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Date: 08/04/2009
आर.टी जी एस संव्यवहार

भा.रि.बै./ 2008-09 /426

भु.नि.प्र.वि. (आर.टी जी.एस.) सं.1776/02.10.02/2008-09
अप्रैल 8, 2009
 

अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक/मुख्य कार्यकारी अधिकारी
आर.टी जी.एस. में भाग लेने वाले सभी बैंक

 
महोदय/महोदया,
 
आर.टी जी एस संव्यवहार
 

आर.टी जी.एस. संव्यवहारों की मात्रा तेजी से बढ़ रही है । आर.टी जी.एस. में मार्च 2008 में हुए 0.72 मिलियन संव्यवहारों की तुलना में मार्च 2009 में 1.94 मिलियन संव्यवहार हुए हैं। वर्तमान में आर.टी जी.एस. संव्यवहारों में निपटान होने वाले ग्राहक संव्यवहार कुल आर.टी जी.एस. संव्यवहारों  का 89% है तथा इसमें और वृद्धि हो रही है। हमने हाल ही में बड़े बैंकों के साथ बैठक के दौरान संपूर्ण आर.टी जी.एस. ग्राहक संव्यवहारों  को और अधिक प्रयोक्ता अनुकूल बनाने के उद्देश्य से समीक्षा की। इन चर्चाओं के आधार पर आर.टी जी.एस.सदस्यों द्वारा कार्यान्वित किये जाने के लिए निम्नलिखित निर्णय लिए गये।

2. जैसा कि आपको विदित है कि अप्रैल 07, 2008 के हमारे परिपत्र सं. भु.नि.प्र.वि.(के. का) सं.1607/04.04.002/2007-2008 द्वारा सभी आर.टी जी.एस. सदस्यों को वायर अंतरण शुरू करते समय भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी दिशानिदेशों का अनुपालन करने के लिए कहा गया था। हमने आर-41 का नमूना भी संलग्न किया था और बैंकों को यह भी बताया गया था कि संदेश फार्मेट में भेजने वाले और प्राप्तकर्ता की जानकारी कैसे ली जाए । अब इसके साथ ही बैंको को दिये गये फार्मेट के अनुसार ग्राहक संदेश फार्मेट (आर-41) के फील्ड टैग सं. 5500 और 5561 में पूरी जानकारी देनी होगी।

 
फील्ड टैग सं. 5500
 

लाइन 1

भेजने वाली बैंक का खाता सं./देश-विशेष की अद्वितीय संदर्भ सं./पहचान सं.

35 X

लाइन 2

भेजने वाले/विप्रेषक का नाम

35 X

लाइन 3 और 4

पता और निवास का स्थान

2*35 X

 
फील्ड टैग सं. 5561
 

लाइन 1

खाता सं.    

[/34 X]

लाइन 2

हिताधिकारी का नाम

35 X

लाइन 3, 4 और 5

पता और निवास का स्थान

3*35 X

 

3. हम समझते हैं कि कुछ बैंक संदेशों में आवश्यक विवरण दे रहे हैं, जबकि बहुत से बैंकों ने अभी भी दिशानिदेशों का अनुपालन नहीं किया है। इसलिए हम यह पुन: दोहराते हैं कि स्ट्रेट थ्रू प्रोसेसिंग ( एस. टी. पी. ) वातावरण में मानकीकरण बहुत आवश्यक है और एस. टी. पी. की सफलता के लिए संदेश में एकरूपता होना आवश्यक है। 

4. आर.टी जी.एस. के ग्राहक शिकायत करते रहे हैं कि विभिन्न बैंकों द्वारा ग्राहकों की पास बुक/ खाता विवरण में दी गई जानकारी में एकरूपता नहीं है। कुछ बैंकें विवरण दिये बगैर ही केवल आर.टी जी.एस. क्रेडिट दर्शाती हैं जबकि अन्य बैंके भेजने वाले की बैंक खाता संख्या अथवा संव्यवहार की यू. टी. आर. देती हैं। यह बिभिन्न बैंकों द्वारा कोर बैंकिंग सोल्यूशन (सी. बी. एस.) के माध्यम से मैसेज फार्मेट के बिभिन्न फील्ड टैगों से जानकारी ग्रहण करने के आधार पर दिया जाता है। परिणाम स्वरूप किसी दिंनाक को एक से अधिक 'आर.टी जी.एस. क्रेडिट'  प्राप्त करने वाला ग्राहक निधियों के स्रोत को जानने में असमर्थ रहता है और इससे समाधान (Reconciliation) की समस्याएं भी होती हैं।

5. अतएव यह सूचित किया जाता है कि :

क) आर.टी जी.एस. से धनराशि प्राप्त करने वाले बैंक के ग्राहक को उसके खाता विवरण / पासबुक में भेजने वाले का नाम दिया जाए।
ख) आर.टी. जी.एस. द्वारा धनप्रेषण करने वाले बैंक के ग्राहक को उसके खाता विवरण/ पासबुक में हिताधिकारी का नाम दिया जाए।

इस प्रयोजन के लिए यह सूचित किया जाता है कि फील्ड टैग सं.5500 और फील्ड टैग सं. 5561 में दी गई जानकारी ऊपर बताए अनुसार सभी बैंको को एक समान रूप से देनी चाहिए। बैंकों के सी. बी. एस. में संशोधन कर उसमें प्रोवीजन किया जाए जिससे वे प्राप्तकर्ता के खाता विवरण / पासबुक  के लिए फील्ड टैग सं.5500 की लाइन 2 और भेजने वाले का खाता विवरण/ पासबुक के लिए फील्ड टैग सं. 5561 की लाइन 2 को ग्रहण कर सकें। बैंक यदि आवश्यक/उपयोगी समझे तो उपरोक्त के अलावा भी अतिरिक्त जानकारी देने के लिए स्वतंत्र हैं।

6. आर.टी जी.एस. से जुड़े सभी बैंक इन अनुदेशों का अनुपालन करने के लिए जून 01, 2009 तक आवश्यक कदम उठाएं ।

कृपया प्राप्ति-सूचना दें और इस पर की गई कार्रवाई की जानकारी भी यथासमय भिजवाएं।

 
भवदीय,
 
(जी. पद्मनाभन)
मुख्य महाप्रबंधक
 
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