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दिवाला और शोधन अक्षमता कोड, 2016 के तहत दर्ज दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड के खिलाफ कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवेदन

29 नवंबर 2019

दिवाला और शोधन अक्षमता कोड, 2016 के तहत दर्ज दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड
के खिलाफ कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवेदन

रिज़र्व बैंक ने आज (29 नवंबर 2019) दिवाला और शोधन अक्षमता (वित्तीय सेवा प्रदाताओं की दिवाला और समापन कार्यवाहियाँ तथा न्याय निर्णयन प्राधिकारी को आवेदन) नियम, 2019 (“एफ़एसपी दिवाला नियम”) के नियम 5 और 6 के साथ पठित दिवाला और शोधन अक्षमता कोड (आईबीसी), 2016 की धारा 239 की उप धारा (2) के खंड (ज़ेडके) के साथ पठित धारा 227 के तहत दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड के खिलाफ कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवेदन किया है।

एफएसपी दिवाला नियम के नियम 5 (बी) (i) के अनुसार, आवेदन दर्ज करने की तिथि से उसकी स्वीकृति या अस्वीकृति तक अंतरिम अधिस्थगन शुरू किया जाएगा। नियम 5 (ख) यह स्पष्ट करता है कि "अंतरिम अधिस्थगन" में धारा 14 की उप धारा (1), (2) और (3) के प्रावधान प्रभावी होंगे। आईबीसी की धारा 14 की उप-धारा (1), (2) और (3) को नीचे पुन: प्रस्तुत किया जा रहा है:

“(1) उप-धारा (2) और (3) के प्रावधानों के अधीन दिवाला शुरू होने की तारीख से न्याय निर्णयन प्राधिकारी आदेश द्वारा निम्नलिखित को प्रतिबंधित करने के लिए अधिस्थगन की घोषणा करेगा, अर्थात:

(क) किसी भी न्यायालय, प्राधिकरण, मध्यस्थता पैनल अथवा अन्य प्राधिकरण के किसी भी निर्णय, डिक्री या आदेश के निष्पादन सहित कॉर्पोरेट देनदार के खिलाफ मुकदमा शुरू करना, लंबित मुकदमे को जारी या कार्यान्वित करना;

(ख) कॉर्पोरेट देनदार द्वारा अपनी किसी भी संपत्ति या किसी भी कानूनी अधिकार या लाभकारी हित को हस्तांतरित करना, ऋणग्रस्त करना, अलग करना या निपटाना;

(ग) वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण एवं पुनर्निर्माण तथा प्रतिभूति हित प्रवर्तन अधिनियम, 2002 (2002 की 54) के तहत की गयी किसी भी कार्रवाई सहित कॉरपोरेट देनदार द्वारा अपनी संपत्ति के संबंध में सृजित किसी भी प्रतिभूति हित को रोकने, वसूलने या लागू करने की कोई भी कार्रवाई;

(घ) मालिक या पट्टेदार द्वारा किसी संपत्ति को पुनः प्राप्त किया जाना जहां ऐसी संपत्ति को कॉर्पोरेट देनदार द्वारा अधिकृत कर लिया गया हो या कब्जे में ले लिया गया हो।

(2) अधिस्थगन अवधि के दौरान कॉर्पोरेट देनदार को आवश्यक वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति, जैसा भी निर्धारित हो, को समाप्त या निलंबित या बाधित नहीं किया जाएगा।

(3) उप-धारा (1) के प्रावधान निम्न पर लागू नहीं होंगे —

(क) किसी भी वित्तीय नियामक के परामर्श से केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित लेनदेन;

(ख) कॉर्पोरेट देनदार के लिए गारंटी अनुबंध में जमानतकर्ता.”

(योगेश दयाल) 
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2019-2020/1295


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