शहरी बैंकिंग

शायद यह भूमिका हमारे कार्यकलापों का सबसे अधिक अघोषित पहलू है, फिर भी यह सबसे महत्वपूर्ण है। इसमें अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों के लिए ऋण उपलब्धता सुनिश्चित करना, देश की वित्तीय मूलभूत सुविधा के निर्माण के लिए डिज़ाइन किए गए संस्थानों की स्थापना करना, वहनीय वित्तीय सेवाओं की पहुंच में विस्तार करना और वित्तीय शिक्षा और साक्षरता को बढ़ावा देना शामिल है।

प्रेस प्रकाशनी


(270 kb )
बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35 ए के अंतर्गत निदेश– दि सिटी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, मुंबई - अवधि का विस्तार

14 अक्तूबर 2021

बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35 ए के अंतर्गत निदेश–
दि सिटी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, मुंबई - अवधि का विस्तार

भारतीय रिज़र्व बैंक ने दिनांक 17 अप्रैल 2018 के निदेश सं. DCBS.CO.BSD-I/D-5/12.22.039/2017-18 के माध्‍यम से 17 अप्रैल 2018 की कारोबार की समाप्ति से दि सिटी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, मुंबई को निदेशाधीन रखा था। इन निदेशों की वैधता को समय-समय पर बढ़ाया गया और आखिरी बार वैधता का समय 16 अक्तूबर 2021 तक बढ़ाया था।

2. जन साधारण के सूचनार्थ एतद्द्वारा सूचित किया जाता है कि बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35 ए की उप धारा (1) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक एतद्द्वारा निदेश देता है कि उक्त निदेश 14 अक्तूबर 2021 के निदेश सं DOR.MON/D-42/12.22.039/2021-22 के अनुसार बैंक पर दिनांक 16 जनवरी 2022 तक लागू रहेंगे तथा ये निदेश समीक्षाधीन रहेंगे।

3. संदर्भाधीन निदेश के अन्य नियम और शर्ते अपरिवर्तित रहेंगी। उपरोक्त वैधता को सूचित करने वाले दिनांक 14 अक्तूबर 2021 के निदेश की एक प्रति बैंक के परिसर में जनता की सूचना के लिए लगाई गई है।

4. भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा उपरोक्त वैधता बढ़ाने और/ या संशोधित करने का यह अर्थ न लगाया जाए कि भारतीय रिज़र्व बैंक, बैंक की वित्तीय स्थिति से संतुष्ट है।

(योगेश दयाल) 
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2021-2022/1049

2021
2020
2019
2018
2017
2016
2015
2014
2013
2012
पुरालेख
Server 214
शीर्ष