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Date: 04/08/2011
कार्ड उपलब्‍ध नहीं (सीएनपी) लेनदेनों संबंधी सुरक्षा मामले और जोखिम कम करने के उपाय

भारिबैं/2011-12/145
भुनिप्रवि.पीडी.केंका.सं. 223/02.14.003 / 2011-2012

04 अगस्त 2011

अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक/मुख्य कार्यकारी अधिकारी
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों/शहरी सहकारी बैंकों/राज्य सहकारी बैंकों/
जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों/अधिकृत कार्ड भुगतान नेटवर्कों सहित
सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक

महोदया/महोदय

कार्ड उपलब्‍ध नहीं (सीएनपी) लेनदेनों संबंधी सुरक्षा मामले और जोखिम कम करने के उपाय

कृपया हमारे दिनांक 18 फरवरी, 2009 के परिपत्र भारिबैं/भुनिप्रवि सं. 1501 / 02.14.003 / 2008-2009 का अवलोकन करें जिसमें 01 अगस्‍त 2009 से आईवीआर लेनदेनों को छोडकर सभी कार्ड उपलब्‍ध नहीं (सीएनपी) लेनदेनों में कार्ड पर सूचना दृष्टिगत नहीं के आधार पर अतिरिक्त प्रमाणीकरण/वैधीकरण करना बैंकों के लिए अनिवार्य करने संबंधी निर्देश जारी किए गए थे. इस अधिदेश को, हमारे दिनांक 31 दिसंबर 2010 के परिपत्र भारिबैं/भुनिप्रवि सं. 1503/02.14.003/2010-2011 के माध्‍यम से, सभी आईवीआर लेनदेनों को 01 फरवरी 2011 से इसके अंतर्गत लाने हेतु विस्‍तारित किया गया था.

2. दिनांक 31 दिसंबर 2010 के परिपत्र भारिबैं/भुनिप्रवि सं. 1503/02.14.003/2010-2011 में निहित निर्देशों के पैरा 4 के माध्‍यम से बैंकों को सूचित किया गया था कि उसमें दिये गये सीएनपी लेनदेनों की कुछ श्रेणियों के लिए प्रमाणीकरण के अतिरिक्‍त घटकों को लागू करने के संबंध में हमें बताएं. भारतीय रिज़र्व बैंक के साथ बैंकों की बैठक में दिनांक 22 जून 2011 को इस मामले पर चर्चा हुई थी जिसमें रिज़र्व बैंक द्वारा इस बात पर जोर दिया गया कि य्द्यपि वह इस संबंध में किसी विशिष्‍ट समाधान का समर्थन नहीं कर रहा, फिर भी यह अत्‍यावश्‍यक है कि सभी सीएनपी लेनदेनों को आगे बिना किसी विलंब के प्रमाणीकरण के अतिरिक्‍त कारकों के दायरे में लाया जाए. इसके लिए बैंकों को जल्द से जल्द संभव विकल्पों का मूल्यांकन करने के लिए सूचित किया गया था. हितधारकों की प्रतिपुष्टि के आधार पर और कार्ड धारकों के हित के मद्देनजर निम्नलिखित निर्देश जारी किये जा रहे हैं :

  1. दिनांक 31 दिसंबर 2010 के हमारे निर्देशों के पैरा 4 में दर्शाये गये सभी सीएनपी लेनदेनों के लिए प्रमाणीकरण के अतिरिक्‍त कारकों को 01 मई 2012 से लागू करना अनिवार्य है.

  2. निर्धारित तारीख के बाद प्रमाणीकरण के अतिरिक्‍त कारक के बिना किये गये लेनदेनों से संबंधित मामलों पर यदि कोई ग्राहक शिकायत आती है तो जारीकर्ता बैंक बिना विलंब किये ग्राहक को हानि की प्रतिपूर्ति करेगा.

3. यह निर्देश भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 (2007 के अधिनियम 51) की धारा 18 के तहत जारी किया जाता है.

4. कृपया प्राप्ति सूचना दें.

भवदीय

विजय चुग
मुख्य महाप्रबंधक

 
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