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Date: 01/03/2018
प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार – लक्ष्‍य और वर्गीकरण

आरबीआई/2017-18/135
विसविवि.केंका.प्लान.बीसी.18/04.09.01/2017-18

01 मार्च 2018

अध्यक्ष / प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी
सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक

प्रिय महोदय/ महोदया,

प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार – लक्ष्‍य और वर्गीकरण

कृपया बैंकों के लिए प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र पर दिनांक 23 अप्रैल 2015 के परिपत्र विसविवि.केंका.प्लान.बीसी. 54/04.09.01/2014-15 द्वारा जारी संशोधित दिशा-निर्देशों का संदर्भ ग्रहण करें। उक्त परिपत्र के पैरा (II) (i) के अंतर्गत उल्लेख किया गया था कि 20 या उससे अधिक की शाखाओं वाले विदेशी बैंकों के लिए लघु और सीमांत किसानों तथा माइक्रो उद्यमों को उधार देने संबंधी उप-लक्ष्य 2017 में समीक्षा के बाद 2018 के पश्‍चात लागू किया जाएगा।

2. तदनुसार, उक्त बैंकों की प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र को उधार देने संबंधी प्रोफाइल की समीक्षा के उपरांत तथा बैंकों के मध्य व्यवसाय हेतु समान अवसर सृजन करने के उद्देश्य से, यह निर्णय लिया गया है कि वित्त वर्ष 2018-19 से लघु और सीमांत किसानों को उधार देने हेतु समायोजित निवल बैंक ऋण (एएनबीसी) अथवा तुलन-पत्र से इतर एक्सपोज़र राशि के सममूल्य ऋण (सीईओबीई), इनमें से जो भी अधिक हो, के 8 प्रतिशत का उप लक्ष्य 20 या उससे अधिक की शाखाओं वाले विदेशी बैंकों के लिए लागू होगा। साथ ही, बैंकों द्वारा माइक्रो उद्यम को उधार देने हेतु एएनबीसी अथवा सीईओबीई, इनमें से जो भी अधिक हो, के 7.50 प्रतिशत का उप लक्ष्य, वित्त वर्ष 2018-19 से 20 या उससे अधिक की शाखाओं वाले विदेशी बैंकों के लिए भी लागू होगा।

3. इसके अतिरिक्त, विभिन्न हितधारकों से प्राप्त प्रतिक्रिया के आलोक में तथा हमारी अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र के बढ़ते महत्व को देखते हुए, यह निर्णय लिया गया है कि प्राथमिकता-प्राप्त क्षेत्र में वर्गीकरण के लिए वर्तमान में लागू माइक्रो/ लघु और मध्यम उद्यम (सेवा) के प्रत्येक उधारकर्ता को क्रमशः 5 करोड़ तथा 10 करोड़ की ऋण सीमा को हटा दिया जाए। तदनुसार, एमएसएमईडी अधिनियम, 2006 के अंतर्गत उपकरणों में निवेश के अनुसार परिभाषित एवं सेवाएं उपलब्ध कराने या प्रदान करने में लगे एमएसएमई को दिए गए सभी बैंक ऋण बिना किसी क्रेडिट सीमा के प्राथमिकता-प्राप्त के अंतर्गत वर्गीकरण हेतु पात्र होंगे।

भवदीय,

(गौतम प्रसाद बोरा)
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक

 
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