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राज्य वित्तः वर्ष 2019-20 के बज़ट का अध्ययन

30 सितंबर 2019

राज्य वित्तः वर्ष 2019-20 के बज़ट का अध्ययन

आज, भारतीय रिज़र्व बैंक ने “राज्य वित्तः वर्ष 2019-20 के बज़ट का अध्ययन” शीर्षक से रिपोर्ट जारी की है, यह एक वार्षिक प्रकाशन है जो राज्य सरकारों के वित्त की सूचना, विश्लेषण और आकलन उपलब्ध कराता है। इस साल गर्मियों में कई राज्यों में चुनाव होने के कारण उनकी अंतिम बजटों के प्रस्तुतीकारण में जुलाई-सितंबर 2019 तक की देरी हुई। इस वर्ष की रिपोर्ट में 2017-18 के वास्तविक आकड़ों और 2018-19 के लिए संशोधित परिणामों (और अनंतिम खातों) की पृष्ठभूमि को देखते हुए 2019-20 के लिए बजट अनुमानों (बीई) की अंतर्निहित गतिशीलता का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट “ऋण: राज्यों की मध्यम अवधि की राजकोषीय चुनौतियाँ“ विषय को संबोधित करती है। 1990-91 से राज्य वित्त रिपोर्ट में प्रकाशित आकड़ों की समय शृंखला भी इस रिपोर्ट के साथ जारी की गई है।

रिपोर्ट के मुख्य अंश निम्नानुसार हैं :

  • 2017-18 और 2018-19 के दौरान राज्यों का सकल राजकोषीय घाटा (जीएफडी) राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम (एफआरबीएम) की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3 प्रतिशत की सीमा के भीतर रहा है।

  • 2019-20 के लिए, राज्यों ने सकल घरेलू उत्पाद के 2.6 प्रतिशत के समेकित जीएफडी का बजट बनाया है।

  • राज्यों का बकाया ऋण पिछले पांच वर्षों में जीडीपी के 25 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जो इसकी स्थिरता के लिए मध्यम अवधि चुनौतियों प्रस्तुत कर रहा है।

  • राजस्व सृजन विवेकपूर्ण ऋण प्रबंधन की कुंजी होता है - जीएसटी कार्यपद्धति के तहत प्रौद्योगिकी सक्षम दक्षता लाभ को पूंजीकृत करके कर उछाल में सुधार किया जा सकता है और उपयोगकर्ता शुल्क बढ़ाकर, जब भी संभव हो, राजस्व बढ़ाने की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है।

  • वितरण कंपनियों (डीआईएससीओएम) के घाटे और गारंटियों के संभावित आह्वान से होनेवाले ऋण स्थिरता के लिए प्रारंभिक जोखिम है।

  • समेकन, पुर्नर्निगम और परिपक्वता वृद्धि का संयोजन चलनिधि में सुधार करने और राज्य विकास ऋण (एसडीएल) के लिए एक द्वितीयक बाजार विकसित करने में मदद कर सकता है। राज्यों के जोखिम प्रोफाइल के अनुसार एसडीएल का अंतर मूल्य निर्धारण बेहतर बाजार अनुशासन के लिए महत्वपूर्ण है।

  • आगे, राज्यों के लिए 2019-20 में बजट के अनुसार अपनी पूंजीगत व्यय योजनाओं को आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण है क्योंकि समग्र आर्थिक गतिविधि और कल्याण के निहितार्थ सामान्य सरकारी पूंजीगत व्यय के दो तिहाई हिस्से के लिए राज्य उत्तरदायी होते हैं।

यह प्रकाशन आर्थिक और नीति अनुसंधान विभाग के राज्य वित्त प्रभाग द्वारा तैयार किया गया है। वर्तमान अंक इस रिपोर्ट के पिछले अंकों के साथ वेबसाइट (www.rbi.org.in) पर उपलब्ध है। इस प्रकाशन पर टिप्पणियां निदेशक, राज्य वित्त प्रभाग, आर्थिक और नीति अनुसंधान विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक, शहीद भगत सिंह मार्ग, मुंबई-400001 को भेजी जा सकती हैं। टिप्पणियां ई-मेल के माध्यम से भी भेजी जा सकती हैं।

(योगेश दयाल) 
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी : 2019-2020/831


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