प्रेस प्रकाशनी

मौद्रिक नीति समिति की 3 से 5 दिसंबर 2019 को हुई बैठक के कार्यवृत्त

19 दिसंबर 2019

मौद्रिक नीति समिति की 3 से 5 दिसंबर 2019 को हुई बैठक के कार्यवृत्त
[भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45 ज़ेडएल के अंतर्गत]

भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45 ज़ेडबी के अंतर्गत गठित मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बीसवीं बैठक 3 से 5 दिसंबर 2019 को भारतीय रिज़र्व बैंक, मुंबई में आयोजित की गई।

2. बैठक में सभी सदस्य – डॉ. चेतन घाटे, प्रोफेसर, भारतीय सांख्यिकी संस्थान; डॉ. पामी दुआ, निदेशक, दिल्ली अर्थशास्त्र स्कूल; और डॉ. रविन्द्र एच. ढोलकिया, पूर्व प्रोफेसर, भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद; डॉ. माइकल देबब्रत पात्र, कार्यपालक निदेशक (भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45 ज़ेडबी(2)(सी) के अंतर्गत केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित रिज़र्व बैंक का अधिकारी); श्री बिभू प्रसाद कानूनगो, उप-गवर्नर, प्रभारी मौद्रिक नीति उपस्थित हुए और इसकी अध्यक्षता श्री शक्तिकांत दास, गवर्नर द्वारा की गई।

3. भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45 ज़ेडएल के अनुसार, रिज़र्व बैंक मौद्रिक नीति समिति की प्रत्येक बैठक के चौदहवें दिन इस बैठक की कार्यवाहियों के कार्यवृत्त प्रकाशित करेगा जिसमें निम्नलिखित शामिल होगा:

(क) मौद्रिक नीति समिति की बैठक में अपनाया गया संकल्प;

(ख) उपर्युक्त बैठक में अपनाए गए संकल्प पर मौद्रिक नीति के प्रत्येक सदस्य को प्रदान किया गया वोट; और

(ग) पर्युक्त बैठक में अपनाए गए संकल्प पर धारा 45 ज़ेडआई की उप-धारा (11) के अंतर्गत मौद्रिक नीति समिति के प्रत्येक सदस्य का वक्तव्य।

4. मौद्रिक नीति समिति ने उपभोक्ता विश्वास, परिवार मुद्रास्फीति प्रत्याशा, कॉर्पोरेट क्षेत्र का कार्यनिष्पादन, क्रेडिट स्थिति, औद्योगिक, सेवा और बुनियादी सुविधा क्षेत्रों की संभावना तथा व्यावसायिक पूर्वानुमानकर्ताओं के अनुमानों का आकलन करने के लिए रिज़र्व बैंक द्वारा करवाए गए सर्वेक्षणों की समीक्षा की। एमपीसी ने इन संभावनाओं के विभिन्न जोखिमों के इर्द-गिर्द स्टाफ के समष्टि आर्थिक अनुमानों और वैकल्पिक परिदृश्यों की विस्तृत रूप से भी समीक्षा की। उपर्युक्त पर और मौद्रिक नीति के रुख पर व्यापक चर्चा करने के बाद एमपीसी ने संकल्प अपनाया जिसे नीचे प्रस्तुत किया गया है।

संकल्प

5. मौद्रिक नीति समिति ने आज (5 दिसंबर 2019) की अपनी बैठक में वर्तमान और उभरती समष्टिगत आर्थिक परिस्थिति के आकलन के आधार पर यह निर्णय लिया है कि –

  • चलनिधि समायोजन सुविधा (एलएएफ) के तहत नीतिगत रेपो दर को 5.15 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा जाए।

परिणामस्‍वरूप, एलएएफ के तहत प्रतिवर्ती रेपो दर 4.90 प्रतिशत और सीमांत स्‍थायी सुविधा (एमएसएफ) दर तथा बैंक दर 5.40 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखे जाए।

  • एमपीसी ने यह भी निर्णय लिया कि जब तक मुद्रास्फीति लक्ष्य के भीतर बनी रहती है, तब तक वृद्धि को पुनर्जीवित करना आवश्यक है और इसके लिए उदार रुख बरकरार रखा जाए।

ये निर्णय वृद्धि को सहारा प्रदान करते हुए उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्‍फीति के 4 प्रतिशत के मध्‍यावधिक लक्ष्‍य को +/-2 प्रतिशत के दायरे में हासिल करने के उद्देश्‍य से भी है।

इस निर्णय के समर्थन में प्रमुख विवेचनों को नीचे दिए गए विवरण में वर्णित किया गया है।

आकलन

वैश्विक अर्थव्यवस्था

6. अक्टूबर 2019 में एमपीसी की बैठक के बाद से, वैश्विक आर्थिक गतिविधि मंद रही है, हालांकि लचीलेपन के कुछ संकेत दिखाई दे रहे हैं। उन्नत अर्थव्यवस्थाओं (एई) के बीच, तीसरी तिमाही में अमेरिका में जीडीपी की संवृद्धि में मजबूत निजी निवेश और व्यक्तिगत खपत व्यय में वृद्धि हुई। हालांकि, हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि कारखाने की गतिविधि नवंबर में लगातार चौथे महीने संकुचित हुई, जबकि अक्टूबर में खुदरा बिक्री और औद्योगिक उत्पादन में गिरावट आई। यूरो क्षेत्र में, जीडीपी संवृद्धि उन्नत घरेलू खपत और सरकारी खर्च पर पिछली तिमाही के मुकाबले तीसरी तिमाही में स्थिर रही, हालांकि विनिर्माण गतिविधि में भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण संघर्ष जारी रहा। कमजोर वैश्विक मांग के कारण निर्यात में गिरावट आई, जापानी अर्थव्यवस्था ने तीसरी तिमाही में गति खो दी। मुख्य रूप से सेवा क्षेत्र और निर्माण गतिविधि द्वारा संचालित यूके में आर्थिक गतिविधि तीसरी तिमाही में तीव्र हुई।

7. उभरती हुई बाजार अर्थव्यवस्थाओं (ईएमई) के बीच, चीन में जीडीपी की वृद्धि दर तीसरी तिमाही में और कम हो गई, जो कमजोर औद्योगिक उत्पादन और अमेरिका के साथ व्यापार तनाव के बीच निर्यात में गिरावट को दर्शाती है। अक्टूबर में खुदरा बिक्री कम होने से राजकोषीय और मौद्रिक प्रोत्साहन में मंदी के आसार हैं। रूस में तीसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि कृषि उत्पादन और औद्योगिक गतिविधि में तेजी के कारण में तेज हुई। दक्षिण अफ्रीका में, आर्थिक गतिविधि तीसरी तिमाही में संकुचित हुई, जिसका मुख्य कारण खनन और विनिर्माण गतिविधि में मंदी रही। ब्राजील में, कृषि, उद्योग और कारोबार निवेश गतिविधि द्वारा संचालित सकल घरेलू उत्पाद में तीसरी तिमाही में तेजी आई।

8. एमपीसी की पिछली बैठक के बाद से कच्चे तेल की कीमतें दोनों दिशाओं में एक संकीर्ण सीमा में चली गई हैं, जो यूएससी-चीन व्यापार वार्ता में प्रगति से संबंधित बदलते मनोभाव को दर्शाती है। नवंबर की शुरुआत में सोने की कीमतों में सुरक्षित मांग के रूप में जोखिम के पुनरुद्धार से गिरावट आने के पहले कारोबार में कमी आई। प्रमुख एई और ईएमई में मुद्रास्फीति तीसरी तिमाही में सौम्य बनी रही, सिवाय चीन में जहां यह आठ साल में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।

9. अक्टूबर में वैश्विक वित्तीय बाजारों में अमेरिका और चीन के बीच व्यापार को लेकर नए आशावाद से उपजे जोखिम मनोभाव और ब्रेक्सिट सौदे की संभावना के कारण उछाल आ गया था। अमेरिका में, इस माहौल में इक्विटी बाजारों में रुकावट आयी, जो बेहतर कॉर्पोरेट आय और मजबूत नौकरियों के आंकड़ों द्वारा भी समर्थित है। ईएमआई में स्टॉक बाजार ने नवंबर की दूसरी छमाही में हांगकांग में चल रही यूएस-चाइना व्यापार वार्ता की नई आशंकाओं पर कुछ बिक्रय दबाव से पहले अक्टूबर में बढ़त दर्ज की। अक्टूबर की शुरुआत में अमेरिका में बॉन्ड प्रतिफल जोखिम-बिक्री पर मजबूत हुए; हालांकि, वे व्यापार विवादों के जल्द समाधान की उम्मीद से नवंबर के मध्य से नरम हो गए। यूरो क्षेत्र में बॉन्ड प्रतिफल नकारात्मक रहे, लेकिन नो-डील ब्रेक्सिट से मनोभाव में सुधार की संभावना कम है। ईएमई में, बॉन्ड प्रतिफल ने मिश्रित गति दिखाई, जो शुरुआत में यूएस-चीन व्यापार वार्ता और देश-विशिष्ट कारकों पर आशावाद द्वारा संचालित है। मुद्रा बाजारों में, अमेरिकी डॉलर अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले कमजोर हुआ, जबकि ईएमई मुद्राएं एक प्रशंसनीय पूर्वाग्रह के साथ कारोबार कर रही हैं।.

घरेलू अर्थव्यवस्था

10. घरेलू मोर्चे पर, 2019-20 की दूसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि वर्ष-दर-वर्ष 4.5 प्रतिशत मंद रही, जो लगातार छठी तिमाही में अनुक्रमिक गिरावट को बढ़ाती है। सकल स्थिर पूंजी निर्माण (जीएफसीएफ) में तीव्र गिरावट द्वारा वास्तविक जीडीपी वृद्धि को मापा गया जिसे सरकारी सकल उपभोग व्यय (जीएफसीई) में तीव्र उछाल द्वारा बचाया गया। जीएफसीई को छोड़कर, सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 3.1 प्रतिशत रही होगी। वास्तविक निजी अंतिम खपत व्यय (पीएफ़सीई) में वृद्धि 18-तिमाही के गिरावट से ठीक हुई। निर्यात की तुलना में आयात में तीव्र संकुचन के कारण निवल निर्यात आसान हुई।

11. आपूर्ति पक्ष पर, सकल मूल्य वर्धित (जीवीए) वृद्धि 2019-20 की दूसरी तिमाही में घटकर 4.3 प्रतिशत हो गई, जिसमें विनिर्माण क्षेत्र में संकुचन के कारण गिरावट आयी थी। विनिर्माण गतिविधि में मंदी 2019-20 की दूसरी तिमाही में क्षमता उपयोग (सीयू) में 68.9 प्रतिशत तक के गिरावट में भी दर्शायी गयी थी, जो रिज़र्व बैंक के आदेश बही, माल सूची सक्षमता उपयोग सर्वेक्षण (ओबीआईसीयूएस) के पूर्ववर्ती परिणाम में पहली तिमाही में 73.6 प्रतिशत थी। इसी अवधि में मौसमी समायोजित सीयू भी 74.6 प्रतिशत से गिरकर 69.6 प्रतिशत पर आ गया। सेवा क्षेत्र में संवृद्धि मंद रही जो मुख्य रूप से व्यापार, होटल, परिवहन, संचार, प्रसारण सेवाओं और निर्माण गतिविधि द्वारा दबा हुआ है। हालांकि, सार्वजनिक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाओं में वृद्धि सरकार के अंतिम उपभोग व्यय में वृद्धि के अनुरूप तेज हुई। पहले अग्रिम अनुमानों में खरीफ खाद्यान्न उत्पादन में संकुचन के बावजूद कृषि जीवीए वृद्धि में मामूली वृद्धि हुई।

12. दूसरी तिमाही से परे, रबी की बुवाई अक्टूबर में और नवंबर की शुरुआत में खरीफ की कटाई में देरी और बेमौसम बारिश के कारण हुए झटके को झेल रही है। 29 नवंबर तक, यह एक साल पहले कवर किए गए एकड़ों की तुलना में केवल 0.5 प्रतिशत कम था। उत्तर-पूर्व मानसून वर्षा 4 दिसंबर तक लंबी अवधि के औसत से 34 प्रतिशत अधिक थी। 28 नवंबर को प्रमुख जलाशयों में भंडार, रबी मौसम के दौरान सिंचाई का मुख्य स्रोत, पूर्ण जलाशय स्तर का 86 प्रतिशत था, जो एक साल पहले इसी अवधि में 61 प्रतिशत थी।

13. आठ प्रमुख उद्योगों के उत्पादन का संकुचन - जो औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का 40 प्रतिशत हिस्सा है - अक्टूबर में लगातार दूसरे महीने में विस्तारित हुआ और यह और भी स्पष्ट हो गया कि यह कोयला, बिजली, सीमेंट, प्राकृतिक गैस और कच्चा तेल के कारण हुआ। हालांकि, रबी मौसम में मजबूत बुवाई गतिविधि की उम्मीदों को दर्शाते हुए उर्वरकों का उत्पादन तेजी से बढ़ा। रिज़र्व बैंक के औद्योगिक संभावना सर्वेक्षण के शुरुआती परिणामों के अनुसार, उत्पादन, घरेलू और बाहरी मांग और रोजगार परिदृश्य पर निरंतर निराशाजनक मनोभाव के कारण 2019-20 की तीसरी तिमाही में विनिर्माण क्षेत्र में समग्र मनोभाव निराशावादी रहे।

14. उच्च आवृत्ति संकेतक बताते हैं कि सेवा क्षेत्र की गतिविधि आम तौर पर अक्टूबर में कमजोर रही। ट्रैक्टर और मोटरसाइकिल की बिक्री - ग्रामीण मांग के संकेतक – मध्यम गति से संकुचित बनी रही; हालांकि, यात्री वाहन बिक्री - शहरी मांग का एक संकेतक - 11 महीने की गिरावट के बाद अक्टूबर में एक धीमी सकारात्मक वृद्धि दर्ज की जो त्यौहारी मौसम की मांग और ऑटो कंपनियों द्वारा प्रचार के उपायों को दर्शाता है। वाणिज्यिक वाहन बिक्री और रेलवे माल यातायात संकुचित हुई। नए निर्यात कारोबार में गिरावट और कारोबार की उम्मीदों के टूटने के कारण अक्टूबर (49.2) में सेवाओं के लिए पीएमआई नकारात्मक क्षेत्र में रहा। हालांकि, यह नए व्यवसाय में तेजी पर नवंबर में विस्तार क्षेत्र में 52.7 पर पहुंच गया।

15. सीपीआई में वर्ष-दर-वर्ष परिवर्तनों द्वारा मापी गई खुदरा मुद्रास्फीति, अक्टूबर में तेजी से बढ़कर 4.6 प्रतिशत हो गई, जो खाद्य कीमतों में वृद्धि से प्रेरित थी। ईंधन समूह की कीमतें अपस्फीति में बनी हुई हैं, जबकि सीपीआई में मुद्रास्फीति खाद्य और ईंधन को छोड़कर एक महीने पहले अपने स्तर से और मंद हो गई है।

16. सीपीआई के परिचालकों की ओर रुख करते हुए, अक्टूबर में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 6.9 प्रतिशत हो गई - 39 महीने की उच्च– जिसका मुख्य कारण भारी बेमौसम बारिश के कारण सब्जियों की कीमतों में तेजी से हुई वृद्धि है। विशेष रूप से प्याज की कीमतों में सितंबर में 45.3 प्रतिशत और अक्टूबर में 19.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। कई अन्य खाद्य पदार्थों जैसे कि फल, दूध, दाल और अनाज में मुद्रास्फीति भी बढ़ी है, जो विभिन्न कारकों को दर्शाती है- दूध के मामले में चारे की कीमतों के लागत में तेजी; दालों के उत्पादन और बुवाई क्षेत्र में गिरावट; और न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रभाव। चीनी और कन्फेक्शनरी की कीमतें अक्टूबर में अपस्फीति से बाहर हो गईं क्योंकि गन्ना उत्पादन एक वर्ष-दर-वर्ष आधार पर संकुचित हुआ।

17. एलपीजी, जलाऊ लकड़ी और चिप्स की कीमतों में अपस्फीति के कारण अक्टूबर में लगातार चौथे महीने ईंधन समूह की कीमतें कमजोर बनी रहीं। हालांकि, बिजली की कीमतों अक्टूबर में 13 राज्यों में बिजली वितरण कंपनियों (डीआईएससीओएम) द्वारा उपयोगकर्ता शुल्क में वृद्धि के बाद तेजी आयी थी, जैसा कि सीपीआई में परिलक्षित होता है।

18. खाद्य और ईंधन को छोड़कर सीपीआई में मुद्रास्फीति सितंबर में 4.2 प्रतिशत से सौम्य होकर अक्टूबर में 3.4 प्रतिशत हो गई, जो मुख्य रूप से अनुकूल आधार प्रभावों के कारण हुई। कतिपय क्षेत्रों में मूल्य वृद्धि भी मंद रही जैसे यातायात किराया, टेलीफोन प्रभार, ट्यूशन शुल्क और घर के किराए में दर्शाया गया है।

19. रिज़र्व बैंक के नवंबर 2019 के सर्वेक्षण के अनुसार, परिवारों की मुद्रास्फीति की उम्मीदें 3 महीने के आगे क्षितिज के आधार पर 120 आधार अंकों और 1 साल के आगे क्षितिज के 180 आधार अंकों के रूप में बढ़ीं, क्योंकि वे हाल के महीने में खाद्य कीमतों में तेजी के अनुकूल थे। रिज़र्व बैंक के उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण के आधार पर, खपत की गैर-आवश्यक वस्तुओं पर खर्च एक साल पहले की तुलना में संकुचित हुआ है; हालांकि, उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि कीमतों में वृद्धि के कारण उनके समग्र खर्च में अपरिवर्तित बने रहने की उम्मीद है। विनिर्माण कंपनियों ने रिज़र्व बैंक की औद्योगिक संभावना सर्वेक्षण में उम्मीद है कि (i) कमजोर मांग की स्थिति और 2019-20 कि तीसरी और चौथी तिमाही में इनपुट मूल्य के दबाव को कम किया; और (ii) उत्पादन मूल्यों को मंद किया जो आगे मूल्य निर्धारण कमजोरी को दर्शाता है।

20. त्यौहार की मांग के कारण प्रचलन में मुद्रा के विस्तार के बावजूद अक्टूबर और नवंबर 2019 में सिस्टम में कुल चलनिधि अधिशेष में रही। एलएएफ़ के तहत औसत दैनिक शुद्ध अवशोषण अक्टूबर में 1,98,566 करोड़ था। केंद्र ने अपने खर्च के वित्तपोषण के लिए पहले सप्ताह और महीने के आखिरी तीन दिनों में अर्थोपाय अग्रिम (डब्ल्यूएमए) का लाभ उठाया। नवंबर में, अधिशेष चलनिधि का औसत दैनिक शुद्ध अवशोषण सरकार द्वारा डब्ल्यूएमए के लिए लगातार और बड़े पैमाने पर सहयोग के साथ 2,40,566 करोड़ हो गया। परिणामस्वरूप, रिज़र्व बैंक ने ओवरनाईट परिवर्तनीय दर प्रतिवर्ती रेपो नीलामियों के अलावा 4 नवंबर, 2019 से दीर्घावधि परिवर्तनीय दर प्रतिवर्ती रेपो नीलामियों का परिचालन करने का निर्णय लिया गया। अब तक, चार दीर्घावधि प्रतिवर्ती रेपो नीलामियों का आयोजन किया गया है - 21 दिनों के अवधि की दो नीलामी और 35 दिनों और 42 दिनों प्रत्येक के लिए एक जिसके द्वारा 78,934 करोड़ अवशोषित किए गए। आसान चलनिधि की स्थिति को दर्शाते हुए, अक्टूबर में 8 आधार अंकों (बीपीएस) और नवंबर में 10 बीपीएस द्वारा पॉलिसी रेपो दर (औसतन) से नीचे भारित औसत मांग दर (डब्ल्यूएसीआर) का कारोबार हुआ।

21. विभिन्न मुद्रा बाजार खंड और निजी कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार में मौद्रिक संचलन पूर्ण और यथोचित तेजी से हुआ है। फरवरी-अक्टूबर 2019 के दौरान नीतिगत रेपो दर में 135 बीपीएस की संचयी कमी के मुक़ाबले, विभिन्न मुद्रा और कॉर्पोरेट ऋण बाजार खंडों में संचलन 137 बीपीएस (ओवरनाइट मांग मुद्रा बाजार) से 218 बीपीएस (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के 3 महीने का सी.पी.) के बीच रहा। तथापि, सरकारी प्रतिभूति बाजार में संचलन 113 बीपीएस (5-वर्षीय सरकारी प्रतिभूती) और 89 बीपीएस (10-वर्ष की सरकारी प्रतिभूती) पर आंशिक रूप से रहा। अग्रिम बाजार संचलन में देरी हुई है लेकिन वह गति पकड़ रहा है। निधियों की सीमांत लागत आधारित उधार दर (एमसीएलआर) की 1-वर्ष की माध्यिका लागत में 49 आधार अंकों की गिरावट आई है। बैंकों द्वारा स्वीकृत नए रुपये ऋणों पर भारित औसत उधार दर (डबल्यूएएलआर) में 44 आधार अंकों की गिरावट आई है, जबकि इस अवधि के दौरान बकाया रुपये ऋणों पर 2 आधार अंकों की वृद्धि हुई है। तथापि, संचलन के सुधरकर आगे बढ़ने की उम्मीद है चूंकि (i) आधार दर ऋणों की हिस्सेदारी, ब्याज दरें जिस पर यह अटका हुआ था, उसमें गिरावट आई है; और (ii) एमसीएलआर-आधारित अस्थिर दर वाले ऋण, जो आमतौर पर वार्षिक रूप से पुनर्निर्धारित होते हैं, नवीनीकरण हेतु बाकी हैं।

22. बाह्य बेंचमार्क प्रणाली की शुरुआत के बाद, अधिकांश बैंकों ने अपनी ऋण दरों को रिजर्व बैंक की नीतिगत रेपो दर से जोड़ा है। फरवरी-नवंबर 2019 के दौरान माध्यिका अवधि की मीयादी जमा दर में 47 बीपीएस की गिरावट आई है। फरवरी-सितंबर के दौरान आठ महीनों में सिर्फ 7 बीपीएस की गिरावट के मुकाबले अक्टूबर में भारित औसत मीयादी जमा दर में 9 बीपीएस की गिरावट आई है। आगे बढ़ते हुए, यह उधार दरों के संप्रेषण के लिए एक शुभ संकेत है।

23. सितंबर-अक्टूबर 2019 में निर्यात संकुचित हुआ जो कि वैश्विक व्यापार में कमजोर कमजोरी को दर्शाता है। हालांकि, पेट्रोलियम उत्पादों को छोड़ कर निर्यात में गिरावट कम थी और वास्तव में गैर-तेल निर्यात वृद्धि दो महीने के अंतराल के बाद अक्टूबर में सकारात्मक क्षेत्र में वापस आ गई थी। निर्यातों की तुलना में आयातों में तेजी से संकुचन हुआ और कच्चे तेल की कम कीमतों के कारण तेल आयात बिल में गिरावट आई। सोने की आयात की मात्रा में तेज संकुचन ने इस खाते से निर्यात पर अंकुश लगा दिया। इलेक्ट्रॉनिक्स, कोयला और मोती और कीमती पत्थरों के कारण गैर-तेल और गैर-सोने के आयात में भी संकुचन आया। इन घटनाओं को दर्शाते हुए सितंबर-अक्टूबर में व्यापार घाटा कम हुआ। वित्त पोषण में सकल विदेशी प्रत्यक्ष निवेश एक साल पहले के 17.0 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2019-20 की पहली छमाही में 20.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक बढ़ गया है। सकल विदेशी पोर्टफोलियो निवेश अप्रैल-नवंबर 2019 में 8.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 14.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था। इसके अलावा 11 मार्च 2019 से स्वैच्छिक संस्थाओं के मार्ग के तहत एफपीआई द्वारा सकल निवेश 6.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। अप्रैल-अक्टूबर 2019 के दौरान बाहरी वाणिज्यिक विक्रेताओं का सकल वितरण 11.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जबकि एक साल पहले इसी अवधि के दौरान यह 1.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। 3 दिसंबर 2019 को भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 451.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर था - मार्च 2019 के अंत तक 38.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर की वृद्धि हुई।

संभावनाएं

24. अक्टूबर 2019 में चौथे द्विमासिक संकल्प में, समान रूप से संतुलित जोखिम के साथ सीपीआई मुद्रास्फीति 2019-20 की दूसरी तिमाही के लिए 3.4 प्रतिशत, 2019-20 दूसरी छमाही के लिए 3.5-3.7 प्रतिशत और 2020-21 की पहली तिमाही के लिए 3.6 प्रतिशत अनुमानित की गई थी। दूसरी तिमाही के लिए वास्तविक मुद्रास्फीति परिणाम मोटे तौर पर - औसत 3.5 प्रतिशत - अनुमानों के अनुरूप रहें । हालांकि, अक्टूबर के लिए मुद्रास्फीति उम्मीद से बहुत अधिक रहीं।

25. आगे जाकर, मुद्रास्फीति दृष्टिकोण कई कारकों से प्रभावित होने की संभावना है। सबसे पहले, सब्जियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव तत्कालिक महीनों में जारी रहने की संभावना है; हालाँकि, सरकार द्वारा आयात में वृद्धि के साथ-साथ आपूर्ति बढ़ाने के उपायों और देर से खरीफ के मौसम से आने वाली आपूर्ति में फरवरी 2020 की शुरुआत में सब्जियों की कीमतों में नरमी लाने में मदद होनी चाहिए। दूसरा खाद्य मुद्रास्फीति के प्रक्षेपवक्र के निहितार्थ के साथ दूध, दाल और चीनी जैसे अन्य खाद्य पदार्थों में देखी जाने वाली कीमतों पर दबाव के बने रखने की संभावना है।तीसरा, रिज़र्व बैंक द्वारा प्रदत्त परिवारों की 3-महीने और 1-वर्ष की आगे की मुद्रास्फीति की प्रत्याशाओं, दोनों में तेजी आई है और अन्य सर्वेक्षणों में भी ये अव्यक्त भावना परिलक्षित हो रही है। चौथा, घरेलू वित्तीय बाजारों में अस्थिरता परिलक्षित हो रही है। पांचवीं, घरेलू मांग कम हो गई है, जो खाद्य और ईंधन को छोड़कर मुद्रास्फीति में नरमी को दर्शा रही है। छठे, कच्चे तेल की कीमतें भू-राजनीतिक तनाव के कारण किसी भी आपूर्ति अवरोध को रोकते हुए सीमाबद्ध रहने की उम्मीद है। इन कारकों को ध्यान में रखते हुए, मोटे तौर पर संतुलित जोखिम के साथ सीपीआई मुद्रास्फीति अनुमानों को 2019-20 की दूसरी छमाही के लिए 5.1-4.7 प्रतिशत और 2020-21 की पहली छमाही के लिए 4.0-3.8 प्रतिशत के रूप में संशोधित किया गया है (चार्ट 1)।

26. वृद्धि संभावनाओं की ओर मुड़ते हुए अक्टूबर नीति में 2019-20 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि समान रूप से संतुलित जोखिम के साथ 6.1 प्रतिशत - 2019-20 की दूसरी तिमाही के लिए 5.3 प्रतिशत और 2019-20 की दूसरी छमाही के लिए 6.6-7.2 प्रतिशत की रेंज में और 2020-21 की पहली तिमाही के लिए 7.2 प्रतिशत अनुमानित की गई थी । 2019-20 की दूसरी तिमाही के लिए जीडीपी की वृद्धि अनुमानित से काफी कम रही। विभिन्न उच्च आवृत्ति संकेतक बताते हैं कि घरेलू और बाहरी मांग की स्थिति कमजोर बनी हुई है। शुरुआती परिणामों के आधार पर, रिज़र्व बैंक के औद्योगिक आउटलुक सर्वेक्षण की व्यावसायिक अपेक्षाओं का सूचकांक चौथी तिमाही में व्यापारिक भावनाओं में मामूली उछाल दर्शाता है। हालांकि, सकारात्मक पक्ष पर, फरवरी 2019 से मौद्रिक नीति उदार हो रही है और पिछले कुछ महीनों में सरकार द्वारा शुरू किए गए उपायों से भावना और घरेलू मांग को पुनर्जीवित किए जाने की उम्मीद है। इन कारकों को ध्यान में रखते हुए 2019-20 के लिए वास्तविक जीडीपी की वृद्धि को अक्टूबर की नीति में 6.1 प्रतिशत से घटकर 5.0 प्रतिशत - दूसरी छमाही में 4.9-5.5 प्रतिशत और 2020-21 की पहली छमाही के लिए 5.9-6.3 प्रतिशत के रूप में निचले स्तर पर अनुमानित किया गया (चार्ट 2)। जबकि सुधारित मौद्रिक संचरण और वैश्विक व्यापार तनावों के त्वरित समाधान से सकारात्मक विकास अनुमानों की संभावना है, घरेलू मांग के पुनरुद्धार में देरी, वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में एक और मंदी और भू-राजनीतिक तनाव से नकारात्मक जोखिम की संभावना है।

27. एमपीसी नोट करता है कि आर्थिक गतिविधि और कमजोर हो गई है और आउटपुट अंतर नकारात्मक है। हालांकि, सरकार द्वारा पहले से ही शुरू किए गए कई उपायों और फरवरी 2019 से रिजर्व बैंक द्वारा प्रदान की गई मौद्रिक उदारता से धीरे-धीरे वास्तविक अर्थव्यवस्था के आगे बढ़ाने की उम्मीद है। कॉर्पोरेट वित्त और बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा अनुमोदित परियोजनाओं पर आकड़ें निवेश गतिविधि में वसूली के कुछ शुरुआती संकेत देते हैं हालांकि इसकी स्थिरता को बारीकी से देखने की जरूरत है। इस मोड़ पर जरूरत है, उन बाधाओं को दूर करने की जो निवेश को वापस ले रही हैं। बाहरी बेंचमार्क की शुरूआत से मौद्रिक संचरण मजबूत किए जाने की उम्मीद है। इस संदर्भ में, छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में समायोजन में अधिक लचीलेपन की आवश्यकता है। एमपीसी के निर्णय में, निकट अवधि में मुद्रास्फीति बढ़ रही है, लेकिन यह 2020-21 की दूसरी तिमाही तक लक्ष्य से नीचे रहने की संभावना है। इसलिए, मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण पर स्पष्टता हासिल करने के लिए आने वाले आकड़ों की सावधानीपूर्वक निगरानी करने में समझदारी है। इसी तरह, आगामी केंद्रीय बजट सरकार द्वारा किए जाने वाले उपायों और विकास पर उनके प्रभाव के बारे में बेहतर जानकारी प्रदान करेगा।

28. एमपीसी मानता है कि भविष्य की कार्रवाई के लिए मौद्रिक नीतिगत अवसर है। हालांकि, उभरती वृद्धि - मुद्रास्फीति गतिशीलता को देखते हुए एमपीसी ने इस समय एक विराम लेना उचित समझा है। तदनुसार, एमपीसी ने मुद्रास्फीति को लक्ष्य के भीतर रखते हुए विकास को पुनर्जीवित करने के लिए जब तक आवश्यकता है नीतिगत रेपो दर को अपरिवर्तित रखने और उदार रुख को बनाए रखने का निर्णय लिया है।

29. एमपीसी के सभी सदस्यों - डॉ.चेतन घाटे, डॉ. पामी दुआ, डॉ. रविंद्र एच. ढोलकिया, डॉ. माइकल देवव्रत पात्र, श्री बिभू प्रसाद कानूनगो और श्री शक्तिकांत दास - ने इस निर्णय के पक्ष में मतदान किया।

30. एमपीसी की बैठक के कार्यवृत्त 19 दिसंबर, 2019 तक प्रकाशित किए जाएंगे।

31. एमपीसी की अगली बैठक 4-6 फरवरी, 2020 के दौरान आयोजित की जाएगी।

पॉलिसी रेपो दर को 5.15 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने के लिए संकल्प पर मतदान
सदस्य मतदान
डॉ. चेतन घाटे हां
डॉ. पामी दुआ हां
डॉ. रवींद्र एच. ढोलकिया हां
डॉ. माइकल देवव्रत पात्र हां
श्री बिभू प्रसाद कानूनगो हां
श्री शक्तिकांत दास हाँ

डॉ. चेतन घाटे का वक्तव्य

32. वास्तविक मुद्रास्फीति की गणना में मुद्रास्फीति के अनुमान महत्वपूर्ण हैं। अंतिम समीक्षा के बाद से, 3 महीने आगे (120 बीपीएस) के मुद्रास्फीति अनुमानों में 8% से 9.2% और 1-वर्ष आगे (180 बीपीएस) मुद्रास्फीति अनुमानों में 8.1% से 9.9% तक दोनों में तेज संवृद्धि हुई है।

33. पिछले तीन वर्षों में ऐसी तेज वृद्धि नहीं देखी गई है। यहां तक कि 3- महीने आगे छंटनी का मतलब (8.7% से 9.7% तक) और एक साल आगे छंटनी का मतलब (8.6% से 9.9%) बढ़ गया है। हालांकि ये रुझान खाद्य मुद्रास्फीति में वृद्धि को अनुकूल रूप से प्रतिबिंबित कर सकते हैं, वे संभवतः वर्तमान विकास परिस्थितियों में आर्थिक नीति की अनिश्चितता में वृद्धि को भी दर्शा सकते हैं।

34. अक्टूबर में खाद्य मुद्रास्फीति 6.9% पर रही जो पिछले 39 महीने में सबसे उच्च स्तर है। वित्त वर्ष 19-20 के अप्रैल-अक्टूबर बीच खाद्य में संचयी गति पिछले तीन वित्तीय वर्षों की तुलना में अधिक है। बेमौसम बारिश से खरीफ उत्पादन और रबी की फसल की बुवाई में देरी हुई है। इससे मूल्य दबाव बढ़ रहा है। हालांकि कुछ कारण विशेष प्रवृति के हो सकते हैं, यह भी हो सकता है कि खाद्य में आगे भी झटके मिले। उदाहरण के लिए, अक्टूबर तक सब्जियों को छोड़कर भोजन की संचयी गति इस वित्तीय वर्ष में अधिक थी। मैं पिछले कई समीक्षाओं में खाद्य मुद्रास्फीति के प्रक्षेपवक्र के बारे में चिंतित हूं।

35. हेडलाइन मुद्रास्फीति 4.6% रही जो पिछले 16 माह की तुलना में उच्च स्तर पर है। इसके विपरीत, खाद्य और ईंधन को छोड़कर मुद्रास्फीति, सितंबर में 4.2% से 8 बीपीएस घटकर अक्टूबर में 3.4% हो गयी। खाद्य और ईंधन को छोड़कर मुद्रास्फीति अभी भी वित्त वर्ष 2019-20 में अपेक्षाकृत नरम संचयी गति को इंगित करती है, जो अर्थव्यवस्था में मांग की कमी को दर्शाती है। सेवाओं में निर्मित मूल्य भी आवास, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे समूहों में नरम बने हुए हैं, जिसने खाद्य और ईंधन को छोड़कर मुद्रास्फीति के गति में कमी के लिए योगदान दिया है। हालांकि न्यून सेवा क्षेत्र मुद्रास्फीति के बरकरार रहने की संभावना नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत में सेवा क्षेत्र भारी आपूर्ति के लिए विवश है।

36. आर्थिक वृद्धि लगातार कमजोर होती जा रही है। वित्तीय वर्ष 19-20 की दूसरी तिमाही में संवृद्धि 4.5% तक गिर गया, जो निवेश में 1% की वृद्धि के साथ पिछले 26 तिमाहियों में सबसे कम है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) अगस्त में -1.4% की तुलना में सितंबर (-4.3%) में संकुचन में बना रहा। आईआईपी में कमजोरी सभी खंडों में प्रकट हुई। आईआईपी की कंजोरी भी सितंबर में -5.5% तक संकुचित हो गई। रिज़र्व बैंक के औद्योगिक संभावना सर्वेक्षण (आईओएस) के आधार पर, वित्तीय वर्ष 19-20 की तीसरी तिमाही में मांग की स्थिति में निराशावाद बना रहा।

37. अभावग्रस्त विकास और बढ़ती मुद्रास्फीति के बावजूद मुझे लगता है कि मौद्रिक नीति अभी एक अच्छी जगह पर है।

38. ऐसे समसामयिक कारक हैं जो यह सुझाव देते हैं कि उन्नत-मुद्रास्फीति जोखिम चित्र के विकास पर अधिक स्पष्टता प्राप्त करना सबसे अच्छा है।

39. सर्वप्रथम, प्रति-चक्रीय मौद्रिक नीति अपर्याप्त मौद्रिक नीति संचरण के कारण अपेक्षित रूप से प्रभावी नहीं रही है। कमजोर मौद्रिक संचरण उन कारकों में से एक है, जिसके परिणामस्वरूप अर्थव्यवस्था में खराब समष्टि आर्थिक संतुलन बना हुआ है और वर्तमान में यह वित्तीय क्षेत्र में संवृद्धि ला सकता है।

40. इसमें कोई संदेह नहीं है कि बाह्य बेंचमर्किंग के साथ संचरण में सुधार आएगा क्योंकि एमसीएलआर से जुड़े ऋणों का अनुपात कम हुआ है और अधिक से अधिक ऋण बाह्य बेंचमार्क से जुड़े हैं। इसके अलावा, एनबीएफसी क्षेत्र में जोखिम में कमी को कम करने में, जिन समस्याओं के कारण टर्म प्रीमियर एलीवेटेड हो गए हैं, वे मौद्रिक नीति के बजाय "समष्टि विवेकशील नीति" के अधिकारक्षेत्र में अधिक हैं।

41. दूसरा, पिछली समीक्षा के बाद से कुछ सकारात्मक कारक सामने आए हैं। यह बताता है कि प्रतीक्षा करें और देखें का दृष्टिकोण उचित है।

42. सर्वप्रथम, नए रुपये ऋण पर डबल्यूएएलआर 44 बीपीएस (अंतिम समीक्षा में 29 बीपीएस से) गिर गया है। दर में कटौती की एक बड़ी मात्रा अभी भी संचरित नहीं की गई है और एमपीसी कुछ महीनों तक इंतजार करके कुछ भी नहीं खोता है। दूसरा, भारत में निवल एफडीआई, अप्रैल-सितंबर 2019 के बीच 20.9 बिलियन अमरीकी डालर है जो निरंतर मजबूत बन रहा है। तीसरा, निर्यात के भीतर, नकारात्मक वृद्धि दर्ज करने वाले क्षेत्रों की हिस्सेदारी अक्टूबर 2019 में घटकर 38.2% हो गई है। चौथा, अक्टूबर में, कुछ उच्च आवृत्ति संकेतक ने विकास के सकारात्मक गति में योगदान देना शुरू कर दिया है, जिससे यह पता चलता है कि यह देखने के लिए कुछ महीनों का इंतजार करना सबसे अच्छा है कि मंदी कम हो है या नहीं। पांचवां, यह देखने के लिए इंतजार करना सबसे अच्छा है कि कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती का अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा है। चूंकि 20 सितंबर को कर कटौती की घोषणा की गई थी, और रिज़र्व बैंक के कॉर्पोरेट कार्यनिष्पादन का विश्लेषण सितंबर के अंत तक हुआ था, इसलिए इस डाटा ने कर कटौती के प्रभावों को नहीं उठाया। इसके अलावा, नई कंपनियों के लिए कॉर्पोरेट टैक्स में कटौती 1 अक्टूबर के बाद ही लागू होगी। छठी, आदेश बही, माल सूची और क्षमता उपयोग सर्वेक्षण के शुरुआती परिणामों के आधार पर वित्तीय वर्ष 19-20 की दूसरी तिमाही में क्षमता उपयोग (सीयू) में 68.9% तक की व्यापक गिरावट जिसके लिए आगे स्पष्टीकरण की आवश्यकता है। महत्वपूर्ण रूप से, आईओएस में सीयू के मनोभावों का उपयोग करते हुए, वित्त वर्ष 19-20 की तीसरी तिमाही में कुछ सुधार के लिए पूर्वानुमान लगाया गया है। सातवां, उपभोग व्यय (पीएफसीई) की वृद्धि दर वित्त वर्ष 19-20 की पहली तिमाही में 3.1% से थोड़ा बढ़कर वित्त वर्ष 19-20 की दूसरी तिमाही में में 5% से थोड़ा अधिक हो गई है जो कि अपस्फीतिकारक प्रभाव के बावजूद उल्लेखनीय है। आठवीं, विनिर्माण और सेवाओं दोनों में पीएमआई उनके सबसे हालिया गणना में मजबूत हुआ है। नौवीं, वैश्विक अर्थव्यवस्था में जोखिम का माहौल थोड़ा कम होने का संकेत देता है कि वैश्विक मंदी के जोखिम कम हो गए हैं।

43. हालांकि मुझे चिंता है कि संगठित क्षेत्र में वास्तविक वेतन वृद्धि पिछली समीक्षा के बाद और कमजोर हुई है। ग्रामीण क्षेत्र में, कमजोर मांग की स्थिति शहरी क्षेत्र द्वारा संचालित "वन लेग्ड" वसूली की संभावना को जोड़ती है।

44. मैं रुकने के लिए मतदान करता हूं। मैं रुख को निभावकारी बनाए रखने के लिए भी मतदान करता हूं। मैं डाटा पर निर्भर रहूंगा, आगे बढ़ते हुए; आगे की मौद्रिक नीति कार्रवाई उन्नत विकास-मुद्रास्फीति की गतिशीलता पर निर्भर करेगी।

डॉ. पामी दुआ

45. सीपीआई मुद्रास्फीति द्वारा मापी जाने वाली हेडलाइन मुद्रास्फीति, अगस्त में 3.3% और सितंबर 2019 में 4% से अक्टूबर में 4.6% तक बढ़ गई। सितंबर में खाद्य महंगाई दर 4.7% से बढ़कर अक्टूबर में 6.9% हो गई, जिसका मुख्य कारण सब्जियों, फलों, दालों, दूध और अनाज में मुद्रास्फीति में वृद्धि है। खाद्य और ईंधन को छोड़कर मुद्रास्फीति सितंबर में 4.2% से कम होकर अक्टूबर में 3.4% हो गई, जो अनुकूल आधार प्रभावों को दर्शाती है, साथ ही घरेलू मांग को सौम्य बनाती है।

46. आगे बढ़ते हुए, आरबीआई के मुद्रास्फीति प्रत्याशा सर्वेक्षण के माध्यम से से कैप्चर परिवार के मुद्रास्फीति अनुमान संभवतः खाद्य कीमतों में तेज वृद्धि के कारण सितंबर दौर की तुलना में नवंबर 2019 दौर में तीन महीने के आगे क्षितिज के लिए 120 आधार अंक और एक साल के आगे क्षितिज के लिए 180 आधार अंक बढ़ी। उसी समय, औद्योगिक संभावना सर्वेक्षण (आईओएस) 2019-20 की चौथी तिमाही में विनिर्माण की कीमतों में मंद बिक्री अनुमान दिखाता है साथ ही साथ इनपुट लागत दबाव भी कम करता है।.

47. सब्जियों की कीमतों में वृद्धि निकट भविष्य में जारी रहने की उम्मीद है, लेकिन खरीफ के विलंब से उच्चता से आने और उसके बाद रबी के मौसम के साथ -साथ आयात द्वारा आपूर्ति को बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा किए गए उपाय के कारण फरवरी 2020 में मंद रहेगी ।

48. आउटपुट पक्ष पर, जीडीपी वृद्धि 2019-20 की दूसरी तिमाही में लगातार छठी बार पिछली तिमाही में 5% की तुलना में 4.5% (वर्ष-दर-वर्ष) तक गिर गई। निजी अंतिम उपभोग व्यय में वृद्धि पिछली तिमाही में 3.1% की तुलना में 5.1% थी और सरकारी अंतिम उपभोग व्यय में वृद्धि 15.6% हो गई, जबकि सकल पूंजी निर्माण में वृद्धि तेजी से धीमी हो गई। सरकारी अंतिम उपभोग व्यय को छोड़कर, जीडीपी की वृद्धि दर 3.1% है, जो निजी घरेलू मांग में कमजोरी को रेखांकित करती है। जीवीए में वृद्धि भी 2019-20 की दूसरी तिमाही में 4.3% तक गिर गई, जिसका मुख्य कारण विनिर्मान क्षेत्र में संकुचन के साथ-साथ सेवाओं में मंदी है।

49. सर्वेक्षण के आंकड़ों की ओर रुख करते हुए, आरबीआई के आदेश बही, माल सूची और क्षमता उपयोग सर्वेक्षण (ओबीआईसीयूएस) के शुरुआती परिणाम विनिर्माण क्षेत्र में क्षमता उपयोग में गिरावट का सुझाव देते हैं। विनिर्माण क्षेत्र के लिए रिज़र्व बैंक के के औद्योगिक संभावना सर्वेक्षण के शुरुआती परिणामों के आधार पर व्यावसायिक मूल्यांकन सूचकांक (माँग संकेतकों का एक संयोजन) 2019-20 की तीसरी तिमाही में संकुचन में रहा। आरबीआई के उपभोक्ता विश्वास सर्वेक्षण के अनुसार, वर्तमान स्थिति सूचकांक और भविष्य अनुमान सूचकांक दोनों नवंबर 2019 के दौर में घट गए, जिससे न्यून वर्तमान गतिविधि और न्यून आशावादी दृष्टिकोण का संकेत देता है। इस बीच, और नवंबर में विनिर्मान क्रय प्रबंधक सूचकांक अक्टूबर में 50.6 से बढ़कर नवंबर में 51.2 हो गया, जो नए ऑर्डर और आउटपुट में बढ़ोतरी को दर्शाता है।

50. इस प्रकार, कुल मिलाकर, निजी खपत और निवेश गतिविधि कमजोर है, और व्यापार और उपभोक्ता मनोभाव कुछ हद तक नीचे है। इसके अलावा, निर्यात वृद्धि आयात वृद्धि की तुलना में कम संकुचित हुआ है, जो यह दर्शाता है कि वैश्विक विकास में कमजोरी की तुलना में घरेलू मांग में मंदी कुछ अधिक तीव्र हो सकती है।

51. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, वैश्विक औद्योगिक विकास में एक चक्रीय मंदी के कुछ संकेत अब ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं। फ्रांस और जर्मनी दोनों के लिए औद्योगिक विकास की संभावनाओं में सुधार हुआ है, हालांकि अमेरिका के औद्योगिक दृष्टिकोण में मंदी रही है। चीनी अर्थव्यवस्था की संभावनाएं मजबूर बना हुआ है, जबकि जापान मंदी की स्थिति से जूझ रहा है। कुल मिलाकर, आर्थिक चक्र अनुसंधान संस्थान (ईसीआरआई) के अंतर्राष्ट्रीय प्रमुख सूचकांक के अनुसार वैश्विक अर्थव्यवस्था में अगले कुछ महीनों में आर्थिक विकास में विषम सुधार होने की संभावना है। हालांकि, दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक विकास को गतिरोध से बाहर निकालने के लिए लोकोमोटिव के रूप में कार्य करने की स्थिति में नहीं हैं और इसलिए भारतीय अर्थव्यवस्था को अधिक गति प्रदान करने में सक्षम नहीं होंगी। इस प्रकार, भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए विकास के परिचालक को अर्थव्यवस्था के भीतर से होना चाहिए। इस बीच, ईसीआईआर के भारतीय संयोग सूचकांक में वृद्धि कम होती दिख रही है, जिसमें थोड़ी देर से सुधार हुआ है।

52. घरेलू स्तर पर, मौद्रिक नीति के नजरिए से, विभिन्न मुद्रा और कॉर्पोरेट ऋण बाजारों के लिए फरवरी से अक्टूबर 2019 तक नीतिगत रेपो दर में 135 आधार अंकों की संचयी कमी का मौद्रिक संचरण गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के 3 माह सीपी में 218 आधार अंकों के लिए ओवरनाइट मांग मुद्रा बाजार में 137 आधार अंकों की सीमा में रहा है। सरकारी प्रतिभूति बाजार में संचरण 5 साल की सरकारी प्रतिभूतियों के लिए 113 आधार अंकों पर और 10 साल की सरकारी प्रतिभूतियों के लिए 89 आधार अंकों पर असंपूर्ण रहा है। इस अवधि के दौरान बैंकों द्वारा मंजूर किए गए नए रुपये ऋणों पर भारित औसत उधार दर (डबल्यूएएलआर) 44 आधार अंकों तक गिर गई। आगे बढ़ते हुए, हाल ही में ऋण देने की दर को बाहरी बेंचमार्किंग से जोड़ने से लंबित संचरण में तेजी आने की उम्मीद है, अधिकांश बैंकों ने अपनी ऋण दरों को पॉलिसी रेपो दर से जोड़ा है।

53. आगे, मैंने पिछली नीति में जो कहा था उसे दोहराने चाहती हूँ, विकास मंदी को उलटने के लिए भारी नीति को बहु-आयामी दृष्टिकोण होना चाहिए। इस संबंध में, सरकार द्वारा विकास को पुनर्जीवित करने पर ध्यान केंद्रित करते हुए कई उपाय किए गए हैं। इनमें एफडीआई के मानदंडों को शिथिल करने, निर्बाध कर प्रशासन पर ध्यान केंद्रित करने, व्यापार करने में आसानी में सुधार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को समेकित करने और बैंकिंग क्षेत्र से वित्तीय और वास्तविक अर्थव्यवस्था क्षेत्रों में ऋण के प्रवाह को प्रोत्साहित करने के कदम शामिल हैं। सरकार ने कॉरपोरेट आय कर पर मुख्य ओवरहाल के रूप में राजकोषीय प्रोत्साहन का काम भी किया है, जिसका उद्देश्य कॉरपोरेट्स पर कर के कुल बोझ को कम करना है और इससे भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सुधार करना है। इस तरह के उपायों से निवेश के माहौल को बेहतर बनाने और भारत में अधिक पूंजी प्रवाह को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।

54. उसी समय में, कम आय वाले सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर के साथ-साथ राजस्व संग्रह में कमी राजकोषीय क्षय के जोखिम को बढ़ाती है। इस प्रकार, इस मोड़ पर, विकास को पुनर्जीवित करने की सरकार की पहल पर आगामी बजट से संकेत लेना समझदारी होगी।

55. इस प्रकार, निकट भविष्य में लंबित मौद्रिक संचरण की वसूली के उम्मीद के साथ, सरकार द्वारा पहले से ही किए गए विकास मंदी को दूर करने के लिए अपेक्षित उपाय, और आगामी बजट में घोषित किए जाने वाले विकास पहलों के लिए प्रतीक्षा करें और देखें दृष्टिकोण में एक मेरिट है कि यह देखा जाए कि ये उपाय निवेश सहित वास्तविक आर्थिक गतिविधियों को कैसे प्रभावित करते हैं, आगे जा रहे हैं।

56. एक ही समय में, जबकि विकास धीमा हो रहा है, हेडलाइन मुद्रास्फीति का अनुमान है कि निकट अवधि में वृद्धि होगी, लेकिन 2020-21 की दूसरी तिमाही में लक्ष्य से नीचे रहेगी। इस समय, यह मुद्रास्फीति और वृद्धि दोनों पर आने वाले आंकड़ों की निगरानी करने के लिए सबसे अच्छा है।

57. इसलिए, मैं नीतिगत दर को अपरिवर्तित रखने और निभावकारी रुख को जारी रखने के लिए वोट करती हूं।

डॉ. रवींद्र एच. ढोलकिया का वक्तव्य

58. एमपीसी की अक्टूबर 2019 की बैठक के बाद सितंबर और अक्टूबर 2019 की मुद्रास्फीति काफी अधिक हो गई जिसके परिणामस्वरूप अगले वर्ष के पूर्वानुमान में महत्वपूर्ण ऊर्ध्वगामी संशोधन के साथ आरबीआई का पूर्वानुमान 2019-20 की तीसरी तिमाही के लिए 160 बीपीएस से अधिक होने का अनुमान लगाया गया है। इसी तरह 2019-20 की दूसरी तिमाही के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान न केवल 80 बीपीएस से कम हो गया है बल्कि आरबीआई के 2019-20 की पहली तिमाही में विकास में कमी के आकलन के विपरीत है। जैसा कि मैंने अक्टूबर एमपीसी के कार्यवृत्त के अपने वक्तव्य में बताया था कि वर्तमान वर्ष के दौरान आरबीआई की 6.1% वृद्धि का पूर्वानुमान एक आशावादी पक्ष पर था और यह पूरा नहीं होगा। अब आरबीआई ने अपने अनुमान को काफी हद तक घटाकर 5% कर दिया है जो कि स्वीकार्य है। खाद्य मुद्रास्फीति में तेज वृद्धि अगले दो-तीन महीनों तक जारी रह सकती है जो हेडलाइन मुद्रास्फीति को मध्य-बिंदु लक्ष्य के ऊपर और लचीली लक्ष्य सीमा के ऊपरी हिस्से के करीब ले जाएगी ।आरबीआई द्वारा 2020-21 की दूसरी तिमाही तक की 4 तिमाहियों के लिए मुद्रास्फीति का पूर्वानुमान कुछ मान्यताओं पर आधारित है जिनमें कई अनिश्चितताएं शामिल हैं। इसलिए, मैं इस बिंदु पर कुछ आरक्षण के साथ 2020-21 की दूसरी तिमाही के लिए 3.8% की हेडलाइन मुद्रास्फीति के आरबीआई पूर्वानुमान को लेता हूं।मुद्रास्फीति की उम्मीदें जो हाल के दिनों तक सहारे पर थीं, इस अवधि के दौरान बढ़ सकती हैं जैसा कि भारतीय रिजर्व बैंक के परिवार सर्वेक्षण और आईआईएमए व्यवसायों के सर्वेक्षण से स्पष्ट है, हालांकि स्थिति नियंत्रण से बाहर नहीं हो सकती है। इसके अलावा, वर्तमान वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही के दौरान संभवतः राजकोषीय और मौद्रिक नीति पर चक्रीय उपायों के जवाब में संवृद्धि के पुनरुद्धार के नूतन संकेत हैं, लेकिन उन्हें अधिक आंकड़ों के साथ पुष्टि की आवश्यकता है। मैंने पिछली नीति में 40-बीपीएस दर में कटौती के लिए तर्क दिया था और मैं अभी भी यह मानता हूं कि अभी भी दर में कटौती की गुंजाइश है । प्रश्न समय और परिमाण का है। मेरे विचार में नीति के पक्ष पर निर्णायक कार्रवाई करने से पहले विकास दर - मुद्रास्फीति की गतिशीलता पर स्पष्टता के लिए प्रतीक्षा करना और देखना और इस मोड़ पर कुछ और विश्वास हासिल करना विवेकपूर्ण है।इस बीच, बाजारों में पहले से बने दर में कटौती के समायोजन के लिए पर्याप्त समय है।इसलिए, मैं अभी के लिए 5.15% पर पॉलिसी रेपो दर रखने के लिए वोट करता हूं और निभावकारी रुख के साथ रहूँगा। मेरे वोट के अधिक विशिष्ट कारण इस प्रकार हैं -

i) हालांकि हेडलाइन मुद्रास्फीति में वर्तमान उछाल यकीनन खाद्य पदार्थों पर अस्थायी आपूर्ति झटके के कारण है, यह प्रभाव केवल कुछ वस्तुओं तक ही सीमित नहीं है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि इसका प्रभाव कितना और कितने समय तक रहेगा। भारतीय रिज़र्व बैंक के नवीनतम सर्वेक्षण के अनुसार तीन महीने और बारह महीने की अवधि के लिए परिवार मुद्रास्फीति की उम्मीदों में 120 बीपीएस और 180 बीपीएस की तेजी देखी गई। इस प्रकार, सर्वेक्षण किए गए परिवारों का मानना है कि बढ़ी हुई मुद्रास्फीति एक अस्थायी घटना नहीं है बल्कि आने वाले पूरे वर्ष में बढ़ती जा सकती है। दूसरी ओर, आईआईएम अहमदाबाद सर्वे ऑफ बिज़नेस आगे के 12 महीने के लिए अपनी मुद्रास्फीति की अपेक्षा में केवल 10 बीपीएस की वृद्धि दर्शाता है जो संकेत देता है कि वर्तमान उछाल अस्थायी है। भारतीय रिज़र्व बैंक के अपने पूर्वानुमान उत्तरवर्ती का समर्थन करते हैं लेकिन वे कई अनिश्चितताओं से घिरे हुए कुछ महत्वपूर्ण मान्यताओं पर आधारित हैं। अधिक डेटा के साथ इस पर स्पष्टता महत्वपूर्ण है।

ii) 3 मार्च 2018 को इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली में प्रकाशित सह-लेखक के साथ मेरा खुद का शोध बताता है कि हाल के मुद्रास्फीति गतिशीलता के अनुसार कोर मुद्रास्फीति पर बाह्य आघात (जैसे खाद्य या ईंधन की कीमते) के दूसरे दौर के प्रभाव, यदि हैं तो, काफी कम हैं। अतीत की तुलना में यह हेडलाइन मुद्रास्फीति की है जो कोर में बदलती है बजाय इसके कि कोर हेडलाइन में बदल जाती है। उपभोक्ता विश्वास पर भारतीय रिज़र्व बैंक का हालिया सर्वेक्षण इस तर्क को कुछ समर्थन प्रदान करता है। इससे पता चलता है कि खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेज वृद्धि के जवाब में, गैर-आवश्यक वस्तुओं की खपत कम हुई जो बताती है कि भोजन और गैर-खाद्य खपत के बीच संपर्क की संभावना कम हो गई है। इसलिए, यह कहा जा सकता है कि मुख्य रूप से खाद्य पदार्थों पर आधारित खाद्य की अपेक्षाओं के परिणामस्वरूप कोर प्रसंस्करण में वृद्धि नहीं हो सकती है। हालाँकि, हमें इस तर्क की पुष्टि या विरोध करने के लिए कुछ और ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है।.

iii) यद्यपि भारतीय रिज़र्व बैंक सर्वेक्षण के शुरुआती परिणामों के अनुसार क्षमता उपयोग 2019-20 की दूसरी तिमाही में 70% से भी कम हो गया है, अर्थव्यवस्था में विकास संवृद्धि के कई नूतन संकेत हैं। विनिर्माण के साथ-साथ सेवाओं में पीएमआईपूर्ववर्ती संकुचन से विस्तार मोड में बदल गया, जो पर्याप्त संवृद्धि की ओर संकेत करता है। भारतीय रिज़र्व बैंक के सर्वेक्षण से पता चला है कि पहले के बचतकर्ता कॉर्पोरेट्स निवेशकों में बदल गए हैं। लंबे समय के बाद कॉर्पोरेट अपनी भौतिक संपत्ति बढ़ा रहे हैं, न कि वित्तीय संपत्ति। ऋण बाजारों में दर में कटौती का प्रसारण हो रहा है और उधार दरों के लिए बाह्य बेंचमार्क की नीति के कारण इसके और आगे बढ़ने की संभावना है। भारतीय रिज़र्व बैंक के अपने पूर्वानुमान से पता चलता है कि 2019-20 की दूसरी तिमाही में विकास में कमी आई है और धीरे-धीरे संवृद्धि तीसरी और चौथी तिमाही में होगी और अगले साल भी जारी रहेगी। वर्तमान वर्ष के लिए उच्च आवृत्ति आंकड़े और जीडीपी के अग्रिम अनुमानों को इस संवृद्धि की सीमा और गति की सावधानीपूर्वक जांच करने के लिए देखे जाने की आवश्यकता है क्योंकि यह हेडलाइन मुद्रास्फीति पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।

iv) 2020-21 के केंद्रीय बजट और 2019-20 के लिए आर्थिक सर्वेक्षण अगले कुछ महीनों में आने वाले हैं। जैसा कि मैंने पहले भी कहा विकास संवृद्धि के पुनरुद्धार का समाधान केवल सुविधाजनक भूमिका निभाते हुए मौद्रिक नीति के साथ राजकोषीय नीति द्वारा मौलिक और मजबूत रूप से किया जाना चाहिए। इसलिए बजट और आर्थिक सर्वेक्षण में उल्लिखित राजकोषीय उपायों का रुख, सामग्री और प्रतिबद्धता को विकास चिंताओं पर अत्यंत उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान करना चाहिए। मेरी राय में मौद्रिक नीति को उन प्रयासों का पूरक होना चाहिए बशर्ते कि मुद्रास्फीति के जोखिम दिए गए लक्ष्य सीमा के भीतर निहित हों। इस संदर्भ में मैं राजकोषीय स्लिपेज के बारे में चिंताओं पर अपने पहले के तर्कों को दोहराना चाहूंगा। जब गंभीर विकास मंदी के कारण चक्रीय गिरावट होती है तो राजकोषीय नीति के मापदंडों में कोई बदलाव किए बिना भी राजकोषीय स्लिपेज की उम्मीद करना तर्कसंगत है। यदि मामूली आय वृद्धि अनुमान से गंभीर रूप से कम हैं तो राजस्व लक्ष्य से कम ही रहेगा। यदि ऐसी परिस्थितियों में राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को बनाए रखने के लिए व्यय में कटौती की जाती है तो यह मंदी के दौरान एक संकुचन वाली राजकोषीय नीति होगी !! आम तौर पर राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों जैसी स्थिरीकरण नीतियों को प्रति-चक्रीय होना चाहिए न कि चक्रीय-समर्थक। ऐसी परिस्थितियों में जीडीपी के 3% राजकोषीय अनुशासन लक्ष्य को अधिक बल नहीं देना चाहिए और इसे अस्थायी रूप से अनदेखा किया जा सकता है। यद्यपि एन.के. सिंह समिति ने ऐसी अनिवार्य परिस्थितियों में 50 बीपीएस स्लिपेज का प्रावधान किया है, केवल 50 बीपीएस स्लिपेज के लिए कोई तर्क नहीं है। इसलिए, मेरी राय में वर्तमान परिस्थितियों में 50 से अधिक आधार अंकों की स्लिपेज को उचित ठहराया जा सकता है। वर्तमान में मौद्रिक मोर्चे पर आगे की कार्रवाई से पहले विकास की मंदी से निपटने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता और कार्रवाई की स्पष्टता की प्रतीक्षा करना मेरे विचार में महत्वपूर्ण है।

59. इन सभी तर्कों को देखते हुए नीति दर पर एक ठोस कार्रवाई के लिए और अधिक स्पष्टता की प्रतीक्षा करना व्यावहारिक है। इस बीच पिछली दर में कटौती का अपेक्षित बेहतर प्रसारण किसी भी स्थिति में उद्देश्य की पूर्ति करेगा। निभावकारी रूख जारी रहना चाहिए, लेकिन इस नीति में हमें रेपो दर 5.15% पर रखना चाहिए।

डॉ. माइकल देवव्रत पात्र का वक्तव्य

60. इस बैठक में एमपीसी द्वारा सामना किए जानेवाली मैक्रोइकॉनॉमिक और वित्तीय परिस्थितियों के संगठन में परस्पर विरोधी खिंचाव है। वास्तव में, वास्तविक जीडीपी विकास में मंडी के कारण समायोजक मौद्रिक नीतिगत कार्रवाइयों और रुख की अपेक्षा है, जबकि नौ महीने के उत्तराधिकार के बाद तीसरे महीने के लिए हेडलाइन मुद्रास्फीति में वृद्धि एक विपरीत प्रतिक्रिया या कम से कम स्थिति को बनाए रखने की स्थिति की मांग करती है जब तक कि यह अनुमान लगाने के लिए कोई आधार हो कि खाद्य मूल्य चक्र जो इसे चला रहे हैं, वे अवनति पर हैं।

61. इस संदर्भ में, मुद्रास्फीति में हालिया उतार-चढ़ाव की दो विशेषताएं मौद्रिक नीति निर्णय पर आधारित होती हैं। पहला, अगले दो या तीन महीनों में मौजूदा रीडिंग से अधिक की उम्मीद करना समझदारी है और फरवरी 2019 में शुरू हुई दर में कटौती के अनुक्रम में एक ठहराव की आवश्यकता है। दूसरा, मुद्रास्फीति का दबाव सब्जी की कीमतों से लेकर खाद्य और पेय पदार्थों के अन्य तत्वों की ओर घूम रहा है। वर्तमान गणना से, सब्जियों की कीमतें 2019-20 की चौथी तिमाही से पलटने की उम्मीद की जा सकती है क्योंकि आपूर्ति की स्थिति में सुधार हो रहा है। इसलिए, मौद्रिक नीति निर्धारित करते समय इन बातों पर ध्यान दिया जा सकता है। अहम सवाल यह है कि क्या अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में उल्टा असर होगा या बना रहेगा, खासकर दाल और दूध पर ? यदि यह जारी रहता है, तो क्या यह गैर-खाद्य मुद्रास्फीति में फैल जाएगा? यह भी आने वाले कुछ महीनों में आने वाले आंकड़ों की कड़ी निगरानी से देखा जा सकता है और इसलिए, विराम जरूरी है।

62. वास्तविक अर्थव्यवस्था की ओर मुड़ते हुए, समग्र गतिविधि में मंदी यदि कमजोर न हो जाए, तो संभवतः तीसरी तिमाही तक लम्बी हो सकती है। विशेष रूप से, निवेश की मांग में वृद्धि में तेज गिरावट, पहले से ही किए गए कार्यों को मजबूत करने के लिए तत्काल नीतिगत प्रतिक्रियाओं की मांग कर सकती है। इस प्रयास में मौद्रिक नीति का योगदान पूंजी की लागत को कम करना हो सकता है। टर्नअराउंड लाने के लिए, हालांकि, निवेश से भविष्य की आय धाराओं का शुद्ध वर्तमान मूल्य पूंजी की लागत से अधिक होना चाहिए। यह व्यवसाय-अनुकूल वातावरण में एनिमल स्पिरिट को फिर से जागृत करने का प्रयास करेगा, जो करीबी और निरंतर नीति समन्वय के महत्व को उजागर करेगा। मौद्रिक नीति विकास का समर्थन करने में पहले से ही प्री-एम्पटिव रही है और विकास को पुनर्जीवित करने तक इसे समायोजन मोड में रखना एक प्रतिबद्धता है। ब्याज दर में 135 आधार बिंदुओं की कटौती और राजकोषीय नीति के साथ अर्थव्यवस्था में अपना काम करने वाली नीतिगत कार्रवाइयां इस बैठक में इस पास-थ्रू को अनुमति देने के लिए और दृढ़ और कैलिब्रेटेड नीतिगत कार्रवाइयों के साथ कर्षण के संकेतों का समर्थन करने के लिए तत्पर है।

63. इस बैठक में यथास्थिति के लिए मतदान करते समय, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि विकास के आवेगों को कम करने के लिए अवसर और उपाय उपलब्ध है। इस उद्देश्य के साथ, मैं मौद्रिक नीति के समायोजक रुख को बनाए रखने के लिए वोट देता हूं।

श्री बिभू प्रसाद कानूनगो का वक्तव्य

64. अक्टूबर की नीति के बाद से, वृद्धि और मुद्रास्फीति के परिणामों ने अक्टूबर नीति में रिजर्व बैंक द्वारा अनुमानित अपने पथों से महत्वपूर्ण रूप से विचलन किया है। सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (जीएफ़सीई) में 15.6 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि के बावजूद 2019-20 की दूसरी तिमाही में वास्तविक जीडीपी विकास दर 4.59 (वर्ष-दर-वर्ष) पहले अनुमानित 5.3 प्रतिशत की तुलना में अधिक कमजोर रहा। हालांकि निजी खपत में सुधार हुआ, नियत निवेश मात्र 1 प्रतिशत की दर से बढ़ा। जीवीए की तरफ औद्योगिक और सेवा विकास धीमा हो गया जबकि कृषि विकास में थोडी वृद्धि हुई।

65. दूसरी तिमाही में आठ प्रमुख उद्योगों का सूचकांक 2011-12 की श्रृंखला में सबसे कम वृद्धि दर्ज करते हुए सितंबर 2019 में 5.1 प्रतिशत की दर से संकुचित होकर अक्टूबर 2019 के दौरान 5.8 तक और संकुचित हुआ। अन्य उच्च आवृत्ति संकेतक, सीमेंट उत्पादन, अंतर्राष्ट्रीय के बीच एयर कार्गो ट्रैफिक और रेलवे फ्रेट ट्रैफिक अक्टूबर में और संकुचित हुए। सकारात्मक पक्ष पर, यात्री वाहनों की बिक्री और घरेलू हवाई यात्री यातायात - शहरी मांग के संकेतकों में अक्टूबर में सकारात्मक वृद्धि देखी गई, जबकि मोटर साइकिल की बिक्री - ग्रामीण मांग के संकेतक में सितंबर की तुलना में और निचे की ओर संकुचन हुआ। नवंबर में विनिर्माण और सेवाओं के लिए पीएमआई में सुधार हुआ। रबी की बुआई रफ्तार पकड़ रही है। पर्याप्त जलाशय का स्तर अच्छी रबी संभावनाओं को दर्शाता है। 2019-20 के लिए विकास अनुमान को पिछली पॉलिसी के 6.1 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दिया गया है।

66. मुद्रास्फीति के मोर्चे पर, अक्टूबर में बेमौसम बारिश और नवंबर की शुरुआत में कुछ फसलों को नुकसान पहुंचा है और मंडी आगमन पैटर्न भी बाधित हुआ है। नतीजतन, अस्थायी मांग-आपूर्ति असंतुलन के कारण कई सब्जियों, खासकर प्याज की कीमतों में दबाव बढ़ गया। 2020-21 की पहली छमाही के दौरान, रबी आपूर्ति के जवाब में खाद्य कीमतों में नरमी का अनुमान है। भोजन और ईंधन को छोड़कर सीपीआई में मुद्रास्फीति के दबाव मांग की स्थितियों में निरंतर सुधार के कारण नरम हो रहे हैं। घरों की औसत मुद्रास्फीति की उम्मीदें, जो कुछ हद तक पिछड़ी हुई हैं और खाद्य मुद्रास्फीति के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं, तीन महीने आगे के क्षितिज के लिए 8 प्रतिशत से 9.2 प्रतिशत तक और एक वर्ष आगे के क्षितिज के लिए 8.1 प्रतिशत से 9.9 प्रतिशत तक मजबूती हुए है।

67. 2019-20 की दूसरी छमाही के लिए हेडलाइन मुद्रास्फीति के पहले के 3.5 से 3.7 प्रतिशत के मुकाबले अब 5.1 से 4.7 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है। हालाँकि 2020-21 की दूसरी तिमाही में धीरे-धीरे मुद्रास्फीति में लक्ष्य से नीचे की ओर सुधार होगा।

68. फरवरी 2019 से रेपो दर में 135 बीपीएस की संचयी कमी आई है, अक्टूबर तक ताजा रुपये के ऋणों पर भारित औसत उधार दर (डब्लूएएलआर) में 44 बीपीएस की कमी आई है, जो उम्मीद से कम है। हालांकि, यह प्रोत्साहक है कि खुदरा (आवास, वाहन, शिक्षा ऋण, आदि) और सूक्ष्म और लघु उद्यमों (एमएसई) क्षेत्रों में नए फ्लोटिंग दर ऋणों की बाहरी बेंचमार्किंग की शुरूआत के बाद ट्रांसमिशन में कुछ सुधार हुआ है। अक्टूबर 2019 में बाहरी बेंचमार्किंग प्रणाली की शुरुआत के बाद, अधिकांश बैंकों ने अपनी उधार दरों को पॉलिसी रेपो दर से जोड़ा है। अक्टूबर में भारित औसत सावधि जमा दर (डब्लूएटीडीआर) में 9 बीपीएस की गिरावट आई, जो मौद्रिक संचरण को लिए अच्छी तरह से आगे बढ़ा रही है।

69. एमपीसी ने संचयी रूप से रेपो दर को 135 आधार अंकों से कम किया है, जिसका प्रभाव धीरे-धीरे वास्तविक अर्थव्यवस्था पर महसूस किया जाएगा। खाद्य कीमतों में तेज वृद्धि से मुद्रास्फीति में मौजूदा उतार-चढ़ाव उल्टा होने की उम्मीद है। हालांकि, खाद्य मूल्य प्रक्षेपवक्र पर काफी अनिश्चितता है, और खरीफ उत्पादन पर बेमौसम बारिश के प्रभाव की मात्रा केवल अगले साल की शुरुआत में ही पता चलेगी। आने वाला डेटा ग्रोथ आउटलुक पर अधिक स्पष्टता भी प्रदान कर सकता है। मैं इस समय इस नीति दर में ठहराव के लिए वोट करता हूं। आने वाले डेटा के लिए इंतजार करना और विचार करना बेहतर है। यहां तक ​​कि भविष्य की मौद्रिक नीति कार्रवाई के लिए अवसर मौजूद होने के बावजूद, इस मोड़ पर ठहराव भविष्य में उचित नीति प्रतिक्रिया को जांचने में मदद करेगा। मैं तब तक दृढ़ता से समायोजन रुख के लिए वोट देता हूं जब तक कि लक्ष्य के भीतर मुद्रास्फीति को बनाए रखते हुए विकास को पुनर्जीवित करना आवश्यक हो।

श्री शक्तिकांत दास का वक्तव्य

70. 2019-20 की दूसरी तिमाही में, लगातार छठी तिमाही में जीडीपी विकास दर में गिरावट के साथ आर्थिक गतिविधियां कमजोर रही हैं। जीडीपी के दो मुख्य घटकों में से, जबकि निवेश गतिविधि अधिक कमजोर हो गई, निजी खपत में सुधार के संकेत मिले है। सीपीआई मुद्रास्फीति पिछले तीन महीनों में बढ़ी है और सब्जी की कीमतों और कुछ अन्य खाद्य पदार्थों में मूल्य दबाव को दर्शाती है। हालांकि, खाद्य और ईंधन को छोड़कर मुद्रास्फीति चार प्रतिशत से नीचे चली गई, जो घरेलू मांग की स्थिति को दर्शाता है। व्यापार संघर्षों से संबंधित अनिश्चितता के जारी रखने से वैश्विक आर्थिक गतिविधि कमजोर बनी हुई है। प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने समायोजित मौद्रिक नीति रुख बनाए रखा है।

71. सितंबर और आगे अक्टूबर में हेडलाइन मुद्रास्फीति तेजी से बढ़ी, सब्जियों की कीमतों में अचानक वृद्धि हुई क्योंकि देश के कई हिस्सों में बेमौसम बारिश के कारण खरीफ की फसल खराब हो गई थी; प्याज की कीमतों में वृद्धि विशेष रूप से तेज थी। पिछले दो वर्षों की तुलना में दाल, अनाज, फल और चीनी जैसे कुछ गैर-वनस्पति खाद्य पदार्थों की कीमतें तेज गति से बढ़ीं। कुल मिलाकर, अक्टूबर में खाद्य समूह की मुद्रास्फीति 39 महीने के उच्च स्तर पर थी। एलपीजी की कीमतों में लगातार गिरावट के कारण मुख्य रूप से अक्टूबर में लगातार चौथे महीने ईंधन समूह की मुद्रास्फीति में कमी रही। हालांकि, बिजली की कीमतें कई राज्यों में बढ़ गई हैं।

72. अक्टूबर में पूरे समय के लिए खाद्य और ईंधन को छोड़कर सीपीआई मुद्रास्फीति 3.4 प्रतिशत के निम्न स्तर पर रही। मजबूत अनुकूल आधार प्रभाव के अलावा, परिवहन किराए, टेलीफोन शुल्क, ट्यूशन फीस, मनोरंजन और घर के किराये जैसी कई सेवाओं में भी मूल्य वृद्धि को नियंत्रित रही है। रिज़र्व बैंक द्वारा किए गए सर्वेक्षण के आखिरी दौर में परिवारों की मुद्रास्फीति की उम्मीदें हालांकि दोनों, 3 महीने आगे और 12 महीने आगे के क्षितिज के लिए तेजी से बढ़ीं जोकि संभवतः खाद्य कीमतों में तेज वृद्धि को दर्शाती हैं। सीपीआई मुद्रास्फीति 2020-21 की पहली छमाही के लिए 4.0-3.8 प्रतिशत तक संशोधित होने से पहले 2019-20 की दूसरी छमाही के लिए 5.1-4.7 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है।

73. आर्थिक गतिविधि की ओर मुड़ते हुए, 2019-20 की दूसरी तिमाही के लिए सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि पहली तिमाही में 5.0 प्रतिशत से 4.5 प्रतिशत तक घट गई: रिज़र्व बैंक ने अपनी अक्टूबर की नीति में दूसरी तिमाही के लिए सकल घरेलू उत्पाद में 5.3 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया था।हालांकि निजी खपत में पहली तिमाही में 3.1 से दूसरी तिमाही में 5.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, यह देखना होगा कि क्या यह वृद्धि बनी रहती है। आर्थिक गतिविधि को एक मजबूत समर्थन प्रदान करने के लिए सरकारी अंतिम उपभोग व्यय बढ़ गया, जिसके अभाव में विकास और भी कम होता। आपूर्ति पक्ष पर, विनिर्माण गतिविधि संकुचीत हुई। रिज़र्व बैंक द्वारा किए गए ऑर्डर बुक, इन्वेंट्री और क्षमता उपयोग (ओबीआईसीयूएस) सर्वेक्षण के शुरुआती परिणामों से पता चलता है कि विनिर्माण क्षेत्र में क्षमता का उपयोग 2019-20 में पहली तिमाही में 73.6 प्रतिशत से घटकर दूसरी तिमाही में 68.9 प्रतिशत हो गया। सार्वजनिक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाओं (पीएडीओ) में वृद्धि के बावजूद सेवा क्षेत्र की गतिविधि में कमी आई है।

74. हालांकि, दूसरी तिमाही के अतिरिक्त कुछ सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। खरीफ की कटाई में देरी और अक्टूबर की शुरुआत और नवंबर की शुरुआत में बेमौसम बारिश की वजह से रबी की बुआई काफी कम हो गई है। 28 नवंबर को पूरे जलाशय के स्तर के 86 प्रतिशत तक का बड़े जलाशयों में भंडारण एक साल पहले के 61 प्रतिशत की तुलना में काफी अधिक रहा। यह रबी मौसम के लिए शुभसंकेत है। अक्टूबर में संकुचीत आठ प्रमुख उद्योगों के उत्पादन में, पीएमआई विनिर्माण अक्टूबर में 50.6 से बढ़कर नवंबर में 51.2 हो गया। सेवा क्षेत्र के कुछ उच्च आवृत्ति संकेतकों ने अक्टूबर / नवंबर में एक सकारात्मक बदलाव दिखाया। यात्री वाहन की बिक्री, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्री यातायात, विदेशी पर्यटक आगमन और निर्मित इस्पात की खपत में पिछले महीने की तुलना में अक्टूबर में उच्च वृद्धि देखी गई। हालांकि वाणिज्यिक वाहन और दोपहिया वाहनों की बिक्री अक्टूबर में संकुचित हुई, लेकिन संकुचन की गति धीमी हो गई। सेवाओं के लिए पीएमआई, जो अक्टूबर (49.2) में संकुचन में था, नवंबर में 52.7 तक विस्तारित हो गया। 2019-20 के लिए वास्तविक जीडीपी की वृद्धि अक्टूबर की नीति में 6.1 प्रतिशत से 5.0 प्रतिशत नीचे की ओर संशोधित की गई है - 2019-20 दूसरी छमाही में 4.9-5.5 प्रतिशत और सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि का अनुमान 2020-21 की पहली छमाही के लिए 5.9-6.3 प्रतिशत है। जबकि बेहतर मौद्रिक संचरण और वैश्विक व्यापार तनाव का एक त्वरित समाधान अनुमानित प्रक्षेपवक्र के ऊपर विकास को धकेल सकता है, घरेलू मांग के पुनरुद्धार में देरी, वैश्विक आर्थिक गतिविधि में एक और मंदी और भू-राजनीतिक तनाव इसे अनुमानित पथ से नीचे खींच सकते हैं।

75. मौद्रिक संचरण विभिन्न मनी मार्केट सेगमेंट और निजी कॉर्पोरेट बॉन्ड यील्ड में लगभग पूर्ण और लगभग तात्कालिक रहा है, जबकि सरकारी प्रतिभूति बाजार में संचरण आंशिक रहा है। हाल की अवधि में कुछ सुधार के बावजूद, बैंकों की ऋण दरों में मौद्रिक संचरण अपर्याप्त है। फरवरी-नवंबर 2019 के दौरान फंड-आधारित उधार दर (एमसीएलआर) की 1-वर्ष की औसत सीमांत लागत में 49 आधार अंकों की गिरावट आई है। बैंकों द्वारा मंजूर किए गए ताजा रुपये ऋणों पर भारित औसत उधार दर (डब्लूएएलआर) में फरवरी- अक्टूबर 2019 तक 44 आधार अंकों की गिरावट आई है। अक्टूबर 2019, जबकि इसी अवधि के दौरान बकाया रुपये ऋणों पर डब्लूएएलआर में 2 आधार अंकों की वृद्धि हुई। बाहरी बेंचमार्क सिस्टम की शुरुआत के साथ, संचरण से आगे चलकर बेहतर होने की उम्मीद है क्योंकि मौजूदा एमसीएलआर-आधारित फ्लोटिंग दर ऋण, जो आमतौर पर वार्षिक रूप से पुनर्निर्धारित होते हैं, नवीनीकरण के योग्य बन जाते हैं। सिस्टम में कुल तरलता बड़े पैमाने पर अधिशेष में बनी हुई है। भारित औसत टर्म डिपॉजिट दर में अक्टूबर में 9 बीपीएस और फरवरी-अक्टूबर 2019 के दौरान 16 आधार अंकों की गिरावट आई। यह उधार दरों में प्रसारण के लिए शुभ संकेत है।

76. कुल मिलाकर, कई अनिश्चितताएं विकास-मुद्रास्फीति दृष्टिकोण को प्रभावित करती हैं। सबसे पहले, पिछले तीन महीनों में प्याज और अन्य सब्जियों की कीमतों में उछाल के कारण खाद्य मुद्रास्फीति में वृद्धि। यह धीरे-धीरे नरम होने की संभावना है क्योंकि देर से खरीफ का उत्पादन बाजार में आएगा। इसे देखते हुए, सब्जियों द्वारा संचालित वर्तमान खाद्य मूल्य उछाल को देखना होगा जिसके लिए अधिक से अधिक स्पष्टता की आवश्यकता है कि समग्र खाद्य मुद्रास्फीति पथ कैसे विकसित होने जा रहा है, क्योंकि अनाज, दाल, दूध और चीनी जैसे कुछ गैर-वनस्पति खाद्य पदार्थों की कीमतों के दृष्टिकोण के बारे में कुछ अनिश्चितता है। इस स्तर पर यह भी स्पष्ट नहीं है कि हाल ही में दूरसंचार शुल्कों में वृद्धि कैसे जारी रहेगी, क्योंकि खाद्य और ईंधन को छोड़कर सीपीआई मुद्रास्फीति मामूली रूप से प्रभावित हुई है।

77. दूसरी बात, हालांकि घरेलू मांग की स्थिति कमजोर हो गई है, कुछ उच्च आवृत्ति संकेतक हाल के दिनों में बेहतर हुए हैं। कैपेक्स चक्र के पलटने के कुछ संकेत निम्न से परिलक्षित हो रहे है (i) 1539 सूचीबद्ध निजी विनिर्माण कंपनियों के परिणामों के आधार पर; निश्चित परिसंपत्तियों के लिए तैनात धन की हिस्सेदारी में 2018-19 की पहली छमाही के दौरान के 18.9 प्रतिशत से 2019-20 की पहली छमाही के दौरान 45.6 प्रतिशत की वृद्धि और (ii) निजी क्षेत्र में बैंकों / वित्तीय संस्थानों द्वारा रुपये में स्वीकृत परियोजनाओं की कुल लागत में 2019-20 की पहली तिमाही के 45,781 करोड़ से दूसरी तिमाही में 79925 करोड़ की वृद्धि। ये सकारात्मक घटनाक्रम हैं लेकिन इनकी स्थिरता के लिए आने वाले आकड़ों के साथ सावधानीपूर्वक मूल्यांकन करने की आवश्यकता है।

78. तीसरी बात, हाल के महीनों में मौद्रिक संचरण में सुधार हुआ है। मौद्रिक संचरण पर पिछली नीतिगत दर में कमी का प्रभाव अभी भी सामने आ रहा है।

79. चौथी बात, सरकार द्वारा हाल ही में किए गए प्रति-चक्रीय उपायों का प्रभाव भी सामने आ रहा है। अगला बजट लगभग दो महीनों में प्रस्तुत क्यी जाएगा और यह आगे के उपायों के बारे में अधिक स्पष्टता प्रदान करेगा जो सरकार शुरू कर सकती है। यह जरूरी है कि मौद्रिक और राजकोषीय नीतियां घनिष्ठ समन्वय में काम करें।

80. पांचवी बात, वैश्विक वित्तीय बाजार व्यापार संबंधी अनिश्चितताओं के कारण अस्थिर बने हुए हैं।

81. इन सभी पहलुओं को उनकी समग्रता पर संतुलन के साथ विचार करते हुए, मैं इस बैठक में पॉलिसी रेपो दर को 5.15 प्रतिशत के वर्तमान स्तर पर बनाए रखने के और यह सुनिश्चित करते हुए कि मुद्रास्फीति लक्ष्य के भीतर बनी हुई है विकास को पुनर्जीवित करने के लिए आवश्यक रूप से लंबे समय तक समायोजन रुख को बनाए रखने के लिए वोट देता हूं। पॉलिसी में अवसर है, हालांकि, जिसका उपयोग, इसके इष्टतम प्रभाव को सुनिश्चित करने के लिए उचित समय पर किए जाने की आवश्यकता है।

योगेश दयाल  
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2019-2020/1465


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