वित्तीय समावेशन और विकास

यह कार्य वित्तीय समावेशन, वित्तीय शिक्षण को बढ़ावा देने और ग्रामीण तथा एमएसएमई क्षेत्र सहित अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों के लिए ऋण उपलब्ध कराने पर नवीकृत राष्ट्रीय ध्यानकेंद्रण का सार संक्षेप में प्रस्तुत करता है।

प्रेस प्रकाशनी


सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों पर विशेषज्ञ समिति

18 मार्च 2019

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों पर विशेषज्ञ समिति

आपको विदित होगा कि रिज़र्व बैंक ने क्षेत्र के संरचनात्मक बाधाओं और कार्यनिष्पादन को प्रभावित करने वाले कारकों को समझने के लिए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों पर एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया। समिति के गठन और कार्य क्षेत्र के बारे में विवरण https://www.rbi.org.in/hindi/Scripts/PressReleases.aspx?Id=37553&Mode=0 उपलब्ध है।

समिति इसके विकास के लिए कारणों की पहचान करने और दीर्घकालिक समाधानों की पहचान करने के लिए क्षेत्र की एक व्यापक समीक्षा कर रही है। इसलिए, समिति ने निम्नलिखित पहलुओं पर जनता से बड़े पैमाने पर सुझाव आमंत्रित करने का निर्णय किया है:

व्यक्ति / संस्था का नाम:

ईमेल आईडी :

क्रम संख्या सुझाव
1 निवेश / टर्नओवर आधारित मानदंडों की वर्तमान प्रणाली के संदर्भ में एमएसएमई के वर्गीकरण / पहचान के लिए एमएसएमई की परिभाषा का सुझाव देना।
   
2 क्या जिला औद्योगिक केंद्र (डीआईसी) ने अपेक्षित उद्देश्य को पूरा किया हैं ? डीआईसी की भूमिका में सुधार के लिए सुझाव।
   
3 एमएसएमई समूहों के विकास और वृद्धि को प्रभावित करने वाली संरचनात्मक कमी / समस्याएं क्या हैं?
   
4 उद्यमियों की क्षमता निर्माण में संरचनात्मक कमी का समाधान करने के लिए सुझाव।
   
5 क्या यहां बिल में छूट की सुविधा अर्थात टीआरइडीएस बारे में जागरूकता है? टीआरइडीएस के माध्यम से ऑनबोर्डिंग और वित्त तक पहुँचने में सुधार के सुझाव।
   
6 एमएसएमई के लिए क्रेडिट रेटिंग तंत्र में सुधार के सुझाव ।
   
7 अन्य कोई विशिष्ट सुझाव

सुझाव और टिप्पणियां 28 मार्च 2019 तक मुख्य महाप्रबंधक, भारतीय रिज़र्व बैंक, वित्तीय समावेशन और विकास विभाग, केंद्रीय कार्यालय, 10 वीं मंजिल, फोर्ट, मुंबई-400001 को भेजी जा सकती हैं या ई-मेल किया जा सकता है।

अनिरुद्ध डी. जाधव
सहायक प्रबंधक

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