इस विषय पर उपयोगकर्ताओं द्वारा समान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर सरल भाषा में देने का प्रयास है। तथापि कोई लेनदेन करने के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) तथा उसके अंतर्गत बनाए गए विनियमों/ नियमों अथवा निदेशों का संदर्भ लें। इससे संबंधित मूल विनियम 21 जनवरी 2016 की अधिसूचना सं.फेमा 7(आर)/2015-आरबी के मार्फत जारी की गई विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत के बाहर अचल संपत्ति का अधिग्रहण तथा अंतरण) विनियमावली, 2015 में दिये गए हैं।। जारी किए गए दिशानिर्देश विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 के अंतर्गत अचल संपत्ति के अधिग्रहण तथा अंतरण पर मास्टर निदेश सं.12 के भाग-I में समेकित किए गए हैं। मूल विनियमावली में कोई संशोधन यदि कोई हों, इसमें जोड़ दिए गए हैं।

प्रश्न 1. क्या कोई निवासी व्यक्ति भारत के बाहर कोई ऐसी अचल संपत्ति धारण करना जारी रख सकता है, जो उसने अनिवासी होने के समय अर्जित की थी?
प्रश्न 2. क्या कोई निवासी व्यक्ति विप्रेषण भेजकर भारत के बाहर संपत्ति खरीद सकता है?
प्रश्न 3. भारत के बाहर संपत्ति के अंतरण पर लागू प्रतिबंध किस पर लागू नहीं होते हैं?
प्रश्न 4. निवासी द्वारा भारत के बाहर अचल संपत्ति का अधिग्रहण कैसे किया जा सकता है?

प्रश्न 1. क्या कोई निवासी भारत के बाहर कोई ऐसी अचल संपत्ति धारण करना जारी रख सकता है जो उसने अनिवासी होने के समय अर्जित की थी?

उत्तर : फेमा अधिनियम, 1999 की धारा 6(4) के तहत भारत में निवासी कोई व्यक्ति भारत से बाहर स्थित अचल संपत्ति धारित कर सकता है, उसे अपने स्वामित्व में रख सकता है, अंतरित कर सकता है अथवा परिसंपत्ति में निवेश कर सकता है, यदि इस प्रकार की संपत्ति जब वह भारत से बाहर निवास करता था/ करती थी तब उसने प्राप्त की हो, धारित की हो, अथवा उसके स्वामित्व में हो अथवा भारत से बाहर के निवासी किसी व्यक्ति से उसे वह संपत्ति विरासत में प्राप्त हुई हो ।

प्रश्न 2. क्या कोई निवासी व्यक्ति विप्रेषण भेजकर भारत के बाहर संपत्ति खरीद सकता है?

उत्तर: कोई निवासी व्यक्ति भारत के बाहर अचल संपत्ति खरीदने के लिए उदारीकृत विप्रेषण योजना (एलआरएस) के अंतर्गत विप्रेषण भेज सकता है। यदि किसी परिवार के सदस्य किसी संपत्ति को खरीदने के लिए अपने विप्रेषणों को एकत्रित करते हैं तो उक्त संपत्ति उन सभी सदस्यों के नाम पर होनी चाहिए जिन्होंने विप्रेषण किए हैं।

प्रश्न 3. भारत के बाहर संपत्ति के अंतरण पर लागू प्रतिबंध किस पर लागू नहीं होते हैं?

उत्तर: किसी निवासी द्वारा भारत के बाहर संपत्ति अर्जित करने संबंधी प्रतिबंध उस स्थिति में लागू नहीं होता है जब:

ए. यदि निवासी विदेशी राष्ट्रिक है; अथवा

बी. उक्त संपत्ति को 8 जुलाई 1947 के पूर्व अर्जित किया गया है और अनुमति प्राप्त करने के बाद भी उसे धारित करना जारी रहा; अथवा

सी. यदि उसे पट्टे पर (लीज़) अर्जित किया है और वह पट्टा पांच वर्ष से अधिक नहीं है;

प्रश्न 4. निवासी द्वारा भारत के बाहर अचल संपत्ति का अधिग्रहण कैसे किया जा सकता है?

उत्तर: भारत के बाहर निम्नलिखित प्रकार से अचल संपत्ति अर्जित की जा सकती है;

ए. विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) की धारा 6(4) के प्रावधानों के अंतर्गत;

बी. किसी ऐसे व्यक्ति से विरासत/ उपहार के रूप में (i) जिसे फेमा की धारा 6(4) में संदर्भित किया गया है; अथवा (ii) जिसने उसे 8 जुलाई 1947 के पूर्व अर्जित किया है; (iii) जिसने ऐसी संपत्ति को इस प्रकार के अधिग्रहण के समय प्रचलित तत्कालीन विदेशी मुद्रा प्रावधानों के अनुसार अर्जित किया है।

सी. निवासी व्यक्ति के निवासी विदेशी मुद्रा खाते(आरएफ़सी) में शेष राशि से खरीद सकता है।

डी. उपर्युक्त (बी) तथा (सी) में उल्लिखित व्यक्तियों से उपहार के रूप में, बशर्ते वह ऐसे व्यक्तियों का रिश्तेदार है।

ई. उदारीकृत विप्रेषण योजना (एलआरएस) के अंतर्गत किए गए विप्रेषणों से खरीद कर ।

एफ़. किसी रिश्तेदार के साथ संयुक्त रूप से, बशर्ते कि भारत के बाहर निधियों का बहिर्गमन नहीं होता है।

जी. किसी भारतीय कंपनी, जिसके समुद्रपारीय कार्यालय हैं, के द्वारा अपने कारोबार को चलाने के लिए अथवा कंपनी के स्टाफ के आवास के लिए।

भाग II

“अक्सर पूछे जानेवाले प्रश्न’ नामक यह शृंखला इस विषय पर उपयोगकर्ताओं द्वारा समान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर सरल भाषा में देने का प्रयास है। तथापि कोई लेनदेन करने के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) तथा उसके अंतर्गत बनाए गए विनियमों/ नियमों अथवा निदेशों का संदर्भ लें। इससे संबंधित मूल विनियम हैं 21 जनवरी 2016 की अधिसूचना सं. फेमा 7 (आर)/2015- आरबी द्वारा जारी किए विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत के बाहर अचल संपत्ति का अधिग्रहण तथा अंतरण) विनियमावली, 2015 । जारी किए गए दिशा-निर्देश विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 के अंतर्गत अचल संपत्ति के अधिग्रहण तथा अंतरण पर मास्टर निदेश सं.12 के भाग-II में समेकित किए गए हैं। मूल विनियमावली में कोई संशोधन, यदि कोई हों, इसमें जोड़ दिए गए हैं।

प्रश्न 1. कोई अनिवासी भारतीय (एनआरआई) तथा कोई प्रवासी भारतीय(ओसीआई) भारत में अचल संपत्ति कैसे अर्जित कर सकता है?
प्रश्न 2. भारत में अर्जित की गई संपत्ति के लिए भुगतान करने के स्वीकृत माध्यम क्या हैं?
प्रश्न 3. क्या विदेशी दूतावास/ राजनयिक/ महा वाणिज्यदूत भारत में संपत्ति अर्जित कर सकते हैं?
प्रश्न 4. क्या विदेशी राष्ट्रिक भारत में संपत्ति का अधिग्रहण कर सकते हैं ?
प्रश्न 5. कोई दीर्घावधि वीजा (एलटीवी) धारक भारत में संपत्ति का अधिग्रहण किस प्रकार कर सकता है?
प्रश्न 6. क्या किसी अनिवासी / प्रवासी भारतीय का पति/पत्नी जो कि अनिवासी / प्रवासी भारतीय नहीं है, भारत में संपत्ति का अधिग्रहण कर सकता है?
प्रश्न 7. क्या कोई अनिवासी भारत में अचल संपत्ति की बिक्रीगत आगम राशि को प्रत्यावर्तित कर सकता है?
प्रश्न 8. अंतरण का अर्थ क्या है?

प्रश्न 1. कोई अनिवासी भारतीय (एनआरआई) तथा कोई प्रवासी भारतीय नागरिक (ओसीआई) भारत में अचल संपत्ति कैसे अर्जित कर सकता है?

एनआरआई/ओसीआई(फेमा 20(आर) का विनियम) विवरण
निवासी/एनआरआई/ ओसीआई[3(ए)] से (कृषि भूमि/ फार्म हाउस / बागवानी संपत्ति आदि को छोड़कर) खरीद
निवासी/एनआरआई/ ओसीआई[3(बी)] जो कि रिश्तेदार है से (कृषि भूमि/ फार्म हाउस / बागवानी संपत्ति आदि को छोड़कर) उपहार के रूप में
ए. किसी भी व्यक्ति जिसने उसे प्रचलित क़ानूनों के अंतर्गत अर्जित किया है [3(सी)]; बी. निवासी [3(सी)] से विरासत के रूप में अर्जित (कोई भी आईपी) करना
निवासी/एनआरआई/ ओसीआई[3(ई)] को (कृषि भूमि/ फार्म हाउस / बागवानी संपत्ति आदि को छोड़कर) बेचना
निवासी [3(डी)] को (कृषि भूमि) बेचना
निवासी/एनआरआई/ ओसीआई[3(ई)] उपहार में (कृषि भूमि को छोड़कर) देना
निवासी [3(डी)] उपहार में (कृषि भूमि) देना
निवासी/एनआरआई/ ओसीआई[3(ई)] उपहार में रिहायशी / वाणिज्यिक संपत्ति देना

प्रश्न 2. भारत में अर्जित की गई संपत्ति के लिए भुगतान करने के स्वीकृत माध्यम क्या हैं?

उत्तर : अचल संपत्ति के लिए किया गया भुगतान बैंकिंग चैनल के माध्यम से भारत में प्राप्त होना चाहिए और वह भारत में सभी कर तथा अन्य शुल्क / लेवी के भुगतान के अधीन होगा। यह भुगतान अनिवासी / प्रवासी भारतीय के एनआरई/ एफ़सीएनआर(बी)/ एनआरओ खातों में धारित निधियों में से भी किया जा सकता है। ऐसे भुगतान यात्री चेकों द्वारा अथवा विदेशी मुद्रा नोटों द्वारा नहीं किये जा सकते हैं।

प्रश्न 3. क्या विदेशी दूतावास/ राजनयिक/ महा वाणिज्यदूत भारत में संपत्ति अर्जित कर सकते हैं?

उत्तर: विदेशी दूतावास/ राजनयिक/ महा वाणिज्यदूत भारत में अचल संपत्ति (कृषि भूमि / बागबानी संपत्ति / फार्म हाउस को छोड़कर) की खरीद/ बिक्री कर सकते हैं बशर्ते-

(ए) इस प्रकार की खरीद/ बिक्री के लिए भारत सरकार, विदेश मंत्रालय से मंजूरी (क्लियरंस) प्राप्त कर ली गई हो, तथा

(बी) भारत में अचल संपत्ति के अधिग्रहण के लिए भुगतान बैंकिंग चैनलों के जरिये विदेश से विप्रेषित निधियों में से किया गया हो;

प्रश्न 4. क्या विदेशी राष्ट्रिक (नागरिक) भारत में संपत्ति का अधिग्रहण कर सकते हैं ?

उत्तर: ए) पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, अफगानिस्तान, चीन, ईरान, नेपाल, भूटान, मकाऊ, हांगकांग अथवा डेमोक्रेटिक पीपल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया के नागरिक, उनकी निवासी स्थिति चाहे कुछ भी हो, रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन के बिना भारत में, पाँच वर्षों से अनधिक अवधि के लिए अचल संपत्ति पट्टे पर लेने के सिवाय कोई अचल संपत्ति अर्जित अथवा अंतरित नहीं कर सकते हैं। यह प्रतिबंध प्रवासी भारतीय नागरिकों (ओसीआई) पर लागू नहीं होगा।

बी) भारत में निवास करने वाले विदेशी राष्ट्रिक (नागरिक) [उपर्युक्त (ए) में सूचीबद्ध किए गए 11 देशों को छोड़कर] जो भारतीय मूल के नहीं हैं, भारत में अचल संपत्ति का अधिग्रहण कर सकते हैं।

सी) भारत के बाहर निवास करने वाले विदेशी राष्ट्रिक (नागरिक) जो भारतीय मूल के नहीं हैं, भारत में पाँच वर्ष से अनधिक अवधि के लिए पट्टे पर अचल संपत्ति का अर्जन/ अंतरण कर सकते हैं तथा निवासी से विरासत में अचल संपत्ति का अधिग्रहण कर सकते हैं।

विदेशी राष्ट्रिकों द्वारा सभी अन्य अधिग्रहणों/ अंतरणों के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक की पूर्वानुमती आवश्यक है।

प्रश्न 5. कोई दीर्घावधि वीजा (एलटीवी) धारक भारत में संपत्ति का अधिग्रहण किस प्रकार कर सकता है?

उत्तर: भारत में निवास करने वाले पाकिस्तान, बांग्लादेश अथवा अफ़ग़ानिस्तान के नागरिक जो कि उन देशों में अल्प संख्यक समुदायों (हिन्दू, सीख, बुद्धिस्ट, जैन, पारसी तथा ईसाई) से हैं, तथा जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा दीर्घावधि वीज़ा (एलटीवी) प्रदान किया गया है अपने स्व-अधिवास के लिए भारत में केवल एक रिहायशी अचल संपत्ति तथा स्व-रोजगार के लिए केवल एक अचल संपत्ति खरीद सकते हैं । तथापि इस प्रकार का अधिग्रहण दिनांक 26 मार्च 2018 की अधिसूचना सं. फेमा 20(आर)/2018-आरबी के विनियम 7 के तहत निर्दिष्ट शर्तों के अधीन होगा।

प्रश्न 6. क्या किसी अनिवासी / प्रवासी भारतीय का पति/ की पत्नी जो कि अनिवासी / प्रवासी भारतीय नहीं है, भारत में संपत्ति का अधिग्रहण कर सकता/ सकती है?

उत्तर: भारत के बाहर का निवासी कोई व्यक्ति, जो कि अनिवासी भारतीय अथवा प्रवासी भारतीय नागरिक नहीं है, और जो अनिवासी भारतीय अथवा प्रवासी भारतीय का पति/ पत्नी है, वह फेमा 2(आर) के विनियम 6 में निर्दिष्ट शर्तों के अधीन अपने अनिवासी / प्रवासी भारतीय नागरिक पति/ पत्नी के साथ संयुक्त रूप से एक अचल संपत्ति (कृषि भूमि / बागबानी संपत्ति / फार्म हाउस को छोड़कर) का अधिग्रहण कर सकता/ सकती है ।

प्रश्न 7. क्या कोई अनिवासी भारतीय नागरिक भारत में अचल संपत्ति की बिक्रीगत आगम राशि को प्रत्यावर्तित कर सकता है?

उत्तर: ए) जिस व्यक्ति ने फेमा की धारा 6(5) के अंतर्गत संपत्ति का अधिग्रहण किया है, वह अथवा उसका उत्तराधिकारी ऐसी संपत्ति की बिक्रीगत आगम राशि को रिज़र्व बैंक के अनुमोदन के बिना प्रत्यावर्तित नहीं कर सकता है।

बी) किसी अनिवासी/ प्रवासी भारतीय अथवा किसी विदेशी नागरिक (नेपाल/ भूटान/ भारतीय मूल के व्यक्ति को छोड़कर) को, जिसने (i) फेमा की धारा 6(5) में संदर्भित व्यक्ति से विरासत में पाया है, अथवा (ii) भारत में नौकरी से सेवानिवृत्त हुआ है अथवा(सी) वह अनिवासी विधवा/ विधुर है और अपने मृत पति/ पत्नी जो कि भारत में निवास करने वाला/ वाली भारतीय नागरिक था/ थी, से परिसंपत्ति विरासत में पायी है, को विदेशी मुद्रा प्रबंध (परिसंपत्तियों का विप्रेषण) विनियमावली, 2016 के तहत अन्य परिसंपत्तियों के साथ-साथ 1 मिलियन अमरीकी डॉलर प्रति वित्तीय वर्ष का प्रत्यावर्तन करना अनुमत है।

सी) अनिवासी भारतीय/ भारतीय मूल के व्यक्ति भारत में अचल संपत्ति (कृषि भूमि / बागबानी संपत्ति / फार्म हाउस को छोड़कर) की बिक्रीगत आगम राशि का निम्नलिखित शर्तों के अधीन विप्रेषण कर सकते हैं:

i. अचल संपत्ति, अधिग्रहण के समय लागू विदेशी मुद्रा कानून के प्रावधानों अथवा विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत में अचल संपत्ति का अधिग्रहण तथा अंतरण) विनियमावली, 2018 के प्रावधानों के अनुसार अर्जित की गयी थी;

ii. संपत्ति के अधिग्रहण के लिए सामान्य बैंकिंग चैनलों के जरिए प्राप्त विदेशी मुद्रा अथवा विदेशी मुद्रा अनिवासी खाते में धारित निधियों अथवा अनिवासी बाह्य खाते में धारित निधियों से भुगतान किया गया था।

iii. रिहायशी संपत्ति के मामले में बिक्रीगत आगम राशि का प्रत्यावर्तन इस प्रकार की दो संपत्तियों से अनधिक संपत्तियों तक प्रतिबंधित किया गया है।

प्रश्न 8. अंतरण का अर्थ क्या है?

उत्तर: फेमा की धारा 2 (ज़ेडई) के अनुसार ‘अंतरण’ का अर्थ है - बिक्री, खरीद, विनिमय, बंधक, गिरवी रखना, उपहार, ऋण, अथवा अधिकार, विलेख, कब्जा, अथवा धारणाधिकार के हस्तांतरण का कोई अन्य रूप।

मूल विनियम:

i. 21 जनवरी 2016 की अधिसूचना सं. फेमा 7(आर)/2015- आरबी

ii. दिनांक 26 मार्च 2018 की अधिसूचना सं. फेमा 20(आर)/2018-आरबी


1 अनिवासी भारतीय का अर्थ है भारत के बाहर निवास करने वाला कोई व्यक्ति जो कि भारतीय नागरिक है। प्रवासी भारतीय नागरिक (ओसीआई) भारत के बाहर का निवासी व्यक्ति है, जो कि नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 7(ए) के अंतर्गत प्रवासी भारतीय नागरिक कार्ड-धारक के रूप में पंजीकृत है।

रिश्तेदार का वही अर्थ है जो कंपनी अधिनियम, 2013 में दिया गया है।

2 विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) की धारा 6(5) के अनुसार, भारत से बाहर का निवासी व्यक्ति भारत में स्थित अचल संपत्ति धारित कर सकता है, स्वामित्व में रख सकता है, अंतरित कर सकता है अथवा किसी अचल संपत्ति में निवेश कर सकता है, यदि इस प्रकार की संपत्ति जब वह भारत का निवासी था तब उसने प्राप्त की थी, धारित की थी, अथवा उसके स्वामित्व में थी अथवा भारत के निवासी व्यक्ति से विरासत में प्राप्त हुई थी ।

 
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