विदेशी मुद्रा प्रबंधक

भारतीय रुपए के बाहरी मूल्‍य के निर्धारण के लिए बाज़ार-आधारित प्रणाली में परिवर्तन के साथ विदेशी मुद्रा बाज़ार ने सुधार अवधि की शुरुआत से ही भारत में ज़ोर पकड़ा है।

अधिसूचनाएं


व्यापार ऋण नीति – संशोधित ढांचा

भारिबैंक/2018-19/140
ए.पी. (डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं. 23

13 मार्च 2019

सभी श्रेणी -। प्राधिकृत व्यापारी बैंक

महोदया/महोदय,

व्यापार ऋण नीति – संशोधित ढांचा

प्राधिकृत व्यापारियों का ध्यान बाह्य वाणिज्यिक उधारों (ईसीबी) तथा व्यापार ऋणों को शासित करने वाले तर्कसंगत मूल विनियम की ओर आकर्षित किया जाता है, जिसे दिनांक 17 दिसंबर 2018 को विदेशी मुद्रा प्रबंध (उधार लेना तथा उधार देना) विनियमावली, 2018 के माध्यम से पूर्व में ही अधिसूचित किया गया है और दिनांक 17 दिसंबर 2018 की अधिसूचना सं.फेमा 3(आर)/2018-आरबी के माध्यम से राजपत्र में प्रकाशित किया गया है। उपर्युक्त विनियम पर आधारित नया ईसीबी ढांचा दिनांक 16 जनवरी 2019 के ए.पी. (डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं. 17 के माध्यम से जारी किया गया। ऊपर उल्लिखित अधिसूचित विनियम पर आधारित व्यापार ऋण ढांचा अब जारी किया जा रहा है। इस परिपत्र के अनुबंध में विस्तृत अनुदेश जारी किए गए हैं।

2. इस परिपत्र के अनुबंध में निर्दिष्ट की गई राशि तक तथा अन्य यथा लागू मानदंडों का अनुपालन करने के अधीन स्वचालित मार्ग के अंतर्गत व्यापार ऋण जुटाए जा सकते हैं। व्यापार ऋण प्रस्ताव पर विचार करते समय नामित एडी श्रेणी–I बैंक को यह सुनिशित करना है कि उनके घटक यथा लागू व्यापार ऋण दिशा-निर्देशों का अनुपालन करते हैं। यथा लागू प्रावधानों का किसी भी प्रकार का उल्लंघन करने पर विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 के अंतर्गत दंडात्मक कार्रवाई अथवा न्यायनिर्णयन किया जाएगा।

3. संशोधित व्यापार ऋण नीति तत्काल प्रभाव से लागू होगी। प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक इस परिपत्र की विषयवस्तु से अपने घटकों और ग्राहकों को अवगत कराएं। इन परिवर्तनों को दर्शाने के लिए दिनांक 01 जनवरी 2016 के मास्टर निदेश सं.5 के संबंधित पैराग्राफ को तदनुसार अद्यतन किया जा रहा है।

4. इस परिपत्र में निहित निर्देश, विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम 1999 (1999 का 42) की धारा 10(4) और 11(1) के अंतर्गत और किसी अन्य विधि के अंतर्गत अपेक्षित किसी अनुमति / अनुमोदन, यदि कोई हो, पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना जारी किए गये हैं।

भवदीय

(अजय कुमार मिश्र)
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक


अनुबंध

व्यापार ऋण नीति – संशोधित ढांचा
{देखें: दिनांक 13 मार्च 2019 का ए.पी. (डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं. 23}

व्यापार ऋण (टीसी) का अर्थ है भारत सरकार की मौजूदा विदेश व्यापार नीति के अंतर्गत अनुमत पूंजीगत/ गैर पूंजीगत माल के आयात के लिए इस ढांचे में निर्धारित की गई परिपक्वता के लिए समुद्रपारीय आपूर्तिकर्ता, बैंक, वित्तीय संस्था तथा अन्य अनुमेय मान्यताप्राप्त उधारदाताओं द्वारा प्रदान किए गए ऋण। वित्त के स्रोत के आधार पर ऐसे व्यापार ऋणों में मान्यताप्राप्त उधारदाताओं से आपूर्तिकर्ता ऋण तथा क्रेता की साख पर उधार शामिल हैं।

1. प्रयोग में लाए गए महत्वपूर्ण शब्द:

1.1 समग्र लागत: में ब्याज दर, अन्य शुल्क व्यय, प्रभार, गारंटी शुल्क, फिर वे विदेशी मुद्रा में अथवा भारतीय रुपयों में ही क्यों न अदा किया गया हो, शामिल हैं। लेकिन इसमें भारतीय रुपए में देय कर की रोक के लिए रखी गई राशि शामिल नहीं है।

1.2. अनुमोदन मार्ग: स्वचालित मार्ग से अथवा अनुमोदन मार्ग के अंतर्गत व्यापर ऋण (टीसी) जुटाये जा सकते हैं। अनुमोदन मार्ग के अंतर्गत संभाव्य उधारकर्ताओं को अपने प्राधिकृत व्यापारी [एडी] बैंकों के माध्यम से अपने अनुरोध विदेशी मुद्रा विभाग, केंद्रीय कार्यालय, भारतीय रिज़र्व बैंक के पास जांच के लिए भेजने पड़ते हैं ।

1.3. स्वचालित मार्ग: स्वचालित मार्ग के लिए मामलों की प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I (एडी श्रेणी –I) बैंकों द्वारा जांच की जाती है।

1.4. विशेष आर्थिक क्षेत्र तथा निशुल्क व्यापार भंडारण क्षेत्र : उनका वहीं अर्थ होगा जो उन्हें समय-समय पर संशोधित विशेष आर्थिक क्षेत्र अधिनियम-2005 में दिया गया है।

टिप्पणी: प्राधिकृत व्यापारी, बेंचमार्क दर तथा विदेशी इक्विटि धारक जैसे इस परिपत्र में उपयोग में लाए गए अन्य महत्वपूर्ण शब्दों का अर्थ वहीं होगा, जो बाह्य वाणिज्यिक उधार का नया ढांचा (16 जनवरी 2019 के ए.पी. (डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं. 17) में उन्हें दिया गया है।

2. व्यापार ऋण ढांचा: नीचे सारणी में दिए गए अनुसार व्यापार ऋण (टीसी) किसी भी मुक्त रूप से परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा (विदेशी मुद्रा में मूल्यवर्गित टीसी) अथवा भारतीय रुपए (भारतीय रुपए में मूल्यवर्गित टीसी) में जुटाया जा सकता है:

क्र. सं. मानदंड विदेशी मुद्रा में मूल्यवर्गित टीसी भारतीय रुपए में मूल्यवर्गित टीसी
i टीसी के स्वरूप क्रेता की साख पर उधार तथा आपूर्तिकर्ता उधार
ii पात्र उधारकर्ता आयातक की भूमिका निभाने वाला भारत का निवासी व्यक्ति
iii स्वचालित मार्ग के अंतर्गत राशि तेल/ गॅस परिष्करण तथा विपणन, हवाई तथा नौपरिवहन कंपनियों के लिए 150 मिलियन अमरीकी डॉलर अथवा उसके समतुल्य राशि प्रति आयात लेनदेन। अन्यों के लिए 50 मिलियन अमरीकी डॉलर अथवा उसके समतुल्य राशि प्रति आयात लेनदेन।
iv मान्यताप्राप्त उधारदाता 1. आपूर्तिकर्ता ऋण के लिए: माल का भारत के बाहर स्थित आपूर्तिकर्ता।
2. क्रेता की साख पर उधार के लिए: भारत के बाहर स्थित बैंक, वित्तीय संस्थाएं, विदेशी इक्विटि धारक तथा भारत में स्थित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केन्द्रों (आईएफ़एससी) में वित्तीय संस्थाएं।
टिप्पणी: भारतीय बैंकों तथा गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं (आईएफ़एससी से परिचालन करने वाली) की उधारदाता के रूप में सहभागिता रिज़र्व बैंक के संबंधित विनियामक विभागों द्वारा जारी विवेकपूर्ण दिशानिर्देशों के अधीन होगी। साथ ही, भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं/ अनुषंगी कंपनियों को केवल विदेशी मुद्रा टीसी के लिए मान्यताप्राप्त उधारदाता के रूप में अनुमति है।
v टीसी की अवधि पूंजीगत माल के आयात के लिए टीसी की अवधि की गणना पोतलदान की तारीख से की जाएगी और वह अवधि तीन वर्ष होगी। गैर पूंजीगत माल के लिए यह अवधि एक वर्ष अथवा परिचालन चक्र, इन में से जो भी कम हो, वह होगी। शिपयार्ड / शिप-बिल्डर्स के लिए गैर पूंजीगत माल के आयात के लिए टीसी की अवधि तीन वर्ष तक हो सकती है।
vi प्रति वर्ष समग्र लागत सीमा बेंचमार्क दर के ऊपर 250 बेसिस पॉइंट का स्प्रेड
vii विनिमय दर विदेशी मुद्रा टीसी की मुद्रा का भारतीय रुपयों में मूल्यवर्गित टीसी में परिवर्तन, संबंधित पार्टियों के बीच ऐसा परिवर्तन करने के लिए किये गये करार की तारीख को जो विनिमय दर प्रचलित होगी उस दर पर अथवा यदि टीसी ऋण दाता सहमत हो तो करार की तारीख को प्रचलित दर से कम विनिमय दर पर किया जाएगा रुपये में परिवर्तन के लिए करार की तारीख को जो दर प्रचलित होगी वही विनिमय दर होगी।
viii हेजिंग प्रावधान टीसी को जुटाने वाली एंटीटीज़ को विदेशी मुद्रा एक्सपोजर के मामले में संबंधित क्षेत्र-वार अथवा विवेकपूर्ण विनियामक द्वारा जारी किए गए दिशानिर्देश, यदि कोई हो, का अनुपालन करना होगा। ऐसी एंटीटीज़ के पास निदेशक बोर्ड द्वारा अनुमोदित जोखिम प्रबन्धन नीति होगी। समुद्रपारीय निवेशक रुपए में अपने एक्सपोजर को भारत में एडी श्रेणी I बैंकों के अनुमेय डेरिवेटिव उत्पादों के माध्यम से हेज करने के लिए पात्र हैं। निवेशक बॅक टु बॅक आधार पर विदेश स्थित भारतीय बैंकों की शाखाओं/ अनुषंगी कंपनियों अथवा भारत में उपस्थिती होने वाले विदेशी बैंकों की शाखाओं के माध्यम से भी घरेलू बाज़ार तक पहुँच सकते हैं।
ix उधार की मुद्रा में परिवर्तन टीसी की मुद्रा का किसी भी मुक्त रूप से परिवर्तित होने वाली विदेशी मुद्रा से किसी अन्य मुक्त रूप से परिवर्तनीय विदेशी मुद्रा में अथवा भारतीय रुपयों में परिवर्तन मुक्त रूप से अनुमत है। भारतीय रुपए से मुक्त रूप से परिवर्तित होने वाली किसी भी विदेशी मुद्रा में मुद्रा का परिवर्तन करने की अनुमति नहीं है।

3. विशेष आर्थिक क्षेत्र(एसईज़ेड)/ मुक्त व्यापार भंडारण क्षेत्र (एफ़टीडबल्यूज़ेड)/ घरेलू प्रशुल्क क्षेत्र (डीटीए) में व्यापार ऋण :

3.1 एफ़टीडबल्यूज़ेड सहित एसईज़ेड में स्थित किसी इकाई अथवा विकासक द्वारा एफ़टीडबल्यूज़ेड सहित किसी एसईज़ेड के भीतर अथवा एफ़टीडबल्यूज़ेड सहित किसी भिन्न एसईज़ेड से गैर पूंजीगत तथा पूंजीगत माल की खरीद के लिए उपर्युक्त पैराग्राफ 2 में दिए गए मानदंडों के अनुपालन के अधीन टीसी जूटा सकते हैं। साथ ही डीटीए में स्थित कोई एंटीटी को भी एफ़टीडबल्यूज़ेड सहित एसईज़ेड में स्थित किसी इकाई अथवा विकासक से पूंजीगत/ गैर पूंजीगत माल की खरीद के लिए टीसी जुटाने की अनुमति है।

3.2 एसईज़ेड तथा डीटीए के संबंध में उपर्युक्त के अनुसार अनुमत टीसी लेनदेन समय-समय पर संशोधित एसईज़ेड अधिनियम के यथा लागू प्रावधानों का अनुपालन करते हों। एसईज़ेड से संबंधित टीसी लेनदेन के संबंध में माल के स्वामित्व के अंतरण की तारीख को टीसी की तारीख माना जाएगा। चूंकि एसईज़ेड के भीतर के बिक्री लेनदेन के लिए कोई प्रवेश बिल नहीं होगा इसलिए एनएसडीएल के माध्यम से जनरेट की गई अंतर इकाई रसीद को आयात दस्तावेज़ माना जाएगा।

4. व्यापार ऋण के लिए जमानत: टीसी जुटाने के लिए जमानत संबंधी प्रावधान निम्नानुसार है:

4.1. एडी द्वारा आयातक की ओर से टीसी के समुद्रपारीय उधारदाता के पक्ष में बैंक गारंटियां दी जा सकती हैं, लेकिन गारंटी की राशि टीसी की राशि से अधिक नहीं होनी चाहिए। ऐसी गारंटी की अवधि टीसी के लिए अधिकतम अनुमेय अवधि से अधिक नहीं हो सकती है। विदेशी बैंकों/ भारतीय बैंकों की समुद्रपारीय शाखाओं द्वारा जारी की गई समुद्रपारीय गारंटी द्वारा भी टीसी को सुरक्षित किया जा सकता है। इस प्रकार की गारंटियों अर्थात भारतीय बैंकों तथा भारत के बाहर स्थित उनकी अनुषंगी कंपनियों द्वारा दी गई गारंटियाँ, का निर्गम, समय-समय पर संशोधित “गारंटियों तथा सह-स्वीकृतियों” पर दिनांक 1 जुलाई 2015 के बैंकिंग विनियमन विभाग के मास्टर परिपत्र सं. डीबीआर.सं.डीआईआर.बीसी.11/13.03.00/2015-16 में निहित प्रावधानों के अनुपालन के अधीन होगा।

4.2. टीसी जुटाने के प्रयोजन के लिए आयातक चल आस्तियों (वित्तीय आस्तियों सहि त)/ अचल संपत्ति (एसईज़ेड में भूमि को छोड़कर) /कॉर्पोरेट अथवा व्यक्तिगत गारंटी की जमानत भी टीसी जुटाने के लिए दे सकते हैं। अतः एडी को यह सुनिश्चित करते हुए प्रस्तावित जमानत पर भार का सृजन करने / कॉर्पोरेट अथवा व्यक्तिगत गारंटी को स्वीकार करने की अनुमति दी जाएगी कि (i) ऋण करार में एक जमानत खंड है जिसके अंतर्गत आयातक को समुद्रपारीय उधारदाता/ प्रतिभूति न्यासी के पक्ष में अचल सम्पत्तियों/ चल आस्तियों/ वित्तीय प्रतिभूतियों पर भार सृजित करना / कॉर्पोरेट तथा/ अथवा व्यक्तिगत गारंटी जारी करना आवश्यक है; (ii) जहां कहीं आवश्यक है, वहाँ भारत में मौजूदा ऋण दाताओं से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त किया गया है; (iii) इस प्रकार की व्यवस्था अंडर लाइंग टीसी के साथ समाप्त होती हों; (iv) लागू किए जाने पर गारंटी के प्रति कुल भुगतान, टीसी के प्रति देयता से अधिक नहीं होना चाहिए; तथा (v) भार का सृजन/ प्रवर्तन/ लागू किया जाना, विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत में अचल संपत्ति का अर्जन तथा अंतरण) विनियमावली, 2000 तथा विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत के बाहर निवास करने वाले व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम), विनियमावली, 2000 अथवा विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 के अंतर्गत बनाए गए कोई अन्य संबंधित विनियमों में निहित प्रावधानों के अनुसार होगा तथा एफ़डीआई/ एफ़आईआई/ एसईज़ेड नीति/ नियम/ दिशानिर्देशों का अनुपालन भी करेगा। इस प्रावधान के अंतर्गत उल्लिखित गारंटी के निर्गम संबंधी दिशानिर्देश, फेमा के अंतर्गत जारी संबंधित विनियमों की सरकारी राजपत्र में प्रकाशन की तारीख से लागू होंगे।

5. रिपोर्टिंग अपेक्षाएँ: टीसी लेनदेन निम्नलिखित रिपोर्टिंग अपेक्षाओं के अधीन हैं :

5.1. मासिक रिपोर्टिंग: एडी श्रेणी-I बैंकों को माह के दौरान अपनी सभी शाखाओं द्वारा अनुमोदित टीसी के ब्योरे जैसे- टीसी का आहरण, उपयोग तथा चुकौती, फॉर्म टीसी में एक समेकित विवरण में इस प्रकार प्रेषित करना होगा कि वह आगामी महीने के 10वें दिन के भीतर निदेशक, अंतरराष्ट्रीय व्यापार तथा वित्त प्रभाग, आर्थिक एवं नीति अनुसंधान विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक, केंद्रीय कार्यालय, फोर्ट, मुंबई -400001 (तथा ई-मेल के माध्यम से MS-Excel फाइल के माध्यम से) को पहुंचेगा। प्रत्येक टीसी को एडी बैंक द्वारा एक विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी। फॉर्म टीसी का फ़ारमैट समय-समय पर संशोधित दिनांक 1 जनवरी 2016 के मास्टर निदेश- विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम के आन्तर्गत रिपोर्टिंग के भाग V के अनुबंध IV पर उपलब्ध है।

टिप्पणी: गैर पूंजीगत/ पूंजीगत वस्तुओं के लिए पोत लदान की तारीख से क्रमशः 180 दिन तथा एक वर्ष/ तीन वर्ष तक के आपूर्तिकर्ता ऋण को भी एडी बैंकों द्वारा रिपोर्ट किया जाना चाहिए। साथ ही समय-समय पर दिनांक 1 जनवरी 2016 के माल तथा सेवाओं के आयात पर मास्टर निदेश के पैराग्राफ बी.5 तथा सी.2 के अनुसार विलंबित आयात पर देय राशियों के निपटान के लिए एडी बैंकों/ रिज़र्व बैंक के क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा प्रदान की गई अनुमतियों को एडी बैंकों द्वारा उपर्युक्त क्रियाविधि के अनुसार रिपोर्ट किया जाना चाहिए।

5.2. तिमाही रिपोर्टिंग : एडी श्रेणी-I बैंकों की सभी शाखाओं द्वारा टीसी के लिए जारी की गई गारंटियों से संबंधित आंकड़ों को एक समेकित विवरण में तिमाही अंतरालों पर एक्सटेनसिबल बिज़नस रिपोर्टिंग लैंग्विज (XBRL) प्लैटफ़ार्म पर प्रस्तुत करना आवश्यक है। उपर्युक्त प्रयोजन के लिए एडी श्रेणी-I बैंक को https://secweb.rbi.org.in/orfsxbrl/ पर अपने यूसर नेम, पासवर्ड तथा बैंक कोड का उपयोग करते हुए लॉगिन करना होगा। संबंधित फॉर्म को डाउनलोड करने के लिए एडी बैंक “Download Returns Package” लिंक को फॉलो कर के फॉर्म डाउनलोड करना होगा। एडी बैंक अनुक्रमिक चरणों का पालन करते हुए फ़ाइल अपलोड करें। यूसर नेम तथा पासवर्ड के लिए एडी बैंक संपर्क के ब्यौरों के साथ ई-मेल लिखें। यदि कोई स्पष्टीकरण आवश्यक हो, तो उसे भी रिज़र्व बैंक की पूर्वोक्त मेल पर भेजा जाए तथा/ अथवा टेलीफ़ोन सं. 022-22601000 (विस्तार-2715) पर संप्रेषित किया जाए। XBRL वेबसाइट का उपयोग करने संबंधी मार्गदर्शक सामग्री भी उसी पृष्ठ पर हेल्प विकल्प के अंतर्गत उपलब्ध है। इस विवरण का फ़ारमैट समय-समय पर संशोधित दिनांक 1 जनवरी 2016 के मास्टर निदेश- विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम के अन्तर्गत रिपोर्टिंग के भाग V के अनुबंध V पर उपलब्ध है।

6. प्राधिकृत व्यापारियों की भूमिका: हालांकि टीसी नीति का अनुपालन सुनिश्चित करने का प्राथमिक दायित्व आयातक का है, फिर भी एडी से भी यह अपेक्षा की जाती है कि वे अपने घटकों द्वारा टीसी नीति के यथा लागू मानदंडों/ विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करें। चूंकि रिज़र्व बैंक ने टीसी व्यवस्थाओं/ ऋण करारों को प्रलेखित करने का कोई फ़ारमैट अथवा तरीका निर्धारित नहीं किया है, इसलिए प्राधिकृत व्यापारी अंडर लाइंग टीसी व्यवस्था से अपने आप को संतुष्ट करने के लिए किसी भी दस्तावेज़ पर विचार कर सकते हैं। प्राधिकृत व्यापारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि एफ़टीडबल्यूज़ेड सहित एसईज़ेड में स्थित किसी इकाई अथवा विकासक द्वारा एफ़टीडबल्यूज़ेड सहित किसी एसईज़ेड के भीतर अथवा एफ़टीडबल्यूज़ेड सहित किसी भिन्न एसईज़ेड से गैर पूंजीगत तथा पूंजीगत माल की खरीद संबंधी लेनदेन के कारण कोई दोहरा वित्तपोषण नहीं किया गया है। प्राधिकृत व्यापारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि गैर पूंजीगत माल के आयात के लिए टीसी की यथालागू अवधि, परिचालन चक्र अथवा एक वर्ष (शिपयार्ड/ शिप बिल्डर के लिए तीन वर्ष) से कम है।

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