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रिज़र्व बैंक वर्किंग पेपर सं. 13/2022: क्या अंतर्निहित अस्थिरता सूचकांक (वीआईएक्स) भारत में शेयर बाज़ार में उतार-चढ़ाव का एक अग्रगामी संकेतक है?

19 सितंबर 2022

रिज़र्व बैंक वर्किंग पेपर सं. 13/2022: क्या अंतर्निहित अस्थिरता सूचकांक (वीआईएक्स) भारत में
शेयर बाज़ार में उतार-चढ़ाव का एक अग्रगामी संकेतक है?

भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज अपनी वेबसाइट पर भारतीय रिज़र्व बैंक वर्किंग पेपर शृंखला* के अंतर्गत "क्या अंतर्निहित अस्थिरता सूचकांक (वीआईएक्स) भारत में शेयर बाज़ार में उतार-चढ़ाव का एक अग्रगामी संकेतक है?" शीर्षक से एक वर्किंग पेपर रखा। पेपर के सह- लेखन अमरेंद्र आचार्य, सुब्रत कुमार सीत और प्रकाश ए. साल्वी ने किया है।

यह पेपर पिछले एक दशक में भारत में अंतर्निहित अस्थिरता सूचकांक (वीआईएक्स) और शेयर बाज़ार के उतार-चढ़ाव के बीच संबंधों की जांच करता है। यह पाता है कि स्टॉक सूचकांक में नकारात्मक प्रतिफल सकारात्मक प्रतिफल की तुलना में अंतर्निहित अस्थिरता में बड़े बदलाव उत्पन्न करते हैं। प्रतिफल का आकार भी अंतर्निहित अस्थिरता सूचकांक में सापेक्ष परिवर्तन को प्रभावित करता है। इसके अलावा, यह देखा गया है कि उच्च स्तर की अस्थिरता 20- और 60- दिनों की अवधि में निवेशकों के खरीदारी निर्णयों को प्रभावित करती है। इस तरह के व्यवहार से संकेत मिलता है कि भारतीय शेयर बाजार एक हद तक अग्रगामी है और अमेरिका में देखे गए पैटर्न से मिलता- जुलता है।

(योगेश दयाल) 
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2022-2023/893


*भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने रिज़र्व बैंक वर्किंग पेपर शृंखला की शुरुआत मार्च 2011 में की थी। ये पेपर भारतीय रिज़र्व बैंक के स्टाफ सदस्यों और कभी-कभी बाहरी सह-लेखकों, जब अनुसंधान संयुक्त रूप से किया जाता है, के अनुसंधान की प्रगति पर शोध प्रस्तुत करते हैं। इन्हें टिप्पणियों और आगे की चर्चा के लिए प्रसारित किया जाता है। इन पेपरों में व्यक्त विचार लेखकों के हैं और जरूरी नहीं कि वे जिस संस्थान (संस्थाओं) से संबंधित हैं, उनके विचार हों। अभिमत और टिप्पणियां कृपया लेखकों को भेजी जाएं। इन पेपरों के उद्धरण और उपयोग में इनके अनंतिम स्‍वरूप का ध्यान रखा जाए।


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