अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

समुद्रपारीय (विदेश में किया जाने वाला प्रत्यक्ष निवेश) प्रत्यक्ष निवेश

(दिनांक 07 मई 2019 तक अद्यतन)

प्रश्न 1. समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश से संबंधित दिशानिर्देश कहाँ उपलब्ध हैं तथा समुद्रपारीय निवेश पर दिशानिर्देशों से संबंधित स्पष्टीकरण कैसे प्राप्त किए जा सकते हैं?

प्रश्न 2. भारत के बाहर प्रत्यक्ष निवेश किसे कहते हैं?

प्रश्न 3. भारत के निवासी व्यक्तियों (व्यक्ति) को विदेश में प्रतिभूतियों की खरीद/ अधिग्रहण के लिए कौनसी सामान्य अनुमतियाँ उपलब्ध हैं?

प्रश्न 4. क्या समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश किसी भी गतिविधि के लिए किया जा सकता है? समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश करने के लिए प्रतिबंधित गतिविधियां कौनसी हैं?

प्रश्न 5. संयुक्त उद्यम (जेवी) तथा पूर्ण स्वामित्ववाली सहायक संस्था (डब्लूओएस) क्या है?

प्रश्न 6. स्वचालित मार्ग तथा अनुमोदन मार्ग क्या है?

प्रश्न 7. अनुमोदन मार्ग के अंतर्गत समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश (ओडीआई) करने के लिए प्रस्ताव को किस प्रकार प्रेषित किया जाए?

प्रश्न 8. “नामित प्राधिकृत व्यापारी” की संकल्पना क्या है? यदि जेवी/ डबल्यूओएस के एक से अधिक भारतीय प्रवर्तक हों तो क्या उसी जेवी/ डबल्यूओएस के लिए एक से अधिक “नामित प्राधिकृत व्यापारी” हो सकते हैं? यदि एक भारतीय प्रवर्तक की एक ही देश में अथवा भिन्न देशों में एक से अधिक जेवी हो तो क्या होगा?

प्रश्न 9. कौनसी अन्य ओडीआई लेनदेन के लिए आरबीआई का अनुमोदन आवश्यक है?

प्रश्न 10. स्वचालित मार्ग के अंतर्गत समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश करने के कौन पत्र हैं? भारतीय पार्टी किसे कहते हैं?

प्रश्न 11. स्वचालित मार्ग के अंतर्गत समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश के लिए सीमाएं एवं अपेक्षाएँ क्या हैं?

प्रश्न 12. क्या सभी देशों में समुद्रपारीय निवेश मुक्त रूप से अनुमत हैं और क्या निवेश की मुद्रा के संबंध में कोई प्रतिबंध हैं?

प्रश्न 13: स्वचालित मार्ग के अंतर्गत किसी जेवी/ डबल्यूओएस में समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश करने के लिए भारतीय पार्टी को किस क्रियाविधि का पालन करना है?

प्रश्न 14. क्या स्वचालित मार्ग के अंतर्गत प्रत्यक्ष निवेश करने के लिए रिज़र्व बैंक में पूर्व पंजीकरण करना आवश्यक है?

प्रश्न 15: फॉर्म ओडीआई कहाँ उपलब्ध होगा?

प्रश्न 16. क्या स्वचालित मार्ग के अंतर्गत प्रत्यक्ष निवेश करने के लिए रिज़र्व बैंक द्वारा यूआईएन के आबंटन को रिज़र्व बैंक का अनुमोदन माना जाए?

प्रश्न 17. क्या समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश की परिभाषा का यह भी अर्थ होता है कि कोई किसी विद्यमान कंपनी को या तो अंशतः अथवा पूर्णतः अधिगृहीत कर सकता है?

प्रश्न 18. ‘वित्तीय प्रतिबद्धता’ किसे कहते हैं?

प्रश्न 19. समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश के निधियन के लिए अनुमेय स्रोत कौनसे हैं?

प्रश्न 20. क्या कोई भारतीय पार्टी समुद्रपारीय जेवी/ डबल्यूओएस के पक्ष में कार्यनिष्पादन गारंटी जारी कर सकती है?

प्रश्न 21. क्या कोई भारतीय पार्टी विदेश में अपनी दूसरी पीढ़ी(सेकंड जनरेशन) या परवर्ती स्तर की सहायक कंपनी की ओर से कॉर्पोरेट गारंटी जारी कर सकती है?

प्रश्न 22. क्या भारतीय पार्टी के अप्रत्यक्ष व्यक्तिगत प्रवर्तक सामान्य अनुमति के अंतर्गत जेवी/ डबल्यूओएस की ओर से किसी समुद्रपारीय उधारदाता को व्यक्तिगत गारंटी जारी कर सकता है?

प्रश्न 23. क्या कोई भारतीय पार्टी अपने समुद्रपारीय सहायक कंपनी की ओर से असीमित अवधि वाली कॉर्पोरेट गारंटी जारी कर सकती है?

प्रश्न 24. क्या स्वचालित मार्ग के अंतर्गत जेवी/ डबल्यूओएस/ स्टेप डाउन सहायक कंपनी की ओर से पूर्व में ही जारी की गई गारंटी के रोल ओवर के लिए अनुमति प्रदान की जा सकती है जिसमें सुविधा के अंतिम उपयोग में अथवा समुद्रपारीय उधारदाता अथवा कूपन (ब्याज) दर अथवा राशि में परिवर्तन हुआ है?

प्रश्न 25. क्या गारंटी के इस प्रकार के रोल ओवर को आरबीआई को नए से रिपोर्ट किया जाना है अथवा विद्यमान रिपोर्ट पर्याप्त होगा?

प्रश्न 26. भारत के बाहर प्रत्यक्ष निवेश करने वाली भारतीय पार्टी के बाध्यताएं क्या हैं?

प्रश्न 27. क्या किसी समुद्रपारीय जेवी/ डबल्यूओएस के लेखापरीक्षित वित्तीय विवरणों के आधार पर वार्षिक कार्यनिष्पादन रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य है?

प्रश्न 28. वार्षिक कार्यनिष्पादन रिपोर्ट(एपीआर) को प्रस्तुत नहीं करने पर कौनसे दंड लगाए जा सकते हैं?

प्रश्न 29. क्या अनिवासी के पक्ष में भारतीय पार्टी/ कंपनी समूह की अचल/ चल संपत्ति अथवा अन्य वित्तीय आस्तियों पर कोई मुक्त रूप से गिरवी/ बंधक/ दृष्टिबंधक/ भार सृजित कर सकता है?

प्रश्न 30. क्या वित्तीय सहायता के प्रयोजन से विदेश स्थित जेवी/ डबल्यूओएस के शेयरों को गिरवी रखा जा सकता है?

प्रश्न 31. प्रश्न सं. 17 तथा प्रश्न सं. 13 में संदर्भित मूल्यन मानदंड क्या हैं?

प्रश्न 32.(ए) क्या कोई भारतीय कंपनी विदेश में वित्तीय सेवाएँ क्षेत्र में लिप्त जेवी/ डबल्यूओएस में निवेश कर सकती है?

बी) क्या वित्तीय सेवा क्षेत्र में लिप्त भारतीय कंपनी विदेश में गैर वित्तीय सेवा क्षेत्र में किसी जेवी/ डबल्यूओएस में निवेश कर सकती है?

सी) क्या कोई भारतीय कंपनी समुद्रपारीय कोमोडिटीज़ एक्स्चेंज में व्यापार करने के लिए जेवी/ डबल्यूओएस स्थापित कर सकती है?

प्रश्न 33. क्या कोई भारतीय कंपनी अपनी भारतीय सहायक कंपनी / होल्डिंग कंपनी की निवल मालियत का विदेश में किसी जेवी/ डबल्यूओएस में निवेश करने के लिए उपयोग कर सकती है?

प्रश्न 34. क्या कोई भारतीय पार्टी समुद्रपारीय जेवी/ डबल्यूओएस को निर्यातों से प्राप्त आय का पूंजीकरण कर सकती है?

प्रश्न 35. क्या कोई भारतीय पार्टी किसी समुद्रपारीय संस्था को उस संस्था में इक्विटि सहभागिता के बिना ऋण अथवा गारंटी दे सकती है?

प्रश्न 36. समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश के प्रयोजन के लिए अनिवार्यतः परिवर्तनीय अधिमानी शेयरों (सीसीपीएस) पर क्या कार्रवाई की जाएगी?

प्रश्न 37. शेयर स्वैप के जरिए किसी समुद्रपारीय संस्था में प्रत्यक्ष निवेश के लिए क्या आवश्यक है?

प्रश्न 38. समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश मार्ग के माध्यम से भागीदारी फर्म्स को कौनसे कार्यकलाप करने के लिए अनुमति है?

प्रश्न 39. क्या भागीदारी फर्म के भागीदार फर्म के लिए तथा उसकी ओर से समुद्रपारीय जेवी/ डबल्यूओएस के शेयर धारित कर सकते हैं?

प्रश्न 40. क्या दूसरी पीढ़ी की कंपनी स्थापित करने के लिए कोई प्रतिबंध हैं? क्या इस प्रकार की स्टेप डाउन सहायक कंपनियाँ स्वचालित मार्ग के अंतर्गत स्थापित की जा सकती हैं?

प्रश्न 41. क्या कोई भारतीय पार्टी स्वचालित मार्ग के तहत किसी विशेष प्रयोजन संस्था (एसपीवी) के जरिए जेवी/ डबल्यूओएस ले सकती है?

प्रश्न 42. क्या कोई भारतीय पार्टी इस प्रकार की स्टेप डाउन सहायक कंपनियों का प्रत्यक्ष निधीयन कर सकती है?

प्रश्न 43. क्या भारत में निवासी व्यक्ति रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन के बिना विदेशी प्रतिभूतियों को अर्जित/ बेच सकता है?

प्रश्न 44. क्या भारतीय कॉर्पोरेट्स प्रत्यक्ष निवेश के अलावा अन्य किसी माध्यम से विदेश में निवेश कर सकते हैं?

प्रश्न 45. क्या कोई निवासी व्यक्ति अपनी निदेशक की क्षमता में विदेशी कंपनी के शेयर अर्जित कर सकता है?

प्रश्न 46. क्या निवासी व्यक्ति सामान्य अनुमति के अंतर्गत उनके द्वारा दी गई व्यावसायिक सेवाओं अथवा निदेशक के परिश्रमिक के बदले में विदेशी संस्था के शेयर अर्जित कर सकते हैं?

प्रश्न 47. क्या निवासी व्यक्ति उसके द्वारा धारित शेयरों के अधिकार निर्गम में अभिदान कर सकते हैं?

प्रश्न 48. क्या सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में लिप्त भारतीय कंपनी के व्यक्तिगत कर्मचारियों/ निदेशकों को विदेश में उनकी जेवी/ डबल्यूओएस में शेयर अधिगृहीत करने के लिए कोई छूट दी गई है?

प्रश्न 49. भारतीय म्युच्युअल फंड को विदेश में निवेश करने के लिए कौनसे मार्ग उपलब्ध हैं?

प्रश्न 50. देशी उद्यम पूंजी फंडों (डोमेस्टिक वेंचर कैपिटल फंड) के लिए निवेश अवसर कौनसे हैं?

प्रश्न 51. क्या कृषि में निवेश अनुमत है?

प्रश्न 52.(ए) विदेशी जेवी/ डबल्यूओएस से विनिवेश के विभिन्न प्रकार कौनसे हैं?

(बी) क्या कोई भारतीय पार्टी बट्टे खाते डाले बिना जेवी/ डबल्यूओएस से विनिवेश कर सकती है?

(सी) क्या कोई भारतीय पार्टी बट्टे खाते डालना शामिल होने वाली जेवी/ डबल्यूओएस से विनिवेश कर सकती है?

(डी) क्या कोई अन्य अतिरिक्त पूर्व-शर्तें/ अनुपालन हैं जिन के अधीन विनिवेश के समय इस प्रकार से बट्टे खाते डालना अनुमत है?

प्रश्न 53. क्या विदेशी जेवी/ डबल्यूओएस के तुलनपत्र की पुनर्संरचना, जिसमें पूँजी और प्राप्य राशियों को बट्टे खाते डालना शामिल हो अनुमत है?

प्रश्न 54. क्या कोई भारतीय पार्टी विदेश में विदेशी मुद्रा खाता खोल/ बनाए रख सकती है?

प्रश्न 55. अनिवार्यतः परिवर्तनीय अधिमनी शेयर(सीसीपीएस) से अन्य अधिमनी शेयरों पर ओडीआई के प्रयोजन के लिए क्या कार्रवाई की जाएगी?

प्रश्न 56. क्या किसी समुद्रपारीय उद्यम को दिए गए ऋण को इक्विटि में परिवर्तित किया जा सकता है? यदि हां तो उससे संबंधित रिपोर्टिंग अपेक्षाएँ क्या है?

प्रश्न 57. क्या इक्विटि एक्सपोजरों को ऋण अथवा अधिमानी पूंजी, डिबैंचर्स, आदि जैसे निधिक एक्सपोजर के अन्य प्रकारों में परिवर्तित किया जा सकता है?

प्रश्न 58. क्या विद्यमान गारंटी के फोरक्लोज़र/ क्लोज़र को एडी बैंक/ भारतीय पार्टी द्वारा आरबीआई को रिपोर्ट किया जाना है?

प्रश्न 59. दिनांक 3 मई, 2000 की यथा संशोधित अधिसूचना सं.फेमा 3/2000-आरबी के विनियम 4 (1)(iii) के प्रावधान भारतीय संस्था के विदेश में संयुक्त उद्यम अथवा पूर्णतः स्वाधिकृत सहायक संस्था को विदेशी मुद्रा में ऋण सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्राधिकृत व्यापारी की भारत के बाहर स्थित शाखा पर लागू होती है?

प्रश्न 60. यदि किसी भारतीय पार्टी की समूह कंपनी जांच के अधीन है तो क्या वह भारतीय पार्टी स्वचालित मार्ग के अंतर्गत ओडीआई लेनदेन कर सकती है?

प्रश्न 61. क्या 2 जनवरी 2017 की अधिसूचना फेमा सं.382/2004-आरबी जिसके जरिए एफ़एटीएफ़ असहयोग करने वाले देशों तथा अधिकारक्षेत्रों में स्वचालित मार्ग के अंतर्गत स्थापित/ अधिगृहीत जेवी/ डबल्यूओएस में समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश को प्रतिबंधित किया गया है, केवल उन देशों पर लागू है जिनकी वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफ़एटीएफ़) ने “कार्रवाई करें” के रूप में पहचान की है?

प्रश्न 62. किसी संयुक्त उद्यम(जेवी) अथवा पूर्णतः स्वाधिकृत सहायक कंपनी(डबल्यूओएस) द्वारा आवासीय/ वाणिज्यिक परिसर के विकास/ निर्माण(तथा उसके पश्चात बिक्री) को ओडीआई विनियम(समय-समय पर यथासंशोधित दिनांक 7 जुलाई 2004 की अधिसूचना फेमा सं.120/आरबी-2004) के अंतर्गत स्थावर इस्टेट कारोबार माना जाएगा?

प्रश्न 63. क्या कोई भारतीय पार्टी/ निवासी भारतीय प्रारंभिक भुगतान किए बिना अथवा आस्थगित भुगतान के आधार पर किसी विदेशी संस्था के शेयर अर्जित कर सकता है?

प्रश्न 64. क्या कोई भारतीय पार्टी(आईपी) अपनी विदेशी संस्था की स्टेप डाउन सहायक कंपनी के माध्यम से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से अपनी विदेशी संस्था(डबल्यूओएस) के माध्यम से भारत मेन्स्तेप डाउन सहायक कंपनी/ संयुक्त उद्यम स्थापित कर सकती है?


प्रश्न 1. समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश से संबंधित दिशानिर्देश कहाँ उपलब्ध हैं तथा समुद्रपारीय निवेश पर दिशानिर्देशों से संबंधित स्पष्टीकरण कैसे प्राप्त किए जा सकते हैं?

उत्तर: इन दिशानिर्देशों को भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर यथासंशोधित दिनांक 7 जुलाई 2004 की अधिसूचना सं.फेमा120/आरबी-2004 के माध्यम से अधिसूचित किया गया है । ये विनियम रिज़र्व बैंक की वेबसाइट http://www.rbi.org.in/scripts/fema.aspx पर उपलब्ध हैं। “निवासियों द्वारा संयुक्त उद्यम (जेवी)/ विदेश में पूर्ण स्वामित्ववाली सहायक संस्थाओं (डब्लूओएस) में प्रत्यक्ष निवेश पर मास्टर निदेश” नाम से मास्टर निदेश को जारी किया गया है। मास्टर निदेश में बैंकिंग मामलों तथा विदेशी मुद्रा लेनदेन सहित विभिन्न अधिनियमों के तहत रिज़र्व बैंक द्वारा बनाए गए नियम एवं विनियमों पर अनुदेशों को समेकित किया गया है। यह मास्टर निदेश आरबीआई की वेबसाइट https://www.rbi.org.in पर अधिसूचना खंड में उपलब्ध है।

अनुदेशों द्वारा विशिष्ट रूप से अथवा समान्यतः कवर नहीं किए गए मामलों के संबंध में यदि कोई अतिरिक्त स्पष्टीकरण चाहिए, हो तो उसे संबंधित प्राधिकृत व्यापारी (एडी) बैंक से प्राप्त किया जाए। तथापि यदि बैंक संतोषजनक उत्तर नहीं दे पता है, तो मामले के संपूर्ण ब्यौरे देते हुए एडी बैंक के माध्यम से रिज़र्व बैंक के केंद्रीय कार्यालय को निम्नलिखित पते पर अथवा ई-मेल से अनुरोध किया जाए:

पता :
मुख्य महाप्रबंधक
भारतीय रिज़र्व बैंक
विदेशी मुद्रा विभाग
समुद्रपारीय निवेश प्रभाग
केंद्रीय कार्यालय, अमर बिल्डिंग, 5वीं मंजिल
मुंबई 400001.

2. भारत के बाहर प्रत्यक्ष निवेश किसे कहते हैं?

उत्तर: भारत के बाहर प्रत्यक्ष निवेश का अर्थ है, स्वचालित मार्ग अथवा अनुमोदन मार्ग के अंतर्गत किसी विदेशी संस्था की पूंजी में अंशदान अथवा संस्था के बहिर्नियम में अभिदान के माध्यम से अथवा बाज़ार से खरीद कर अथवा निजी प्लेसमेंट अथवा स्टॉक एक्स्चेंज के माध्यम से किसी विदेशी संस्था के विद्यमान शेयर की खरीद से किया गया निवेश, जो विदेशी संस्था (जेवी अथवा डबल्यूओएस) में दीर्घकालीन हित को दर्शाता है। यह प्रश्न सं. 44 के उत्तर में स्पष्ट किए गए पोर्टफोलियो निवेश के अर्थ से भिन्न है।

प्रश्न 3. भारत के निवासी व्यक्तियों (व्यक्ति) को विदेश में प्रतिभूतियों की खरीद/ अधिग्रहण के लिए कौनसी सामान्य अनुमतियाँ उपलब्ध हैं?

उत्तर: भारत के निवासी व्यक्तियों (व्यक्ति) को विदेश में प्रतिभूतियों की खरीद/ अधिग्रहण के लिए निम्नानुसार सामान्य अनुमतियाँ प्रदान की गई हैं:

ए) आरएफ़सी खाते में धारित निधियों में से;

बी) विदेशी मुद्रा शेयरों की विद्यमान धारिता पर बोनस शेयरों के रूप में

सी) जब भारत में स्थायी रूप से निवास नहीं कर रहें हैं तो भारत के बाहर के विदेशी मुद्रा संसाधनों से इस प्रकार से खरीदे गए अथवा अधिगृहीत किए गए शेयरों को बेचने के लिए भी सामान्य अनुमति उपलब्ध है।

दिनांक 4 अगस्त 2013 (अधिसूचना सं.263 के माध्यम से) से भारत का कोई निवासी व्यक्ति प्रतिभूतियों की खरीद सहित अनुमत चालू तथा पूंजी खाता लेनदेन तथा विदेश में संयुक्त उद्यम (जेवी) / पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी (डबल्यूओएस) स्थापित / अधिगृहीत करने के लिए उदारीकृत विप्रेषण योजना (एलआरएस) के अंतर्गत प्रति वित्तीय वर्ष, रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित की गई सीमा तक विप्रेषण कर सकता है।

प्रश्न 4. क्या समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश किसी भी गतिविधि के लिए किया जा सकता है? समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश करने के लिए प्रतिबंधित गतिविधियां कौन-सी हैं?

उत्तर: कोई भी भारतीय पार्टी किसी भी वास्तविक गतिविधि में समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश कर सकती है।

दिनांक 7 जुलाई 2004 की अधिसूचना सं. फेमा 120/आरबी-2004 में परिभाषित किए गए अनुसार अचल संपत्ति तथा बैंकिंग कारोबार समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र हैं। अचल संपत्ति कारोबार का अर्थ है जमीन-जायदाद की खरीद-बिक्री या अंतरणीय विकास अधिकार (टीडीआर) का व्यवसाय, लेकिन इसमें टाउनशिप का विकास, आवासीय/ व्यावसायिक परिसरों, सड़कों या पुलों का निर्माण, आदि शामिल नहीं है।

तथापि भारत में परिचालन करने वाले भारतीय बैंक विदेश में जेवी/ डबल्यूओएस स्थापित कर सकते हैं बशर्ते वे विनियमन विभाग (DoR), केन्द्रीय कार्यालय, आरबीआई से बैंकिंग विनियमन अधिनियम,1949 के अंतर्गत अनापत्ति प्राप्त करते हैं।

कोई विदेशी प्रतिष्ठान, जिसमें किसी भारतीय पार्टी की प्रत्यक्ष या परोक्ष इक्विटी सहभागिता हो, भारतीय रुपयों से सहबद्ध वित्तीय उत्पाद (यथा, अपरिदेय व्यापार, जिसमें विदेशी मुद्रा, रुपया विनिमय दरें, शेयर सूचकांक, जो भारतीय बाजार से सहबद्ध हों, आदि, शामिल हैं) रिज़र्व बैंक के विनिर्दिष्ट अनुमोदन के बिना नहीं देगा । इस प्रकार की उत्पाद सुविधा देने की किसी घटना को वर्तमान फेमा विनियमों का उल्लंघन माना जायेगा और फलतः उस पर फेमा, 1999 के प्रासंगिक प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जायेगी ।

यह नोट किया जाए कि वित्तीय सेवा क्षेत्र में गतिविधियां करने के लिए पूर्वोक्त अधिसूचना के विनियम 7 में विनिर्दिष्ट किए गए अनुसार कतिपय अतिरिक्त शर्तों का पालन करना होगा। कृपया प्रश्न 32 का उत्तर देखें।

प्रश्न 5. संयुक्त उद्यम (जेवी) तथा पूर्ण स्वामित्ववाली सहायक संस्था (डब्लूओएस) क्या है?

उत्तर: “ संयुक्त उपक्रम (जेवी) “ / “पूर्ण स्वामित्ववाली सहायक संस्था (डब्लूओएस)” का अर्थ है मेजबान देश के नियमों एवं विनियमों के अनुसार गठित, पंजीकृत या निगमित कोई विदेशी संस्था, जिसमें कोई भारतीय पार्टी / किसी निवासी भारतीय द्वारा प्रत्यक्ष निवेश किया गया हो;

किसी विदेशी संस्था को भारतीय पार्टी/ निवासी भारतीय का संयुक्त उद्यम (जेवी) तब कहा जाता है जब उसमें भारतीय पार्टी के साथ अन्य विदेशी प्रवर्तकों की शेयर धारिता है। डबल्यूओएस के मामले में समस्त पूंजी एक अथवा उससे अधिक भारतीय पार्टी/ निवासी भारतीय द्वारा धारित होती है।

प्रश्न 6. स्वचालित मार्ग तथा अनुमोदन मार्ग क्या है?

उत्तर: स्वचालित मार्ग के अंतर्गत भारतीय पार्टी को विदेश में जेवी/ डबल्यूओएस में समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश करने के लिए रिज़र्व बैंक से किसी प्रकार के पूर्वानुमोदन की आवश्यकता नहीं है। इस प्रकार के निवेश करने हेतु धन-प्रेषण करने के लिए भारतीय पार्टी को फ़ॉर्म ओडीआइ (रिपोर्टिंग पर मास्टर निदेश) में एक आवेदन और निर्धारित संलग्नक/ दस्तावेज किसी प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-। बैंक के पास देना चाहिए । तथापि वित्तीय सेवा क्षेत्र में निवेश के मामले में भारत तथा विदेश, दोनों के संबंधित विनियामक प्राधिकारियों से पूर्वानुमोदन अपेक्षित है।

“फार्म ओडीआइ” विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम के अंतर्गत “रिपोर्टिंग पर मास्टर निदेश” नामक मास्टर निदेश के अनुबंध के रूप में उपलब्ध है।

स्वचालित मार्ग के अंतर्गत शर्तों द्वारा कवर नहीं किए जाने वाले प्रस्तावों को रिज़र्व बैंक का पूर्वानुमोदन अपेक्षित है जिसके लिए उसमें निर्धारित दस्तावेज के साथ विशिष्ट आवेदन फार्म ओडीआइ में उनके प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-। बैंकों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

प्रश्न 7. अनुमोदन मार्ग के अंतर्गत समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश (ओडीआई) करने के लिए प्रस्ताव को किस प्रकार प्रेषित किया जाए?

उत्तर: आवेदक को अपने नामित प्राधिकृत व्यापारी से प्रस्ताव के साथ संपर्क करना चाहिए, जिसे विधिवत संवीक्षा के पश्चात तथा नामित एडी बैंक के विशिष्ट सिफ़ारिशों के साथ समर्थनकारी दस्तावेजों (नीचे उल्लिखित किए गए अनुसार) सहित रिज़र्व बैंक को निम्नलिखित पते पर प्रस्तुत किया जाएगा :

मुख्य महाप्रबंधक
भारतीय रिज़र्व बैंक
विदेशी मुद्रा विभाग
समुद्रपारीय निवेश प्रभाग
केंद्रीय कार्यालय, अमर बिल्डिंग, 5वीं मंजिल
सर पी.एम. रोड, फोर्ट
मुंबई 400001.

नामित एडी-बैंक को प्रस्ताव अग्रेषित करने से पूर्व अनुमोदन मार्ग के अंतर्गत ऑन-लाइन ओआईडी एप्लिकेशन में ‘फॉर्म-ओडीआई’ प्रस्तुत करना चाहिए तथा एप्लिकेशन द्वारा जनरेट किए गए ट्रैन्सैक्शन नंबर का उल्लेख पत्र में किया जाए।

यदि प्रस्ताव को अनुमोदन दिया जाता है तो एडी बैंक को रिज़र्व बैंक को सूचित करते हुए विप्रेषण कर देना चाहिए ताकि यूआईएन आबंटित हो जाए।

रिज़र्व बैंक द्वारा अनुमोदन के लिए एडी बैंक को फॉर्म ओडीआई-भाग -I के खंड डी, तथा खंड ई के साथ निम्नलिखित दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होंगे:

ए) भारतीय पार्टी के नामित एडी से मुहरबंद लिफाफे में निम्नलिखित ब्यौरों का उल्लेख करने वाला पत्र:

  • ओआईडी एप्लिकेशन द्वारा जनरेट किया गया ट्रैन्सैक्शन नंबर

  • भारतीय संस्था के संक्षिप्त ब्यौरे

  • समुद्रपारीय संस्था के संक्षिप्त ब्यौरे

  • प्रस्ताव की पृष्ठभूमि, यदि हो।

  • ट्रैन्सैक्शन के संक्षिप्त ब्यौरे

  • वर्तमान फेमा प्रावधानों का उल्लेख कराते हुए अनुमोदन मांगने का/के कारण

  • निम्नलिखित के संबंध में नामित एडी बैंक के प्रेक्षण :-

  • भारत के बाहर जेवी/ डबल्यूओएस की प्रत्यक्षतः अर्थ क्षमता

  • इस प्रकार के निवेश से बाहरी व्यापार को होने वाले योगदान तथा भारत को होने वाले अन्य लाभ

  • आईपी तथा विदेशी संस्था की वित्तीय स्थिति तथा कारोबार का ट्रैक रिकार्ड

  • भारत के बाहर जेवी/ डबल्यूओएस की गतिविधि अथवा संबंधित गतिविधि में आईपी की निपुणता तथा अनुभव

  • नामित एडी बैंक कि सिफ़ारिश

बी) आईपी द्वारा नामित एडी बैंक को संबोधित किया गया पत्र

सी) प्रस्तावित लेनदेन के लिए बोर्ड का संकल्प

डी) संगठनात्मक ढांचे का आरेखी प्रतिरूप जिसमें आईपी की सभी अनुषंगी संस्थाओं को उनके स्टेक (प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष) तथा स्थिति (परिचालन कंपनी अथवा एसपीवी जो भी है) सहित हॉरिजॉन्टली तथा वर्टिकली दर्शाया गया हो

(ई) समुद्रपारीय संस्था का निगमन तथा मूल्यांकन प्रमाणपत्र (यदि लागू हो)

(एफ़) अन्य संबंधित दस्तावेज़ जिन्हें अंकित, अनुक्रमित तथा फ्लैग किया गया हो

प्रश्न 8. “नामित प्राधिकृत व्यापारी” की संकल्पना क्या है? यदि जेवी/ डबल्यूओएस के एक से अधिक भारतीय प्रवर्तक हों तो क्या उसी जेवी/ डबल्यूओएस के लिए एक से अधिक “नामित प्राधिकृत व्यापारी” हो सकते हैं? यदि एक भारतीय प्रवर्तक की एक ही देश में अथवा भिन्न देशों में एक से अधिक जेवी हो तो क्या होगा?

उत्तर: भारतीय पार्टी/ निवासी व्यक्ति को किसी विशिष्ट समुद्रपारीय जेवी/ डबल्यूओएस के संबंध में सभी लेनदेन को किसी प्राधिकृत व्यापारी की एक शाखा के माध्यम से ही किए जाने चाहिए। यह शाखा उस जेवी/ डबल्यूओएस के संबंध में “नामित प्राधिकृत व्यापारी” होगी और उस विशिष्ट जेवी/ डबल्यूओएस में निवेश के संबंध में सभी लेनदेन तथा पत्राचार/ संप्रेषण को प्राधिकृत व्यापारी की इस “नामित ”शाखा के माध्यम से ही रिपोर्ट किया जाए। यदि जेवी/ डबल्यूओएस को विदेश में दो अथवा उससे अधिक भारतीय परावर्तकों द्वारा स्थापित किया जा रहा है तो सभी भारतीय प्रवर्तक जिन्हें एकत्रित रूप से भारतीय पार्टी कहा जाएगा और निवासी व्यक्ति को उस जेवी/ डबल्यूओएस के संबंध में सभी लेनदेन केवल एक “नामित प्राधिकृत व्यापारी” के माध्यम से करने होंगे। यदि भारतीय पार्टी/ निवासी व्यक्ति को किसी अन्य एडी में स्थानांतरित होना है तो विद्यमान प्राधिकृत अधिकारी से अनापत्ति प्रमाणपत्र प्राप्त कर रिज़र्व बैंक को एक पत्र द्वारा आवेदन किया जाए। भारतीय प्रवर्तक अपने अलग अलग जेवी/ डबल्यूओएस के लिए एक ही प्राधिकृत व्यापारी की विभिन्न शाखाओं अथवा अन्य प्राधिकृत व्यापारियों की शाखाओं को नामित कर सकते हैं। इस संबंध में शर्त केवल यह है कि प्रवर्तकों की संख्या कितनी भी हो, एक जेवी/ डबल्यूओएस के सभी प्रकार के लेनदेन करने के लिए केवल एक ही “नामित प्राधिकृत व्यापारी” होगा।

प्रश्न 9. कौन से अन्य ओडीआई लेनदेन के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक का अनुमोदन आवश्यक है?

उत्तर: पूर्वानुमोदन आवश्यकता वाले कुछ प्रस्ताव नीचे दिए गए हैं:

i) ऊर्जा तथा प्रकृतिक संसाधन क्षेत्र में लेखा परीक्षा किए गए अंतिम तुलन-पत्र की तारीख के अनुसार भारतीय कंपनियों की निवल मालियत की निर्धारित सीमा से अधिक समुद्रपारीय निवेश;

ii) तेल क्षेत्र में विदेशी अनिगमित संस्थाओं में निवासी कॉर्पोरेट द्वारा लेखा परीक्षा किए गए अंतिम-तुलन पत्र की तारीख के अनुसार भारतीय कंपनियों की निवल मालियत की निर्धारित सीमा से अधिक निवेश, बशर्ते कि ऐसे प्रस्ताव का अनुमोदन सक्षम प्राधिकारी द्वारा किया जाये और इस प्रकार के निवेश का अनुमोदन करने वाले बोर्ड संकल्प की प्रमाणित प्रति द्वारा उसका विधिवत समर्थन किया जाए। तथापि भारत सरकार द्वारा विधिवत अनुमोदित नवरत्न पीएसयु, ओएनजीसी विदेश लि. (ओवीएल) और ऑयल इंडिया लि. (ओआइएल) द्वारा तेल क्षेत्र में विदेशी अनिगमित/ निगमित संस्थाओं में बिना किसी सीमा के निवेश (अर्थात्, तेल एवं प्राकृतिक गैस, आदि, की खोज एवं ड्रिलिंग के लिए) के लिए स्वचालित मार्ग के अंतर्गत अनुमति है।

iii) पात्रता के कुछ मानदंडों को पूरा करने वाले स्वामित्व प्रतिष्ठानों तथा पंजीकरण नहीं की गई भागीदारी फर्म्स द्वारा समुद्रपारीय निवेश;

iv) विनिर्माण/ शैक्षिक/ अस्पताल क्षेत्र में लिप्त पंजीकृत न्यासों/ सोसाइटियों (पात्रता के कुछ मानदंडों को पूरा करने वाले) द्वारा भारत के बाहर उसी क्षेत्र के जेवी/ डबल्यूओएस में निवेश;

v) भारतीय पार्टी द्वारा उप-अनुषंगी संस्था (एसडीएस) के दूसरे तथा उसके बाद के स्तर को कॉर्पोरेट गारंटी;

vi) भारतीय पार्टी द्वारा अपने एसडीएस के पहले तथा उसके बाद के स्तर को प्रस्तावित की गई गारंटी के सभी अन्य प्रकार;

vii) पूर्वोक्त विनियम 16 ए के अंतर्गत उल्लिखित पात्रता के कुछ मानदंडों को पूरा करने वाली सूचीबद्ध/ गैर सूचीबद्ध भारतीय कंपनी की बहियों में पूंजी तथा प्राप्य राशियों को बट्टे खाते डालना आवश्यक है ऐसी जेवी/ डबल्यूओएस के तुलन-पत्र की पुनर्रचना;

viii) वसूली की निर्धारित अवधि के पश्चात वसूल नहीं हुई निर्यात की राशियों के पूंजीकरण के लिए रिज़र्व बैंक का पूर्वानुमोदन आवश्यक होगा; तथा

ix) जेवी/ डबल्यूओएस में इक्विटि अंशदान के बिना वित्तीय प्रतिबद्धता लेने के लिए भारतीय पार्टी से प्राप्त प्रस्तावों पर भारताईय पार्टी की कारोबारी आवश्यकता तथा जेवी/ डबल्यूओएस जिस देश में स्थित है उस मेजबान देश की विधिक आवश्यकता के आधार पर रिज़र्व बैंक द्वारा अनुमोदन मार्ग के अंतर्गत विचार किया जाए ।

प्रश्न 10. स्वचालित मार्ग के अंतर्गत समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश करने के कौन पात्र हैं? भारतीय पार्टी किसे कहते हैं?

उत्तर: भारतीय पार्टी स्वचालित मार्ग के अंतर्गत समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश करने के लिए पात्र है। “भारतीय पार्टी” का अर्थ है भारत में निगमित कोई कंपनी या संसद के अधिनियम द्वारा सृजित कोई निकाय या भागीदारी फर्म, जो भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 के अंतर्गत पंजीकृत हो या कोई सीमित देयता भागीदारी (एलएलपी), जो सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 (2009 का 6) के अंतर्गत पंजीकृत हो और इसमें रिज़र्व बैंक द्वारा यथा अधिसूचित भारत का कोई अन्य प्रतिष्ठान शामिल है; जब एक से अधिक ऐसी कंपनी, निकाय या प्रतिष्ठान किसी विदेशी प्रतिष्ठान में निवेश करें, तब ऐसे एकीकरण को भी “भारतीय पार्टी” माना जायेगा;

प्रश्न 11. स्वचालित मार्ग के अंतर्गत समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश के लिए सीमाएं एवं अपेक्षाएँ क्या हैं?

उत्तर: स्वचालित मार्ग के अंतर्गत समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश के लिए मानदंड नीचे दिए गए अनुसार हैं:

i) भारतीय पार्टी अपनी निवल मालियत (लेखा परीक्षा किए गए अंतिम तुलन पत्र की तारीख के अनुसार) की निर्धारित सीमा तक मेजबान देश की विधि के अनुसार अनुमत किसी भी वास्तविक गतिविधि के लिए जेवी/ डबल्यूओएस में निवेश कर सकते हैं। निवल मालियत की तुलना में निर्धारित सीमा उस स्थिति में लागू नहीं होगी जहां भारतीय पार्टी के ईईएफ़सी खाते में धारित शेष में से अथवा एडीआर/ जीडीआर के माध्यम से जुटाई गई निधियों में से निवेश किया गया हो;

ii) भारतीय पार्टी को रिज़र्व बैंक की निर्यातकों की सतर्कता सूची/रिज़र्व बैंक/ ऋण सूचना ब्यूरो (इंडिया) लि. (सिबिल)/ या रिज़र्व बैंक द्वारा यथा अनुमोदित किसी अन्य ऋण सूचना कंपनी द्वारा बैंकिंग प्रणाली में प्रकाशित/परिचालित चूककर्ता-सूची में नहीं होना चाहिए अथवा उसे किसी जाँच/ प्रवर्तन एजेंसी या विनियामक निकाय की जाँच के दायरे में नहीं होना चाहिए; तथा

iii) किसी जेवी/ डब्लूओएस से संबंधित सभी लेन देन भारतीय पार्टी द्वारा नामित किये जाने वाले प्राधिकृत व्यापारी बैंक की एक शाखा के माध्यम से किये जाने चाहिए ।

प्रश्न 12. क्या सभी देशों में समुद्रपारीय निवेश मुक्त रूप से अनुमत हैं और क्या निवेश की मुद्रा के संबंध में कोई प्रतिबंध हैं?

उत्तर: पाकिस्तान में निवेश अनुमोदन मार्ग के तहत अनुमत है। नेपाल में किए गए निवेश केवल भारतीय रुपए में किए जा सकते हैं। भूटान में निवेश भारतीय रुपए तथा मुक्त रूप से परिवर्तनीय मुद्राओं में अनुमत है।

प्रश्न 13: स्वचालित मार्ग के अंतर्गत किसी जेवी/ डबल्यूओएस में समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश करने के लिए भारतीय पार्टी को किस क्रियाविधि का पालन करना है?

उत्तर: स्वचालित मार्ग के अंतर्गत समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश करने के लिए भारतीय पार्टी को फॉर्म ओडीआई भरना होगा जिसे उसमें सूचीबद्ध किए गए दस्तावेज़, जैसे बोर्ड के संकल्प की प्रमाणित प्रतिलिपि, सांविधिक लेखापरीक्षकों के प्रमाणपत्र तथा प्रश्न 31 के उत्तर में सूचीबद्ध किए गए मूल्यांकन मानदंडों के अनुसार मूल्यांकन रिपोर्ट (किसी मौजूदा कंपनी के अधिग्रहण के मामले में), द्वारा विधिवत रूप से समर्थित किया गया हो और निवेश/ विप्रेषण करने के लिए प्राधिकृत व्यापारी (नामित प्राधिकृत व्यापारी) से संपर्क करना होगा।

प्रश्न 14. क्या स्वचालित मार्ग के अंतर्गत प्रत्यक्ष निवेश करने के लिए रिज़र्व बैंक में पूर्व पंजीकरण करना आवश्यक है?

उत्तर: स्वचालित मार्ग के अंतर्गत प्रत्यक्ष निवेश करने के लिए वास्तव में रिज़र्व बैंक में पूर्व पंजीकरण करना आवश्यक नहीं है। दिनांक 13 अप्रैल 2016 के ए.पी. (डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं.62 के अनुसार किसी जेवी/ डबल्यूओएस के लिए फॉर्म ओडीआई में पहले विप्रेषण/ निवेश की ऑनलाइन रिपोर्ट के बाद उस विशिष्ट जेवी/ डबल्यूओएस के लिए तत्काल और अपने आप एक विशिष्ट पहचान संख्या (यूआईएन) जनित की जाएगी। उसी जेवी/ डबल्यूओएस में इसके बाद के निवेश यूआईएन के आबंटन के बाद ही किए जा सकते हैं।

प्रश्न 15: फॉर्म ओडीआई कहाँ उपलब्ध होगा?

उत्तर: “फार्म ओडीआई” विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम के अंतर्गत रिपोर्टिंग पर मास्टर निदेश” नामित मास्टर निदेश के अनुबंध के रूप में उपलब्ध है।

13 अप्रैल 2016 से प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I के बैंकों को यूआईएन के आबंटन, बाद के विप्रेषणों की रिपोर्टिंग, एपीआर फ़ाइल करने, आदि के लिए रिज़र्व बैंक में समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश एप्लिकेशन में संशोधित ओडीआई फॉर्म्स को ऑनलाइन फ़ाइल करना होगा। ओडीआई फॉर्म्स को प्रस्तुत करने संबंधी संशोधित क्रियाविधि दिनांक 13 अप्रैल 2016 के ए.पी. (डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं.62 द्वारा जारी की गई है।

एडी श्रेणी-I बैंकों को भारतीय पार्टी से निवेशोत्तर परिवर्तनों से संबंधित दस्तावेजों सहित ओडीआई फॉर्म्स भौतिक रूप में प्राप्त होना जारी रहेगा। उन्हें यूआईएन–वार सुरक्षित बनाए रखना चाहिए ताकि जब कभी विशिष्ट रूप से आवश्यक हो तो उसे रिज़र्व बैंक को प्रस्तुत किया जा सके।

प्रश्न 16. क्या स्वचालित मार्ग के अंतर्गत प्रत्यक्ष निवेश करने के लिए रिज़र्व बैंक द्वारा यूआईएन के आबंटन को रिज़र्व बैंक का अनुमोदन माना जाए?

उत्तर: नहीं, यूआईएन के आबंटन को जेवी/ डबल्यूओएस में किएगए/ किए जाने वाले निवेश के लिए रिज़र्व बैंक का अनुमोदन नहीं माना जा सकता है। यूआईएन जारी करने का अर्थ यही है की डेटाबेस को अद्यतन बनाए रखने के लिए निवेश को रिकार्ड कर लिया गया है। फेमा के विनियमों के प्रावधानों का अनुपालन करने की ज़िम्मेदारी एडी बैंक तथा/ अथवा भारतीय पार्टी की है।

साथ ही 1 जून 2012 से स्वचालित मार्ग के अंतर्गत जेवी/ डबल्यूओएस को आबंटित किए गए यूआईएन के ब्यौरे देने वाला एक स्व-जनित ई-मेल यूआईएन के आबंटन की पुष्टि के रूप में एडी/ भारतीय पार्टी को प्रेषित किया जाता है । रिज़र्व बैंक द्वारा यूआईएन के आबंटन की पुष्टि के रूप में कोई अलग पत्र भारतीय पार्टी तथा एडी श्रेणी–I बैंक को जारी नहीं किया जाता है।

प्रश्न 17. क्या समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश की परिभाषा का यह भी अर्थ होता है कि कोई किसी विद्यमान कंपनी को या तो अंशतः अथवा पूर्णतः अधिगृहीत कर सकता है?

उत्तर: कोई पात्र भारतीय पार्टी विदेश में पूर्व से ही विद्यमान संस्था में या तो आंशिक हिस्सेदारी(जेवी) अथवा समग्र हिस्सेदारी अर्जित कर सकती है बशर्ते उसका मूल्यांकन निर्धारित मानदंडों के अनुसार किया गया है। कृपया प्रश्न सं. 31 भी देखें।

प्रश्न 18. ‘वित्तीय प्रतिबद्धता’ किसे कहते हैं?

उत्तर: ‘वित्तीय प्रतिबद्धता’ का अर्थ है किसी भारतीय पार्टी द्वारा निम्नलिखित के माध्यम से भारत के बाहर प्रत्यक्ष निवेश की राशि :

i. विदेश में किसी जेवी/ डबल्यूओएस के इक्विटी शेयरों या अनिवार्यतः परिवर्तनीय अधिमानी शेयरों (सीसीपीएस) में अंशदान के माध्यम से ।

ii. अधिमनी शेयरों (रिपोर्टिंग के प्रयोजन के लिए इसे ऋण समझा जाए) के रूप में जेवी/ डबल्यूओएस में अंशदान।

iii. विदेश में उसकी जेवी/ डबल्यूओएस को ऋण के रूप में ।

iv. उसकी समुद्रपारीय जेवी/ डबल्यूओएस की ओर से जारी की गयी कॉर्पोरेट गारंटी (निष्पादन गारंटी से भिन्न) की राशि का 100%;

v. उसकी समुद्रपारीय जेवी/ डबल्यूओएस की ओर से जारी की गयी निष्पादन गारंटी की राशि का 50%;

vi. भारतीय पार्टी की समुद्रपारीय जेवी/ डबल्यूओएस की ओर से किसी निवासी बैंक द्वारा जारी बैंक गारंटी/ आपाति साख पत्र, जो कि भारतीय पार्टी की प्रति गारंटी/ संपार्श्विक द्वारा समर्थित हो।

vii. भारतीय पार्टी/ उसकी समूह कंपनियों की चल/ अचल संपत्ति अथवा अन्य वितति आस्तियों पर भार (गिरवी/ बंधक/ दृष्टिबंधक) सृजित करके ली गई निधि/ गैर निधि आधारित ऋण सुविधा की राशि

(नोट: गारंटी की राशि तथा अवधि को प्रारंभ में ही विनिर्दिष्ट किया जाना चाहिए।)

प्रश्न 19. समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश के निधियन के लिए अनुमेय स्रोत कौनसे हैं?

उत्तर: समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश के लिए निधियन निम्नलिखित स्रोतों में से एक अथवा अधिक स्रोतों के माध्यम से ल्या जा सकता है:

i. भारत में किसी एडी बैंक से विदेशी मुद्रा का आहरण।

ii. शेयरों की अदला-बदली (स्वैप) (इससे तात्पर्य है भारतीय पार्टी के शेयरों की अदला-बदली के माध्यम से किसी समुद्रपारीय जेवी/ डबल्यूओएस के शेयरों का अधिग्रहण)

iii. निर्यातों तथा अन्य देयताओं तथा अन्य प्राप्य राशियों का पूँजीकरण।

iv. बाह्य वाणिज्यिक उधार (इसीबी)/विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांडों (एफसीसीबी) से प्राप्त राशि ;

v. विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बांडों और साधारण शेयरों को (डिपॉजिटरी रसीद तंत्र के माध्यम से) जारी किये जाने की योजना, 1993 और उक्त मामले में भारत सरकार द्वारा समय-समय पर जारी किये गये दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्गत एडीआर/जीडीआर के विनिमय में;

vi. भारतीय पार्टी द्वारा किसी प्राधिकृत व्यापारी के पास विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा खाते (इइएफसी खाता में धारित जमाराशि ।

vii. एडीआर/जीडीआर निर्गमों के माध्यम से जुटायी गयी विदेशी मुद्रा निधियों की आय ।

प्रश्न 20. क्या कोई भारतीय पार्टी समुद्रपारीय जेवी/ डबल्यूओएस के पक्ष में कार्यनिष्पादन गारंटी जारी कर सकती है?

उत्तर: हाँ, भारतीय पार्टी को कार्यनिष्पादन गारंटी जारी करने की अनुमति है तथा कार्य निष्पादन गारंटियों की 50 प्रतिशत राशि को उसकी समुद्रपारीय जेवी/ डबल्यूओएस की वित्तीय प्रतिबद्धता की गणना के प्रयोजन से ध्यान में लिया जाएगा जो कि समय-समय पर रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित सीमा के भीतर हिनी चाहिए। इसके अलावा संविदा की पूर्ति के लिए विनिर्दिष्ट अवधि संबंधित कार्यनिष्पादन गारंटी की वैधता अवधि होगी। ऐसे मामलों में जहां गारंटी लागू किए जाने के कारण वित्तीय प्रतिबद्धता की निर्धारित सीमा का उल्लंघन होता है, वहाँ भारतीय पार्टी को इस प्रकार से गारंटी लागू किए जाने पर भारत से निधियों का विप्रेषण करने के लेई रिज़र्व बैंक का पूर्वानुमोदन लेने होगा।

प्रश्न 21. क्या कोई भारतीय पार्टी विदेश में अपनी दूसरी पीढ़ी (सेकंड जनरेशन) या परवर्ती स्तर की सहायक कंपनी की ओर से कॉर्पोरेट गारंटी जारी कर सकती है?

उत्तर: भारतीय पार्टी को अनुमोदन मार्ग के अंतर्गत विदेश में अपनी दूसरी पीढ़ी (सेकंड जनरेशन) अथवा परवर्ती स्तर की स्टेप डाउन ऑपरेटिंग सहायक कंपनी की ओर से कॉर्पोरेट गारंटी जारी करने की अनुमति है बशर्ते जिस दूसरे स्तर की स्टेप डाउन परिचालन सहायक कंपनी की ओर से इस प्रकार की गारंटी जारी किया जाना अभिप्रेत है, उसमें भारतीय कंपनी अप्रत्यक्ष रूप से 51 प्रतिशत या अधिक का हित धारण करती हो ।

प्रश्न 22. क्या भारतीय पार्टी के अप्रत्यक्ष व्यक्तिगत प्रवर्तक सामान्य अनुमति के अंतर्गत जेवी/ डबल्यूओएस की ओर से किसी समुद्रपारीय उधारदाता को व्यक्तिगत गारंटी जारी कर सकता है ?

उत्तर: 28 मार्च 2012 से वर्तमान में सामान्य अनुमति के अंतर्गत भारतीय पार्टी के प्रवर्तकों द्वारा व्यक्तिगत गारंटी के निर्गम के लिए दी गई अनुमति, प्रत्यक्ष प्रवर्तकों द्वारा व्यक्तिगत गारंटी के मामले में लागू शर्तों के साथ भारतीय पार्टी के अप्रत्यक्ष निवासी व्यक्तिगत प्रवर्तकों को भी प्रदान की गई है।

प्रश्न 23. क्या कोई भारतीय पार्टी अपने समुद्रपारीय सहायक कंपनी की ओर से असीमित अवधि वाली कॉर्पोरेट गारंटी जारी कर सकती है?

उत्तर: 27 मार्च 2006 के ए.पी. (डीआईआर सीरीज) परिपत्र सं.29 के अनुसार कोई भी गारंटी असीमित अवधि वाली नहीं हो सकती है।

प्रश्न 24. क्या स्वचालित मार्ग के अंतर्गत जेवी/ डबल्यूओएस/ स्टेप डाउन सहायक कंपनी की ओर से पूर्व में ही जारी की गई गारंटी के रोल ओवर के लिए अनुमति प्रदान की जा सकती है जिसमें सुविधा के अंतिम उपयोग में अथवा समुद्रपारीय उधारदाता अथवा कूपन (ब्याज) दर अथवा राशि में परिवर्तन हुआ है?

उत्तर: नहीं, आज की तारीख में कोई गारंटी जिसे जेवी/ डबल्यूओएस/ स्टेप डाउन सहायक कंपनी की ओर से जारी किया गया हो, को पुनः फेमा का अनुपालन किए गए बिना स्वचालित मार्ग के अंतर्गत रोल ओवर किए जाने की अनुमति दी जा सकती है, बशर्ते कि विद्यमान गारंटी की वैधता अवधि में ही केवल परिवर्तन हो रहा है। गारंटी के अंतिम उपयोग में अथवा समुद्रपारीय उधारदाता अथवा कूपन (ब्याज) दर अथवा राशि अथवा गारंटी की किसी अन्य शर्त में कोई परिवर्तन होने की स्थिति में गारंटी का रोल ओवर फेमा की विद्यमान शर्तों के अनुपालन के अधीन होगा।

प्रश्न 25. क्या गारंटी के इस प्रकार के रोल ओवर को आरबीआई को नए से रिपोर्ट किया जाना है अथवा विद्यमान रिपोर्ट पर्याप्त होगा?

उत्तर: नहीं, विद्यमान गारंटी के रोल ओवर को एडी बैंक द्वारा संशोधित वैधता अवधि सहित नए सिरे से ऑन लाइन रिपोर्ट करना है।

प्रश्न 26. भारत के बाहर प्रत्यक्ष निवेश करने वाली भारतीय पार्टी के बाध्यताएं क्या हैं?

उत्तर: किसी भारतीय पार्टी को निम्नलिखित का अनुपालन करना होगा:

i. जेवी/ डबल्यूओएस में निवेश किये जाने के साक्ष्य के रूप में शेयर प्रमाणपत्र या कोई अन्य दस्तावेज प्राप्त करे और नामित एडी को छः महीने के भीतर प्रस्तुत करें।

ii. विदेशी जेवी/ डबल्यूओएस से प्राप्य सभी राशि, यथा, लाभांश, रॉयल्टी, तकनीकी फीस, आदि, भारत को प्रत्यावर्तित करे।

iii. भारतीय पार्टी द्वारा भारत के बाहर स्थापित अथवा आधिग्रहित प्रत्येक जेवी या डब्लूओएस के संबंध में नामित प्राधिकृत व्यापारी के माध्यम से रिज़र्व बैंक के पास प्रत्येक वर्ष फार्म ओडीआइ के भाग-III में एक वार्षिक कार्य निष्पादन रिपोर्ट (एपीआर) प्रस्तुत किया जाए। एपीआर फ़ाइल करने संबंधी नए अनुदेश दिनांक 13 अप्रैल 2016 के ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं.61 द्वारा जारी किए गए हैं।

iv. जेवी/डब्लूओएस द्वारा अपने कार्यकलापों को विविधीकृत करने / स्टेप डाउन सब्सिडियरी स्थापित करने/ अपने शेयरधारण के पैटर्न को बदलने के संबंध में लिए गए निर्णयों के ब्यौरों की रिपोर्ट संबंधित जेवी/डब्लूओएस के सक्षम प्राधिकारी द्वारा उन निर्णय़ों का मेजबान देश के स्थानीय कानून के अनुसार अनुमोदन किये जाने के 30 दिनों के भीतर करनी चाहिए और उसे संबंधित वार्षिक कार्य निष्पादन रिपोर्ट में भी सम्मिलित करना चाहिए ।

v. विनिवेश के मामले में शेयरों/ प्रतिभूतियों की बिक्री से प्राप्त आय को उसके प्राप्त होने के तत्काल बाद तथा किसी भी हालत में शेयरों/ प्रतिभूतियों की बिक्री की तारीख से 90 दिन की अनधिक अवधि के भीतर भारत में प्रत्यावर्तित की जाएगी और इस आशय की दस्तावेजी साक्ष्य प्राधिकृत व्यापारी के माध्यम से रिज़र्व बैंक को प्रस्तुत की जाएगी।

प्रश्न 27. क्या किसी समुद्रपारीय जेवी/ डबल्यूओएस के लेखापरीक्षित वित्तीय विवरणों के आधार पर वार्षिक कार्यनिष्पादन रिपोर्ट प्रस्तुत करना अनिवार्य है?

उत्तर: समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश (ओडीआई) करने वाली भारतीय पार्टी (आईपी)/ निवासी व्यक्ति (आरआई) को आईपी/ आरआई द्वारा भारत के बाहर स्थापित अथवा आधिग्रहित प्रत्येक संयुक्त उद्यम (जेवी) या पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक संस्था (डब्लूओएस) के संबंध में रिज़र्व बैंक के पास प्रत्येक वर्ष 30 जून तक फार्म ओडीआइ के भाग-III में एक वार्षिक कार्य-निष्पादन रिपोर्ट (एपीआर) प्रस्तुत किया जाए। (पूर्वोक्त फेमा अधिसूचना के विनियम 15 के अंतर्गत निर्धारित किए गए अनुसार) ।

13 अप्रैल 2016 से पात्र आवेदक की ओर से किसी प्रकार के ओडीआई संबंधित लेनदेन करने/ का लाभ प्रदान करने से पूर्व एडी बैंक को अपने नोडल कार्यालय से इस बात की पुष्टि करने के लिए अनिवार्यतः इस बात की जांच करनी चाहिए कि आवेदक के सभी जेवी/ डबल्यूओएस के संबंध में सभी एपीआर प्रस्तुत किए गए हैं। साथ ही निवासी व्यक्तियों के संबंध में सांविधिक लेखापरीक्षक अथवा सनदी लेखाकार द्वारा एपीआर के प्रमाणन पर ज़ोर नहीं दिया जाए। स्व-प्रमाणन को स्वीकार किया जाए।

यदि अनेक आईपी/आरआई ने एक ही विदेशी जेवी/डब्लूओएस में निवेश किया है, तो एपीआर प्रस्तुत करने की बाध्यता उस आईपी/आरआई की होगी, जिसका अधिकतम हित जेवी/डब्लूओएस में हो । वैकल्पिक रूप से, विदेशी जेवी/डब्लूओएस में हित धारण करने वाले आईपी/आरआई परस्पर सहमति से एपीआर के प्रस्तुतीकरण की जिम्मेवारी किसी नामित प्रतिष्ठान को सौंप सकते हैं, जो एडी बैंक को युक्तियुक्त वचनपत्र देकर पूर्वोक्त अधिसूचना के विनियम 15 के अनुसार एपीआर प्रस्तुत करने का दायित्व स्वीकार करे ।

जहाँ मेजबान देश का कानून जेवी/डब्लूओएस की लेखाबहियों की लेखापरीक्षा को अनिवार्य नहीं बनाता हो, वहाँ भारतीय पार्टी द्वारा वार्षिक कार्य निष्पादन रिपोर्ट (एपीआर) जेवी/ डब्लूओएस के लेखा परीक्षा नहीं किये गये वार्षिक लेखों के आधार पर रिज़र्व बैंक को प्रस्तुत की जासकती है, बशर्ते कि :

ए. भारतीय पार्टी के सांविधिक लेखापरीक्षक यह प्रमाणित करें कि मेजबान देश का कानून जेवी/डब्लूओएस की लेखाबहियों की लेखापरीक्षा को अनिवार्य नहीं बनाता है तथा एपीआर में दिए गए आंकड़े समुद्रपारीय जेवी/डब्लूओएस के अलेखापरीक्षित वार्षिक लेखे के अनुसार हैं; और

बी. कि जेवी/ डब्लूओएस के अलेखापरीक्षित वार्षिक लेखों को भारतीय पार्टी के बोर्ड द्वारा अंगीकार और अनुसमर्थन किया गया है ।

सी. अलेखपरीक्षित तुलन पत्र पर आधारित एपीआर को फ़ाइल करने से दी गई उपर्युक्त छूट ऐसे देश में स्थित जेवी/ डबल्यूओएस के संबंध में उपलब्ध नहीं होगी जो कि या तो वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफ़एटीएफ़) की निगरानी में हैं अथवा जिसके संबंध में एफ़एटीएफ़ द्वारा वर्धित उचित सावधानी बरतने की सिफ़ारिश की है अथवा भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा निर्धारित कोई अन्य देश/क्षेत्र है।

प्रश्न 28. वार्षिक कार्यनिष्पादन रिपोर्ट(एपीआर) को प्रस्तुत नहीं करने पर कौनसे दंड लगाए जा सकते हैं?

उत्तर: एपीआर की विलंबित प्रस्तुति/ उसे प्रस्तुत नहीं करने पर चूककर्ता भारतीय पार्टी के विरुद्ध फेमा, 1999 के अंतर्गत निर्धारित दंडात्मक उपाय किए जाएंगे।

प्रश्न 29. क्या अनिवासी के पक्ष में भारतीय पार्टी/ कंपनी समूह की अचल/ चल संपत्ति अथवा अन्य वित्तीय आस्तियों पर कोई मुक्त रूप से गिरवी/ बंधक/ दृष्टिबंधक/ भार सृजित कर सकता है?

उत्तर: किसी विदेशी ऋणदाता के पक्ष में घरेलू/ समुद्रपारीय आस्तियों पर भार का सृजन दिनांक 29 दिसंबर 2014 के एपी (डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं.54 के अनुसार किया जाएगा।

प्रश्न 30. क्या वित्तीय सहायता के प्रयोजन से विदेश स्थित जेवी/ डबल्यूओएस के शेयरों को गिरवी रखा जा सकता है?

उत्तर : भारतीय पार्टी को भारत में प्राधिकृत व्यापारी/ लोक वित्त संस्था अथवा किसी समुद्रपारीय उधारदाता से अपने लिए अथवा जेवी/ डबल्यूओएस के लिए निधि आधारित/ गैर निधि आधारित ऋण सुविधा प्राप्त करने के लिए किसी जेवी/ डबल्यूओएस के शेयरों को जमानत के रूप में गिरवी रखने की अनुमति है। समुद्रपारीय उधारदाता के संबंध में शर्त यह है कि समुद्रपारीय उधारदाता को बैंक के रूप में विनियमित तथा पर्यवेक्षित किया जाता हो तथा भारतीय पार्टी की कुल वित्तीय प्रतिबद्धताएं समुद्रपारीय निवेश के लिए रिज़र्व बैंक द्वारा समय समय पर निर्धारित सीमा के भीतर हैं।

प्रश्न 31. प्रश्न सं. 17 तथा प्रश्न सं. 13 में संदर्भित मूल्य-निर्धारण मानदंड क्या हैं?

उत्तर: विद्यमान विदेशी कंपनी के आंशिक/ पूर्ण अधिग्रहण के मामले में जहां निवेश पाँच मिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक है, कंपनी के शेयर का मूल्य-निर्धारण भारतीय प्रतिभूति तथा विनिमय बोर्ड (सेबी) में पंजीकृत श्रेणी-I के मर्चंट बैंकर अथवा मेजबान देश के उचित विनियामक प्राधिकरण में पंजीकृत भारत के बाहर के निवेश बैंकर/ मर्चंट बैंकर तथा अन्य सभी मामलों में किसी सनदी लेखाकार/ प्रमाणित लोक लेखापाल द्वारा किया जाना चाहिए।

तथापि शेयरों का अधिग्रहण कर के निवेश के मामले में जहां राशि पर ध्यान दिए बिना प्रतिफल का पूर्ण अथवा आंशिक भुगतान भारतीय पार्टी के शेयर के निर्गम (शेयरों के स्वैप) द्वारा किया जाना है वहाँ मूल्य-निर्धारण (सेबी) में पंजीकृत श्रेणी-I के मर्चंट बैंकर अथवा मेजबान देश के उचित विनियामक प्राधिकरण में पंजीकृत भारत के बाहर के निवेश बैंकर/ मर्चंट बैंकर द्वारा किया जाना चाहिए।

अपनी जेवी/ डबल्यूओएस में भारतीय पार्टी द्वारा अतिरिक्त समुद्रपारीय निवेश के मामले में वह चाहे प्रीमियम पर हो अथवा बट्टे पर अथवा अंकित मूल्य पर, ऊपर दिए विनिर्दिष्ट की गई मूल्य निर्धारण की संकल्पना लागू होगी।

प्रश्न 32.(ए) क्या कोई भारतीय कंपनी विदेश में वित्तीय सेवा क्षेत्र में लिप्त जेवी/ डबल्यूओएस में निवेश कर सकती है?

उत्तर: केवल ऐसी भारतीय पार्टी, जो वित्तीय सेवा क्षेत्र में कार्यरत हो, विदेश में वित्तीय सेवा क्षेत्र की किसी जेवी/ डबल्यूओएस में निवेश कर सकती है बशर्ते वह निम्नलिखित अतिरिक्त शर्तों को पूर्ण करे:

i. उसने पूर्ववर्ती तीन वित्तीय वर्षों के दौरान वित्तीय सेवा कार्यकलापों से शुद्ध लाभ अर्जित किया हो;

ii. वह वित्तीय क्षेत्र कार्यकलाप करने के लिए भारत में विनियामक प्राधिकार में पंजीकृत है;

iii. उसने इस प्रकार के वित्तीय कार्यकलाप करने से पहले भारत और विदेश में संबंधित विनियामक प्राधिकारियों से इस प्रकार के वित्तीय क्षेत्र कार्यकलाप करने के लिए अनुमोदन प्राप्त किया हो;

iv. उसने भारत में संबंधित विनियामक प्राधिकारी द्वारा यथा निर्धारित पूँजी पर्याप्तता से संबंधित विवेकपूर्ण मानदंडों को पूरा किया हो; तथा

किसी विद्यमान जेवी/ डब्लूओएस या इसकी स्टेप डाउन सब्सिडियरी द्वारा वित्तीय सेवा क्षेत्र में कोई अतिरिक्त निवेश करने के लिए भी उक्त शर्तों को पूरा करना होगा ।

बी) क्या वित्तीय सेवा क्षेत्र में लिप्त भारतीय कंपनी विदेश में गैर वित्तीय सेवा क्षेत्र में किसी जेवी/ डबल्यूओएस में निवेश कर सकती है?

भारत में वित्तीय सेवाएँ क्षेत्र में कार्यरत विनियमित संस्थाएं जो विदेश में गैर वित्तीय सेवा क्षेत्र गतिविधियों में निवेश करती हैं उन्हें भी ऊपर उल्लिखित अतिरिक्त शर्तों का अनुपालन करना होगा।

सी) क्या कोई भारतीय कंपनी समुद्रपारीय कोमोडिटीज़ एक्स्चेंज में व्यापार करने के लिए जेवी/ डबल्यूओएस स्थापित कर सकती है?

विदेश में कोमोडिटीज़ एक्स्चेंज में व्यापार करने तथा समुद्रपारीय कोमोडिटीज़ एक्स्चेंज में व्यापार करने के लिए जेवी/ डबल्यूओएस स्थापित करने को वित्तीय सेवाएँ गतिविधि माना जाएगा तथा फॉरवर्ड मार्केट्स कमीशन के सेबी के साथ हुए विलय के कारण उसके लिए भारतीय प्रतिभूति तथा विनिमय बोर्ड (सेबी) की मंजूरी अपेक्षित होगी।

प्रश्न 33. क्या कोई भारतीय कंपनी अपनी भारतीय सहायक कंपनी / होल्डिंग कंपनी की निवल मालियत का विदेश में किसी जेवी/ डबल्यूओएस में निवेश करने के लिए उपयोग कर सकती है?

उत्तर: भारतीय कंपनी अपनी भारतीय सहायक कंपनी / होल्डिंग कंपनी की निवल मालियत का उसकी होल्डिंग कंपनी अथवा सहायक कंपनी द्वारा स्वतंत्र रूप से उपयोग में नहीं लायी गई राशि की हद्द तक उपयोग कर सकते है, लेकिन ऐसा निम्नलिखित के अधीन किया जा सकता है:

ए) होल्डिंग कंपनी की भारतीय पार्टी में कम-से-कम 51 प्रतिशत की प्रत्यक्ष हिस्सेदारी (स्टेक) है।

बी) भारतीय पार्टी की अपनी सहायक कंपनी में कम-से-कम 51 प्रतिशत की प्रत्यक्ष हिस्सेदारी (स्टेक) है।

सी) होल्डिंग अथवा सहायक कंपनी उसके लिए भारतीय पार्टी के पक्ष में एक दावात्याग पत्र प्रस्तुत किया है।

यह सुविधा भागीदारी फर्म्स के लिए/ से उपलब्ध नहीं है।

प्रश्न 34. क्या कोई भारतीय पार्टी समुद्रपारीय जेवी/ डबल्यूओएस को निर्यातों से प्राप्त आय का पूंजीकरण कर सकती है?

उत्तर: हां, भारतीय पार्टी को अनुमति है कि अपनी समुद्रपारीय जेवी/ डबल्यूओएस से निर्यात, फीस, रॉयल्टी के रूप में या समुद्रपारीय जेवी/ डबल्यूओएस से तकनीकी जानकारी देने, परामर्शी, प्रबंधकीय एवं अन्य सेवाएँ प्रदान करने के लिए प्राप्य राशियों के रूप में विदेशी प्रतिष्ठान से प्राप्त होने वाले भुगतानों को प्रयोज्य सीमा के भीतर पूँजीकृत करे ।

वैसी निर्यात आय, जिसकी वसूली निर्धारित अवधि के बाद भी नहीं हुई हो, के पूँजीकरण के लिए रिज़र्व बैंक का पूर्व अनुमोदन प्राप्त करना होगा ।

भारतीय सॉफ्टवेयर निर्यातकर्ताओं को बिना संयुक्त उद्यम करार किये रिज़र्व बैंक के पूर्व अनुमोदन से किसी विदेशी सॉफ्टवेयर स्टार्ट-अप कंपनी को किये गये अपने निर्यातों के मूल्य का 25 प्रतिशत, शेयरों के रूप में प्राप्त करने की अनुमति है ।

प्रश्न 35. क्या कोई भारतीय पार्टी किसी समुद्रपारीय संस्था को उस संस्था में इक्विटि सहभागिता के बिना ऋण अथवा गारंटी दे सकती है?

उत्तर: नहीं।

(i) किसी समुद्रपारीय संस्था को केवल तब ऋण तथा गारंटी प्रदान की जा सकती है जब उसमें प्रत्यक्ष निवेश के माध्यम से पहले से ही मौजूदा इक्विटि / सीसीपीएस सहभागिता है।

तथापि इक्विटि अंशदान के बिना जेवी/ डबल्यूओएस में वित्तीय प्रतिबद्धता लेने के लिए भारतीय पार्टी से प्राप्त प्रस्तावों पर भारतीय पार्टी की कारोबारी आवश्यकता तथा जिस देश में जेवी/ डबल्यूओएस स्थित है उस मेजबान देश की विधिक अपेक्षाओं के आधार पर रिज़र्व बैंक द्वारा अनुमोदन मार्ग के अंतर्गत विचार किया जाए।

तथापि यदि समुद्रपारीय संस्था भारतीय पार्टी की फर्स्ट लेवल स्टेप डाउन ऑपरेटिंग सहायक कंपनी है तो भारतीय पार्टी रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन से ऐसी स्टेप डाउन ऑपरेटिंग सहायक कंपनी की ओर से कारपोरेट गारंटी जारी कर सकती है, लेकिन शर्त यह है कि इस प्रकार की गारंटी को भारतीय पार्टी की कुल वित्तीय प्रतिबद्धता की गणना के लिए ध्यान में लिया जाएगा।

यदि समुद्रपारीय संस्था भारतीय पार्टी की दूसरी पीढ़ी या परवर्ती स्तर वाली स्टेप डाउन ऑपरेटिंग सहायक कंपनी है तो भारतीय पार्टी रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन से ऐसी स्टेप डाउन ऑपरेटिंग सहायक कंपनी की ओर से कारपोरेट गारंटी जारी कर सकती है, बशर्ते कि भारतीय पार्टी उस विदेशी स्टेप डाउन ऑपरेटिंग सहायक कंपनी में अप्रत्यक्ष रूप से 51 प्रतिशत या अधिक का हित धारण करती हो और गारंटी को भारतीय पार्टी की कुल वित्तीय प्रतिबद्धता की गणना के लिए ध्यान में लिया जाएगा।

ii) पात्र भारतीय पार्टियों को स्वचालित मार्ग के अंतर्गत सह-स्वामित्व के आधार पर सबमेरीन केबुल सिस्टम्स का निर्माण और अनुरक्षण करने के लिए अन्य अंतरराष्ट्रीय परिचालकों के साथ कन्सॉर्टियम में सहभागिता करने की भी अनुमति दी जाती है ।

प्रश्न 36. समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश के प्रयोजन के लिए अनिवार्यतः परिवर्तनीय अधिमानी शेयरों (सीसीपीएस) पर क्या कार्रवाई की जाएगी?

उत्तर: 28 मार्च 2012 से अनिवार्यतः परिवर्तनीय अधिमानी शेयरों (सीसीपीएस)को इक्विटि शेयरों के सममूल्य पर माना जाता है तथा भारतीय पार्टी को सीसीपीएस के माध्यम से जेवी में उसके एक्सपोजर के आधार पर वित्तीय प्रतिबद्धता लेने की अनुमति है।

प्रश्न 37. शेयर स्वैप के जरिए किसी समुद्रपारीय संस्था में प्रत्यक्ष निवेश के लिए क्या आवश्यक है?

उत्तर: भारत के बाहर किसी जेवी/ डबल्यूओएस में शेयर स्वैप व्यवस्था के जरिए प्रत्यक्ष निवेश किया जा सकता है। 3 मई 2000 की फेमा अधिसूचना सं. 20 के अंतर्गत निर्धारित विनियम के अनुसार शेयर स्वैप किया जाए।

प्रश्न 38. समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश मार्ग के माध्यम से भागीदारी फर्म्स को कौनसे कार्यकलाप करने के लिए अनुमति है?

उत्तर: भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 के अंतर्गत पंजीकृत भागीदारी फर्म्स कॉर्पोरेट संस्थाओं पर लागू होने वाली समान शर्तों के अधीन समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश कर सकती हैं।

प्रश्न 39. क्या भागीदारी फर्म के भागीदार फर्म के लिए तथा उसकी ओर से समुद्रपारीय जेवी/ डबल्यूओएस के शेयर धारित कर सकते हैं?

उत्तर: व्यक्तिगत भागीदार, ऐसी समुद्रपारीय जेवी/ डबल्यूओएस में भागीदारी फर्म के लिए तथा उसकी ओर से शेयर धारित कर सकते हैं जहां निवेश के लिए समग्र निधियन उक्त फ़र्म द्वारा किया गया है तथा आगे इस शर्त के अधीन कि मेजबान देश के विनियम अथवा परिचालनगत अपेक्षाएँ इस प्रकार की धारिता आवश्यक करते हों।

प्रश्न 40. क्या दूसरी पीढ़ी की कंपनी स्थापित करने के लिए कोई प्रतिबंध हैं? क्या इस प्रकार की स्टेप डाउन सहायक कंपनियाँ स्वचालित मार्ग के अंतर्गत स्थापित की जा सकती हैं?

उत्तर: संस्थाओं की विदेश स्थित जेवी/ डबल्यूओएस द्वारा स्वचालित मार्ग के अंतर्गत निवेश के लिए यथा लागू समग्र सीमाओं के भीतर दूसरी पीढ़ी की ओपेरेटिंग कंपनियाँ (स्टेप डाउन सहायक कंपनियाँ) स्थापित करने पर कोई प्रतिबंध नहीं हैं। तथापि वित्तीय क्षेत्र के कार्यकलाप करने के लिए स्टेप डाउन ओपेरेटिंग कंपनियाँ स्थापित करने की इच्छा रखने वाली कंपनियों को प्रश्न सं. 32 में निर्दिष्ट किए गए अनुसार वित्तीय सेवा क्षेत्र में प्रत्यक्ष निवेश के लिए अतिरिक्त अपेक्षाओं का अनुपालन करना होगा।

प्रश्न 41. क्या कोई भारतीय पार्टी स्वचालित मार्ग के तहत किसी विशेष प्रयोजन संस्था (एसपीवी) के जरिए जेवी/ डबल्यूओएस ले सकती है?

उत्तर: हाँ, विदेश में जेवी/ डबल्यूओएस में निवेश करने के एकल प्रयोजन से स्वचालित मार्ग के तहत एसपीवी के माध्यम से प्रत्यक्ष निवेश करने की अनुमति है।

प्रश्न 42. क्या कोई भारतीय पार्टी इस प्रकार की स्टेप डाउन सहायक कंपनियों का प्रत्यक्ष निधीयन कर सकती है?

उत्तर: जहां जेवी/ डबल्यूओएस को एसपीवी के माध्यम से स्थापित किया गया है, वहां ओपेरेटिंग स्टेप डाउन सहायक कंपनी को समग्र निधीयन केवल एसपीवी के माध्यम से ही किया जाएगा। तथापि प्रथम स्तर की स्टेप डाउन ओपेरेटिंग सहायक कंपनी की ओर से दी जानेवाली गारंटियों के मामले में, ये भारतीय पार्टी द्वारा सीधे दी जा सकती हैं बशर्ते इस प्रकार के एक्सपोजर भारतीय पार्टी की अनुमत वित्तीय प्रतिबद्धताओं के भीतर हैं।

प्रश्न 43. क्या भारत में निवासी व्यक्ति रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन के बिना विदेशी प्रतिभूतियों को अर्जित/ बेच सकता है?

उत्तर: कृपया प्रश्न 3 का उत्तर भी देखें।

निवासी व्यक्ति रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन के बिना निम्नलिखित मामलों में विदेशी प्रतिभूतियों को अर्जित कर / बेच सकता है:

i. भारत के बाहर के व्यक्ति से उपहार के रूप में;

ii. भारत के बाहर निगमित कंपनी द्वारा जारी की गई नकदी रहित कर्मचारी स्टॉक ऑप्शन योजना (ईएसओपी), जिसमें भारत से कोई विप्रेषण करना शामिल नहीं है, के माध्यम से;

iii. भारतीय कंपनी में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष इक्विटि हिस्से के प्रतिशत पर ध्यान दिये बिना किसी विदेशी कंपनी के भारतीय कार्यालय अथवा शाखा या विदेशी कंपनी की भारत में सहायक कंपनी या भारतीय कंपनी के कर्मचारी अथवा निदेशक को जारी की गई कर्मचारी स्टॉक ऑप्शन योजना (ईएसओपी) के माध्यम से;

iv. भारत में अथवा भारत से बाहर निवास करने वाले व्यक्ति से विरासत के रूप में;

v. विदेशी मुद्रा प्रबंध (विदेशी मुद्रा खाता) विनियमावली, 2000 के अनुसार बनाए रखे गए निवासी विदेशी मुद्रा (आरएफ़सी) खाते में धारित निधियों से विदेशी प्रतिभूतियों की खरीद के माध्यम से; और

vi. उनके द्वारा पहले से ही धारित विदेशी प्रतिभूतियों पर बोनस/ अधिकार शेयरों के मध्यम से।

प्रश्न 44. क्या भारतीय कॉर्पोरेट्स प्रत्यक्ष निवेश के अलावा अन्य किसी माध्यम से विदेश में निवेश कर सकते हैं?

उत्तर: हां, भारतीय कंपनियां मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्स्चेंज में सूचीबद्ध विदेशी कंपनियों में अथवा ऐसी कंपनियों द्वारा निर्गमित रेटेड ऋण प्रतिभूतियों में अंतिम लेखापरीक्षित तुलन पत्र की तारीख के अनुसार अपनी निवल मालियत के 50 प्रतिशत तक निवेश कर सकते हैं ।

प्रश्न 45. क्या कोई निवासी व्यक्ति अपनी निदेशक की क्षमता में विदेशी कंपनी के शेयर अर्जित कर सकता है?

उत्तर: हां, रिज़र्व बैंक ने निवासी व्यक्ति को निदेशक बनने के लिए न्यूनतम संख्या में जितने अर्हक शेयर धारण करने अपेक्षित हैं उस सीमा तक विदेशी प्रतिभूतियाँ अर्जित करने की सामान्य अनुमति दी है। तदनुसार निवासी व्यक्तियों को सामान्य अनुमति के अंतर्गत कंपनी जहाँ अवस्थित हो उस मेजबान देश के कानून के अनुसार निर्धारित सीमा तक विदेशी कंपनी में निदेशक बनने हेतु अर्हक शेयर अर्जित करने के लिए निधियाँ प्रेषित करने की अनुमति दी है तथा ऐसे शेयरों को अर्जित करने के लिए विप्रेषण की सीमा निवासी व्यक्तियों के लिए उदारीकृत विप्रेषण योजना (एलआरएस) के अंतर्गत निर्धारित समग्र सीमा तक, जो अभिग्रहण के समय प्रवृत्त हो, सीमित है;

निवासी निदेशक द्वारा धारित अर्हक शेयरों को जेवी/ डबल्यूओएस के पूंजी ढांचे में रिपोर्ट किए जाने चाहिए। भारतीय संस्था के स्वरूप का चयन “अन्य भारतीय संस्था” के रूप में किया जाए।

प्रश्न 46. क्या निवासी व्यक्ति सामान्य अनुमति के अंतर्गत उनके द्वारा दी गई व्यावसायिक सेवाओं अथवा निदेशक के परिश्रमिक के बदले में विदेशी संस्था के शेयर अर्जित कर सकते हैं?

उत्तर: निवासी व्यक्तियों को सामान्य अनुमति के अंतर्गत उनके द्वारा विदेशी संस्था को दी गई व्यावसायिक सेवाओं अथवा निदेशक के परिश्रमिक के आंशिक/ पूर्ण प्रतिफल के बदले में विदेशी संस्था के शेयर अर्जित करने की अनुमति है। मूल्य के रूप में ऐसे शेयरों को अर्जित करने की सीमा निवासी व्यक्तियों के लिए उदारीकृत विप्रेषण योजना (एलआरएस) के अंतर्गत निर्धारित समग्र सीमा तक, जो अभिग्रहण के समय प्रवृत्त हो, सीमित है;

प्रश्न 47. क्या निवासी व्यक्ति उसके द्वारा धारित शेयरों के अधिकार निर्गम में अभिदान कर सकते हैं?

उत्तर: हां, कोई निवासी व्यक्ति भारत के बाहर निगमित कंपनी द्वारा निर्गमित अधिकार शेयरों के माध्यम से विदेशी प्रतिभूतियां अर्जित कर सकता है बशर्ते विद्यमान शेयर फेमा के प्रावधानों के अनुसार धारित किए गए हों।

प्रश्न 48. क्या सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में लिप्त भारतीय कंपनी के व्यक्तिगत कर्मचारियों/ निदेशकों को विदेश में उनकी जेवी/ डबल्यूओएस में शेयर अधिगृहीत करने के लिए कोई छूट दी गई है?

उत्तर: सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में लिप्त भारतीय प्रवर्तक कंपनी के व्यक्तिगत कर्मचारियों/ निदेशकों को विदेश में जेवी/ डबल्यूओएस में शेयर अधिगृहीत करने के लिए सामान्य अनुमति उपलब्ध है बशर्ते:

i. खरीद के लिए प्रतिफल रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित सीमा से अधिक नहीं है। सभी कर्मचारियों/ निदेशकों द्वारा इस प्रकार अर्जित शेयर भारत के बाहर जेवी/डब्लूएएस की चुकता पूँजी के 5 प्रतिशत से अधिक नहीं है।

ii. ऐसे शेयरों के आबंटन के बाद, भारतीय प्रवर्तक कंपनी द्वारा धारित शेयरों का प्रतिशत, उसके कर्मचारियों को आबंटित शेयरों के साथ, ऐसे आबंटन के पूर्व भारतीय प्रवर्तक कंपनी द्वारा धारित शेयरों के प्रतिशत से कम नहीं है;

ज्ञान आधारित क्षेत्रों में लिप्त भारतीय कंपनी के कार्यकारी निदेशक सहित निवासी कर्मचारी एडीआर/जीडीआर सहबद्ध स्टॉक ऑप्शन योजनाओं के अंतर्गत विदेशी प्रतिभूतियाँ खरीद सकते हैं बशर्ते क्रय का प्रतिफल भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित सीमा से अधिक नहीं है।

प्रश्न 49. भारतीय म्युच्युअल फंड को विदेश में निवेश करने के लिए कौनसे मार्ग उपलब्ध हैं?

उत्तर: सेबी में पंजीकृत भारतीय म्युचुअल फंडों को अनुमति दी गयी है कि वे निम्नलिखित में 7 बिलियन युएसडी की समग्र सीमा के भीतर निवेश कर सकते हैं :

ए. भारतीय और विदेशी कंपनियों के एडीआर/जीडीआर;

बी. विदेश में मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध विदेशी कंपनियों की इक्विटी; विदेश में मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों में सूचीबद्ध करने के लिए प्रारंभिक और फॉलो-ऑन पब्लिक ऑफरिंग;

सी. पूर्ण परिवर्तनीय मुद्रा वाले देश में विदेशी ऋण प्रतिभूतियाँ-अल्पावधि एवं दीर्घावधि, जिनका श्रेणी-निर्धारण निवेश ग्रेड से नीचे नहीं किया गया हो;

डी. मुद्रा बाजार निवेश, जिनका श्रेणी-निर्धारण निवेश ग्रेड से नीचे नहीं किया गया हो; रिपो, जहाँ काउंटर-पार्टी को निवेश ग्रेड से नीचे निर्धारित नहीं किया गया हो।

ई. सरकारी प्रतिभूतियाँ, जहाँ देशों का श्रेणी-निर्धारण निवेश ग्रेड से नीचे नहीं किया गया हो;

एफ़. विदेश में मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों में व्यापारित डेरिवेटिव, जो केवल हेजिंग संविभाग संतुलन के लिए प्रतिभूतियों के रूप में अंतर्निहित हों;

जी. विदेशी बैंकों में अल्पावधि जमाराशियाँ, जहाँ जारीकर्ता का श्रेणी-निर्धारण निवेश ग्रेड से नीचे नहीं किया गय़ा हो; और

एच. विदेशी म्युचुअल फंडों या विदेशी विनियामकों के पास पंजीकृत युनिट ट्रस्टों द्वारा जारी की गयी युनिटें/प्रतिभूतियाँ।

प्रश्न 50. देशी उद्यम पूंजी फंडों (डोमेस्टिक वेंचर कैपिटल फंड) के लिए निवेश अवसर कौनसे हैं?

उत्तर: डोमेस्टिक वेंचर कैपिटल फंड, जो सेबी में पंजीकृत हों, 500 मिलियन युएसडी की समग्र सीमा के अधीन अपतटीय वेंचर कैपिटल अंडरटेकिंग की इक्विटी और इक्विटी सहबद्ध लिखतों में निवेश कर सकते हैं ।

प्रश्न 51. क्या कृषि में निवेश अनुमत है?

उत्तर: भारतीय भागीदारी अधिनियम, 1932 के अंतर्गत पंजीकृत निवासी कॉर्पोरेट तथा भागीदारी फर्म्स या तो सीधे अथवा अपने समुद्रपारीय कार्यालयों के माध्यम से ऐसे कार्यकलाप के लिए आवश्यक जमीन की खरीद सहित कृषि परिचालन कर सकते हें, बशर्ते:

ए) भारतीय पार्टी अन्यतः पूर्वोक्त अधिसूचना के विनियम 6 के तहत निवेश करने के लिए पात्र है और ऐसा निवेश समग्र रूप से विनिर्दिष्ट सीमा के भीतर है, तथा

बी) विदेश में जमीन का अधिग्रहण करके इस प्रकार के निवेश के प्रयोजन के लिए जमीन का मूल्य निर्धारण मेजबान देश में उचित मूल्य निर्धारण प्राधिकारी में पंजीकृत प्रमाणित मूल्य निर्धारण कर्ता द्वारा प्रमाणित है।

प्रश्न 52.(ए) विदेशी जेवी/ डबल्यूओएस से विनिवेश के विभिन्न प्रकार कौनसे हैं?

उत्तर: भारतीय पार्टी द्वारा अपनी विदेशी जेवी/ डबल्यूओएस से विनिवेश किसी अनिवासी को इक्विटि शेयरों के अंतरण/ बिक्री अथवा विदेशी जेवी/ डबल्यूओएस के परिसमापन/ विलय / समामेलन के माध्यम से किया जा सकता है।

(बी) क्या कोई भारतीय पार्टी बट्टे खाते डाले बिना जेवी/ डबल्यूओएस से विनिवेश कर सकती है?

उत्तर: हां, भारतीय पार्टी स्वचालित मार्ग के अंतर्गत निम्नलिखित के अधीन बट्टे खाते डाले बिना जेवी/ डबल्यूओएस से विनिवेश कर सकती है:

i. यह विक्रय किसी स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से किया गया हो, जहाँ जेवी/डब्लूओएस के शेयर सूचीबद्ध हों;

ii. यदि शेयर स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध नहीं हों और शेयरों का विनिवेश निजी व्यवस्था द्वारा किया गया हो, तो शेयर-मूल्य जेवी/डब्लूओएस के नवीनतम लेखापरीक्षित वित्तीय विवरणों पर आधारित शेयरों के उचित मूल्य के रूप में सनदी लेखाकार/प्रमाणित लोक लेखाकार द्वारा प्रमाणित मूल्य से कम नहीं है;

iii. भारतीय पार्टी को जेवी या डब्लूओएस से लाभांश, तकनीकी जानकारी फीस, रॉयल्टी, परामर्शी सेवा, कमीशन या अन्य हकदारी और/या निर्यात आय प्राप्त करना बाकी न हो;

iv. विदेशी संस्था कम से कम पूरे एक वर्ष तक परिचालन करती रही हो और उस वर्ष के लिए लेखापरीक्षित लेखे के साथ वार्षिक कार्य निष्पादन रिपोर्ट रिज़र्व बैंक के पास प्रस्तुत की गयी हो;

v. भारतीय पार्टी की जाँच सीबीआई/डीओई/सेबी/आइआरडीए या भारत में किसी अन्य विनियामक प्राधिकारी द्वारा नहीं की जा रही है।

vi. पूर्वोक्त अधिसूचना के विनियम 16 के तहत विनिर्दिष्ट अन्य शर्तें ।

(सी) क्या कोई भारतीय पार्टी बट्टे खाते डालना शामिल होने वाली जेवी/ डबल्यूओएस से विनिवेश कर सकती है?

उत्तर: हां, भारतीय पार्टी स्वचालित मार्ग के अंतर्गत निम्नलिखित मामलों में उन जेवी/ डबल्यूओएस से विनिवेश कर सकती है जिनमें बट्टे खाते डालना शामिल है:

ए. उस मामले में, जहाँ जेवी/डब्लूओएस विदेशी स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध है;

बी. उन मामलों में, जहाँ भारतीय पार्टी भारत में किसी स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध है और उसकी निवल मालियत 100 करोड़ रुपये से कम नहीं है;

सी. जहाँ भारतीय पार्टी असूचीगत कंपनी है और विदेशी उद्यम में निवेश (या वित्तीय प्रतिबद्धता) 10 मिलियन युएसडी से अधिक नहीं है; और

डी. जहाँ भारतीय पार्टी एक सूचीबद्ध कंपनी है और उसकी निवल मालियत 100 करोड़ रुपये से कम है, लेकिन किसी विदेशी जेवी/डब्लूओएस में निवेश (या वित्तीय प्रतिबद्धता) 10 मिलियन युएसडी से अधिक नहीं है।

(डी) क्या कोई अन्य अतिरिक्त पूर्व-शर्तें/ अनुपालन हैं जिन के अधीन विनिवेश के समय इस प्रकार से बट्टे खाते डालना अनुमत है?

हां, इस प्रश्न के भाग (बी) की मद सं. (i) से (vi)।

प्रश्न 53. क्या विदेशी जेवी/ डबल्यूओएस के तुलनपत्र की पुनर्संरचना, जिसमें पूँजी और प्राप्य राशियों को बट्टे खाते डालना शामिल हो अनुमत है?

उत्तर: भारतीय कंपनी, जिसने विदेश में डब्लूओएस स्थापित किया है या जिसका कम से कम 51 प्रतिशत हक विदेशी जेवी में है, जेवी/डब्लूओएस के संबंध में पूँजी (इक्विटी/अधिमानी शेयर) या अन्य प्राप्य राशियों, (यथा, ऋण, रॉयल्टी, तकनीकी जानकारी फीस तथा प्रबंध फीस) को निम्नलिखित के अधीन बट्टे खाते डाल सकते हैं, भले ही ऐसे जेवी/ डब्लूओएस का कार्य करना जारी हो:

i. सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों को अनुमति है कि वे स्वचालित मार्ग के अंतर्गत जेवी/डब्लूओएस में किये गये निवेश का 25 प्रतिशत तक पूँजी और अन्य प्राप्य राशियों को बट्टे खाते डाल सकती हैं; और

ii. गैर सूचीबद्ध कंपनियों को अनुमति है कि वे रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन से जेवी/ डब्लूओएस में किये गये इक्विटी निवेश के 25 प्रतिशत तक पूँजी और अन्य प्राप्य राशियों को बट्टे खाते डाल सकती हैं।

बट्टे खाते डालने/ पुनर्संरचना किये जाने की रिपोर्ट रिज़र्व बैंक को नामित एडी श्रेणी-। बैंक के माध्यम से ऐसे बट्टे खाते डाले जाने/पुनर्संरचना किये जाने के 30 दिनों के भीतर की जानी है । बट्टे खाते डालना/ पुनर्संरचना करना इस शर्त के अधीन है कि भारतीय पार्टी स्वचालित मार्ग और अनुमोदन मार्ग के अंतर्गत एडी श्रेणी-। बैंक को आवेदन के साथ संवीक्षा के लिए निम्नलिखित दस्तावेज प्रस्तुत करे :

ए. तुलनपत्र की प्रमाणित प्रति, जिसमें भारतीय पार्टी द्वारा स्थापित विदेशी डब्लूओएस/जेवी की हानि को दर्शाया गया हो ; और

बी. अगले पाँच वर्षों के लिए पूर्वानुमान, जिसमें उस लाभ का उल्लेख किया गया हो, जो इस प्रकार बट्टे खाते डाले जाने/पुनर्संरचना के फलस्वरूप भारतीय कंपनी को उपचित होने वाले हैं ।

प्रश्न 54. क्या कोई भारतीय पार्टी विदेश में विदेशी मुद्रा खाता खोल/ बनाए रख सकती है?

उत्तर: दिनांक 2 अप्रैल 2012 से जहां कहीं मेजबान देश के विनियम ऐसा करना निर्दिष्ट करते हों वहाँ भारतीय पार्टी कतिपय शर्तों के अधीन समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश के प्रयोजनार्थ विदेश में विदेशी मुद्रा खाता (एफसीए) खोल सकती है, रख सकती है और उसका अनुरक्षण कर सकती है।

प्रश्न 55. अनिवार्यतः परिवर्तनीय अधिमनी शेयर(सीसीपीएस) से अन्य अधिमनी शेयरों पर ओडीआई के प्रयोजन के लिए क्या कार्रवाई की जाएगी?

उत्तर: अनिवार्यतः परिवर्तनीय अधिमनी शेयर (सीसीपीएस) से अन्य सभी प्रकार के अधिमनी शेयरों को भारतीय पार्टी द्वारा अपनी विदेशी जेवी/ डबल्यूओएस को प्रदान किया गया ऋण माना जाएगा तथा अन्य बातों के साथ साथ समय-समय पर यथा संशोधित दिनांक 7 जुलाई 2004 की अधिसूचना फेमा सं.120/आरबी-2004 के विनियम 6(4) के प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा। एडी बैंक अधिमानी पूंजी, डिबैंचर्स, नोट्स, बॉन्ड आदि जैसे निधिक एक्सपोजर को दिनांक 13 अप्रैल 2016 के ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं.62 द्वारा फॉर्म ओडीआई भरने क एलिए जारी किए गए अनुदेशों के अनुसार ‘ऋण‘ शीर्ष क एयनतरगत रिपोर्ट करना होगा।

प्रश्न 56. क्या किसी समुद्रपारीय उद्यम को दिए गए ऋण को इक्विटि में परिवर्तित किया जा सकता है? यदि हां तो उससे संबंधित रिपोर्टिंग अपेक्षाएँ क्या है ?

उत्तर: हां, ऋण को स्वचालित मार्ग के तहत इक्विटि/ सीसीपीएस में परिवर्तित किया जा सकता है तथा एक पत्र द्वारा नामित एडी बैंक के माध्यम से आरबीआई को रिपोर्ट किया जा सकता है। ऋण को अधिमानी शेयरों (सीसीपीएस के अलावा) में परिवर्तित करने पर आरबीआई को रिपोर्ट करना आवश्यक नहीं है।

प्रश्न 57. क्या इक्विटि एक्सपोजरों को ऋण अथवा अधिमानी पूंजी, डिबैंचर्स, आदि जैसे निधिक एक्सपोजर के अन्य प्रकारों में परिवर्तित किया जा सकता है?

उत्तर: समय-समय पर यथा संशोधित दिनांक 7 जुलाई 2004 की अधिसूचना फेमा सं.120/आरबी-2004 के विनियम 16 (2) के विद्यमान प्रावधानों के अनुसार विनिवेश से प्राप्त आय को निर्धारित समय सीमा के भीतर भारत में प्रत्यावर्तित किया जाना है। अतः विनिवेश से प्राप्त आय को भारत में प्रत्यावर्तित किए बिना इक्विटि आधारित एक्सपोजर को ऋण अथवा अधिमानी पूंजी, डिबैंचर्स, आदि जैसे निधिक एक्सपोजर के अन्य प्रकारों में परिवर्तित करने के लिए रिज़र्व बैंक का पूर्वानुमोदन अपेक्षित होगा।

प्रश्न 58. क्या मौजूदा गारंटी के फोरक्लोज़र/ क्लोज़र को एडी बैंक/ भारतीय पार्टी द्वारा आरबीआई को रिपोर्ट किया जाना है?

उत्तर: हां, दिनांक 13 अप्रैल 2016 के ए.पी.(डीआइआर सीरीज) परिपत्र सं.62 के अनुसार भारतीय पार्टी को अपनी जेवी/ डबल्यूओएस/ स्टेप डाउन सहायक संस्था की ओर से दी गई विद्यमान गारंटी के फोरक्लोज़र/ क्लोज़र को रिपोर्ट किया जाना है। साथ ही किसी विद्यमान गारंटी (फेमा के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार जेवी/ डबल्यूओएस/ स्टेप डाउन सहायक संस्था की ओर से दी गई) की राशि तथा वैधता में किसी भी प्रकार के परिवर्तन को भी तदनुसार ऑनलाइन रिपोर्ट किया जाए।

प्रश्न 59. दिनांक 3 मई, 2000 की यथा संशोधित अधिसूचना सं.फेमा 3/2000-आरबी के विनियम 4 (1)(iii) के प्रावधान भारतीय संस्था के विदेश में संयुक्त उद्यम अथवा पूर्णतः स्वाधिकृत सहायक संस्था को विदेशी मुद्रा में ऋण सुविधाएं प्रदान करने के लिए प्राधिकृत व्यापारी की भारत के बाहर स्थित शाखा पर लागू होती है?

उत्तर: नहीं, दिनांक 3 मई, 2000 की यथा संशोधित अधिसूचना सं.फेमा 3/2000-आरबी के विनियम 4 (1) (iii) के प्रावधान भारत में प्राधिकृत व्यापारी बैंक द्वारा भारतीय संस्था के विदेश में संयुक्त उद्यम अथवा पूर्णतः स्वामित्व वाली सहायक संस्था को प्रदान की गई ऋण सुविधाओं पर लागू होंगे। प्राधिकृत व्यापारी की भारत के बाहर स्थित शाखा जो कि भारत में निगमित अथवा गठित बैंक होने के नाते भारत के बाहर अपने बैंकिंग कारोबार क्रम में विदेशी मुद्रा में ऋण प्रदान कर सकती है।

प्रश्न 60. यदि किसी भारतीय पार्टी की समूह कंपनी जांच के अधीन है तो क्या वह भारतीय पार्टी स्वचालित मार्ग के अंतर्गत ओडीआई लेनदेन कर सकती है?

उत्तर: भारतीय पार्टी स्वचालित मार्ग के अंतर्गत ओडीआई लेनदेन कर सकती है यदि उन्होंने समय-समय पर यथा संशोधित दिनांक 7 जुलाई 2004 की अधिसूचना फेमा सं.120/आरबी-2004 के विनियम 6 तथा अन्य यथालागू फेमा विनियमों/ दिशानिर्देशों का अनुपालन किया हो। तथापि इस प्रकार की जांच को फॉर्म ओडीआई में रिपोर्ट किया जाना चाहिए।

प्रश्न 61. क्या 2 जनवरी 2017 की अधिसूचना फेमा सं.382/2016-आरबी जिसके जरिए एफ़एटीएफ़ से असहयोग करने वाले देशों तथा अधिकार क्षेत्रों में स्वचालित मार्ग के अंतर्गत स्थापित/ अधिगृहीत जेवी/ डबल्यूओएस में समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश को प्रतिबंधित किया गया है, केवल उन देशों पर लागू है जिनकी वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफ़एटीएफ़) ने “कार्रवाई करें” के रूप में पहचान की है?

उत्तर: हां, 2 जनवरी 2017 की अधिसूचना फेमा सं.382/2016-आरबी के अनुसार समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश पर किया गया प्रतिबंध केवल उन देशों पर लागू है जिनकी वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफ़एटीएफ़) ने “कार्रवाई करें” के रूप में पहचान की है।

प्रश्न 62. किसी संयुक्त उद्यम(जेवी) अथवा पूर्णतः स्वाधिकृत सहायक कंपनी(डबल्यूओएस) द्वारा आवासीय/ वाणिज्यिक परिसर के विकास/ निर्माण(तथा उसके पश्चात बिक्री) को ओडीआई विनियम(समय-समय पर यथासंशोधित दिनांक 7 जुलाई 2004 की अधिसूचना फेमा सं.120/आरबी-2004) के अंतर्गत स्थावर इस्टेट कारोबार माना जाएगा ?

उत्तर: नहीं। समय-समय पर यथासंशोधित दिनांक 7 जुलाई 2004 की अधिसूचना फेमा सं.120/आरबी-2004 के विनियम सं. 2(पी) के साथ पठित विनियम 5(2) के अनुसार आवासीय/ वाणिज्यिक परिसर (बिक्री पूर्व) के विकास/ निर्माण(तथा उसके पश्चात बिक्री) के लिए जमीन खरीदने को स्थावर इस्टेट कारोबार माना नहीं जाने की स्थिति में उसे एक एकीकृत मुख्य कार्यकलाप माना जाएगा

प्रश्न 63. क्या कोई भारतीय पार्टी/ निवासी भारतीय प्रारंभिक भुगतान किए बिना अथवा आस्थगित भुगतान के आधार पर किसी विदेशी संस्था के शेयर अर्जित कर सकता है?

उत्तर: नहीं। समय-समय पर यथासंशोधित दिनांक 7 जुलाई 2004 की अधिसूचना फेमा सं.120/आरबी-2004 के प्रावधान प्रारंभिक भुगतान किए बिना अथवा आस्थगित भुगतान के आधार पर किसी विदेशी संस्था के शेयर अर्जित करने की अनुमति नहीं देते है।

प्रश्न 64. क्या कोई भारतीय पार्टी(आईपी) अपनी विदेशी संस्था की स्टेप डाउन सहायक कंपनी के माध्यम से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से अपनी विदेशी संस्था(डबल्यूओएस) के माध्यम से भारत मेन्स्तेप डाउन सहायक कंपनी/ संयुक्त उद्यम स्थापित कर सकती है?

उत्तर: नहीं, समय-समय पर यथासंशोधित दिनांक 7 जुलाई 2004 की अधिसूचना फेमा सं.120/आरबी-2004 के निवासियों को किसी भी विदेशी प्रतिभूति के अंतरण तथा निर्गम से संबंधित प्रावधान किसी भारतीय पार्टी(आईपी) को अपनी विदेशी डबल्यूओएस के माध्यम से भारतीय सहायक कंपनियाँ स्थापित करने की अनुमति नहीं देते हैं और ये प्रावधान किसी आईपी को ऐसी डबल्यूओएस अर्जित करने अथवा जेवी में निवेश करने की अनुमति भी नहीं देते जिसका भारत में पहले से ही प्रत्यक्ष/ अप्रत्यक्ष निवेश है।


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