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अनिवासी रुपया खाते – नीति की समीक्षा

भारिबैंक/2019-20/102
ए.पी. (डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं.09

22 नवम्बर 2019

सभी श्रेणी-। प्राधिकृत व्यापारी बैंक

महोदया/महोदय,

अनिवासी रुपया खाते – नीति की समीक्षा

प्राधिकृत व्यापारी- I (एडी श्रेणी–I) का ध्यान वर्ष 2019-10 के लिए दिनांक 4 अक्तूबर 2019 को जारी चौथे द्वैमासिक मौद्रिक नीति वक्तव्य के विकासात्मक तथा विनियामक नीति वक्तव्य के पैराग्राफ 3 की ओर आकर्षित किया जाता है।

2. समय-समय पर संशोधित किए गए “जमाराशियां तथा खाते” विषय पर जारी दिनांक 1 जनवरी 2016 के मास्टर निदेश सं.14 के भाग II के पैराग्राफ 7 के अनुसार भारत के बाहर निवास करने वाला कोई भी व्यक्ति, जिसका भारत में कारोबारी हित जुड़ा है, वह रुपये में वास्तविक लेनदेन करने के प्रयोजन से किसी प्राधिकृत व्यापारी के पास एक विशेष अनिवासी रुपया खाता (एसएनआरआर खाता) खोल सकता है।

3. भारत के बाहर के निवासी व्यक्तियों द्वारा भारतीय रुपये के उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने की दृष्टि से भारत सरकार के साथ परामर्श कर के यह निर्णय लिया गया है कि भारत के बाहर निवास करने वाले व्यक्ति को निम्नलिखित के लिए ऐसा खाता खोलने की अनुमति प्रदान करते हुए एस.एन.आर.आर. खाते के दायरे को विस्तारित किया जाए:

i. भारतीय रुपये में बाह्य वाणिज्यिक उधार(ईसीबी);

ii. भारतीय रुपये में व्यापार ऋण ;

iii. भारतीय रुपये में व्यापार (निर्यात/आयात) संबंधी इन्वाइस बनाना; तथा

iv. गुजरात अंतरराष्ट्रीय वित्त-प्रौद्योगिकी शहर (गिफ्ट सिटि) में स्थित आईएफ़एससी इकाइयों द्वारा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (आईएफ़एससी) के बाहर कारोबार संबंधी लेनदेन जैसे आईएफ़एससी के बाहर भारतीय रुपये में प्रशासनिक व्यय, रद्दी माल (स्क्रैप) की बिक्री से प्राप्त भारतीय रुपये की राशि, भारतीय रुपये में सरकारी प्रोत्साहन, आदि। यह खाता भारत में किसी बैंक (आईएफ़एससी से बाहर) में रखा जाएगा ।

4. भारत सरकार के साथ परामर्श कर के यह भी निर्णय लिया गया है कि एसएनआरआर खाते के परिचालन के लिए कतिपय अन्य प्रावधानों को निम्नानुसार तर्कसंगत बनाया जाए:

i. उपर्युक्त पैराग्राफ 3 में दिये गए प्रयोजनों से खोले गए एसएनआरआर खाते की अवधि पर लगाए गए प्रतिबंध को निकाल देना क्योंकि प्रस्तावित लेनदेन अधिक स्थायी स्वरूप के होते हैं।

ii. अनिवासी साधारण (एनआरओ) खाते के अलावा किसी मृत खाताधारक के खाते में से अनिवासी नामिती को प्राप्य/ देय राशि को अनिवासी बाह्य (एनआरई) खाते में जमा करने अथवा सामान्य बैंकिंग चैनल के माध्यम से भारत के बाहर सीधे विप्रेषण करने की अनुमति दी जाए।

5. जमाराशियों तथा खातों संबंधी नीति के सभी अन्य प्रावधान अपरिवर्तित हैं। प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक इस परिपत्र की विषयवस्तु से अपने घटकों और ग्राहकों को अवगत कराएं।

6. इन परिवर्तनों को दर्शाने के लिए दिनांक 1 जनवरी 2016 के मास्टर निदेश सं. 14 को तदनुसार अद्यतन किया जा रहा है।

7. इस परिपत्र में निहित निर्देश, विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम 1999 (1999 का 42) की धारा 10(4) और 11(2) के अंतर्गत और किसी अन्य विधि के अंतर्गत अपेक्षित किसी अनुमति/अनुमोदन, यदि कोई हो, पर प्रतिकूल प्रभाव डाले बिना जारी किए गये हैं।

भवदीया

(शर्मिला ठाकुर)
महाप्रबंधक


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