बैंकिंग प्रणाली का विनियामक

बैंक राष्‍ट्रीय वित्‍तीय प्रणाली की नींव होते हैं। बैंकिंग प्रणाली की सुरक्षा एवं सुदृढता को सुनिश्चित करने और वित्‍तीय स्थिरता को बनाए रखने तथा इस प्रणाली के प्रति जनता में विश्‍वास जगाने में केंद्रीय बैंक महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा करता है।

अधिसूचनाएं


वृहत् एक्सपोजर ढांचा (एलईएफ़)

आरबीआई/2018-19/156
बैंविवि.सं.बीपी.बीसी.31/21.01.003/2018-19

1 अप्रैल 2019

सभी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक
(क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर)

महोदया /महोदय

वृहत् एक्सपोजर ढांचा (एलईएफ़)

कृपया उक्त विषय पर दिनांक 01 दिसंबर 2016 का परिपत्र बैंविवि.सं.बीपी.बीसी.43/21.01.003/2016-17 देखें। हितधारकों से प्राप्त अभ्यावेदनों पर समुचित विचार करने के बाद, निम्नलिखित निर्णय लिए गए हैं:

  1. केंद्रीकृत रूप से समाशोधित न होने वाले डेरिवेटिव एक्सपोजर 01 अप्रैल 2020 तक एक्सपोजर सीमा के दायरे से बाहर रहेंगे। तथापि बैंक इन एक्सपोजर की गणना अलग से करें और तिमाही आधार पर बैंकिंग विनियमन विभाग को भेजें।

  2. एलईएफ़ के तहत एक्सपोजर सीमा की गणना के उद्देश्य से, किसी विदेशी वैश्विक प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण बैंक (जी-एसआईबी) की भारतीय शाखा को किसी अन्य भारतीय बैंक की तरह माना जाएगा और तदनुसार यह भारत में अन्य गैर- जीएसआईबी पर इसकी टियर I पूंजी के 25% तक एक्सपोजर ले सकती है।

  3. किसी विदेशी जी-एसआईबी की भारतीय शाखा की इसके मुख्य कार्यालय के साथ अंतरबैंक एक्सपोजर सीमा भारत में इसकी टियर I पूंजी के 20% तक होगा।

  4. एलईएफ़ के प्रयोजन से पात्र पूंजी आधार, पिछले लेखापरीक्षित तुलन पत्र के अनुसार टियर I पूंजी की प्रभावी राशि होगी, जो दिनांक 1 जुलाई 2015 के बासल III – पूंजी संबंधी विनियम पर मास्टर परिपत्र (समय-समय पर यथासंशोधित) में पारिभाषित मानदंड को पूरा करती हो। तथापि, तुलन पत्र प्रकाशित करने की तिथि के बाद डाली गई पूंजी को भी वृहत एक्सपोजर ढांचे के उद्देश्य से गणना में लिया जा सकता है। बैंक पूंजी संवर्द्धन पूरा होने पर बाह्य लेखा परीक्षक का प्रमाणपत्र प्राप्त करें और पूंजी निधि में वृद्धि को गणना में शामिल करने से पहले इसे भारतीय रिज़र्व बैंक (बैंकिंग पर्यवेक्षण विभाग) को प्रस्तुत करें।

  5. भारतीय बैंकों के लिए वर्ष के दौरान उपचित लाभ भी, जो दिनांक 1 जुलाई 2015 के बासल III – पूंजी संबंधी विनियम पर मास्टर परिपत्र (समय-समय पर यथासंशोधित) के पैरा 4.2.3.1 (vii) में निहित प्रावधानों के अधीन है, वृहत एक्सपोजर ढांचे के उद्देश्य से टियर I पूंजी के रूप में माना जाएगा।

  6. अन्य बैंकों के साथ या अपने मुख्य कार्यालयों के साथ निर्दिष्ट अंतरबैंक सीमाओं का उल्लंघन कर रहे बैंकों को उनका एक्सपोजर सीमा के भीतर लाने के लिए कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।

भवदीय,

(सौरभ सिन्हा)
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक

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