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भारतीय रिज़र्व बैंक ने एफ़एक्स वैश्विक संहिता के प्रति अपने प्रतिबद्धता वक्तव्य का नवीनीकरण किया

20 जुलाई 2022

भारतीय रिज़र्व बैंक ने एफ़एक्स वैश्विक संहिता के प्रति अपने प्रतिबद्धता वक्तव्य का नवीनीकरण किया

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने एफएक्स वैश्विक संहिता ("संहिता") के प्रति अपने नवीनीकृत प्रतिबद्धता वक्तव्य (एसओसी) पर हस्ताक्षर किया है। यह संहिता, जिसे 25 मई 2017 को शुरू किया गया था, की बाद में समग्र रूप से समीक्षा की गई और अद्यतन संहिता को वैश्विक एफएक्स समिति द्वारा 15 जुलाई 2021 को प्रकाशित किया गया। यह संहिता अंतरराष्ट्रीय निपटान बैंक (बीआईएस), बेसल के तत्वावधान में विकसित, केंद्रीय बैंकों और बाजार सहभागियों द्वारा तैयार सर्वोत्तम बाजार प्रथाओं का संकलन है। यह संहिता थोक एफएक्स बाजार सहभागियों पर लागू होती है, जिसमें विक्रय-पक्ष, क्रय-पक्ष और वित्तीय मध्यस्थ शामिल हैं, और यह स्वैच्छिक प्रकृति की है। यह संहिता, किसी भी विधिक या विनियामक दायित्व को लागू नहीं करती है और इसका उद्देश्य स्थानीय विधि, नियमों और विनियमनों का पूरक बनना है। इस संहिता को वर्तमान में वैश्विक एफएक्स समिति (जीएफएक्ससी) द्वारा प्रत्येक क्षेत्राधिकार में स्थानीय एफएक्स समिति (एलएफएक्ससी) के समन्वय से विश्व स्तर पर कार्यान्वित किया जा रहा है। आरबीआई जीएफएक्ससी का सदस्य है। आरबीआई ने चार प्रमुख केंद्रीय बैंकों के साथ, दिनांक 25 मई 2017 को संयुक्त मीडिया प्रकाशनी के माध्यम से संहिता के प्रकाशन का स्वागत किया था (संयुक्त मीडिया प्रकाशनी: बीओके, एचकेएमए, एमएएस, आरबीए और आरबीआई एफएक्स ग्लोबल कोड के प्रकाशन का स्वागत करते हैं)। बाद में, आरबीआई ने 18 अप्रैल 2019 को अपना प्रतिबद्धता वक्तव्य जारी किया था।

आरबीआई इस संहिता में अच्छी प्रथाओं के सिद्धांतों का समर्थन करता है। आरबीआई ने भारत में एफएक्स बाजार प्रतिभागियों के बीच संहिता को अपनाने और पालन को बढ़ावा देने के लिए भारतीय विदेशी मुद्रा समिति (आईएफएक्ससी) के गठन की भी सुविधा प्रदान की है। संहिता एवं अन्य संबंधित जानकारी: http://www.globalfxc.org पर उपलब्ध है।

एफ़एक्स वैश्विक संहिता के प्रति प्रतिबद्धता का नवीनीकृत वक्तव्य

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