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Date: 01/07/2011
एजेंसी बैंकों द्वारा सरकारी कारोबार संचालित करने के लिए मास्टर परिपत्र – एजेंसी कमीशन का भुगतान

भारिबैं/2011-12/97
सबैंलेवि. सलेप्र.सं.एच. 3 /31.12.010/2011-12   

1 जुलाई 2011

सभी एजेंसी बैंक

महोदय/ महोदया

एजेंसी बैंकों द्वारा सरकारी कारोबार संचालित करने के लिए मास्टर परिपत्र एजेंसी कमीशन का भुगतान

भारतीय रिज़र्व बैंक समय समय पर बैंकों को देय एजेंसी कमीशन पर विभिन्न अनुदेश जारी करता रहा है। इन अनुदेशों को दिनांक 1 जुलाई 2010 के हमारे मास्टर परिपत्र भारिबैं/2010-11/89 (सबैंलेवि.सलेप्र.सं.एच. 04/31.12.010/2010-11) में सूचित किया गया था। संशोधित परिपत्र की एक प्रतिलिपि संलग्न है। आप हमारी वेबसाइट  www.mastercirculars.rbi.org.in पर भी उपर्युक्त परिपत्र प्राप्त कर सकते हैं।

2. कृपया प्राप्ति सूचना दें।

भवदीय

(बी के मिश्रा)
महाप्रबंधक

अनु: यथोक्त


एजेंसी कमीशन के संबंध में मास्टर परिपत्र

1. एजेंसी कमीशन संशोधित दरें

(i)  [आरबीआई /2005-06/77 (डीजीबीए.जीएडी. सं.379/31.12.010(सी)/2005-06) दिनांक 25 जुलाई 2005]

(ii) [आरबीआई /2005-06/384 (डीजीबीए. जीएडी.सं.17585/31.12.010(सी)/2005-06) दिनांक 8 मई 2006]

एजेंसी बैकों को देय एजेंसी की दरें हमारे परिपत्र[आरबीआई /2005-06/77(डीजीबीए. जीएडी. सं.379/31.12.010(सी)/2005-06 दिनांक 25 जुलाई 2005)] के अनुसार 1 जुलाई 2005 से परिशोधित करके कुल बिक्री (टर्नओवर) (मूल्य) आधार से लेनदेन आधार (ट्रांजेक्शन बेसिस) में परिवर्तित कर दी गई हैं। बैंकों से प्राप्त अभिवेदनों के आधार पर इस संबंध में एक समीक्षा की गई थी। तदनुसार, यह निर्णय लिया गया है कि दरों में निम्नानुसार आशोधन किया जाए। आशोधित दरें 1 जुलाई 2005 से लागू होंगी।

क) प्राप्तियाँ: 45/- रुपये प्रति लेनदेन

ख) पेंशन को छोड़कर अन्य भुगतान: 9 पैसे प्रति 100 रुपये के टर्न ओवर पर

ग) पेंशन भुगतान: 60/- रुपये प्रति लेनदेन

एजेंसी बैंकों द्वारा प्रदत्त सेवाओं की गुणवत्ता की निगरानी पेंशनरों को बैंकों द्वारा प्रदत्त सेवा पर विशेष ध्यान के साथ भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा की जाएगी।

चूंकि प्राप्तियों और पेंशन भुगतानों पर एजेंसी कमीशन 'प्रति लेनदेन' आधार पर देय है, एजेंसी बैंकों को सूचित किया जाता है कि ऐसे कमीशन का दावा पेश करने के लिए आवश्यक रिकार्ड रखें। उसे किसी भी समय सत्यापन के लिए रिज़र्व बैंक अथवा उसकी प्राधिकृत एजेंसी को उपलब्ध कराया जाएगा। लेनदेनों की संख्या की गणना करने के लिए, सरकारी लेखा प्राधिकारियों को पेश की गयी दैनिक शाखा सूचि (स्क्रोल) की गणना की जाएगी। त्रुटि सूचियों (एरर स्क्रोल्स) में रिपोर्ट किये गये लेनदेन एजेंसी कमीशन के लिए पात्र नहीं होंगे। एक निर्धारिती के रुप में विभिन्न करों की वसूली/भुगतान के लिए बैंक की अपनी सांविधिक देयता के संबंध में लेनदेन एजेंसी कमीशन के भुगतान के लिए योग्य नहीं होंगे। कमीशन का दावा पेश करते समय बैकों द्वारा इस आशय का निर्धारित प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

2. एजेंसी कमीशन - लोक भविष्य निधि (पीपीएफ) योजना 1968 तथा वरिष्ठ नागरिक बचत योजना 2004 (एससीएसएस)

[आरबीआई /2006-07/289(डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-14024/31.12.010/2006-07) दिनांक 16 मार्च 2007]

पीपीएफ और एससीएसएस का कार्य करने हेतु भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा एजेंसी कमीशन के भुगतान की भारत सरकार से परामर्श करने पर मुद्दे की जांच की गई और यह निर्णय लिया गया कि पीपीएफ और एससीएसएस के अंतर्गत  संचालित लेनदेनों के लिए बैंकों को मेहनताने के भुगतान के लिए एक ही चैनल का पालन किया जाए। तदनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक पीपीएफ और एससीएसएस से संबंधित लेनदेनों के लिए निम्नलिखित दरों पर एजेंसी कमीशन का भुगतान करेगा:

क) प्राप्तियाँ: 45/- रुपये प्रति लेनदेन

ख) भुगतान: 9 पैसे प्रति 100 रुपए टर्नओवर पर

उपरोक्त दरों में संशोधन के साथ भारत सरकार पीपीएफ और एससीएसएस का प्रबंधन करने हेतु पारिश्रमिक  के भुगतान को बंद कर देगी।

3. पीपीएफ और एससीएसएस लेनदेनों पर बैंकों द्वारा एजेंसी कमीशन दावे

[आरबीआई /2006/07/408 (डीजीबीए.सीडीडी.सं.एच-16532/15.15.001/2006-07) दिनांक 21 मई 2007]

पीपीएफ और एससीएसएस लेनदेन के संबंध में एजेंसी कमीशन का दावा करने की एक समान प्रथा लाने की द्दष्टि से मार्गदर्शी सिद्धांत जारी किए गए और एजेंसी कमीशन का दावा करने हेतु फार्मेट निर्धारित किया गया। सभी एजेंसी बैंकों को सूचित किया गया था कि अनुबंध I और II के फार्मेट में पीपीएफ और एससीएसएस के संबंध में एजेंसी कमीशन का दावा करें और अनुबंध III में दावे का सारांश प्रस्तुत करे। दिनांक 1 जुलाई 2005 से पीपीएफ पर और दिनांक 1 अप्रैल 2006 से एससीएसएस पर एजेंसी कमीशन देय है। दिनांक 31 मार्च 2007 तक देय ऐसे सभी दावों के साथ बकाया राशि दिनांक 10 जून 2007 तक एजेंसी बैंकों द्वारा  प्रस्तुत की जाए। चूंकि देय एजेंसी कमीशन के लिए केवल एक चैनल होगा इसलिए भारत सरकार द्वारा यदि कोई पारिश्रमिक का भुगतान किया जा चुका हो तो उसे बैंक द्वारा वसूल कर लिया जाएगा।

4. एजेन्सी कमीशन के लिए पात्र सरकारी लेनदेन

[आरबीआई /2004/305(डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-2625-2658/31.12.010(सी)/2004-05) दिनांक 17 दिसंबर 2004]

[डीजीबीए.जीएडी.सं एच 8852/  31.12.010(सी)/2010-11 दिनांक 21 जून 2011 ]

निम्नलिखित लेनदेन एजेंसी कमीशन के लिए पात्र होंगे:

  • केन्द्र/राज्य सरकारों की ओर से राजस्व प्राप्तियां और भुगतान

  • केन्द्र/राज्य सरकारों के संबंध में पेंशन का भुगतान

  • अनिवार्य जमा योजना(एसडीएस)1975, लोक भविष्य निधि योजना (पीपीएफ)

  • वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस)

  • अन्य ऐसा कोई कार्य जो भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा विशेष रुप से एजेंसी कमीशन के लिए पात्र रुप में सूचित किया गया हो (जैसे राहत बांड/बचत बांड इत्यादि लेनदेन)

वित्तिय संस्थाओं और बैंकों इत्यादि से सीधे उगाहे गये राज्य सरकारों के अल्पावधि/दीर्घावधि ऋण एजेंसी कमीशन के लिए पात्र नहीं हैं क्योंकि ये लेनदेन सामान्य बैंकिंग कारोबार की प्रकृति के नहीं माने जाते हैं। लोक ऋण के प्रबंध के लिए एजेंट के रुप में कार्य करने हेतु रिज़र्व बैंक एजेंसी बैंकों को यथा सहमत दर पर अलग से पारिश्रमिक अदा करता है। हम इस बात को दोहराते हैं कि मंत्रालयों/विभागों इत्यादि की ओर से बैंकों द्वारा खोले गये ऋण पत्र (एल/सी) से होने वाले लेनदेन एजेंसी कमीशन के लिए पात्र नहीं होंगे।

हालांकि एजेंसी बैंकों में से कुछ से प्राप्त संदर्भों के संदर्भ में एजेंसी कमीशन के लिए एक पात्र मद के रूप में बैंकों द्वारा स्टांप शुल्क के संग्रहण के मुद्दे की हमारे द्वारा जांच की गई और यह निर्णय लिया गया है कि एजेंसी बैंको द्वारा सरकारी लेनदेन के रूप में स्टांप शुल्क के संग्रह को एजेंसी कमीशन की पात्रता हेतु निम्नानुसार पात्र माना जाए :

i) जब भी एजेंसी बैंकों भौतिक मोड या ई - मोड के माध्यम से (चालान आधारित) स्टांप शुल्क संग्रह करते है , वे एजेंसी कमीशन के भुगतान के लिए पात्र हैं बशर्ते कि एजेंसी बैंक स्टांप शुल्क संग्रह करने के लिए  जनता से कोई शुल्क या राज्य सरकार से पारिश्रमिक प्राप्त नही करते है ।

ii) जहां कि फ्रैंकिंग गतिविधि का संबंध है, अगर एजेंसी बैंक को फ्रैंकिंग विक्रेता के रूप में राज्य सरकार द्वारा काम दिया गया है और यह जनता से दस्तावेजों की फ्रैंकिंग के लिए स्टांप शुल्क जमा करती है तो यह एजेंसी कमीशन के लिए पात्र नहीं होंगे चूंकि राज्य सरकार फ्रैंकिंग विकेता के रूप में एजेंसी बैंक को कमीशन दे रही है । हालांकि एजेंसी बैंक जो फ्रैंकिंग बार की खरीद के लिए स्टांप वेंडर द्वारा भौतिक या ई - मोड में चालान के माध्यम से स्टांप राजकोष में जमा करने के लिए प्राप्त करती है तो यह स्टांप  ड्यूटी के एक नियमित रूप का भुगतान होगा और उपरोक्त मद संख्या (i) के अंतर्गत एजेंसी कमीशन के लिए पात्र होगा ।

सभी एजेंसी बैंक टर्नओवर कमीशन (टीओसी) का दावा करते समय इस आशय का एक प्रमाणपत्र करेंगे कि अपात्र लेनदेनों पर टीओसी का दावा प्रस्तुत नहीं किया गया है।

5. एजेंसी बैंकों के माध्यम से राज्य सरकार के आयकर/ अन्य प्रत्यक्ष कर और व्यवसाय कर/अन्य कर स्वीकार करने हेतु योजना

[आरबीआई /2004/64(डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-41/ 42.02.001/2003-04) दिनांक 22 जुलाई 2004]

[आरबीआई /2004/248(डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-1225-1258/42.02.001/2004-05)दिनांक 27 अक्तूबर 2004]

[आरबीआई /2004-05/344(डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-3568-3601/42.01.001/2004-05)दिनांक 13 जनवरी 2005]

एजेंसी बैंक जो अपनी स्वयं की कर देयताएं अपनी स्वयं की शाखाओं के माध्यम से अथवा जहां कहीं उनकी स्वयं ही सीधे वसूली हेतु प्राधिकृत शाखाएं न होने की स्थिति में भारतीय स्टेट बैंक की प्राधिकृत शाखाओं के माध्यम से अथवा भारतीय रिज़र्व बैंक के कार्यालयों के माध्यम से अदा कर रहे हैं, उन्हें वैसा स्क्रौल में अलग से उल्लेख करना चाहिए। ऐसे लेनदेन एजेंसी कमीशन के भुगतान के लिए पात्र नहीं होंगे। बैंकों को एजेंसी कमीशन का दावा प्रस्तुत करते समय इस आशय का एक प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना चाहिए कि उनके द्वारा चुकायी गयी उनकी स्वयं की कर देयताएं (स्त्रोत पर काटे गए कर [टीडीएस], कार्पोरेट कर, इत्यादि) इसमें शामिल नहीं हैं।

6. एजेंसी कमीशन पर टी डी एस की कटौती

[डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-190/31.12.010/2003-04 दिनांक 14 सितंबर 2003]

[डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-6670/31.12.010(सी) /2010-11 दिनांक 24 मार्च 2011]

केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि रिज़र्व बैंक द्वारा अदा की गयी अथवा उसके द्वारा अपने एजेंटो को क्रेडिट किए गए एजेंसी कमीशन की राशि पर कर की कटौती करने की आवश्यकता नहीं होगी। केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने अपने दिनांक 14 मार्च 2011 के ज्ञापन एफ सं. 275/20/2011- आईटी(बी) के द्वारा पुन: स्पष्ट किया है कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकार के सामान्य बैंकिंग कार्य करने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा एजेंसी बैंकों को भुगतान किए गए या क्रेडिट किए गए टर्नओवर कमीशन पर आरबीआई को टैक्स कटौती करना वांछनीय नही है । तथापि, यह बात दोहरायी जाती है कि संबंधित बैंकों को प्राप्त होने पर एजेंसी कमीशन की राशि कर-योग्य होगी क्योंकि वह बैंक की आय का ही भाग है।

7. एजेंसी बैंकों द्वारा सरकारी कारोबार संचालित करना – एजेंसी कमीशन का भुगतान – बैंकों द्वारा एजेंसी कमीशन का दावा प्रस्तुत करने के लिए फार्मेट

[आरबीआई /2005/147 (डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-751/ 31.12.010(सी)/2005-06) दिनांक 30 अगस्त 2005] और [डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-19378/31.12.010(सी)/ 2005-06 दिनांक 6 जून 2006]

[डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-754/31.12.010(सी)/2005-06 दिनांक 30 अगस्त 2005]

एजेंसी बैंको द्वारा (भारतीय स्टेट बैंक के अतिरिक्त) एजेंसी कमीशन का दावा प्रस्तुत करने के लिए एक फार्मेट तैयार किया गया है। इसके अलावा राहत बांड/बचत बांड के संबंध में ब्याज और/अथवा मोचन मूल्य अदा करने के संबंध में एजेंसी कमीशन का दावा प्रस्तुत करने के लिए भी एक अलग फार्मेट तैयार किया गया है। एजेंसी बैंकों को एजेंसी कमीशन के लिए अपना दावा निर्धारित फार्मेट में प्रस्तुत करना आवश्यक है।

भारतीय स्टेट बैंक अपना दावा दिनांक 6 जून 2006 के परिपत्र द्वारा यथा संशोधित दिनांक 30 अगस्त 2005 के हमारे पत्र डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-754/31.12.010(सी)/ 2005-06 में निर्धारित फार्मेट में प्रस्तुत करेगा।

8. एजेंसी बैंकों द्वारा प्रस्तुत एजेंसी कमीशन दावे-सामान्य अनियमितताएं – गलत दावों के लिए दण्डात्मक ब्याज लगाना

[आरबीआई /2005/193 (डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-4530/ 31.12.010(सी)2005-06) दिनांक 27 अक्तूबर 2005]

[डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-11136/31.12.010(सी)/2005-06 दिनांक 31 जनवरी 2006]

[डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-13118/31.12.010(सी)/2005-06 दिनांक 2 मार्च 2006]

कुछ एजेंसी बैंकों द्वारा प्रस्तुत एजेंसी कमीशन दावों का हमारे द्वारा अकस्मात सत्यापन करने पर पायी गयी सामान्य अनियमितताओं के बारे में एजेंसी बैंकों को सूचित किया गया था। बैंकों से यह अपेक्षा है कि वे एजेंसी कमीशन के लिए दावे प्रस्तुत करते समय उचित सावधानी बरतें और यह सुनिश्चित करें कि वे बिल्कुल ठीक हैं। गलत दावों से बचने की दृष्टि से, उन्हें अपने आंतरिक/समवर्ती लेखा परीक्षक से उक्त जानकारी को प्रमाणित करवा लेना चाहिए। एजेंसी बैंकों को निपटाये गये एजेंसी कमीशन के किन्हीं गलत दावों के लिए बैंक दर (प्रतिवर्ष 1 मई और 1 नवंबर की स्थिति के अनुसार भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा यथा अधिसूचित)+2% की दर पर  दण्ड ब्याज अदा करना होगा।

9. विशेष जमा योजना पर एजेंसी कमीशन

[डीजीबीए.जीएडी.सं.एच.11794/31.12.010(सी)/2005-06 दिनांक 13 फरवरी 2006]

एस डी एस –1975 के अंतर्गत लेनदेन 'पेंशन को छोडकर अन्य भुगतानों' के बराबर एजेंसी कमीशन के लिए योग्य हैं। इस प्रकार, एजेंसी बैंकों को ऐसे लेनदेनों पर प्रति 100 रुपये की कुल खरीद (टर्नओवर) पर 9 पैसे की दर से एजेंसी कमीशन की पात्रता है। चूंकि इस योजना के अंतर्गत अब नयी जमाराशियों की आगे अनुमति नहीं है, एसडीएस-1975 के अंतर्गत वर्तमान में निम्नलिखित लेनदेन होंगे-

क) निधि से अनिवार्य आहरणों के लिए जब भी कभी अनुरोध प्राप्त होता है, उसकी अनुमति प्रदान करना;

ख) वार्षिक दरों पर ब्याज भुगतान और ग) इस योजना में किये गये प्रावधान के अनुसार खाता बंद करना।

10. पेंशन लेनदेनों पर एजेंसी कमीशन

[डीजीबीए.जीएडी.सं.एच.13034/31.12.010(सी)/2006-07 दिनांक 27 फरवरी 2007]

एजेंसी बैंक प्रति लेन देन रु.60/- की दर से एजेंसी कमीशन का दावा करने के लिए केवल तब पात्र होंगे जब उनके द्वारा पेंशन के संवितरण का संपूर्ण कार्य किया जाएगा। यदि पेंशन संवितरण से संबंधित संपूर्ण कार्य संबंधित सरकारी विभाग/कोषागार द्वारा किया गया हो और बैंकों द्वारा केवल उन्हें सरकारी खाते से एकल नामे द्वारा पेंशनरों के खातों में जमा करना आवश्यक हो, ऐसे लेनदेन को 'पेंशन भुगतान के अलावा भुगतान' के अंतर्गत संवर्गीकृत किया जाए और वे 9 पैसे प्रति 100/-रुपए टर्नओवर की दर से एजेंसी कमीशन के भुगतान के लिए पात्र होंगे।

11. एजेंसी कमीशन दावों मे अनियमित बढ़ोतरी

(डीजीबीए.जीएडी.एच-1800/31.12.010/ 2009-10 दिनांक 21 अगस्त 2009)

एजेंसी बैंकों के लिए सुनिश्चित करना आवश्यक है कि एजेंसी कमीशन का दावा निर्धारित प्रारूप में भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय / केंद्रीय लेखा अनुभाग नागपुर को सही रूप में प्रस्तुत किया जाए। इसके अलावा शाखाओं द्वारा किए गए दावों में निहित जानकारी आंतरिक / समवर्ती लेखा परीक्षक द्वारा प्रमाणित होना चाहिए ताकि गलत दावे से बचा जा सके । लेकिन हमारे क्षेत्रीय कार्यालयों ने हमें सूचित किया है कि एजेंसी बैंकों ने कुछ बड़ी राशि के गलत / त्रुटिपूर्ण दावें  उनके आंतरिक / समवर्ती लेखा परीक्षक द्वारा विधिवत प्रमाणित कर प्रस्तुत किए है। इस तरह के आंतरिक / समवर्ती लेखा परीक्षक द्वारा प्रमाणित गलत दावे, त्रैमासिक दावा करने की इस आवश्यक वांछनीयता की शर्त को, अर्थहीन बना देगी । इसे देखते हुए एजेंसी बैंकों से अनुरोध है कि अपनी शाखाओं को चेतावनी जारी करें कि वे हमारे क्षेत्रीय कार्यालय को प्रस्तुत किए जाने वाले दावों का सही होना सुनिश्चित करें । एजेंसी बैंकों को यह भी सूचित किया जाता है कि एजेंसी कमीशन के एक/दो वर्ष की अवधि के लिए प्रस्तुत दावों की आंतरिक निरीक्षण / लेखा परीक्षा के दौरान नमूना जांच भी करवाएं । एजेंसी बैंक इस प्रक्रिया की निगरानी एवं हुई प्रगति की आवधिक समीक्षा की व्यवस्था करें ।

12. एजेंसी कमीशन के दावे बाहरी लेखापरीक्षक / सनदी लेखाकार द्वारा सत्यापित होने चाहिए

(डीजीबीए.जीएडी.एच-3903/31.12.010(सी)/ 2009-10 दिनांक 11 नवंबर 2009)

हमनें पाया है  कि निर्देश के बावजूद, हमारे क्षेत्रीय कार्यालयों में एजेंसी बैंकों से गलत / अधिक दावे प्राप्त हो रहे है। इसलिए निर्णय लिया गया कि आगे से एजेंसी बैंकों द्वारा प्रस्तुत एजेंसी कमीशन दावें भारतीय रिजर्व बैंक को प्रस्तुत करने से पहले बाहरी ऑडिटर (चार्टर्ड एकाउंटेंट्स) द्वारा परीक्षित और प्रमाणित होने आवश्यक है । जहां बाहरी लेखा परीक्षक समवर्ती/ सांविधिक लेखा परीक्षक भी है, ऐसे मामले में दावा समवर्ती/ सांविधिक लेखा परीक्षक द्वारा प्रमाणित किया जा सकता है। तदनुसार, एजेंसी बैंकों को सूचित किया जाता है कि हमारे क्षेत्रीय कार्यालयों को प्रस्तुत किए जा रहे सभी एजेंसी कमीशन के दावें बाहरी ऑडिटर (चार्टर्ड एकाउंटेंट) द्वारा विधिवत प्रमाणित होने चाहिए। हमारे क्षेत्रीय कार्यालयों को प्रस्तुत एजेंसी कमीशन दावा इस प्रमाण पत्र के साथ किया जाना चाहिए कि दावा लेखा परीक्षित किया गया है और  बाहरी लेखा परीक्षक (चार्टर्ड एकाउंटेंट) द्वारा सही पाया गया है ।  इस के अलावा, एजेंसी बैंकों को सुनिश्चित करना है कि एजेंसी बैंक की आंतरिक निरीक्षक/ लेखा परीक्षक निरीक्षण / लेखा परीक्षा के दौरान अपनी शाखाओं द्वारा प्रस्तुत दावों की  सही होने की पुष्टि करेंगे ।

13. एजेंसी कमीशन के दावे बाहरी लेखापरीक्षक द्वारा सत्यापित होने चाहिए ।

(डीजीबीए.जीएडी.एच-160/31.12.010(सी)/ 2010-11 दिनांक 07 जुलाई 2010 )

एजेंसी बैंकों को निर्देश दिए गए है कि वे एजेंसी कमीशन के दावे भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रस्तुत करने से पहले उनकी बाहरी लेखा परीक्षक ( सनदी लेखाकार) से लेखापरीक्षा करवा लें । हालांकि ऐसे बाहरी लेखापरीक्षक की प्रमाणपत्र में इस बात का स्पष्ट उल्लेख हो कि :

(ए) भारिबै को प्रस्तुत एजेंसी कमीशन आवेदन में दी गई ‘प्राप्तियां’ और ‘पेंशन भुगतान लेनदेन’ और ‘ पेंशन के अतिरिक्त भुगतानो’ के लिए एजेंसी कमीशन एजेंसी बैंक की संबद्ध शाखा/ओं द्वारा अनुरक्षित रिकार्ड के साथ मिलान हो रहा है ; और

(बी) वाल्यूम(नंबर) आधारित लेनदेन यथा ‘ प्राप्तियां’ और पेंशन भुगतान लेनदेन’ के संबंध में किए गए एजेंसी कमीशन के दावें एक बार ही किए गए है और इन्हें ‘ पेंशन के अतिरिक्त भुगतानो’ के संबंध में वेल्यू आधारित लेनदेन का हिसाब करते समय शामिल नही किया गया है ।


मास्टर परिपत्र में समेकित परिपत्रों की सूची

क्र.
सं.

परिपत्र सं.

दिनांक 

विषय

1.

डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-190/31.12.010/ 2003-04

सितम्बर
14, 2003

एजेंसी कमीशन पर भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा टीडीएस नहीं काटा जाएगा।

2.

आरबीआई /2004/64
(डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-41/42.02.001/ 2003-04)

22 जुलाई 2004

एजेंसी बैंकों के माध्यम से आयकर और अन्य प्रत्यक्ष कर (केन्द्र सरकार) तथा राज्य सरकारों के व्यवसाय कर/अन्य कर स्वीकार करने की योजना

3.

आरबीआई /2004/248 (डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-1225-1258/42.02.001/2004-05)

27 अक्तूबर 2004

एजेंसी बैंकों के माध्यम से आयकर और अन्य प्रत्यक्ष कर (केन्द्र सरकार) तथा राज्य सरकारों के व्यवसाय कर/अन्य कर स्वीकार करने की योजना

4.

आरबीआई /2004/305
(डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-2625-2658/31.12.010(सी)2004-05)

17 दिसंबर 2004

एजेंसी बैंको द्वारा सरकारी कार्य करने के लिए पारिश्रमिक-लेनदेन कमीशन का भुगतान

5.

आरबीआई /2004-05/344
(डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-3568-3601/ 42.01.001/2004-05)

13 जनवरी 2005

एजेंसी बैंकों के माध्यम से आयकर और अन्य प्रत्यक्ष कर (केन्द्र सरकार) तथा राज्य सरकारों के व्यवसाय कर/अन्य कर स्वीकार करने की योजना

6.

आरबीआई /2005-06 /77
(डीजीबीए.जीएडी.सं.379/31.12.010(सी)/2005-06)

25 जुलाई 2005

एजेंसी कमीशन –दरों में संशोधन

7.

आरबीआई /2005/147(डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-751/31.12.010(सी)/2005-06)

डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-754/ 31.12.010(सी)/2005-06)

(डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-19378/31.12.010(सी)/2005-06)

30 अगस्त 2005

30 अगस्त 2005

6 जून 2006

बैंकों द्वारा एजेंसी कमीशन का दावा प्रस्तुत करने के लिए फार्मेट

8.

आरबीआई /2005/193
(डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-4530/31.12.010 (सी)/2005-06)

(डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-11136/31.12.010 (सी)/2005-06

(डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-13118/31.12.010 (सी)/2005-06)

27 अक्तूबर 2005

31 जनवरी 2006

2 मार्च 2006

एजेंसी बैंकों द्वारा प्रस्तुत एजेंसी कमीशन के दावे – सामान्य अनियमिताएं

9.

(डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-11794/31.12.010 (सी)/2005-06)

13 फरवरी 2006

विशेष जमा योजना के संबंध में एजेंसी कमीशन

10.

आरबीआई /2005-06/384
(डीजीबीए.जीएडी.सं.17585/31.12.010 (सी)/2005-06)

8 मई 2006

सरकारी कारोबार करना – एजेंसी कमीशन दरों में संशोधन

11.

(डीजीबीए.जीएडी.सं.एच-13034/ 31.12.010/2006-07)

27 फरवरी 2007

पेंशन भुगतान के संबंध में एजेंसी कमीशन

12.

आरबीआई /2006-07/289 (डीजीबीए. जीएडी.एच-14024/31.12.010/2006-07)

16 मार्च 2007

लोक भविष्य निधि योजना, 1968 (पीपीएफ) और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना 2004 (एससीएसएस) के लिए एजेंसी कमीशन

13.

आरबीआई /2006-07/408
(डीजीबीए.सीडीडी.एच-16532/15.15.001/ 2006-07)

21 मई 2007

पीपीएफ और एससीएसस के दावों के लिए फार्मेट

14.

(डीजीबीए.जीएडी.एच-1800/31.12.010/ 2009-10)

अगस्त 21, 2009

एजेंसी कमीशन दावों मे अनियमित बढ़ोतरी

15.

(डीजीबीए.जीएडी.एच-3903/31.12.010(सी)/ 2009-10)

नवंबर 11, 2009

एजेंसी कमीशन के दावे बाहरी लेखापरीक्षक / सनदी लेखाकार द्वारा सत्यापित होने चाहिए

16.

डीजीबीए.जीएडी.सं एच 160/ 31.12.010(सी)/2010-11

7 जुलाई 2010

एजेंसी कमीशन के दावे बाहरी लेखापरीक्षक द्वारा सत्यापित होने चाहिए

17.

डीजीबीए.जीएडी.सं एच 6670/ 31.12.010(सी)/2010-11

24 मार्च 2011

एजेंसी कमीशन पर टीडीएस के कटौती भारिबै द्वारा नही की जाएगी

18.

डीजीबीए.जीएडी.सं एच 8852/ 31.12.010(सी)/2010-11

21 जून 2011

रजिस्ट्रेशन शुल्क और स्टांप ड्यूटी पर एजेंसी कमीशन का भुगतान

 
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