मौद्रिक नीति

आर्थिक नीति के अंतिम उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए मौद्रिक नीति केंद्रीय बैंक के नियंत्रण में ब्याज दरों, मुद्रा आपूर्ति और ऋण की उपलब्धता जैसे परिमाणों को विनियमित करने के लिए मौद्रिक साधनों के उपयोग को सूचित करती।

प्रेस प्रकाशनी


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विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य

8 अक्टूबर 2021

विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य

यह वक्तव्य (i) चलनिधि उपायों; (ii) भुगतान और निपटान प्रणाली; (iii) ऋण प्रबंधन; और (iv) वित्तीय समावेशन और ग्राहक सुरक्षा से संबंधित विभिन्न विकासात्मक और विनियामक नीति उपायों को निर्धारित करता है ।

I. चलनिधि उपाय

1. लघु वित्त बैंकों (एसएफबी) के लिए मांग पर विशेष दीर्घावधि रेपो परिचालन (एसएलटीआरओ)

लघु वित्त बैंक (एसएफबी) व्यक्तियों और छोटे व्यवसायों को अंतिम ऋण प्रदान करने में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं। रेपो दर पर 10,000 करोड़ की तीन वर्ष की विशेष दीर्घावधि रेपो परिचालन (एसएलटीआरओ) सुविधा उन्हें मई 2021 में उपलब्ध कराई गई थी ताकि प्रति उधारकर्ता 10 लाख तक के नए ऋण दिये जा सके। यह सुविधा 31 अक्टूबर 2021 तक उपलब्ध कराई गई थी। लघु व्यवसाय इकाइयों, सूक्ष्म और लघु उद्योगों और अन्य असंगठित क्षेत्र की संस्थाओं पर महामारी की सतत असमान प्रभाव को देखते हुए, इस सुविधा को 31 दिसंबर 2021 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा, यह अब यह मांग पर भी उपलब्ध होगा ताकि इन संस्थाओं को समर्थन देना सुनिश्चित किया जा सके।

II. भुगतान और निपटान प्रणाली

2. ऑफलाइन माध्यम से डिजिटल भुगतान समाधान का आरंभ

06 अगस्त 2020 के विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य ने नवीन प्रौद्योगिकी के प्रयोगिक परीक्षण करने के लिए एक योजना की घोषणा की थी जो उन स्थितियों में भी खुदरा डिजिटल भुगतान को सक्षम बनाता है जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी कम हो / उपलब्ध न हो (ऑफ़लाइन मोड)। सितंबर 2020 से जून 2021 की अवधि के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में इस योजना के तहत तीन प्रायोगिक को सफलतापूर्वक संचालित किया गया था, जिसमें 1.16 करोड़ मूल्य के 2.41 लाख की मात्रा को कवर करने वाले छोटे मूल्य के लेनदेन शामिल थे। निष्कर्ष से संकेत मिलता है कि इस तरह के समाधान आरंभ करने की गुंजाइश है, खासकर दूरदराज के इलाकों में। प्रयोगिकों से प्राप्त अनुभव और उत्साहजनक प्रतिक्रिया को देखते हुए, देश भर में ऑफलाइन मोड में खुदरा डिजिटल भुगतान करने के लिए एक रूपरेखा तैयार करने का प्रस्ताव है। विस्तृत दिशा-निर्देश यथासमय जारी किए जाएंगे।

3. आईएमपीएस की लेन-देन की सीमा बढ़ाकर 5 लाख करना

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की तत्काल भुगतान सेवा (आईएमपीएस) एक महत्वपूर्ण भुगतान प्रणाली है जो 24x7 तत्काल घरेलू धन अंतरण की सुविधा प्रदान करती है और इसे इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग ऐप, बैंक शाखाओं, एटीएम, एसएमएस और आईवीआरएस जैसे विभिन्न चैनलों के माध्यम से एक्सेस किया जा सकता है। वर्तमान में एसएमएस और आईवीआरएस को छोड़कर आईएमपीएस में प्रति लेन-देन की सीमा, जनवरी 2014 से प्रभावी, अन्य चैनलों के लिए 2 लाख तक सीमित है। एसएमएस और आईवीआरएस चैनलों के लिए प्रति लेनदेन सीमा 5000 है। आरटीजीएस के अब चौबीसों घंटे परिचालन के साथ, आईएमपीएस के निपटान चक्र में समान वृद्धि हुई है, जिससे क्रेडिट और निपटान जोखिम कम हो गया है। घरेलू भुगतान लेनदेन के प्रोसेसिंग में आईएमपीएस प्रणाली के महत्व को देखते हुए, एसएमएस और आईवीआरएस के अलावा अन्य चैनलों के लिए प्रति लेनदेन सीमा 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख करने का प्रस्ताव है। इससे डिजिटल भुगतान में और वृद्धि होगी और ग्राहकों को 2 लाख से अधिक डिजिटल भुगतान करने के लिए अतिरिक्त सुविधा प्रदान करेगी। इस संबंध में आवश्यक अनुदेश अलग से जारी किए जाएंगे।

4. भुगतान प्रणाली स्पर्श बिन्दुओं (टच पॉइंट्स) की जियो-टैगिंग

देश भर में डिजिटल भुगतान की पहुंच को गहन बनाना वित्तीय समावेशन के लिए एक प्राथमिक क्षेत्र है। स्वीकृति अवसंरचना के प्रसार को बढ़ाने और अतिरिक्त स्पर्श बिंदु बनाने के लिए भुगतान अवसंरचना विकास निधि (पीआईडीएफ) की स्थापना इस दिशा में एक कदम है। देश भर में स्वीकृति अवसंरचना के संतुलित प्रसार को सुनिश्चित करने के लिए, मौजूदा भुगतान स्वीकृति अवसंरचना के स्थान का पता लगाना आवश्यक है। इस संबंध में, निरंतर आधार पर स्थान की जानकारी प्रदान करके जियो-टैगिंग प्रौद्योगिकी, केंद्रित नीति कार्रवाई के लिए अल्प अवसंरचना वाले क्षेत्रों को लक्षित करने में उपयोगी हो सकती है। तद्नुसार, व्यापारियों द्वारा प्रयोग किए जाने वाले भौतिक भुगतान स्वीकृति अवसंरचना, जैसे- बिक्री बिंदु (पीओएस) टर्मिनल, त्वरित प्रतिक्रिया (क्यूआर) कोड आदि की जियो-टैगिंग (भौगोलिक निर्देशांकों को कैप्चर करना - अर्थात लैटीट्यूड और लोंगीट्यूड) के लिए एक ढांचा तैयार करने का प्रस्ताव है। यह स्वीकृति अवसंरचना के बेहतर प्रसार और डिजिटल भुगतान तक व्यापक पहुंच के द्वारा पीआईडीएफ ढांचे का पूरक होगा। आवश्यक निर्देश अलग से जारी किये जाएंगे।

5. वियामक सैंडबॉक्स - नए कोहार्ट के लिए थीम की घोषणा और पहले की थीम के लिए मांग पर आवेदन

रिज़र्व बैंक के विनियामक सैंडबॉक्स (आरएस) ने अब तक तीन कोहार्ट की शुरुआत की है। 'खुदरा भुगतान' पर पहले कोहार्ट से छह संस्थाएं सफलतापूर्वक बाहर हो गई है, जबकि 'सीमा पार भुगतान' पर दूसरे कोहार्ट के तहत आठ संस्थाएं परीक्षण कर रही हैं। 'एमएसएमई उधार' के तीसरे कोहार्ट के लिए आवेदन विंडो वर्तमान में खुली है।

फिनटेक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने की दृष्टि से, यह प्रस्तावित है कि चौथे कोहार्ट का विषय 'वित्तीय धोखाधड़ी की रोकथाम और शमन' होगा। धोखाधड़ी की घटना और पता लगाने के बीच अंतराल को कम करने, धोखाधड़ी सुशासन संरचना को मजबूत करने और धोखाधड़ियों के लिए प्रतिक्रिया समय को कम करने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस कोहार्ट के लिए आवेदन विंडो यथा समय खोली जाएगी।

इसके अलावा, प्राप्त अनुभव और हितधारकों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर, पहले बंद किए गए कोहार्ट के विषयों के लिए 'मांग पर' आवेदन को सुविधाजनक बनाने का प्रस्ताव है। इस उपाय से उद्योग के साथ निरंतर नवाचार और जुड़ाव सुनिश्चित करने की उम्मीद है ताकि तेजी से विकसित हो रहे फिनटेक परिदृश्य से सक्रिय प्रतिक्रिया मिल सके। संशोधित रूपरेखा आज जारी की जाएगी।

III. ऋण-प्रबंधन

6. राज्य सरकारों/ संघ शासित क्षेत्रों के लिए अर्थोपाय अग्रिम (डब्ल्यूएमए) सीमाओं की समीक्षा और ओवरड्राफ्ट (ओडी) सुविधा में छूट

जैसे की सलाहकार समिति (अध्यक्ष: श्री सुधीर श्रीवास्तव) ने राज्य सरकारों/संघ शासित क्षेत्रों के लिए अर्थोपाय अग्रिम (डब्ल्यूएमए) सीमाओं की समीक्षा करने की सिफारिश की थी, राज्यों / संघ शासित क्षेत्रों को महामारी के दौरान उनके द्वारा सामना की जा रही कठिनाइयों से निपटने में मदद करने के लिए रिज़र्व बैंक द्वारा 30 सितंबर 2021 तक कुल 51,560 करोड़ की बढ़ी हुई अंतरिम डब्ल्यूएमए सीमा प्रदान की गई थी। सतत जारी महामारी से संबंधित अनिश्चितताओं को ध्यान में रखते हुए, बढ़ी हुई डब्ल्यूएमए सीमा 31 मार्च 2022 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है।

महामारी से निपटने के लिए शुरू किए गए उदारीकृत उपायों को जारी रखने का भी निर्णय लिया गया है, अर्थात 31 मार्च 2022 तक, एक तिमाही में ओवरड्राफ्ट (ओडी) के दिनों की अधिकतम संख्या को 36 से 50 दिनों तक और ओडी के लगातार दिनों की संख्या को 14 से 21 दिनों तक बढ़ाना। उपरोक्त उपायों से राज्यों/संघ शासित क्षेत्रों को अपने नकदी प्रवाह को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इस संबंध में विवरण अलग से जारी किया जाएगा।

IV. वित्तीय समावेशन और ग्राहक संरक्षण

7. प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र को उधार - बैंकों को एनबीएफसी के माध्यम से आगे उधार देने की अनुमति देना - सुविधा जारी रखना

अर्थव्यवस्था के कुछ प्राथमिकता वाले क्षेत्रों, जो संवृद्धि और रोजगार में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं,को ऋण प्रवाह बढ़ाने के लिए और इन क्षेत्रों को ऋण प्रदान करने में एनबीएफसी द्वारा निभाई गई भूमिका को पहचानते हुए , पंजीकृत एनबीएफसी (एमएफआई के अलावा) को कृषि (निवेश ऋण), सूक्ष्म और लघु उद्यमों और आवास (एक बढ़ी हुई सीमा के साथ)को ऋण को कुछ सीमा तक प्राथमिकता वाले क्षेत्र को उधार देने के रूप में वर्गीकृत करने की अनुमति अगस्त 2019 में दी गई थी, जिसे अंतिम बार 07 अप्रैल 2021 को बढ़ाया गया था और यह 30 सितंबर 2021 तक वैध थी।

देश के कम सेवा प्राप्त / सेवा नहीं प्राप्त करने वाले क्षेत्रों को ऋण वितरण में देखे गए बढ़े संकर्षण को ध्यान में रखते हुए, इस सुविधा को 31 मार्च 2022 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में एक परिपत्र शीघ्र ही जारी किया जाएगा।

8. एनबीएफसी के लिए आंतरिक लोकपाल

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ने एमएसएमई, सूक्ष्म वित्त, आवास, वाहन वित्त जैसे विशिष्ट क्षेत्रों को वित्त प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और अंतिम वित्तीय मध्यस्थता के माध्यम से बैंकों के प्रयासों को प्रभावी ढंग से पूरा किया है। कई एनबीएफसी ने अपने वित्तीय उत्पादों और सेवाओं को ग्राहकों के व्यापक समूह तक पहुंचाने में सहायता के लिए सफलतापूर्वक डिजिटल मोड अपनाया है।

देश भर में एनबीएफसी के बढ़ते महत्व, शक्ति और पहुंच के कारण शिकायत निवारण प्रथाओं सहित बेहतर ग्राहक अनुभव होना आवश्यक हो गया है। पिछले कुछ वर्षों में, आरबीआई ने एनबीएफसी के ग्राहकों के लिए उपभोक्ता संरक्षण और शिकायत निवारण के लिए विभिन्न उपाय शुरू किए हैं, जिसमें एनबीएफसी को शिकायत निवारण के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने (2013) और एनबीएफसी के लिए लोकपाल योजना शुरू करने (2018) की आवश्यकता शामिल है।

एनबीएफसी के आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र को और मजबूत करने की दृष्टि से, उच्च ग्राहक इंटरफेस वाली एनबीएफसी की कुछ श्रेणियों के लिए आंतरिक लोकपाल योजना (आईओएस) शुरू करने का निर्णय लिया गया है। एनबीएफसी के लिए आईओएस, जो बैंकों और गैर-बैंक भुगतान प्रणाली प्रतिभागियों के लिए आईओएस की तर्ज पर होगा, के लिए ग्राहकों की शिकायतों, जो सेवा में कमी की प्रकृति का और एनबीएफसी द्वारा आंशिक या पूर्ण रूप से खारिज कर दिये गए हों, की जांच करने हेतु कुछ चुनिंदा एनबीएफ़सी को अपने आंतरिक शिकायत निवारण तंत्र के शीर्ष पर एक आंतरिक लोकपाल (आईओ) नियुक्त करने की आवश्यकता होगी। । इस संबंध में विस्तृत निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे।

(योगेश दयाल) 
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2021-2022/1003

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