शहरी बैंकिंग

शायद यह भूमिका हमारे कार्यकलापों का सबसे अधिक अघोषित पहलू है, फिर भी यह सबसे महत्वपूर्ण है। इसमें अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों के लिए ऋण उपलब्धता सुनिश्चित करना, देश की वित्तीय मूलभूत सुविधा के निर्माण के लिए डिज़ाइन किए गए संस्थानों की स्थापना करना, वहनीय वित्तीय सेवाओं की पहुंच में विस्तार करना और वित्तीय शिक्षा और साक्षरता को बढ़ावा देना शामिल है।

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बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (एएसीएस) की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत निदेश – हिंदु को-ऑपरेटिव बैंक लि., पठानकोट, पंजाब – अवधि का विस्तार

25 सितंबर 2021

बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (एएसीएस) की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत
निदेश – हिंदु को-ऑपरेटिव बैंक लि., पठानकोट, पंजाब – अवधि का विस्तार

भारतीय रिज़र्व बैंक ने लोकहित में बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 (एएसीएस) की धारा 56 के साथ पठित धारा 35 (ए) की उपधारा (1) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए हिंदु को-ऑपरेटिव बैंक लि., पठानकोट, पंजाब को 25 मार्च 2019 को कारोबार की समाप्ति से निदेश जारी किए थे। ये निदेश समय-समय पर संशोधित किए गए, जिसकी वैधता पिछली बार 24 सितंबर 2021 तक बढ़ाई गई थी। ये निदेश अगले एक माह के लिए अर्थात 25 सितंबर 2021 से 24 अक्टूबर 2021 तक बैंक पर लागू रहेंगे तथा ये समीक्षाधीन रहेंगे। दिनांक 24 सितंबर 2021 के निदेशों की एक प्रति हितबद्ध आम जनता के अवलोकनार्थ बैंक के परिसर में प्रदर्शित की गई है। भारतीय रिज़र्व बैंक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इन निदेशों में संशोधन किए जाने पर विचार कर सकता है। भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी निदेशों का यह अर्थ नहीं लगाया जाना चाहिए कि इस बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द किया गया है। बैंक की वित्तीय स्थिति में जब तक सुधार नहीं हो जाता तब तक बैंक, प्रतिबंधों के अधीन बैंकिंग कारोबार जारी रखेगा।

(योगेश दयाल) 
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2021-2022/931

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