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Date: 30/01/2025
सूक्ष्मवित्त (माइक्रोफाइनेंस) ऋणों के लिए विनियामकीय ढांचे दिनांक जुलाई 25, 2022 (30 जनवरी 2025 को अद्ययन किया गया)

प्र 1. सूक्ष्मवित्त ऋणों के लिए विनियामकीय ढांचे पर मास्टर निदेश के कुछ पहलुओं से संबन्धित नई नीतियों के प्रारूपण, बोर्ड स्तर की मंजूरी प्राप्त करने, प्रौद्योगिकीय प्रणालियों में परिवर्तन करने, कर्मचारियों के प्रशिक्षण, आदि के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता हो सकती है। यदि 1 अप्रैल 2022 को प्रभावी तिथि माना जाए तो क्या इन निर्देशों को पूर्ण रूप से लागू करने की समय सीमा को बढ़ाया जा सकता है?

उत्तर. इन निर्देशों की प्रभावी तिथि 1 अप्रैल 2022 है। हालांकि, कुछ विनियमित संस्थाओं (आरई) द्वारा व्यक्त कार्यान्वयन संबंधी कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए, आरई को सूचित किया जाता है कि वे इन निर्देशों को पूरी तरह से जल्द से जल्द (अधिकतम 1 अक्टूबर 2022 तक) सर्वोत्तम प्रयास के आधार पर लागू करें।

प्र 2. क्या एक परिवार के सभी सदस्यों के लिए सूक्ष्मवित्त ऋण का उधारकर्ता बनना अनिवार्य है?

उत्तर. निर्देशों के अनुसार घरेलू स्तर पर आय और ऋणग्रस्तता के आकलन की आवश्यकता है। घर के सभी सदस्यों को ऐसे ऋण का आवेदक/ उधारकर्ता बनाने की आवश्यकता नहीं है, जोकि एक व्यक्तिगत सदस्य को प्रदान किया जा सकता है। आरई की बोर्ड-अनुमोदित नीतियों में घर के सभी सदस्यों की आय और ऋणग्रस्तता का आकलन करने के लिए कार्यप्रणालियाँ/ परिचालन ढांचे शामिल किए जा सकते हैं।

प्र 3. क्या उपभोग के लिए दिये गए बिना संपार्श्विक के ऋण (जैसे कि गैजेट खरीदने, समारोह पर होने वाले खर्च के लिए आदि) को सूक्ष्मवित्त ऋण माना जाएगा?

उत्तर. कम आय वाले परिवार अर्थात 3,00,000 तक की वार्षिक आय वाले परिवार से संबंधित व्यक्ति/ व्यक्तियों को दिये गए सभी संपार्श्विक-मुक्त ऋण सूक्ष्मवित्त ऋण माने जाएंगे।

प्र 4. यदि कोई ऋण किसी प्रतिभूति (सोना, उपकरण, घरेलू सामान, अंतर्निहित संपत्ति आदि) के दृष्टिबंधक द्वारा समर्थित है, तो क्या इस ऋण को संपार्श्विक-मुक्त माना जाएगा और इसे सूक्ष्मवित्त ऋण के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा?

उत्तर. किसी प्रतिभूति के दृष्टिबंधक द्वारा समर्थित ऋण को सूक्ष्मवित्त ऋण नहीं माना जाएगा।

प्र 5. क्या मासिक घरेलू आय के प्रतिशत के रूप में एक परिवार द्वारा मासिक ऋण चुकौती दायित्वों पर 50 प्रतिशत की सीमा से संबंधित अनुदेश कम आय वाले परिवारों को दिए गए गैर-सूक्ष्मवित्त ऋणों पर लागू हैं ?

उत्तर. हां, कम आय वाले परिवार (जोकि निदेशों के तहत परिभाषित किए गए है) को गैर-सूक्ष्मवित्त ऋण प्रदान करने के लिए यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि मासिक घरेलू आय के प्रतिशत के रूप में परिवार के मासिक ऋण चुकौती दायित्वों पर 50 प्रतिशत की सीमा का उल्लंघन नहीं हो। दूसरे शब्दों में, 50 प्रतिशत की सीमा में सूक्ष्मवित्त के साथ-साथ गैर-सूक्ष्मवित्त ऋण भी शामिल होंगे।

प्र 6. परिवार की कुल मासिक चुकौती दायित्वों की गणना के लिए बिना ईएमआई वाली क्रेडिट सुविधाओं को कैसे माना जाना चाहिए?

उत्तर. आरई की बोर्ड-अनुमोदित नीतियों में ऐसे परिचालन पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिए। ऋण चुकौती के लिए परिवार के मासिक भुगतान का अनुमान लगाने हेतु वार्षिक चुकौती दायित्वों को बारह महीनों में बांटा जाना एक संभावित तरीका हो सकता है।

प्र 7. क्या घरेलू आय के आकलन के लिए एक सूक्ष्मवित्त ऋण द्वारा वित्तपोषित आस्ति/ गतिविधि से अपेक्षित आय को शामिल किया जा सकता है?

उत्तर. नहीं।

प्र 8. फैक्टशीट में किस प्रकार के बीमा शुल्क का खुलासा करना है और प्रभावी वार्षिक ब्याज दर की गणना के लिए शामिल किया जाना है? क्या फैक्टशीट में गैर-ऋण उत्पादों से संबंधित शुल्क भी दिए जाने चाहिए?

उत्तर. फैक्टशीट में शामिल बीमा शुल्क केवल क्रेडिट लिंक्ड बीमा उत्पाद के लिए हैं क्योंकि ये शुल्क सूक्ष्मवित्त ऋण से संबंधित हैं। यदि किसी उधारकर्ता ने ऋण नहीं लिया होता तो उसे इन शुल्कों को वहन नहीं करना पड़ता। फैक्टशीट में केवल सूक्ष्मवित्त ऋणों के मूल्य निर्धारण से संबंधित जानकारी होनी चाहिए ताकि इसे सुव्यवस्थित रखा जा सके। अन्य गैर-क्रेडिट उत्पादों से संबंधित प्रकटीकरण निदेश के पैरा 7.1.51 के तहत उल्लिखित फैक्टशीट से पृथक प्रदान किए जाने चाहिए। सभी गैर-ऋण उत्पाद (वित्तीय उत्पाद जैसे निवेश उत्पाद, बीमा उत्पाद आदि के साथ-साथ गैर-वित्तीय उत्पाद जैसे सौर लालटेन, सिलाई मशीन आदि) केवल उधारकर्ता की स्पष्ट सहमति के साथ प्रदान किए जाने चाहिए और आरई को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उधारकर्ता को दिए गए ऋण और अन्य गैर-क्रेडिट उत्पादों के बीच कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है। कोई भी ऋण उत्पाद के लिए पूर्व शर्त के रूप में किसी भी गैर-ऋण उत्पाद की बिक्री नहीं की जाएगी। आरई को प्रमुखता से प्रदर्शित2 करना चाहिए कि सूक्ष्मवित्त उधारकर्ताओं द्वारा किसी भी गैर-क्रेडिट उत्पाद की खरीद विशुद्ध रूप से स्वैच्छिक आधार पर है। आरई के बोर्ड द्वारा अनुमोदित उचित व्यवहार संहिता, जैसा कि निर्देशों के पैरा 7.1.13 के तहत उल्लेख किया गया है, में भी इस पहलू को शामिल करना चाहिए।

प्र 9. क्या आरई को पुनर्रचित ऋणों के अलावा अन्य मौजूदा ऋणों पर ऋण अवधि के दौरान लागू ब्याज दरों की समीक्षा और संशोधन करने की अनुमति है?

उत्तर. ये निर्देश 1 अप्रैल 2022 को अथवा उसके बाद स्वीकृत ऋणों पर लागू होते हैं। तदनुसार, एनबीएफसी-एमएफआई के मौजूदा ऋण अर्थात 1 अप्रैल 2022 से पहले स्वीकृत ऋणों का मूल्य निर्धारण 31 मार्च 2022 तक लागू दिशानिर्देशों के अनुसार जारी रहेगा। चूंकि अन्य आरई पहले से ही ऋणों के मूल्य निर्धारण के लिए स्वतंत्र थे, उन्हें प्रासंगिक दिशानिर्देशों के अनुपालन के अधीन मौजूदा ऋणों पर भी लागू ब्याज दरों की समीक्षा और संशोधन करने की अनुमति है।

प्र 10. क्या किसी उधारकर्ता को केवल अतिदेय ऋणों की वसूली के लिए अथवा व्यवसाय के सामान्य संचालन के लिए भी सुबह 9:00 बजे से पहले और शाम 6:00 बजे के बाद कॉल करने को कठोर तरीका माना जाएगा?

उत्तर. यह खंड केवल अतिदेय ऋण वाले उधारकर्ताओं से वसूली के लिए ही लागू है। आरई अन्य उधारकर्ताओं के साथ व्यवसाय के लिए मौजूदा समय/ प्रक्रिया, जैसे समूह की बैठकें, नियमित खातों में संग्रह, आदि को उधारकर्ताओं की सुविधा के अनुसार जारी रख सकते हैं।

प्र 11. जब ग्राहक शिकायत निवारण तंत्र पहले से मौजूद है तो क्या वसूली संबंधी शिकायतों के निवारण के लिए एक समर्पित तंत्र शामिल करने का कोई विशेष कारण है?

उत्तर. वसूली संबंधी शिकायतों के लिए एक समर्पित निवारण तंत्र रखने का उद्देश्य यह है कि इन शिकायतों का तत्काल समाधान किया जाना चाहिए। उन्हें अन्य शिकायतों (जैसे संचालन संबंधी मुद्दों) की तरह मानने से कार्रवाई में देरी हो सकती है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि वसूली संबंधी शिकायतों के लिए एक अलग निवारण तंत्र अनिवार्य किया जा रहा है। आरई मौजूदा ग्राहक शिकायत निवारण तंत्र का पुनर्गठन/ पुनर्निर्माण कर सकते हैं ताकि वसूली संबंधी शिकायतों की पहचान की जा सके और उनका तुरंत समाधान किया जा सके।

प्र 12. ‘घरेलू आय के आकलन के लिए सांकेतिक कार्यप्रणाली' पर अनुबंध-I के तहत प्रदान किए गए घरेलू खर्चों के आकलन का उद्देश्य क्या है? क्या इसका मतलब यह है कि एक परिवार के ऋण चुकौती दायित्वों की सीमा की गणना के लिए घरेलू आय, व्यय को हटाने के बाद बची घरेलू आय है?

उत्तर. अनुबंध I में घरेलू आय के आकलन के लिए केवल एक सांकेतिक कार्यप्रणाली प्रदान की गई है, और आरई को घरेलू आय के आकलन के लिए बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति बनाने की आवश्यकता है। घरेलू खर्चों और घरेलू प्रोफाइल के आकलन के संदर्भ केवल उधारकर्ताओं द्वारा रिपोर्ट की गई घरेलू आय को सत्यापित करने के लिए हैं।

प्र 13. क्या सूक्ष्मवित्त ऋणों के लिए विनियामकीय ढांचा सूक्ष्मवित्त क्षेत्र में काम करने वाली सभी संस्थाओं, जिसमें न्यास (ट्रस्ट) और सोसाइटियां शामिल हैं, पर लागू होता है?

उत्तर. सूक्ष्मवित्त ऋणों के लिए विनियामकीय ढांचा केवल निर्देशों के पैरा 2.14 और पैरा 9.25 के तहत परिभाषित आरई/ संस्थाओं पर लागू होता है। हालांकि, सूक्ष्मवित्त क्षेत्र में काम करने वाले अन्य ऋणदाताओं के लिए इन ग्राहक-केंद्रित निर्देशों का पालन करना विवेकपूर्ण हो सकता है।

प्र 13अ- क्या निदेशों के पैरा 9 के अंतर्गत सूक्ष्मवित्त ऋण की गतिविधियों में कार्यरत ‘गैर-लाभकारी’ कंपनियों को दी गई छूट, एनबीएफआई गतिविधियों में कार्यरत अन्य ‘गैर-लाभकारी’ कंपनियों पर भी लागू है?

उत्तर. भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा ‘गैर-लाभकारी’ कंपनियों (यानी., कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 8 या कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 25 के तहत निगमित कंपनियां) को दी गई छूट उन पर लागू है जो निदेशों में परिभाषित माइक्रोफाइनेंस ऋण प्रदान कर रही हैं और 25 अगस्त, 2016 को जारी हमारे ‘मास्टर निदेश - भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 के प्रावधानों से छूट’ (समय-समय पर संशोधित) के पैरा 2(i) में निर्दिष्ट शर्तों के अधीन हैं। यह छूट एनबीएफआई व्यवसाय में कार्यरत अन्य ‘गैर-लाभकारी’ कंपनियों को लागू नहीं है और ऐसी कंपनियों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-आईए के तहत पंजीकरण प्रमाणपत्र प्राप्त करना अनिवार्य है, यदि ये कंपनियां हमारी प्रेस प्रकाशनी 1998-99/1269 दिनांक 08 अप्रैल, 1999 में निर्दिष्ट मुख्य व्यवसाय मानदंड को पूरा करती है।

प्र 14. सूक्ष्मवित्त ऋण लेते समय ग्राहक को किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

उत्तर. अन्य बातों के साथ-साथ ग्राहको को निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए:

(क) सूक्ष्मवित्त ऋण के किसी भी चरण में ऋणदाता के पास कोई जमाराशि/ मार्जिन/ संपार्श्विक/ प्राथमिक प्रतिभूति रखने की कोई आवश्यकता नहीं है।

(ख) ऋणदाता द्वारा उधारकर्ता को उसके द्वारा समझी जानेवाली भाषा में ऋण कार्ड प्रदान करना आवश्यक है जिसमें निम्नलिखित जानकारी होनी चाहिए:

  • जानकारी जो पर्याप्त रूप से उधारकर्ता की पहचान करती है;

  • मूल्य निर्धारण संबंधी सरलीकृत फैक्टशीट;

  • ऋण से जुड़े अन्य सभी नियम और शर्तें;

  • प्राप्त किश्तों और अंतिम भुगतान सहित सभी भुगतानों के लिए ऋणदाता द्वारा पावती; तथा

  • ऋणदाता के नोडल अधिकारी के नाम और संपर्क संख्या सहित शिकायत निवारण प्रणाली का विवरण।

(ग) किसी भी गैर-क्रेडिट उत्पाद की खरीद पूर्ण रूप से स्वैच्छिक है। ऐसे उत्पादों के लिए शुल्क संरचना को ऋण कार्ड में स्पष्ट रूप से सूचित किया जाएगा।

(घ) ऋणदाताओं द्वारा प्रदान किया जाने वाला प्रशिक्षण निःशुल्क है।

प्र 15. सूक्ष्मवित्त ऋण के लिए ग्राहक को कौन से शुल्क चुकाने होते हैं?

उत्तर. ग्राहक को केवल उन्ही शुल्कों का भुगतान करना है जो ऋणदाता द्वारा प्रदान की गयी फैक्टशीट में स्पष्ट रूप से उल्लिखित हैं। इसके अलावा, ग्राहक को निम्नलिखित बातों का भी ध्यान रखना चाहिए:

  • सूक्ष्मवित्त ऋणों पर कोई पूर्व-भुगतान दंड नहीं है।

  • विलंबित भुगतान के लिए जुर्माना, यदि कुछ है तो, केवल अतिदेय राशि पर लागू किया जा सकता है, न कि संपूर्ण ऋण राशि पर।

  • ब्याज दर या किसी अन्य शुल्क में कोई भी परिवर्तन उधारकर्ता को लिखित रूप में अग्रिम रूप से सूचित किया जाएगा और ये परिवर्तन केवल संभावित रूप से प्रभावी होंगे।

प्र 16. उधारकर्ता सूक्ष्मवित्त ऋणों पर वर्तमान ब्याज दरों के बारे में कैसे पता लगा सकता है?

उत्तर. आरबीआई ने ऋणदाताओं के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि वे सूक्ष्मवित्त ऋणों पर लगाए गए न्यूनतम, अधिकतम और औसत ब्याज दरों को अपने सभी कार्यालयों में, उनके द्वारा जारी किए गए साहित्य (सूचना पुस्तिकाओं/ पैम्फलेट) में और उनकी वेबसाइट पर प्रदर्शित करें।


1 7.1.5. गैर-क्रेडिट उत्पादों को जारी करना उधारकर्ताओं की पूर्ण सहमति से होगा और ऐसे उत्पादों के लिए शुल्क संरचना को ऋण कार्ड में ही उधारकर्ता को स्पष्ट रूप से सूचित किया जाएगा।

2 उनके कार्यालयों में, उनकी वेबसाइटों पर उचित व्यवहार संहिता के भाग के रूप में और उधारकर्ता को जारी किए गए ऋण कार्ड में

3 7.1.1 इन निर्देशों के आधार पर सभी आरई अपने बोर्ड के अनुमोदन से एक उचित व्यवहार संहिता (एफपीसी) स्थापित करेंगे। आरई द्वारा एफपीसी को अपने सभी कार्यालयों और अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित किया जाएगा। एफपीसी को उधारकर्ता द्वारा समझी जाने वाली भाषा में जारी किया जाना चाहिए।

4 2.1 इन निर्देशों के प्रावधान निम्नलिखित संस्थाओं पर लागू होंगे:

  1. भुगतान बैंकों को छोड़कर सभी वाणिज्यिक बैंक (लघु वित्त बैंक, स्थानीय क्षेत्र बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सहित);

  2. सभी प्राथमिक (शहरी) सहकारी बैंक / राज्य सहकारी बैंक / जिला केंद्रीय सहकारी बैंक; तथा

  3. सभी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (सूक्ष्म वित्त संस्थानों और आवास वित्त कंपनियों सहित)।

5 माइक्रोफाइनेंस गतिविधियों में लगी उन ‘गैर-लाभकारी' कंपनियों से भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-आईए, 45-आईबी और 45-आईसी से दी गई छूट वापस ले ली गई है जिनकी संपत्ति का आकार 100 करोड़ और उससे अधिक है।

 
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