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शहरी बैंकिंग

शायद यह भूमिका हमारे कार्यकलापों का सबसे अधिक अघोषित पहलू है, फिर भी यह सबसे महत्वपूर्ण है। इसमें अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों के लिए ऋण उपलब्धता सुनिश्चित करना, देश की वित्तीय मूलभूत सुविधा के निर्माण के लिए डिज़ाइन किए गए संस्थानों की स्थापना करना, वहनीय वित्तीय सेवाओं की पहुंच में विस्तार करना और वित्तीय शिक्षा और साक्षरता को बढ़ावा देना शामिल है।

प्रेस प्रकाशनी


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बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के अंतर्गत निदेश – दी सिटी को-ओपरेटीव बैंक लि., मुंबई, महाराष्ट्र - अवधि का विस्तार

15 जनवरी 2021

बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए के
अंतर्गत निदेश – दी सिटी को-ओपरेटीव बैंक लि., मुंबई, महाराष्ट्र - अवधि का विस्तार

दी सिटी को-ओपरेटीव बैंक लि., मुंबई, महाराष्ट्र को दिनांक 17 अप्रैल 2018 के निदेश सं. DCBS.CO.BSD-1/D-5/12.22.039/2017-18 के माध्‍यम से 17 अप्रैल 2018 की कारोबार समाप्ति से छह महीनों के लिए निदेशाधीन रखा गया था। निदेशों की वैधता को समय-समय पर बढ़ाया गया और अंतिम बार इसे 16 जनवरी 2021 तक बढ़ाया गया था ।

2. जन साधारण के सूचनार्थ एतदद्वारा सूचित किया जाता है कि भारतीय रिज़र्व बैंक, बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 56 के साथ पठित धारा 35ए की उपधारा (1) में निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह निदेश देता है कि दिनांक 13 जनवरी 2021 के निदेश सं. DOR.CO.AID.No.D-52/12.22.039/2020-21 द्वारा उक्त बैंक पर यह निदेश 16 जुलाई 2021 तक लागू रहेगा तथा ये निदेश समीक्षाधीन रहेंगे।

3. संदर्भाधीन निदेश के अन्य नियम और शर्ते अपरिवर्तित रहेंगी। उपरोक्त वैधता को सूचित करने वाले दिनांक 13 जनवरी 2021 के निदेश की एक प्रति बैंक के परिसर में जनता की सूचना के लिए लगाई गई है।

4. भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा उपरोक्त वैधता बढ़ाने और / या संशोधित करने का यह अर्थ न लगाया जाए कि भारतीय रिज़र्व बैंक, बैंक की वित्तीय स्थिति से संतुष्ट है।

(योगेश दयाल) 
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2020-2021/952

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