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Date: 28/01/2015
बैंकों द्वारा ऋणों के लिए ‘अदेयता (नो ड्यू) प्रमाणपत्र’ समाप्‍त करना

आरबीआई/2014-15/430
विसविवि.केंका.एलबीएस.बीसी.सं.49/02.01.001/2014-15

28 जनवरी 2015

अध्‍यक्ष एवं प्रबंध निदेशक
सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों सहित)

महोदय/महोदया,

बैंकों द्वारा ऋणों के लिए ‘अदेयता (नो ड्यू) प्रमाणपत्र’ समाप्‍त करना

कृपया सेवा क्षेत्र मानदंडों पर दिनांक 8 दिसंबर 2004 का हमारा परिपत्र ग्राआऋवि.एलबीएस (एसएए) बीसी.सं.62/08.01.00/2004-05 देखें। साथ ही, ‘कृषि ऋण प्राप्‍त करने के लिए क्रियाविधियों और प्रक्रियाओं का सरलीकरण’ पर दिनांक 30 अप्रैल 2007 के परिपत्र ग्राआऋवि.पीएलएफएस.बीसी.सं.85/05.04.02/2006-07 के अनुसार बैंकों को सूचित किया गया था कि वे रु. 50,000 तक के लघु ऋण के लिए लघु और सीमांत किसानों, बंटाईदारों और उन जैसे व्‍यक्तियों से ‘अदेयता (कोई बकाया नहीं) प्रमाणपत्र’ प्राप्‍त करने की आवश्‍यकता समाप्‍त कर दें और इसके स्‍थान पर ऋणकर्ता से स्‍व-घोषणापत्र प्राप्‍त करें।

2. दिनांक 02 जुलाई 2012 के परिपत्र ग्राआऋवि.जीएसएसडी.बीसी.सं.1/09.01.01/2012-13 की ओर भी ध्‍यान आकर्षित किया जाता है जिसमें सूचित किया गया था कि यदि सरकार द्वारा प्रायोजित योजना एसजीएसवाई (अब एनआरएलएम) के अंतर्गत ऋण के लिए ऋणकर्ता से आवेदन प्राप्‍त होने की तारीख से 15 दिनों के भीतर सेवा क्षेत्र शाखा ‘अदेयता प्रमाणपत्र’ जारी नहीं करती है तो ऋणकर्ता अपनी ऋण आवश्‍यकताओं के लिए उस ब्‍लाक की किसी भी शाखा से संपर्क करने के लिए स्‍वतंत्र हैं।

3. इस संदर्भ में हमें ऋणकर्ताओं से शिकायतें प्राप्‍त हो रही हैं कि बैंक, विशेषत: ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में ‘अदेयता प्रमाणपत्र’ के बिना ऋण प्रदान करने से इनकार कर रहे हैं। सभी ऋणकर्ताओं को विशेषत: ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में झंझट रहित ऋण सुनिश्चित करने हेतु, एवं बहुविध वित्‍तपोषण से बचने हेतु बैंकों के पास विविध तकनीकी एवं अन्य तरीकों की उपलब्‍धता के मद्देनजर बैंकों को सूचित किया जाता है कि वे शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं सहित, यदि योजना में अन्यथा उल्लेख न हो, सभी प्रकार के ऋणों चाहे उसमें निहित राशि कुछ भी क्यों न हो, के लिए वैयक्तिक ऋणकर्ताओं (एसएचजी और जेएलजी सहित) से ‘अदेयता प्रमाणपत्र’ प्राप्‍त न करें।

4. बैंक कृपया नोट करें कि जहां सरकार प्रायोजित योजनाओं पर सेवा क्षेत्र दृष्टिकोण लागू बना है, वहीं सरकार द्वारा प्रायोजित योजनाओं के अंतर्गत ऋण प्राप्‍त करने के लिए ऋणकर्ता अपने सेवा क्षेत्र की किसी भी बैंक शाखा से संपर्क करने के लिए स्‍वतंत्र है।

5. बैंकों को, ऋण मूल्‍यांकन के एक भाग के रूप में ‘अदेयता प्रमाणपत्र’ से इतर समुचित सावधानी (ड्यू डीलिजेंस) के वैकल्पिक ढांचे का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया जाता है जिसमें अन्‍य बातों के साथ-साथ निम्‍नलिखित में से एक या अधिक समाविष्ट हो सकता है:

  • ऋण सूचना कंपनियों के माध्‍यम से ऋण के पूर्व इतिहास की जांच
  • ऋणकर्ता से स्‍व-घोषणापत्र या शपथ-पत्र
  • सीईआरएसएआई पंजीकरण
  • समकक्ष निगरानी
  • ऋणदाताओं के बीच सूचना का आदान-प्रदान
  • सूचना की जांच पड़ताल (अपने आप अंतिम समय सीमा के साथ अन्‍य उधारकर्ताओं को लिखना)

6. बैंकों को यह भी सूचित किया जाता है कि वे रिज़र्व बैंक द्वारा जारी वर्तमान अनुदेशों के अनुसार सभी ऋण सूचना कंपनियों (सीआईसी) को यथा अपेक्षित ऋण सूचना/डाटा प्रस्‍तुत करें।

भवदीय

(ए. उदगाता)
प्रधान मुख्‍य महाप्रबंधक

 
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