श्री भरत नरोतम दोशी

श्री भरत नरोतम दोशी भारतीय चार्टर्ड लेखाकार संस्थान और भारतीय कंपनी सचिव संस्थान के फेलो सदस्य हैं तथा उन्होंने बॉम्बे विश्वविद्यालय से विधि में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की है। वे हारवर्ड बिजनस स्कूल (पीएमडी) के पूर्व छात्र हैं तथा “एशियन इकॉनोमिजः रिजनल एंड ग्लोबल रिलेशनशिप्स” पर साल्जबर्ग सेमिनार के फेलो हैं।

श्री दोशी महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के पूर्व कार्यपालक निदेशक और ग्रूप सीएफओ हैं। वे अप्रैल 2008 से महिन्द्रा एंड महिन्द्रा फाइनैंशियल सर्विसेज लिमिटेड के अध्यक्ष भी रहे हैं और मार्च 2016 में भारतीय रिज़र्व बैंक के केंद्रीय निदेशक बोर्ड के निदेशक के रूप में उनका नामांकन होने पर उन्होंने यह पद छोड़ दिया।

वे महिन्द्रा इंटर ट्रेड लिमिटेड के अध्यक्ष हैं।

वे गोदरेज कंज्यूमर प्रॉडक्ट्स लिमिटेड के स्वतंत्र निदेशक भी हैं।

श्री दोशी महिन्द्रा यूनाइटेड वर्ल्ड कॉलेज ऑफ इंडिया, के.सी. महिन्द्रा एजुकेशन ट्रस्ट और महिन्द्रा फाउन्डेशन के नियंत्रक बोर्ड में भी हैं। वे गेटवे हाउसः इंडियन काउंसिल ऑन ग्लोबल रिलेशन्स के बोर्ड में भी हैं जो मुंबई में एक विदेशी नीति विचारक मंडल है।

पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से श्री दोशी विभिन्न विशेषज्ञ समितियों के सदस्य होने के नाते वाणिज्य और उद्योग चेम्बर्स के कार्य से भी सक्रियता के साथ जुड़े हुए हैं। उन्होंने वर्ष 2009-10 के लिए बॉम्बे वाणिज्य और उद्योग चेम्बर के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

वे वित्त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा गठित उच्चाधिकार विशेषज्ञ समिति के सदस्य थे जो मुंबई को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र बनाने के संबंध में थी। वे भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा गठित कार्यदल के सदस्य थे जो गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के विनियमन से संबंधित उभरते हुए व्यापक मुद्दों की जांच करने के संबंध में था और वे लघु कारोबार तथा कम आय परिवारों के लिए व्यापक वित्तीय सेवा (सीसीएफएस) पर भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा गठित समिति के सदस्य भी थे। वे प्रकटन और लेखांकन मानकों पर सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) द्वारा गठित समिति के सदस्य थे। वर्तमान में वे एक्सीलेंस एनैबलर्स के परामर्शदात्री बोर्ड में हैं। यह संगठन भारत में कॉर्पोरेट अभिशासन को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

श्री दोशी की करियर उपलब्धियों के कारण उन्हें कई अवार्ड और पुरस्कार प्राप्त हुए हैं जिनमें उन्हें बिजनस टुडे द्वारा “भारत के सर्वोत्तम सीएफओ”, वर्ष 2005 में आईएमए इंडिया तथा वर्ष 2007 में सीएनबीसी द्वारा “वर्ष का सर्वश्रेष्ठ सीएफओ” घोषित करना और अनुकरणीय करियर और वित्त के क्षेत्र में उनके जीवनभर के योगदान को देखते हुए सीएफओ इंडिया द्वारा उन्हें सीएफओ हॉल ऑफ फेम में संस्थापक सदस्य के रूप में शामिल करना है।


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