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आरबीआई ने एमएसएमई को अग्रिमों के पुनर्गठन पर दिशानिर्देश जारी किए

1 जनवरी 2019

आरबीआई ने एमएसएमई को अग्रिमों के पुनर्गठन पर दिशानिर्देश जारी किए

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भारतीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण घटक है और देश की जीडीपी, निर्यात, औद्योगिक उत्पादन, रोजगार सृजन इत्यादि में महत्वपूर्ण योगदान देता है। भारतीय अर्थव्यवस्था में एमएसएमई के महत्व को देखते हुए, क्षेत्र के लिए इस अवसर पर एक सक्षम वातावरण बनाने के लिए कुछ उपाय पर विचार करना आवश्यक है।

एमएसएमई खातों के पुनर्गठन के मुद्दे पर 19 नवंबर 2018 को आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड की बैठक में चर्चा की गई थी। इस मामले में आरबीआई द्वारा हाल ही में बैंकों और अन्य हितधारकों के साथ बातचीत के दौरान भी चर्चा की गई थी।

आरबीआई में उपरोक्त मुद्दे की जांच की गई है और दवाबग्रस्त बने एमएसएमई खातों के सुविधापूर्ण सार्थक पुनर्गठन के लिए विचार किया गया। आरबीआई ने एमएसएमई को मौजूदा ऋणों के बिना नीचली ओर के आस्ति वर्गीकरण किए एक बार पुनर्गठन करने की अनुमति देने का निर्णय लिया है, जो 1 जनवरी 2019 तक डिफ़ॉल्ट में हैं पर ‘मानक’ हैं। योजना के लिए पात्र होने के लिए, उधारकर्ता के लिए बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों की गैर-निधि आधारित सुविधाओं सहित कुल ऋणग्रस्‍तता, 1 जनवरी 2019 तक 250 मिलियन से अधिक नहीं होनी चाहिए। 31 मार्च 2020 तक पुनर्गठन को कार्यान्वित किया जाना है। इस योजना के अंतर्गत पुनर्गठित खातों के संबंध में पहले से ही धारित प्रावधानों के अतिरिक्त 5% का प्रावधान किया जाएगा । प्रत्येक बैंक / एनबीएफसी को बोर्ड के अनुमोदन से इस योजना के लिए एक नीति तैयार करनी चाहिए, जिसमें अन्य बातों के साथ, दबावग्रस्त खातों की व्यवहार्यता के मूल्‍यांकन और पुनर्गठन खातों की नियमित निगरानी के लिए रूपरेखा शामिल हो।

जोस जे.कट्टूर
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी : 2018-2019/1521


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