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विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) (संशोधन) विनियमावली, 2018

भारतीय रिज़र्व बैंक
विदेशी मुद्रा विभाग
केंद्रीय कार्यालय
मुंबई

अधिसूचना सं.फेमा 20(आर)(1)/2018-आरबी

26 मार्च, 2018

विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) (संशोधन) विनियमावली, 2018

विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (1999 का 42) की धारा 6 की उप-धारा (3) के खंड (बी) और धारा 47 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक एतद्द्वारा विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) विनियमावली, 2017 (दिनांक 07 नवंबर 2017 की अधिसूचना सं.फेमा. 20 (आर)/2017-आरबी) (जिसे इसके पश्चात “मूल विनियमावली” कहा गया है) को निम्नानुसार संशोधित करता है, अर्थात:-

1. संक्षिप्त नाम और प्रारंभ

  1. यह विनियमावली विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत से बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) (संशोधन) विनियमावली, 2018 कहलएगी ।

  2. यह विनियमावली सरकारी राजपत्र में उसके प्रकाशन की तारीख से लागू होगी।

2. विनियम 16.बी में संशोधन :

विनियम 16. बी में,

(i) मौजूदा उप-विनियम 5 को निम्नलिखित से प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात:

“(5)(ए) रिज़र्व बैंक के पास गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में पंजीकृत न की गई निवेश कंपनियों तथा कोर निवेश कंपनियों (सीआईसी), दोनों अन्य भारतीय संस्थाओं की पूंजी में निवेश करने की गतिविधि में लिप्त होने पर उनमें में विदेशी निवेश के लिए सरकार का पूर्वानुमोदन आवश्यक है।”

टिप्पणी : भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 तथा उसके अंतर्गत बनाए गए विनियमों के तहत एनबीएफ़सी के रूप में कार्यरत ऐसी कंपनियों के लिए निर्धारित विनियामक ढांचे के अनुपालन के अतिरिक्त कोर निवेश कंपनियों (CIC) को इन विनियमों का भी अनुपालन करना होगा।”

(बी) भारतीय रिज़र्व बैंक के पास गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में पंजीकृत निवेश कंपनियों में किया जाने वाला निवेश 100% स्वचालित मार्ग के तहत होगा।

(ii) मौजूदा उप-विनियम 7 के पश्चात निम्नलिखित को जोड़ा जाएगा, अर्थात:

“(8) जहां कहीं विदेशी निवेश करने वाला भारत के बाहर का निवासी व्यक्ति भारतीय निवेश प्राप्तकर्ता कंपनी की लेखापरीक्षा किसी ऐसे विशिष्ट ऑडिटर/ ऑडिट फ़र्म द्वारा करवाने की इच्छा प्रकट करता है, जिसका अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क है, तो ऐसी निवेश प्राप्तकर्ता कंपनी का ऑडिट संयुक्त ऑडिट के रूप में किया जाएगा, जिसमें कोई एक ऑडिटर ऐसा होगा जो उस नेटवर्क का हिस्सा नहीं है।”

(iii) मौजूदा क्रम संख्या 9.3. (ए) को निम्नलिखित से प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात:

  (ए) (i) अनुसूचित हवाई परिवहन सेवा/ घरेलू अनुसूचित हवाई यात्री सेवा
(ii) प्रादेशिक हवाई परिवहन सेवा
100% 49% तक स्‍वचालित
49% प्रतिशत से अधिक के लिए सरकारी मार्ग से
(NRI एवं OCI के लिए 100% स्‍वचालित)

(iv) क्रम संख्या 9.5 में, खंड (सी) के पश्चात निम्नलिखित को जोड़ा जाएगा; अर्थात:

“(डी) उपर्युक्त शर्तों के अतिरिक्त मेसर्स एयर इंडिया लिमिटेड में विदेशी निवेश निम्नलिखित शर्तों के अधीन होंगे:

  1. मेसर्स एयर इंडिया लि. में विदेशी एयरलाइन (एयरलाइनों) द्वारा किए गए निवेश सहित विदेशी निवेश प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप में 49% से अधिक नहीं होंगे।

  2. मेसर्स एयर इंडिया लि. का मूल स्वामित्व तथा प्रभावी नियंत्रण भारतीय नागरिकों के पास बने रहना जारी रहेगा।

(v) क्रम संख्या 9.5 में से टिप्पणी (3) को हटा दिया जाएगा।

(vi) क्रम संख्या 10.2 में, नोट 6 के पश्चात नया नोट-7 जोड़ा जाएगा, अर्थात

“(7). रियल इस्टेट ब्रोकिंग सेवा को “रियल इस्टेट कारोबार” की परिभाषा से बाहर रखा गया है और रियल इस्टेट ब्रोकिंग सेवा में स्वचालित मार्ग के तहत 100% विदेशी निवेश की अनुमति है।

(vii) क्रम संख्या 15.3 में स्तंभ “प्रवेश मार्ग” में “ 49% तक स्वचालित मार्ग से; 49% से अधिक होने पर सरकारी मार्ग से ” इन शब्दों को “स्वचालित” शब्द से प्रतिस्थापित किया जाएगा।

(viii) क्रम संख्या 15.3.1 में मौजूदा खंड(डी) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात:

“भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति, भले ही वह किसी ब्रैंड-विशेष का मालिक हो अथवा अन्यथा, को देश में किसी विशिष्ट ब्रैंड का सीधे ब्रैंड के मालिक द्वारा अथवा उस ब्रैंड-विशेष के लिए भारत में सिंगल ब्रैंड उत्पाद खुदरा व्यापार करने वाली किसी भारतीय एंटीटी और उस ब्रैंड-विशेष के मालिक के बीच निष्पादित किसी विधि-सम्मत करार के तहत “सिंगल ब्रैंड” उत्पाद खुदरा व्यापार करने की अनुमति दी जाएगी ।

(ix) क्रम संख्या 15.3.1 के खंड (जी) तथा खंड (एच) को हटा दिया जाएगा।

(x) क्रम संख्या 15.3.1 के हटाए गए खंड (एच) के पश्चात निम्नलिखित को जोड़ा जाएगा, अर्थात:

“(आई) सिंगल ब्रांड खुदरा व्यापार करनेवाली संस्था को उसका पहला स्टोर खुलने के वर्ष के 1 अप्रैल से प्रारम्भिक 5 वर्ष के दौरान वैश्विक परिचलनों के लिए भारत से वस्तुओं की वृद्धिशील सोर्सिंग का भारत से 30 प्रतिशत खरीद की अनिवार्य सोर्सिंग अपेक्षा के समक्ष प्रतितुलन करने की अनुमति दी जाएगी। इस प्रयोजन के लिए वृद्धिशील सोर्सिंग का अर्थ होगा सिंगल ब्रांड खुदरा व्यापार करनेवाली अनिवासी एंटीटीज़ द्वारा प्रत्यक्ष अथवा उनकी समूह कंपनियों के माध्यम से उस सिंगल ब्रांड के लिए किसी विशिष्ट वित्तीय वर्ष में भारत से इस प्रकार की गई वैशिविक सोर्सिंग के मूल्य (रुपये में) में उसके पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष की तुलना में हुई वृद्धि। 5 वर्ष की इस अवधि को पूर्ण करने पर, सिंगल ब्रांड खुदरा व्यापार (SBRT) करनेवाली कंपनी को अपने भारत के परिचालनों के लिए सोर्सिंग संबंधी 30% के मानदंड को सीधे पूर्ण करना होगा और यह वार्षिक आधार पर किया जाएगा।”

(xi) क्रम संख्या 15.3.1 में टिप्पणी (2) तथा टिप्पणी (3) को हटा दिया जाएगा।

(xii) क्रम संख्या 15.3.1 में मौजूदा टिप्पणी (5) को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात:
"अत्याधुनिक” एवं “उच्चतम तकनीक" वाले उत्पादों, जहां स्थानीय सोर्सिंग संभव नहीं है, से संबन्धित एंटीटीयों के लिए कारोबार की शुरुआत से, अर्थात उनके प्रथम स्टोर के प्रारम्भ से तीन वर्षों की अवधि तक सोर्सिंग की शर्तें लागू नहीं होंगी। इसके पश्चात ऊपरउल्लिखित पैरा 15.3.1 के खंड (ई) में उल्लिखित शर्तें लागू होंगी। सोर्सिंग की शर्तों में छूट के लिए आवेदकों द्वारा किए गए दावों को परखने के लिए औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग के सचिव की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें नीति आयोग, संबधित प्रशासनिक मंत्रालय के प्रतिनिधि तथा स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञ शामिल होंगे। उक्त समिति इस प्रकार के दावों के परिप्रेक्ष्य में उत्पादों के स्वरूप अर्थात उनके "अत्याधुनिक” एवं “उच्चतम तकनीक" वाले होने और इस संबंध में स्थानीय सोर्सिंग उपलब्ध न होने के बारे में जांच करेगी और इस प्रकार की छूट दिये जाने संबंधी अपनी संस्तुतियाँ प्रस्तुत करेगी।”

(xiii) क्रम संख्या 16.3 में, टिप्पणी (2) के खंड (ए) के उप-खंड (एबी) में मौजूदा शब्द “विकलांग” के स्थान पर “दिव्यांग” शब्द का उपयोग किया जाएगा।

(xiv) क्रम संख्या 16.3 में टिप्पणी (2) के खंड (सी) को निम्नलिखित से प्रतिस्थापित किया जाएगा:

“कृत्रिम परिवेशीय (इन-विट्रो) निदान उपकरण वे उपकरण हैं, जो जांच के मंतव्‍य से, मानव शरीर अथवा पशुओं से एकत्र किए गए नमूनों के परीक्षण-माध्‍यम की तरह और चिकित्‍सीय अथवा निदान के उद्देश्‍य से प्रयुक्‍त अभिकर्मक (reagent), अभिकर्मक-उत्‍पाद, व्‍यास मापक (कैलिब्रेटर), नियंत्रण सामग्री, किट, उपकरण, उपकरण-समूह, औजार अथवा प्रणाली के रूप में अकेले अथवा समूह में के रूप में प्रयोग किए जाते हैं।

(xv) क्रम संख्या 16.3 में, मौजूदा टिप्पणी (3) को हटा दिया जाएगा।

(xvi) क्रम संख्या एफ़. 6.1 में, मौजूदा खंड (ए) को हटा दिया जाएगा।

3. अनुसूची -1 मे संशोधन

अनुसूची -1 में,

(i) मौजूदा पैराग्राफ 1(4), को निम्नलिखित द्वारा प्रतिस्थापित किया जाएगा, अर्थात;

(4) कोई भारतीय कंपनी केन्द्र सरकार और / अथवा भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर जारी निर्दिष्ट शर्तों के अनुपालन के अधीन, भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति, यदि भारतीय निवेश प्राप्तकर्ता कंपनी स्वचालित मार्ग वाले क्षेत्रों में संलग्न है, को निम्नलिखित के बदले पूंजीगत लिखतें जारी कर सकती है:

(ए) पूंजीगत लिखतों को स्वैप कर के; अथवा

(बी) पूंजीगत माल / मशीनरी / उपकरण (सेकंड हैंड मशीनरी को छोड कर) का आयात कर के ; अथवा

(सी) प्रचालन-पूर्व/ निगमन-पूर्व व्यय (किराया आई के भुगतान सहित)

बशर्ते यदि निवेश प्राप्तकर्ता कंपनी सरकारी अनुमोदन क्षेत्रों में संलग्न हो, तो सरकार का पूर्वानुमोदन प्राप्त करना होगा। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा समय-समय पर यथा-निर्धारित तरीके से आवेदन करना होगा।

(ii) मौजूदा पैरा 1(6) को हटा दिया गया है।

(शेखर भटनागर)
प्रभारी मुख्य महाप्रबंधक


पाद टिप्पणी :

मूल विनियमावली दिनांक 7 नवम्बर 2017 के जी.एस.आर.सं.1374(ई) द्वारा भारत सरकार के सरकारी राजपत्र के भाग II, खंड-3, उप-खंड(i) में प्रकाशित और तत्पश्चात निम्नलिखित द्वारा संशोधित की गयी:-

जी.एस.आर. सं. 279(अ) दिनांक 26.3.2018


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