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भारतीय रिज़र्व बैंक वर्किंग पेपर सं. 02/2019: सीमा-पारीय व्यापार क्रेडिट : भारत के लिए संकट के बाद का अनुभवजन्य विश्लेषण

8 मई 2019

भारतीय रिज़र्व बैंक वर्किंग पेपर सं. 02/2019: सीमा-पारीय व्यापार क्रेडिट : भारत के लिए संकट के बाद का अनुभवजन्य विश्लेषण

भारतीय रिज़र्व बैंक ने आज अपनी वेबसाइट पर भारतीय रिज़र्व बैंक वर्किंग पेपर श्रृंखला* के अंतर्गत “सीमा-पारीय व्यापार क्रेडिट : भारत के लिए संकट के बाद का अनुभवजन्य विश्लेषण" शीर्षक से वर्किंग पेपर उपलब्ध कराया है। यह पेपर राजीव जैन, धीरेंद्र गजभिये और सौमश्री तिवारी द्वारा लिखा गया है।

यह पेपर भारतीय और विदेशी बैंकों द्वारा भारतीय आयातकों के उनके आकार, संरचना और लागत पैटर्न पर ध्यान केंद्रित करते हुए प्रदान किए गए व्यापार क्रेडिट का चित्र प्रस्तुत करता है। 2007-08:ति1 से 2016-17: ति4 के लिए 55 बैंकों के एक पैनल डेटा का उपयोग करते हुए, पेपर पाता है कि दोनों मांग और आपूर्ति पक्ष व्यापार क्रेडिट के प्रवाह को प्रभावित करते हैं। पेपर सुझाव देता है कि उच्च आयात - चाहे उच्च कीमतों या वॉल्यूम के कारण हो - व्यापार ऋण में वृद्धि का नेतृत्व करता है। आपूर्ति पक्ष के दृष्टिकोण से, बैंकों की वित्तीय स्थिति, व्यापार ऋण की लागत और उनके विदेशी नेटवर्क का आकार उनके व्यापार ऋण परिचालन को प्रभावित करते हैं। पेपर के अनुभवजन्य निष्कर्ष यह सुझाव देते हैं कि बैंकों को अपने वैश्विक बैंकिंग संबंधों का विस्तार करने और स्वदेशी साधनों (अर्थात, एलओयू / एलओसी) के बजाय वैश्विक रूप से स्वीकृत किए गए व्यापार वित्त साधनों के उपयोग की ओर अंतरित होने की आवश्यकता है, हालांकि, जो, लागत को बढ़ा सकता है।

* रिज़र्व बैंक ने आरबीआई वर्किंग पेपर श्रृंखला की शुरुआत मार्च 2011 में की थी। ये पेपर रिज़र्व बैंक के स्टाफ सदस्यों द्वारा किए जा रहे अनुसंधान प्रस्तुत करते हैं और अभिमत प्राप्त करने और इस पर अधिक चर्चा के लिए इन्हें प्रसारित किया जाता है। इन पेपरों में व्यक्त विचार लेखकों के होते हैं, भारतीय रिज़र्व बैंक के नहीं होते हैं। अभिमत और टिप्पणियां कृपया लेखकों को भेजी जाएं। इन पेपरों के उद्धरण और उपयोग में इनके अनंतिम स्‍वरूप का ध्यान रखा जाए।

शैलजा सिंह
उप महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2018-2019/2635


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