मौद्रिक नीति

आर्थिक नीति के अंतिम उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए मौद्रिक नीति केंद्रीय बैंक के नियंत्रण में ब्याज दरों, मुद्रा आपूर्ति और ऋण की उपलब्धता जैसे परिमाणों को विनियमित करने के लिए मौद्रिक साधनों के उपयोग को सूचित करती।

प्रेस प्रकाशनी


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विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य

7 अप्रैल 2021

विकासात्मक और विनियामक नीतियों पर वक्तव्य

यह वक्तव्य (i) चलनिधि प्रबंधन और लक्षित क्षेत्रों की सहायता; (ii) विनियमन और पर्यवेक्षण; (iii) ऋण प्रबंधन; (iv) भुगतान और निपटान प्रणाली; (v) वित्तीय समावेशन; और (vi) बाह्य वाणिज्यिक उधार संबंधी विभिन्न विकासात्मक एवं विनियामक नीति उपायों को निर्धारित करता है

I. चलनिधि संबंधी उपाय

1. टीएलटीआरओ ऑन टैप योजना - समय सीमा का विस्तार

ऐसे विशिष्ट क्षेत्रों में गतिविधियों की बहाली के लिए चलनिधि के उपायों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने की दृष्टि से, जिनके साथ बैकवर्ड और फारवर्ड दोनों तरह के संपर्क जुड़े हुए हैं और जिनका संवृद्धि पर गुणात्मक प्रभाव पड़ता है, आरबीआई ने 9 अक्टूबर, 2020 को टीएलटीआरओ ऑन टैप योजना की घोषणा की थी, जो 31 मार्च, 2021 तक उपलब्ध थी। 21 अक्टूबर, 2020 को इस योजना के तहत घोषित पांच क्षेत्रों के अलावा, कामत समिति द्वारा चिन्हित किए गए 26 दबाव वाले क्षेत्रों को 4 दिसंबर, 2020 को और एनबीएफसी के लिए बैंक ऋण को 5 फरवरी, 2021 को टैप टीएलआरओ के तहत पात्र क्षेत्रों के दायरे में लाया गया था। योजना के अंतर्गत बैंकों द्वारा ली गई चलनिधि को इस क्षेत्र में संस्थाओं द्वारा जारी किए गए कॉर्पोरेट बॉन्ड, वाणिज्यिक पत्र और गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर में उपयोग किया जाना है; इसका उपयोग इन क्षेत्रों में बैंक ऋण और अग्रिमों को बढ़ाने के लिए भी किया जा सकता है। इस सुविधा के तहत बैंकों द्वारा किए गए निवेश को एचटीएम पोर्टफोलियो में शामिल किए गए कुल निवेश के 25 प्रतिशत से ऊपर भी परिपक्वता तक धारित(एचटीएम) के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। इस सुविधा के तहत सभी जोखिमों को बड़े जोखिम फ्रेमवर्क (एलईएफ) के तहत गणना से छूट दी गई है। इसकी समीक्षा की गई और अब ऑन टैप योजना पर टीएलटीआरओ को छह महीने की अवधि तक अर्थात् 30 सितंबर, 2021 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

2. अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाओं के लिए चलनिधि सुविधा

कोविड-19 महामारी के बाद वास्तविक अर्थव्यवस्था में ऋण के निरंतर प्रवाह का समर्थन करने के लिए अप्रैल-अगस्त 2020 के दौरान सभी अखिल भारत वित्तीय संस्थानों (एआईएफआई) - राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड); भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी); राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी); और एक्जिम बैंक को कुल 75,000 करोड़ की विशेष पुनर्वित्त सुविधा प्रदान की गई । ये सुविधाएं एक वर्ष की अवधि के लिए उपलब्ध थीं। नाबार्ड, सिडबी और एनएचबी अप्रैल-मई 2020 के दौरान उन्हें दी गई सुविधाओं को चुकाएंगे। अभी भी सुषुप्त अवस्था में पड़ी संवृद्धि के आवेगों के पोषण के नीतिगत उद्देश्य के अनुरूप, वर्ष 2021-22 में नये उधार के तहत एआईएफआई को 50,000 करोड़ की नई मदद का निर्णय लिया गया है। तदनुसार, नाबार्ड को कृषि और संबद्ध गतिविधियों, ग्रामीण गैर-कृषि क्षेत्र और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों-माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं(एनबीएफसी-एमएफ़आई) को सहायता प्रदान करने के लिए एक वर्ष की अवधि के लिए 25,000 करोड़ की एक विशेष चलनिधि सुविधा (एसएलएफ) प्रदान की जाएगी । आवास क्षेत्र को संबल प्रदान करने के लिए एनएचबी को एक वर्ष के लिए 10,000 करोड़ का एसएलएफ प्रदान किया जाएगा । सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की वित्तपोषण आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए सिडबी को इस सुविधा के तहत एक वर्ष तक की अवधि के लिए 15,000 करोड़ मंजूर किए जाएंगे। ये तीनों सुविधाएं प्रचलित नीति रेपो दर पर उपलब्ध होंगी।

II. विनियमन और पर्यवेक्षण

3. भुगतान बैंकों के लिए दिन के अंत में प्रति ग्राहक 1 लाख से 2 लाख तक अधिकतम शेष की सीमा में वृद्धि

27 नवंबर, 2014 को जारी की गई "भुगतान बैंकों के लिए लाइसेंसीकरण संबंधी दिशानिर्देश" के तहत भुगतान बैंक प्रत्येक व्यक्तिगत ग्राहक को 1 लाख का अधिकतम शेष रखने की अनुमति देता है। भुगतान बैंकों के प्रदर्शन की समीक्षा और वित्तीय समावेशन के लिए अपने प्रयासों को प्रोत्साहित करने और एमएसएमई, छोटे कारोबारियों और व्यापारियों सहित अपने ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने की उनकी क्षमता का विस्तार करने के लिए यह ऋण सीमा दिन के अंत में प्रति व्यक्तिगत ग्राहक द्वारा अधिकतम शेष 1 लाख से बढ़ाकर 2 लाख करने का निर्णय लिया गया है। । इस संबंध में एक परिपत्र अलग से जारी किया जाएगा।

4. आस्ति पुनर्निर्माण कंपनियाँ - समिति का गठन

2002 में वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्रचना एवं प्रतिभूति हित का प्रवर्तन (SARFAESI) अधिनियम के पारित होने के बाद, इस क्षेत्र के विकास में गति लाने और एआरसी की कार्यप्रणाली को सुचारु रूप से चलाने के लिए 2003 में आस्ति पुनर्निर्माण कंपनियों (एआरसी) के लिए नियामक दिशानिर्देश जारी किए गए थे। तब से, यद्यपि एआरसी संख्या और आकार में बड़े हो गए हैं, फिर भी दबावग्रस्त आस्तियों को हल करने की उनकी क्षमता अभी तक पूरी तरह से महसूस नहीं की गई है। इसलिए, वित्तीय क्षेत्र के पारिस्थितिक तंत्र में एआरसी के कामकाज की व्यापक समीक्षा करने के लिए एक समिति का गठन करने का प्रस्ताव किया गया है जो वित्तीय संस्थाओं की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ऐसी संस्थाओं को सक्षम बनाने में उपयुक्त उपायों की सिफारिश करेगी। समिति के गठन और उसके संदर्भ की शर्तों का विवरण अलग से घोषित किया जाएगा।

5. एनबीएफसी के माध्यम से बैंकों को ऋण देने की अनुमति देना

निर्यात और रोजगार के मामले में आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले क्षेत्रों के निचले स्तर पर ऋण प्रदान करने में एनबीएफसी द्वारा निभाई गई भूमिका को मान्यता देना और एनबीएफसी की चलनिधि की स्थिति को बढ़ाने के उद्देश्य से अगस्त 2019 में निर्णय लिया गया था कि बैंकों को 31 मार्च 2020 तक कृषि/एमएसएमई/आवास के लिए ऋण प्रदान करने के लिए बैंक के कुल पीएसएल के 5 प्रतिशत तक प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण (पीएसएल) के रूप में पंजीकृत एनबीएफसी (एमएफआई के अलावा) को उधार देने की अनुमति दी जाए। इस छूट को बाद में 31 मार्च, 2021 तक बढ़ाया गया था। दिसंबर 2020 तक निर्दिष्ट प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्रों को ऋण देने के लिए बैंकों द्वारा एनबीएफसी को लगभग 37,000 करोड़ की राशि उधार दी गई है। तेजी से आर्थिक सुधार में सहायता करने के लिए इन क्षेत्रों में ऋण की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बैंकों द्वारा एनबीएफसी को ऋण देने के लिए पीएसएल वर्गीकरण का विस्तार करने का निर्णय लिया गया है, जो उपर्युक्त क्षेत्रों को छह महीने तक अर्थात् 30 सितंबर, 2021 तक ऋण देगा।

6. प्राथमिकता क्षेत्र ऋण (पीएसएल) दिशानिर्देश- ई-एनडब्ल्यूआर/एनडब्ल्यूआर के एवज़ में ऋण सीमा में वृद्धि

कृषि उपज की गिरवी/दृष्टिबंधन के एवज़ में वैयक्तिक किसानों को कृषि ऋण के लिए प्रोत्साहित करने और माल-गोदाम विकास एवं विनियामक प्राधिकरण (डब्ल्यूडीआरए) द्वारा पंजीकृत और विनियमित गोदामों द्वारा जारी की गई परक्राम्य माल-गोदाम रसीद (एनडब्ल्यूआर)/इलेक्ट्रॉनिक- एनडब्ल्यूआर(ई-एनडब्ल्यूआर) की अंतर्निहित सुरक्षा का लाभ उठाने के उद्देश्य से, डब्ल्यूडीआरए द्वारा पंजीकृत तथा विनियमित माल-गोदामों द्वारा जारी एनडब्ल्यूआर/ई-एनडब्ल्यूआर द्वारा समर्थित कृषि उपज की गिरवी/दृष्टिबंधन के एवज़ में प्रति उधारकर्ता की ऋण सीमा को बढ़ाकर 50 लाख से 75 लाख तक करने का निर्णय लिया गया है। अन्य माल-गोदाम रसीदों द्वारा समर्थित प्राथमिकता क्षेत्र ऋण की सीमा 50 लाख प्रति उधारकर्ता ही बनी रहेगी। इस संबंध में परिपत्र अलग से जारी किया जाएगा।

III. कर्ज प्रबंधन

7. राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अर्थोपाय अग्रिम (डबल्यूएमए) की सीमा की समीक्षा

राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अर्थोपाय अग्रिम (डबल्यूएमए) की सीमा की समीक्षा तथा इससे संबंधित अन्य मामलों की जांच के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा अगस्त 2019 में एक सलाहकार समिति (अध्यक्ष : श्री सुधीर श्रीवास्तव) का गठन किया गया था। समिति ने सभी राज्यों के लिए वर्तमान सीमा 32,225 करोड़ रुपये (फरवरी 2016 में निर्धारित) को संशोधित करते हुए इसकी तुलना में इसे समग्र रूप से 47,010 करोड़ रुपये करने की सिफारिश की है, जिससे लगभग 46% की वृद्धि दर्ज होती है। समिति ने बढ़ी हुई अंतरिम अर्थोपाय (डब्ल्यूएमए) सीमा 51,560 करोड़ (पिछले वित्त वर्ष के दौरान रिज़र्व बैंक द्वारा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को महामारी के दौरान आने वाली कठिनाइयों से उबरने में मदद करने के लिए वर्तमान सीमा में 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी) को आगामी 6 माह यथा, 01 अप्रैल 2021 से 30 सितंबर, 2021 तक जारी रखने की भी सिफारिश की है। रिज़र्व बैंक ने दोनों सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है।

IV. वित्तीय समावेशन

8. वित्तीय समावेशन सूचकांक

वित्तीय समावेशन को दुनिया भर में समावेशी और दीर्घकालिक विकास प्राप्त करने के लिए एक प्रमुख संबल के रूप में देखा गया है। यह सरकार, रिज़र्व बैंक और अन्य नियामकों के लिए एक बल दिए जाने वाला क्षेत्र रहा है, जिसमें कई कदम उठाए गए हैं और पिछले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है । देश में वित्तीय समावेशन की सीमा को मापने के लिए, रिज़र्व बैंक एक "वित्तीय समावेशन सूचकांक" (एफआई सूचकांक) का निर्माण करेगा और समय-समय पर प्रकाशित करेगा। एफआई सूचकांक कई मापदंडों पर आधारित होगा और यह देश में वित्तीय समावेशन के व्यापक और मजबूत होने को प्रतिबिंबित करेगा। प्रथमतः, एफआई सूचकांक पिछले मार्च को समाप्त वित्तीय वर्ष के लिए जुलाई में वार्षिक रूप से प्रकाशित किया जाएगा ।

V. भुगतान प्रणाली

9. केन्द्रीयकृत भुगतान प्रणाली (सीपीएस), यथा – आरटीजीएस एवं एनईएफटी – बैंकों के अतिरिक्त अन्य संस्थाओं के लिए सदस्यता

आरबीआई द्वारा संचालित केंद्रीकृत भुगतान प्रणाली (सीपीएफ) - आरटीजीएस और एनईएफटी की सदस्यता कुछ अपवादों जैसे- समाशोधन निगमों और चुनिंदा विकास वित्त संस्थाओं जैसी विशेष संस्थाओं, के अतिरिक्त, अब तक बैंकों तक सीमित है। पिछले कुछ वर्षों में, भुगतान क्षेत्र (जैसे प्रीपेड भुगतान साधन (पीपीआई) जारीकर्ता, कार्ड नेटवर्क, व्हाइट लेबल एटीएम (डब्ल्यूएलए) ऑपरेटरों, ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम (टीआरईडीएस)प्लेटफार्मों) में गैर-बैंकिंग संस्थाओं की भूमिका के महत्व और मात्रा में वृद्धि हुई है, क्योंकि उन्होंने प्रौद्योगिकी का लाभ उठाकर और उपयोगकर्ताओं को कस्टमाइज़्ड समाधान प्रदान करके नव परिवर्तन किए हैं। इस प्रवृत्ति को सुदृढ़ करने और भुगतान प्रणालियों में गैर-बैंकों की भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए, चरणबद्ध तरीके से, रिज़र्व बैंक द्वारा विनियमित भुगतान प्रणाली ऑपरेटरों को सीपीएस में सीधी सदस्यता लेने में सक्षम बनाने का प्रस्ताव है । इस सुविधा से वित्तीय प्रणाली में निपटान संबंधी जोखिम को कम करने और सभी उपयोगकर्ता खंडों तक डिजिटल वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की उम्मीद है । हालांकि ये संस्थाएं इन सीपीएस में अपने लेन-देन के निपटान की सुविधा के लिए रिज़र्व बैंक से किसी भी चलनिधि सुविधा के लिए पात्र नहीं होंगी । आवश्यक निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे ।

10. प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (पीपीआई) की अंतरसंचालनीयता (इंटरऑपरेबिलिटी) और खाते की सीमा में 2 लाख वृद्धि

भुगतान साधनों (जैसे कार्ड, वॉलेट आदि) के इष्टतम उपयोग को बढ़ावा देने के लिए, और दुर्लभ स्वीकृत इन्फ्रास्ट्रक्चर (जैसे पीओएस उपकरणों, एटीएम, क्यूआर कोड, बिल-भुगतान स्पर्श बिंदुओं आदि) की बाधा को देखते हुए, भारतीय रिज़र्व बैंक जारीकर्ता और प्राप्तकर्ता संस्थाओं जैसे, बैंकों या गैर-बैंकों के बीच अंतरसंचालनीयता के लाभों पर जोर दे रहा है । पीपीआई जारी करने और उसके संचालन पर 11 अक्टूबर, 2017 को जारी मास्टर निदेश में बैंकों और गैर-बैंकों द्वारा जारी पीपीआई के बीच अंतरसंचालनीयता के चरणबद्ध कार्यान्वयन के लिए एक रूपरेखा तैयार की गई थी। इसके बाद, अक्टूबर 2018 में जारी दिशा-निर्देशों ने स्वैच्छिक आधार पर अंतरसंचालनीयता को सक्षम किया, जहां पीपीआई पूर्ण-केवाईसी वाले थे (वे सभी अपने ग्राहक को जानिए आवश्यकताओं को पूरा करते थे)। दो साल बीत जाने के बावजूद, पूर्ण-केवाईसी पीपीआई की ओर जाना और इसलिए अंतरसंचालनीयता, अर्थपूर्ण नहीं है। इसलिए, पूर्ण केवाईसी पीपीआई के लिए और सभी स्वीकृत इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए अंतरसंचालनीयता को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव है। पीपीआई के माइग्रेशन को पूर्ण केवाईसी करने को प्रोत्साहित करने के लिए, ऐसे पीपीआई में बकाया शेष की सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने का प्रस्ताव है। इसके लिए अलग से आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे।

11. गैर-बैंकों द्वारा जारी पूर्ण-केवाईसी वाले पीपीआई से नकदी निकासी की अनुमति

वर्तमान में, बैंकों द्वारा जारी केवल पूर्ण केवाईसी वाले पीपीआई के लिए नकदी निकासी की अनुमति है और यह सुविधा एटीएम और पीओएस टर्मिनल के माध्यम से उपलब्ध है। इस तरह के पीपीआई धारकों जिनको यह सुविधा दी गई है कि वे आवश्यकतानुसार नकदी आहरित कर सकते हैं, उनको नकदी रखने के लिए कम प्रोत्साहित किया जाता है जिसके फलस्वरूप उनके द्वारा डिजिटल लेन-देन की संभावना अधिक है । विश्वास को बढ़ाने के उपाय के रूप में, गैर-बैंक पीपीआई जारीकर्ताओं के पूर्ण केवाईसी वाले पीपीआई के लिए भी एक सीमा के अधीन नकदी निकासी की सुविधा की अनुमति देने का प्रस्ताव है। यह उपाय, अंतरसंचालनीयता के लिए मैंडेट के साथ मिलकर, पूर्ण-केवाईसी पीपीआई में माइग्रेशन को बढ़ावा देगा और टीयर III से VI केंद्रों में स्वीकृत इन्फ्रास्ट्रक्चर का भी पूरक होगा । इसके लिए अलग से आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे।

VI. बाह्य वाणिज्यिक उधार

12. सावधि जमाराशियों में बाह्य वाणिज्यिक उधार (ईसीबी) आय की पार्किंग की अवधि में छूट

मौजूदा ईसीबी फ्रेमवर्क के तहत, ईसीबी उधारकर्ताओं को भारत में एडी श्रेणी-1 बैंकों के साथ सावधि जमाराशियों में ईसीबी आय को अधिकतम 12 महीने की अवधि के लिए रखने की अनुमति है। कोविड-19 महामारी प्रेरित लॉकडाउन और प्रतिबंधों के कारण पहले से आहरित ईसीबी का उपयोग करने में उधारकर्ताओं को होने वाली कठिनाई को देखते हुए, राहत प्रदान करने की दृष्टि से उपरोक्त व्यवस्था में एक बार के उपाय के रूप में ही छूट देने का निर्णय लिया गया है । तदनुसार, 1 मार्च, 2020 को या उससे पहले निकाली गई अप्रयुक्त ईसीबी आय को भारत में एडी श्रेणी-1 बैंकों के साथ 1 मार्च, 2022 तक उत्तरव्यापी प्रभाव से सावधि जमाराशियों में पार्क किया जा सकता है। इस संबंध में दिशा-निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे।

(योगेश दयाल) 
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2021-2022/17

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