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वाणिज्यिक बैंकों की सांविधिक लेखापरीक्षा में कमियों के लिए सांविधिक लेखापरीक्षकों के संबंध में प्रवर्तन कार्रवाई ढांचा

29 जून 2018

वाणिज्यिक बैंकों की सांविधिक लेखापरीक्षा में कमियों के लिए सांविधिक लेखापरीक्षकों के संबंध में
प्रवर्तन कार्रवाई ढांचा

बैंक के लेखापरीक्षक (एसए) वित्तीय स्थिरता में योगदान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं जब वे बैंकों की गुणवत्तापूर्ण लेखापरीक्षा करते हैं जो बैंकों के वित्तीय विवरणों में बाजार का विश्वास विकसित करती हैं। वाणिज्यिक बैंकों के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक की पर्यवेक्षी प्रक्रिया में भी गुणवत्तापूर्ण बैंक लेखापरीक्षा मूल्यवान इनपुट है।

लेखापरीक्षा गुणवत्ता में सुधार करने और एक अनुरूप तरीके में सांविधिक लेखापरीक्षकों की जवाबदेही की जांच करने के लिए पारदर्शी व्यवस्था शुरू करने की दृष्टि से, यह निर्णय लिया गया है कि ग्रेडेड प्रवर्तन कार्रवाई ढांचा शुरू किया जाए जिससे कि बैंकों की सांविधिक लेखापरीक्षा करते समय देखी जाने वाली कमियों के लिए बैंकों के लेखापरीक्षकों के संबंध में आरबीआई द्वारा उचित कार्रवाई की जा सके। इस ढांचे में अन्य के साथ-साथ, आरबीआई परिपत्र डीबीआर.बीपी.बीसी.सं. 63/21.04.018/2016-17, दिनांक 18 अप्रैल 2017 में विनिर्दिष्ट थ्रेशॉल्ड से ऊपर बैंकों के लेखापरीक्षित वित्तीय विवरणों के संबंध में भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा किए जाने वाले निरीक्षण के दौरान परिसंपत्ति वर्गीकरण और प्रावधानीकरण में चिह्नित भटकाव की घटनाओं को कवर किया जाएगा। ढांचे की मुख्य विशेषताएं अनुलग्नक में दी गई हैं।

जोस जे. कट्टूर
मुख्य महाप्रबंधक

प्रेस प्रकाशनी: 2017-2018/3425


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