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वर्ष 2020-21 के लिए मुद्रा और वित्त संबंधी रिपोर्ट (आरसीएफ)

26 फरवरी 2021

वर्ष 2020-21 के लिए मुद्रा और वित्त संबंधी रिपोर्ट (आरसीएफ)

रिज़र्व बैंक द्वारा वर्ष 2020-21 के लिए मुद्रा और वित्त संबंधी रिपोर्ट (आरसीएफ) आज जारी की गई । यह पहली बार 1937 में प्रकाशित की गयी थी, आरसीएफ़ ने 1998-99 से थीम-आधारित दृष्टिकोण अपनाया। 2014 और 2019 के बीच एक अंतराल के बाद, इस प्रकाशन के साथ रिपोर्ट को पुनर्जीवित किया गया है। रिपोर्ट का विषय "मौद्रिक नीति की रूपरेखा की समीक्षा" है, जिसमें समष्टि आर्थिक और वित्तीय परिदृश्य में संरचनात्मक परिवर्तनों की पृष्ठभूमि के सापेक्ष मार्च 2021 तक मुद्रास्फीति लक्ष्य की समीक्षा के संदर्भ में सामयिक प्रासंगिकता को शामिल किया गया है, जिसने कई केंद्रीय बैंकों को पॉलिसी की रूपरेखा की समीक्षा करने के लिए प्रेरित किया है। इस रिपोर्ट में अध्ययन की अवधि डेटा विकृतियों के मद्देनजर COVID-19 महामारी की अवधि को छोड़कर अक्टूबर 2016 से मार्च 2020 तक है जिसे भारत में लचीली मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण (एफआईटी) ढांचे के औपचारिक परिचालनात्मकता के साथ आरंभ किया गया है।

रिपोर्ट में भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर से एक प्राक्कथन को शामिल किया गया है। रिपोर्ट की सामग्री, इसके निष्कर्ष, विचार और निष्कर्ष पूरी तरह से योगदानकर्ताओं के हैं और रिज़र्व बैंक के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।

मुख्य बातें

  • अंतर्राष्ट्रीय अनुभव में, उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं (ईएमई) को लक्षित मुद्रास्फीति ने आम तौर पर अपने मुद्रास्फीति लक्ष्य को कम कर दिया है और सहनशीलता बैंड को संकुचित कर दिया है।

  • समीक्षाधीन अवधि के दौरान, हेडलाइन सीपीआई मुद्रास्फीति का औसत भारत में मुद्रास्फीति की अस्थिरता में गिरावट के साथ 3.9 प्रतिशत रही, जोकि अपने प्राथमिक जनादेश के संदर्भ में एफ़आईटी की सफलता को प्रमाणित कर रहा है।

  • ट्रेंड मुद्रास्फीति, जिसकी ओर वास्तविक मुद्रास्फीति एक झटके के बाद अभिमुख होती है, मुद्रास्फीति लक्ष्य के लिए एक उपयुक्त बेंचमार्क प्रदान करती है; ट्रेंड मुद्रास्फीति एफआईटी के पूर्व 9 प्रतिशत ऊपर से गिरकर एफ़आईटी के दौरान 3.8 से 4.3 प्रतिशत की सीमा के बीच रही, जो यह दर्शाता है कि भारत के लिए मुद्रास्फीति लक्ष्य 4 प्रतिशत उपयुक्त स्तर है।

  • अधिकतम मुद्रास्फीति जिसके ऊपर वृद्धि सुस्पष्ट रूप से रुक जाती है, भारत में उसका रेज़ 5 से 6 प्रतिशत के बीच है, यह दर्शाता है कि 6% की मुद्रास्फीति दर, मुद्रास्फीति लक्ष्य के लिए उपयुक्त ऊपरी सहनशीलता सीमा है। दूसरी ओर, 2 प्रतिशत से अधिक की न्यून सीमा से सहिष्णुता बैंड के नीचे की वास्तविक मुद्रास्फीति हो सकती है, जबकि 2 प्रतिशत से नीचे की न्यूनतम सीमा वृद्धि को बाधित करेगा, यह दर्शाता है कि 2 प्रतिशत की मुद्रास्फीति दर उपयुक्त न्यूनतम सहिष्णुता सीमा है।

  • मूल्य स्थिरता को परिभाषित करने के लिए वर्तमान संख्यात्मक ढांचा, अर्थात्, +/- 2 प्रतिशत सहिष्णुता बैंड के साथ 4 प्रतिशत का मुद्रास्फीति लक्ष्य, अगले पांच वर्षों के लिए उपयुक्त है।

  • मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के आकार और इसकी संरचना, निर्णय लेने की प्रक्रिया, संवाद प्रथाओं और जवाबदेही व्यवस्था सहित भारत में एफआईटी की संस्थागत आर्किटेक्चर, अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप है, जबकि विफलता की समय क्षितिज की परिभाषा, एमपीसी सदस्यों की ऑनबोर्डिंग की प्रक्रिया, आगामी दिशानिर्देशों के कुछ पहलू और कार्यवृत्त के प्रकाशन से संबंधित समय, बंद अवधि और ट्रांसक्रिप्ट के प्रकाशन के लिए समीक्षा आवश्यक है।

  • एफआईटी अवधि के दौरान, मुद्रा बाजार में मौद्रिक संचरण पूर्ण और यथोचित रूप से तेज रहा है, लेकिन बांड बाजारों में पूर्ण से कम रहा; जबकि बैंकों के ऋण और जमा दरों में संचरण में सुधार हुआ है, ऋण और जमा की सभी श्रेणियों में बाह्य बेंचमार्क आगे संचरण में सुधार कर सकते हैं।

  • एक खुली अर्थव्यवस्था सेटिंग में मौद्रिक नीति के संचालन में, विदेशी मुद्रा भंडार और संबंधित चलनिधि प्रबंधन प्रमुख हैं; इसलिए, पूंजी प्रवाह में वृद्धि से निपटने के लिए रिज़र्व बैंक की वंध्यीकरण क्षमता को बढ़ाने की आवश्यकता है।

  • मूल्य स्थिरता पर एफआईटी का प्राथमिक ध्यान पूंजी खाते के आगे के उदारीकरण और भारतीय रुपये के संभव अंतर्राष्ट्रीयकरण के लिए अच्छा है।

(योगेश दयाल) 
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी : 2020-2021/1159


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