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Date: 06/10/2016
भुगतान बैंकों के लिए परिचालनगत दिशानिर्देश

भा.रि.बैं./2016-17/80
बैंविवि.एनबीडी.सं. 25/16.13.218/2016-17

6 अक्तूबर, 2016

भुगतान बैंकों के मुख्य कार्यपालक अधिकारी

महोदया/महोदय,

भुगतान बैंकों के लिए परिचालनगत दिशानिर्देश

कृपया भुगतान बैंकों को लाईसेंस प्रदान करने के संबंध में दिनांक 27 नवंबर 2014 के दिशानिर्देश (लाइसेंस प्रदान करने संबंधी दिशानिर्देश) देखें, जिसके अंतर्गत आवेदकों को भुगतान बैंकों की स्थापना करने के लिए सैद्धान्तिक अनुमोदन/ लाइसेंस प्रदान किए गए थे।

2. भुगतान बैंकों के कारोबार के भिन्न स्वरूप और उनके वित्तीय समावेशन पर फोकस को ध्यान में रखते हुए, इन बैंकों के लिए अलग से परिचालनगत दिशानिर्देशों की आवश्यकता की जाँच की गई। तदनुसार, भुगतान बैंकों के लिए परिचालनगत दिशानिर्देश अनुबंध में दिए गए हैं।

3. बाजार जोखिम और परिचालन जोखिम के लिए विवेकपूर्ण ढांचों की जाँच की जा रही है तथा इस संबंध में अनुदेश अलग से जारी किए जाएंगे।

4. ये परिचालनगत दिशानिर्देश लाइसेंस प्रदान करने संबंधी दिशानिर्देशों के पूरक हैं, तथा तत्काल प्रभावी होंगे।

भवदीय,

(एस. एस. बरिक)
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक


अनुबंध

भुगतान बैंकों के लिए परिचालनगत दिशानिर्देश

1. विवेकपूर्ण विनियमन

भुगतान बैंकों (पीबी) के लिए विवेकपूर्ण विनियामक ढांचा मुख्यतः बासल मानदंडों पर ही आधारित होगा। तथापि, इन बैंकों के वित्तीय समावेशन पर फोकस को देखते हुए इसे उपयुक्त रूप से परिवर्तित किया जाएगा।

1.1 पूंजी पर्याप्तता ढांचा

न्यूनतम पूंजी अपेक्षा 15%
सामान्य इक्विटी टियर 1 6%
अतिरिक्त टियर 1 1.5%
न्यूनतम टियर 1 पूंजी 7.5%
टियर 2 पूंजी 7.5%
पूंजी संरक्षण बफर लागू नहीं
प्रति- चक्रीय पूंजी बफर लागू नहीं
एटी1 के परिवर्तन के लिए पूर्व-विनिर्दिष्ट ट्रिगर 31 मार्च 2019 तक 6% सीईटी1, और उसके बाद 7%

1.2 बड़े एक्सपोजरों की सीमा (अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की जमाओं में निवेश के लिए)

किसी एक अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक में इस संबंध में एक्सपोजर भुगतान बैंक की कुल बाह्य देयताओं के पाँच प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।

1.3 पूंजी मापन विधि (कैपिटल मेजरमेंट अप्रोच)

ऋण जोखिम ऋण जोखिम के लिए बासल II मानक विधि

1.4 अंतर-बैंक उधार

भुगतान बैंकों को मांग मुद्रा और संपार्श्वीकृत उधार लेन-देन दायित्व (सीबीएलओ) बाजार में ऋणदाता और उधारकर्ता दोनों के रूप में भाग लेने की अनुमति होगी। तथापि, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों पर लागू होने वाली मांग मुद्रा उधार की उच्चतम सीमा इन उधारों पर भी लागू होगी।

1.5 निवेश वर्गीकरण और मूल्य निर्धारण मानदंड

(i) भुगतान बैंकों को, किसी भी दिन, उस दिन से तीन कार्यदिवस पहले के ”मांग जमाराशि शेष” (डिमांड डिपॉज़िट बैलेन्स- डीडीबी, जिसमें कारोबार प्रतिनिधियों की बयाना राशि भी शामिल है) का कम से कम 75 प्रतिशत सीमा तक निवेश एक वर्ष तक की परिपक्वता अवधि वाली ऐसी सरकारी प्रतिभूतियों/ ट्रेजरी बिल में बनाए रखना होगा, जो भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा सांविधिक चलनिधि अनुपात (एसएलआर) बनाए रखने के लिए पात्र प्रतिभूतियों के रूप में मान्य हों।

(ii) साथ ही, भुगतान बैंकों को, किसी भी दिन, उस दिन से तीन कार्यदिवस पहले के अपने ”मांग जमाराशि शेष” (डीडीबी, जिसमें कारोबार प्रतिनिधियों की बयाना राशि भी शामिल है) की अधिक से अधिक 25 प्रतिशत राशि अन्य अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की मांग और सावधि जमाराशियों में बनाए रखनी होगी।

(iii) ऊपर (i) और (ii) के अंतर्गत किए गए कुल निवेश और जमाएं भुगतान बैंक के ”मांग जमाराशि शेष” (डीडीबी, जिसमें कारोबार प्रतिनिधियों की बयाना राशि भी शामिल है) के 100 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए, जब तक यह रिज़र्व बैंक के पास रखे गए जमाशेष की सीमा तक कम हो।

नोट: अन्य अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के पास रखे गए जमाशेष के रूप में डीडीबी (जिसमें कारोबार प्रतिनिधियों की बयाना राशि भी शामिल है) के 25% से अधिक राशि रखने की अनुमति उस सीमा तक है, जहां तक अतिरिक्त राशि डीडीबी (जिसमें कारोबार प्रतिनिधियों की बयाना राशि भी शामिल है) के अलावा अन्य निधियों से जुटाई गई हो।

(iv) भुगतान बैंकों को अपनी स्वयं की निधियों में से किए गए निवेश के अलावा और किसी निवेश को “परिपक्वता तक धारित” (एचटीएम) श्रेणी में रखने की अनुमति नहीं होगी। अपनी स्वयं की निधियों से किए गए निवेश किसी भी स्थिति में उन आस्तियों या निवेशों में नहीं किए जाएंगे, जिनमें प्रोमोटर/ प्रोमोटर समूह की कोई संस्था प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लाभार्थी हो।

(v) भुगतान बैंकों को “जब जारी किया गया” और “अल्पकालिक बिक्री” लेन-देनों में भाग लेने की अनुमति नहीं होगी।

(vi) भुगतान बैंकों को बैंक जमाराशियों पर लागू सीमा के भीतर बैंक जमा प्रमाणपत्रों में निवेश करने की अनुमति होगी।

(vii) इस विषय पर अन्य निदेश वही होंगे जो अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों पर लागू हैं। (1 जुलाई 2015 का मास्टर परिपत्र आरबीआई/2015-16/97 डीबीआर सं बीपी.बीसी. 6/21.04.141/2015-16 और इसके बाद जारी परिपत्र देखें।)

1.6 विनियामक सीमाओं सहित ऋणों और अग्रिमों पर प्रतिबंध (गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी को ऋण दिए जाने सहित)

भुगतान बैंकों को अपने निदेशकों सहित किसी भी व्यक्ति को ऋण देने की अनुमति नहीं होगी। तथापि, भुगतान बैंक अपनी स्वयं की निधि से अपने बोर्ड द्वारा अनुमोदित नीति, जिसमें ऐसे ऋणों की उच्चतम सीमा रेखांकित की गई हो, के अनुसार अपने कर्मचारियों को ऋण दे सकते हैं।

1.7 पैरा- बैंकिंग गतिविधियां

भुगतान बैंकों को जारी किए गए लाइसेंसिंग दिशानिर्देशों और संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों में अनुमत गतिविधियों को छोड़कर अन्य कोई पैरा-बैंकिंग गतिविधि करने की अनुमति नहीं होगी।

1.8 उत्पाद अनुमोदन

(i) लाइसेंस के लिए आवेदन करते समय, भुगतान बैंकों को चाहिए कि उनके द्वारा प्रस्तावित वित्तीय उत्पादों का स्पष्ट विवरण देते हुए एक सूची रिज़र्व बैंक को प्रस्तुत करें।

(ii) इसके बाद लाए जाने के लिए प्रस्तावित किसी भी अन्य उत्पाद की सूचना रिज़र्व बैंक को दी जानी चाहिए। यदि आवश्यकता हो, तो रिज़र्व बैंक उत्पाद की डिजाइन, परिचालन या अन्य विशेषताओं में उचित प्रतिबंध लगा सकता है, जिसमें उत्पाद को बंद करना भी शामिल है।

2. जोखिम प्रबंधन

2.1 ऋण संकेंद्रण के जोखिम सहित ऋण जोखिम प्रबंधन

पैरा 1.3 में उल्लिखित स्थितियों के अलावा और कहीं लागू नहीं।

2.2 बाजार जोखिम प्रबंधन

भुगतान बैंकों के लिए बाजार जोखिम प्रबंधन से संबंधित प्रावधान वही होंगे, जो वाणिज्यिक बैंको पर लागू हैं। भुगतान बैंकों को डेरिवेटिवों का प्रयोग करने की अनुमति केवल एडी श्रेणी II के तहत की गई गतिविधियों से उत्पन्न होने वाली विदेशी मुद्रा की स्थिति से बचाव करने के लिए होगी।

2.3 परिचालन जोखिम प्रबंधन

भुगतान बैंकों को परिचालन जोखिम प्रबंधन की उन अपेक्षाओं को कार्यान्वित करना चाहिए, जो रिज़र्व बैंक द्वारा परिचालन जोखिम के लिए अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को जारी किए गए हैं, और जिसमें परिचालन हानि संबंधी डेटा एकत्र करना भी शामिल है।

2.4 चलनिधि जोखिम प्रबंधन

चलनिधि जोखिम प्रबंधन से संबंधित प्रावधान वही होंगे, जो वाणिज्यिक बैंको पर लागू हैं, जिसमें भुगतान बैंकों के चलनिधि जोखिम प्रोफाइल को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त सुधार किए जाएंगे।

2.5 कार्यनीति और प्रतिष्ठा संबंधी जोखिम प्रबंधन

कार्यनीति और प्रतिष्ठा जोखिम प्रबंधन से संबंधित प्रावधान वही होंगे, जो वाणिज्यिक बैंको पर लागू हैं, जिसमें एजेन्टों के प्रयोग से होने वाले प्रतिष्ठा जोखिम को देखते हुए उपयुक्त सुधार किए जाएंगे।

2.6 आंतरिक नियंत्रण, लेखापरीक्षा और अनुपालन

भुगतान बैंकों द्वारा आंतरिक नियंत्रण, लेखापरीक्षा और अनुपालन से संबंधित प्रावधान वही होंगे जो अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों पर लागू हैं, जिसमें आईसीटी से जुड़े पहलुओं और एजेन्टों के माध्यम से परिचालन का ध्यान रखने के लिए समुचित सुधार किए जाएंगे।

3. सीआरआर, एसएलआर, प्रकटीकरण और सांविधिक/विनियामक रिपोर्टें

भुगतान बैंकों के लिए, सीआरआर और एसएलआर अपेक्षाएं और विभिन्न प्रकटीकरण और सांविधिक/विनियामक रिपोर्टें वही होंगी जो वाणिज्यिक बैंकों पर लागू हैं (1 जुलाई, 2015 का मास्टर परिपत्र भा.रि.बैं/2015-16/98 बैंविवि.सं.आरईटी.बीसी.24/12.01.001/2015-16 और उसके बाद जारी परिपत्र देखें)।

4. स्वामित्व और नियंत्रण विनियमावली

इस संबंध में निजी क्षेत्र के बैंकों पर लागू मौजूदा प्रावधान, जो कि निजी क्षेत्र के बैंकों द्वारा शेयर निर्गम और मूल्यन पर 21 अप्रैल, 2016 के मास्टर निदेश बैंविवि.पीएसबीडी.सं.95/16.13.100/2015-16 और निजी क्षेत्र के बैंकों में स्वामित्व पर 12 मई 2016 के मास्टर निदेश बैंविवि.पीएसबीडी.सं.97/16.13.100/ 2015-16 में शामिल हैं, वे भुगतान बैंकों पर भी लागू होंगे, जो कि लाइसेंस प्रदान करने वाले दिशानिर्देशों में समाहित मौजूदा विनियमन में किए गए प्रावधानों को छोड़कर होगा।

5. कार्पोरेट अभिशासन

5.1 निदेशक मंडल का गठन और कार्य-कलाप

बैंकिंग कंपनियों पर लागू मौजूदा प्रावधान भुगतान बैंकों पर भी लागू होंगे। विशेष तौर पर परिवर्तनीय संस्थाओं के मामले में, मौजूदा निदेशकों की नियुक्ति के निबंधन और शर्तें उनके वर्तमान कार्य अवधि के पूर्ण होने तक पुराने नियम के अनुसार होंगे।

5.2 बोर्ड की समितियों, प्रबंधन स्तर की समितियों, पारिश्रमिक नीतियों का गठन और कार्य-कलाप

इस संबंध में निजी क्षेत्र के बैंकों पर लागू मौजूदा प्रावधान भुगतान बैंकों पर भी लागू होंगे।

6. बैंकिंग परिचालन

6.1 प्रवेश स्थल (एक्सेस पाइंट) का प्राधिकरण

(i) शुरू के पांच वर्षों के लिए भुगतान बैंकों द्वारा मूर्त प्रवेश स्थल (एक्सेस पाइंट) खोलने की वार्षिक योजना के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन की आवश्यकता होगी। ऐसी प्रथम योजना को व्यवसाय आरम्भ करने से पूर्व भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रस्तुत किया जाएगा। पांच वर्षों की प्रारंभिक स्थिरीकरण अवधि के पश्चात, और समीक्षा के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक पूर्वानुमोदन की अपेक्षा में छूट दे सकता है।

(ii) भुगतान बैंक का कोई कर्मचारी ग्राहकों की शिकायतों को सुनने और एजेंटों के पर्यवेक्षण को संबल देने के लिए जिला स्तर पर ग्राहकों को ज्ञात किसी निश्चित स्थान पर पर्याप्त समय के लिए उपलब्ध रहना चाहिए। इस निश्चित स्थान का उपयोग भुगतान बैंक का बैंकिंग व्यवसाय करने के लिए भी किया जा सकेगा, और इसे ग्रामीण केंद्रों में कम-से-कम 25 मूर्त प्रवेश स्थल (एक्सेस पाइंट) खोलने की अपेक्षा का मूल्यांकन करने के प्रयोजन से मूर्त प्रवेश स्थल (एक्सेस पाइंट) माना जाएगा।

6.2 व्यवसाय प्रतिनिधियों का विनियमन

(i) भुगतान बैंक अपने व्यवसाय भागीदारों के स्वामित्व वाली कंपनियों और अपने स्वयं के समूह वाली कंपनियों सहित सभी अनुमत संस्थाओं को कुछ दूरी बनाए रखने के आधार पर “व्यवसाय प्रतिनिधि” (बीसी) नियुक्त कर सकते हैं। ये कंपनियां “प्रवेश स्थल (एक्सेस पाइंट)” के रूप में कार्यरत अपने कर्मचारियों के प्रबंधन में स्वयं की शाखाएं खोल सकती हैं अथवा “प्रवेश स्थल (एक्सेस पाइंट)” के प्रबंधन के लिए अन्य संस्थाओं/व्यक्तियों को नियुक्त कर सकती हैं, जिनका प्रबंधन उन्हीं के कर्मचारियों द्वारा किया जा सकता है। उक्त मामलों में, विनियामक दृष्टिकोण से “प्रवेश स्थल (एक्सेस पाइंट)” पर किए जाने वाले व्यवसाय और बीसी नेटवर्क के प्रबंधन के लिए शृंखला में शामिल किए गए किसी अन्य मध्यवर्ती पक्षों सहित संगठनात्मक संरचना पर ध्यान दिए बिना शृंखला में शामिल सभी पक्षों के आचरण के लिए संबंधित बैंक उत्तरदायी होगा।

(ii) बचत और चालू खाते खोलने के कार्य को छोड़कर, बीसी को अंतर-परिचालनीयता की अनुमति दी जाएगी।

(iii) बीसी कोई भी ऑफ-लाइन लेनदेन नहीं कर सकते। परिणामस्वरूप, इंटरनेट कनेक्टिविटी न होने पर बीसी कोई लेनदेन नहीं कर सकते।

(iv) भुगतान बैंकों को बीसी की कुछ संख्या/ बीसी के प्रबंधन वाले प्रवेश स्थल (एक्सेस पाइंट) के लिए आधार शाखा खोलने की अपेक्षा से छूट प्राप्त होगी, जैसा कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों को जारी भारतीय रिज़र्व बैंक के दिशानिर्देशों में वर्तमान में निर्धारित है।

6.3 बैंक प्रभार, लॉकर, नामांकन, विकलांग व्यक्तियों को सुविधाएं, इत्यादि

इस संबंध में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों पर लागू मौजूदा प्रावधान भुगतान बैंकों पर भी लागू होंगे।

7. बैंक जमाएं

(i) भारतीय रिज़र्व बैंक के वर्तमान निदेशों में किए गए प्रावधान के अनुसार, भुगतान बैंक केवल बचत और चालू जमाएं स्वीकार कर सकते हैं। लाइसेंस प्रदान करने संबंधी दिशानिर्देशों में किए गए प्रावधान के अनुसार, प्रति ग्राहक समग्र सीमा 100,000 रुपये से अधिक नहीं होगी। तथापि, भारतीय रिज़र्व बैंक को उन भुगतान बैंकों के संबंध में कोई आपत्ति नहीं होगी जो किन्हीं अन्य अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों/ एसएफबी के साथ उस बैंक में ग्राहकों के लिए खोले गए खाते में निर्धारित सीमा से अधिक राशियों को डालने का प्रबंधन करता हो।

(ii) उक्त सीमा ग्राहक जमाओं पर लागू होगी, न कि किसी प्रतिभूति/ बयाना राशि संबंधी जमा पर, जिसे बैंक सामान्य व्यवसाय के दौरान अपने किन्हीं सेवा प्रदाताओं से प्राप्त करता है।

(iii) भारतीय रिज़र्व बैंक और बैंककारी विनियमन अधिनियम के सभी प्रावधान और न्यूनतम जमाशेष, निष्क्रिय खाते, अदावी खातों, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा रखे जाने वाले जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता निधि में ऐसी जमाओं के नियमित आधार पर अंतरण सहित, नामांकन, चेक/ड्राफ्ट, इत्यादि के संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक के निदेश भुगतान बैंकों पर लागू होंगे।

(iv) भुगतान बैंक:

  • को जमा खातों के लिए पासबुक जारी करने की आवश्यकता नहीं है;

  • अनुरोध प्राप्त होने पर प्रभार लेकर अथवा अन्यथा कागज पर खाते का विवरण दे सकते हैं;

  • एसएमएस और/ अथवा इंटरनेट बैंकिंग जैसे बहु-प्रयोक्ता अनुकूल साधनों के माध्यम से खाते संबंधी सूचना दे सकते हैं; और

  • प्रत्येक खाते के लेनदेन के लिए एसएमएस/ई-मेल/मुद्रित प्रमाण के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक पुष्टि प्रदान करें।

8. केवाईसी अपेक्षाएं

(i) भुगतान बैंक अपने विवेकानुसार (अन्य सभी बैंकों की भांति) खाते खोलते समय लिखित हस्ताक्षर न लेने का निर्णय ले सकते हैं और इसके बजाय वे इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणीकरण/ पुष्टि की विधिक वैधता और प्रमाण पर अपना विश्वास जताते हुए बैंकिंग संबंध/ खाता संबंध की शर्तों के ऐसे प्रमाणीकरण/ पुष्टि पर निर्भर कर सकते हैं। तथापि, केंद्रीय केवाईसी रजिस्ट्री पर लागू विनियमावली सहित केवाईसी से संबंधित सभी मौजूदा विनियमावली, और इस संबंध में तत्पश्चात जारी कोई अनुदेश, जैसा कि वाणिज्यिक बैंकों पर लागू है, भुगतान बैंकों पर भी लागू होंगे।

(ii) भुगतान बैंक यह सुनिश्चित करें कि मोबाइल कंपनियों के ग्राहकों सहित प्रत्येक ग्राहक केवाईसी विनियमन का अनुपालन करता है, जिसमें खाता खोलने संबंधी सरलीकृत प्रक्रिया शामिल हो सकती है। यह स्पष्ट किया जाता है कि यदि किसी टेलीकॉम कंपनी, जो कि भुगतान बैंक का प्रवर्तक/ प्रवर्तक समूह संस्था हो, के द्वारा की गई केवाईसी की गुणवत्ता बैंकिंग कंपनी के लिए निर्धारित किए गए अनुसार ही होती है, तो भुगतान बैंक उस टेलीकॉम कंपनी से ग्राहक के केवाईसी ब्योरे प्राप्त कर सकते हैं, बशर्ते कि ग्राहक इसके लिए सहमत हो।

9. विदेशी मुद्रा व्यवसाय

भुगतान बैंक निम्नलिखित कार्य करेंगे:

  • विदेशी मुद्रा विभाग, केंद्रीय कार्यालय द्वारा जारी किए जाने वाले एडी श्रेणी II लाइसेंस से जुड़ी सभी शर्तों का अनुपालन।

  • विदेशी अभिदाय (विनियमन) अधिनियम, 2010 (जैसा कि वाणिज्यिक बैंकों पर लागू है) के प्रावधानों को लागू करना।

10. अन्य बैंकिंग सेवाएं

10.1 मुद्रा वितरण (जिसमें जाली और नकली नोटों का पता लगाना, करेंसी चेस्ट संबंधी सुविधाएं, नोट बदलने की सुविधाएं शामिल होंगी)

भुगतान बैंकों के पास यह विकल्प होगा कि वे भारतीय रिज़र्व बैंक के मानदंड़ों के अनुपालन के अधीन अपनी शाखाओं में कटे-फटे और दोषपूर्ण नोटों को बदल सकते हैं।

10.2 ग्राहक शिक्षा और सुरक्षा

  1. किसी विशेष प्रवेश स्थल (एक्सेस पाइंट) से संबंधित सभी ग्राहक शिकायत के मुद्दों का ऊपर पैरा 6.1 (ii) में उल्लिखित प्रवेश स्थल (एक्सेस पाइंट) पर और जिला स्तर के स्थान दोनों पर निवारण किया जाना चाहिए।

  2. भुगतान बैंकों पर बैंकिंग लोकपाल (बीओ) योजना लागू होगी।

  3. भुगतान बैंकों द्वारा ग्राहक शिकायतों को प्रभावी ढंग से निपटाने और ग्राहकों से उनके संप्रेषण के लिए तैयार की गई प्रणाली, और शिकायत निवारण में विभिन्न स्तरों (प्रवेश स्थल (एक्सेस पाइंट), नियंत्रक कार्यालय (जिला स्तर पर केंद्र), और मुख्यालय) की भूमिका की स्पष्ट सूचना लाइसेंस के लिए आवेदन के साथ भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रेषित की जाए।

  4. भुगतान बैंकों के बोर्ड द्वारा अनुमोदित ग्राहक सेवा नीति में भुगतान बैंकों द्वारा ग्राहक शिकायत के निराकरण की सतत और गहन निगरानी का प्रावधान होना चाहिए।

  5. भारतीय रिज़र्व बैंक प्रत्यक्ष और परोक्ष, दोनों निगरानी प्रणाली के माध्यम से बैंक के शिकायत निवारण प्रणाली का बारीकी से पर्यवेक्षण करेगा।

11. परिचालन, इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग को ऑउटसोर्स करना

  1. इस संबंध में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों पर लागू मौजूदा प्रावधान भुगतान बैंकों पर भी लागू होंगे।

  2. अन्य बैंकों के क्रेडिट कार्ड के माध्यम से पीपीआई जमाशेष डालने की अनुमति होगी।

12. भारतीय लेखांकन मानक का कार्यान्वयन

भुगतान बैंकों के अनुसूचित बैंक बन जाने पर उन पर भारतीय लेखांकन मानक का कार्यान्वयन लागू होगा। उक्त को ध्यान में रखते हुए, यह अनुशंसा की जाती है कि भुगतान बैंक उक्त को अपनाना शुरू करें, ताकि बाद में लगने वाली पारवहन लागत से बचा जा सके।

 
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