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भारत में अनुसूचित वाणिज्य बैंकों की बेसिक सांख्यिकी रिटर्न्स - खंड 47, मार्च 2018

3 जनवरी 2019

भारत में अनुसूचित वाणिज्य बैंकों की बेसिक सांख्यिकी रिटर्न्स - खंड 47, मार्च 2018

रिज़र्व बैंक ने आज इंडियन इकोनॉमी पर डेटाबेस (डीबीआइई) पोर्टल (वेब-लिंक: https://dbie.rbi.org.in/DBIE/dbie.rbi?site=publications#!9) पर अपने डेटा बेस में “भारत में अनुसूचित वाणिज्य बैंकों की बेसिक सांख्यिकी रिटर्न्स -खंड 47” का वेब प्रकाशन जारी किया है। इसमें बेसिक सांख्यिकीय रिटर्न्स (बीएसआर) 1 और 2 के माध्यम से शाखा स्तर पर एकत्र किए गए डेटा के आधार पर बैंक जमा राशियों की विभिन्न विशेषताओं और ऋण के संबंध में वार्षिक सूचनाएं उपलब्ध कराई जाती हैं1। बीएसआर-1 में खाते का प्रकार, उधारकर्ता का व्यवसाय/उसके कार्य-कलाप, ऋण के उपयोग में लाए जाने के स्थान, जिले और आबादी समूह, ब्याज की दरों, ऋण सीमा तथा बकाया रकम के बारे में जानकारी संकलित की जाती है। बैंकों द्वारा बीएसआर-2 में जमा राशियों के प्रकार, सावधि जमाराशियों की परिपक्वता की प्रवृत्ति और साथ ही कर्मचारियों की संख्या के संबंध में शाखावार डेटा रिपोर्ट किए जाते हैं। बैंक केंद्रों वाले आबादी समूहों (ग्रामीण/अर्द्ध शहरी/शहरी/मेट्रोपोलिटन) को 2011 की जनगणना के अनुसार वर्गीकृत किया गया है।

मुख्य निष्कर्ष:

  • मार्च 2018 में लगभग 0.20 बिलियन उधार खाते और 1.91 बिलियन जमा खाते विद्यमान थे, जिनमें से 0.24 बिलियन सावधि जमा खाते थे।

  • पिछले दो वर्षों के दौरान गिरावट देखने के बाद वर्ष 2017-18 में औद्योगिक ऋण वृद्धि में तेजी देखने को मिली जबकि वैयक्तिक उधारी सेगमेंट में निरंतर मज़बूत वृद्धि दर्ज़ हुई।

  • उधार पोर्टफोलिओ में निजी क्षेत्र के बैंको ने अच्छी वृद्धि दर्ज़ की और सकल बैंक ऋणों में उनके शेयर में महत्वपूर्ण सुधार हुआ।

  • वर्ष के दौरान कुल जमा राशियों में बचत जमा का भाग और भी बढ़कर 2016-17 के दौरान की उच्च वृद्धि के भी ऊपर रहा जबकि विमुद्रीकरण के कारण बचत जमा भाग ने अचानक नई ऊँचाई को छुआ: पिछले पांच वर्षों के दौरान सावधि जमा के हिस्से में क्रमशः गिरावट का रुख रहा।

  • मार्च 2018 में सावधि जमा का लगभग 45% हिस्सा ‘1 वर्ष और अधिक परंतु 2 वर्षों से कम’ की मूल परिपक्वता बकेट में प्रोद्भूत हुआ; अवशिष्ट परिपक्वता आधार पर कुल सावधि जमा राशियों का लगभग दो-तिहाई भाग ‘1वर्ष से कम’ परिपक्वता में था।

  • ऋण-जमा (सी-डी) अनुपात एक वर्ष पूर्व के 73.8 प्रतिशत से बढ़कर मार्च 2018 में 76.7 प्रतिशत हो गया था।

  • व्यक्तियों के कुल ऋण और सकल जमा में महिलाओं का हिस्सा मार्च 2018 में और भी बढ़कर क्रमशः 20.4 प्रतिशत और 32.8 प्रतिशत हो गया जबकि एक वर्ष पूर्व यह क्रमशः 19.3 प्रतिशत और 32.0 प्रतिशत पर था।

  • मेट्रोपोलिटन एरिया, जिसमें 20% से कम शाखाएं आती हैं, का हिस्सा कुल जमा में लगभग 52 प्रतिशत था और बैंक ऋण में 64 प्रतिशत का हिस्सा था।

  • रिज़र्व बैंक के द्वारा नीति दर घटाने का प्रभाव निधियों और ऋण दरों की लागत में बैंकों द्वारा की गई और भी कटौती में देखी जा सकती है: (क) 8 प्रतिशत और अधिक ब्याज दर वाली सावधि जमा का हिस्सा एक वर्ष पूर्व के 22.8 प्रतिशत से घटकर मार्च 2018 में 11.4 प्रतिशत हो गया था; और (ख) वर्ष के दौरान उधार खातों में उच्च ब्याज दर बकेट्स से न्यून ब्याज दर बकेट्स की ओर बदलाव पाया गया।

अजीत प्रसाद
सहायक परामर्शदाता

प्रेस प्रकाशनी: 2018-2019/1547


1 बीएसआर-1 डेटा का संकलन एससीबी(आरआरबी को छोड़कर) दिसंबर 2014 से तिमाही आधार पर किया जा रहा है,जिन्हें वेब साइट पर अलग से प्रकाशित किया जाता है।


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