विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम

अपने ग्राहक को जानिये (केवाइसी) मापदंड/धन शोधन निवारण (एएमएल) मानक/आतंकवाद के वित्तपोषण का प्रतिरोध (सीएफटी) करने / धन शोधन निवारण (संशोधन) अधिनियम,  2009 द्वारा यथा संशोधित धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत प्राधिकृत व्याक्तियों का दायित्व- धन अंतरण सेवा योजना (एमटीएसएस)  के तहत सीमापार आवक विप्रेषण

भारिबैंक/2010-11/288
ए.पी.(डीआइआर सिरीज) परिपत्र सं.19
ए.पी. (एफएल/आरएल सिरीज) परिपत्र सं.02

25 नवंबर 2010

सभी प्राधिकृत व्यक्ति, जो मुद्रा अंतरण सेवा योजना के तहत भारतीय एजेंट हैं

महोदया/महोदय

अपने ग्राहक को जानिये (केवाइसी) मापदंड/धन शोधन निवारण (एएमएल) मानक/आतंकवाद के वित्तपोषण का प्रतिरोध (सीएफटी) करने / धन शोधन निवारण (संशोधन) अधिनियम,  2009 द्वारा यथा संशोधित धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत प्राधिकृत व्याक्तियों का दायित्व- धन अंतरण सेवा योजना (एमटीएसएस)  के तहत सीमापार आवक विप्रेषण

सभी प्राधिकृत व्यक्तियों, जो धन अंतरण सेवा योजना (एमटीएसएस)  के तहत भारतीय एजेंट हैं, का ध्यान धन अंतरण सेवा योजना (एमटीएसएस) के तहत सीमापार आवक विप्रेषण के संबंध में अपने ग्राहक को जानिये (केवाइसी) मापदंड/धन शोधन निवारण (एएमएल) मानक/आतंकवाद के वित्तपोषण का प्रतिरोध (सीएफटी) करने / धन शोधन निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2009 द्वारा यथा संशोधित धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 पर 27 नवंबर 2009 के ए.पी. (डीआइआर सिरीज) परिपत्र सं. 18 (ए.पी. (एफएल सिरीज) परिपत्र सं. 05) की ओर आकर्षित किया जाता है ।

धन शोधन/आतंकवाद वित्तपोषण का संदेह

2.  आपराधिक घटकों से काले धन शोधन अथवा आतंकवाद वित्तपोषण गतिविधियों के लिए जानबूझकर अथवा अनजाने में अपनायी जानेवाली धन अंतरण सेवा योजना (एमटीएसएस)  के तहत पूरे विश्वभर से भारत में सीमापार आवक मुद्रा अंतरण की पद्धति को रोकने की दृष्टि से यह स्पष्ट किया जाता है कि जब कभी धन शोधन अथवा आतंकवाद वित्तपोषण का संदेह होता है अथवा जब अन्य कारक यह विश्वास दिलाते है कि ग्राहक, वास्तव में, कम जोखिम का नहीं है, प्राधिकृत व्यक्तियों(भारतीय एजेंट) को किसी विप्रेषण का भुगतान करने से पहले पूर्णरूपेण यथोचित ग्राहक सावधानी (सीडीडी) बरतनी चाहिए । 

संदेहास्पद लेनदेन रिपोर्ट (एसटीआर) फाइल करना

3. उपर्युक्त में उल्लिखित 27 नवंबर 2009 के परिपत्र के पैराग्राफ 5.3(iv) में निहित अनुदेशों के अनुसार, प्राधिकृत व्यक्ति(भारतीय एजेंट) को आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करना तथा उनका सत्यापन  करना संभव नहीं है तो किसी विप्रेषण का भुगतान नहीं करना चाहिए। यह स्पष्ट किया जाता है कि ऐसी स्थितियों में जब प्राधिकृत व्यक्ति(भारतीय एजेंट) को विश्वास हो जाता  है कि अब वह ग्राहक(व्यक्तिगत/व्यवसाय संस्था) की सही पहचान के बारे में आश्वस्त नहीं हो पायेगा, तो प्राधिकृत व्यक्ति(भारतीय एजेंट) को वित्तीय आसूचना ईकाई-भारत (एफआइयु-आइएनडी) में संदेहास्पद लेनदेन रिपोर्ट भी फाइल करनी चाहिए ।

राजनयिक (पोलिटिकली एक्स्पोजड़् पर्सन्स )(पीइपीएस)

4. उपर्युक्त में उल्लिखित 27 नवंबर 2009 के परिपत्र के पैराग्राफ 5.5  में निहित अनुदेशों के अनुसार, राजनयिकों के साथ लेनदेन करने का निर्णय वरिष्ठ स्तर पर लिया जाना चाहिए और ग्राहक स्वीकृति नीति में उसका उल्लेख स्पष्ट रुप से करना चाहिए । प्राधिकृत व्यक्तियों(भारतीय एजेंट) को ऐसे लेनदेनों की लगातार आधार पर बढ़ायी गयी निगरानी रखनी चाहिए । जब ग्राहक पहले ही व्यवसाय संबंध स्थापित किये जाने पर राजनयिक बनते हैं तो भी उपर्युक्त मानदंड लागू किये जाएं। यह स्पष्ट किया जाता है कि उपर्युक्त परिपत्र के पैराग्राफ  5.5 में निहित अनुदेश ऐसे लेनदेनों के लिए भी लागू हैं जहाँ कोई राजनयिक अंतिमत: हिताधिकारी स्वामी है। इसके अतिरिक्त, राजनयिकों के मामले में लेनदेनों के बारे में, यह दोहराया जाता है कि प्राधिकृत व्यक्तियों (भारतीय एजेंट) के पास राजनयिकों, ग्राहक जो राजनयिकों के परिवार के सदस्य अथवा नजदीकी रिश्तेदार हैं और ऐसे लेनदेनों जिसके लिए कोई राजनयिक अंतिमत: हिताधिकारी स्वामी है, को पहचानने तथा ग्राहक यथोचित् बढ़ायी गयी कार्रवाई  (सीडीडी) करने के लिए उचित निरंतर जोखिम प्रबंध क्रियाविधि  का पालन होना चाहिए ।

प्रधान अधिकारी

5. प्रधान अधिकारी की नियुक्ति तथा जिम्मेदारी के संबंध में उपर्युक्त में उल्लिखित 27 नवंबर 2009 के परिपत्र के पैराग्राफ 5.11 के संदर्भ में, यह स्पष्ट किया जाता है कि प्रधान अधिकारी की भूमिका और जिम्मेदारी में समय समय पर जारी अपने ग्राहक को जानिये (केवाइसी) /धन शोधन निवारण (एएमएल) /आतंकवाद के वित्तपोषण का प्रतिरोध (सीएफटी) पर विनियामक दिशा-निर्देशों के साथ समग्र अनुपालन के संबंध में निरीक्षण करने और उसे सुनिश्चित करने  तथा धन शोधन निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2009 द्वारा यथा संशोधित धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 और समय समय पर यथा संशोधित उसके तहत बनाये गये नियमों तथा विनियमों के तहत दायित्वों का समावेश होना चाहिए ।

6.  ये दिशा-निर्देश यथोचित परिवर्तनों सहित धन अंतरण सेवा योजना योजना के तहत भारतीय एजेंटों के उप-एजेंटों को भी लागू होंगे और प्राधिकृत व्याक्ति (भारतीय एजेंट) की स्वयं की यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी कि उनके उप-एजेंट भी इन दिशा-निर्देशों का पालन करते हैं।

7.  प्राधिकृत व्यक्ति(भारतीय एजेंट) इस परिपत्र की विषयवस्तु से अपने संबंधित घटकों को अवगत करा दें ।

8. इस परिपत्र में निहित निदेश विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 10(4) और धारा 11 (1),  और धन शोधन निवारण (संशोधन) अधिनियम,  2009 द्वारा यथा संशोधित धन शोधन निवारण अधिनियम, (पीएमएलए),  2002 और समय समय पर यथा संशोधित धन शोधन निवारण (लेनदेनों के स्वरुप और लागत के अभिलेखों का रखरखाव, रखरखाव की प्रक्रिया और पद्धति तथा जानकारी प्रस्तुत करने  के लिए समय  और बैंकिंग कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और मध्यवर्ती संस्थाओं के ग्राहकों की पहचान के अभिलेखों का सत्यापन और रखरखाव) नियम, 2005 के तहत जारी किये गये हैं । दिशा-निर्देशों का अनुपालन न  करने से संबंधित अधिनियमों  अथवा उसके तहत बनाये गये नियमों के दंडात्मक प्रावधानों  को लागू किया जाएगा ।

भवदीय

(सलीम गंगाधरन)
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक


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