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Date: 04/07/2014
पण्यों की (कमोडीटी) कीमत संबंधी जोखिम की हेजिंग

(4 जुलाई 2014 की स्थिति के अनुसार)

भारत में निवास करने वाले किसी व्यक्ति को किसी प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I (एडी श्रेणी-I) बैंक के माध्यम से किसी पण्य बाज़ार (एक्स्चेंज) अथवा भारत के बाहर के बाज़ार में आयात/ निर्यात किए गए पण्यों, घरेलू लेनदेन, माल भाड़े संबंधी जोखिम आदि में कीमत जोखिम को हेज करने के लिए कांट्रैक्ट करने की अनुमति है। यहाँ पर प्राधिकृत व्यापारी बैंक मुख्यतः अंतर्निहित एक्सपोजर के सत्यापन के अधीन समय-समय पर मार्जिन अपेक्षाओं के प्रति विदेशी मुद्रा के विप्रेषण की सुविधा प्रदान करने की भूमिका निभाते हैं। भारत के निवासी दो चैनलों, अर्थात प्राधिकृत व्यापारी प्रत्यायोजित मार्ग तथा रिज़र्व बैंक के अनुमोदन मार्ग से हेज कर सकते हैं। पण्य कीमत जोखिम की हेजिंग को शासित करने वाले नियम/ दिशानिर्देशों पर अधिक स्पष्टता प्राप्त करने की दृष्टि से, पण्य हेजिंग से संबंधित प्रक्रिया तथा विभिन्न परिचालनगत मामलों में स्पष्टीकरण नीचे दिए गए हैं:

ए. पण्य हेजिंग

1. हेज कौन कर सकता है?

भारत का निवासी कोई व्यक्ति जिसका पण्य एक्सपोजर है तथा जिसे पण्यों की अस्थिर कीमतों के कारण और जोखिमों का सामना करना पड़ता है, फ्युचर्स तथा ऑप्शन्स जैसे हेजिंग उत्पादों, जोकि रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर अनुमत किए गए अनुसार एक्स्चेंज ट्रेडेड तथा ओवर द काउंटर (ओटीसी) डेरिवेटिव्स होते हैं, का उपयोग कर के अंतरराष्ट्रीय पण्य एक्स्चेंज / बाज़ारों में कीमत जोखिम को हेज कर सकते हैं। इसके लिए रिज़र्व बैंक / एडी श्रेणी-I बैंक का पूर्वानुमोदन आवश्यक है।

2. तेल कंपनियों को कौन-सी हेजिंग सुविधाएं उपलब्ध है?

रिज़र्व बैंक ने अनुमोदन/ प्रत्यायोजित मार्ग के माध्यम से तेल की कीमत की हेजिंग के लिए निम्नलिखित सुविधाएं अनुमत की हैं:

ए. अंतर्निहित संविदाओं के आधार पर कच्चे तेल के आयात तथा पैट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से उभरने वाले एक्सपोजर की हेजिंग।

बी. पिछले कार्यनिष्पादन के आधार पर कच्चे तेल के आयात से उभरने वाले एक्सपोजरों की पिछले वर्ष के दौरान वास्तविक आयात की मात्रा के 50 प्रतिशत तक अथवा पिछले तीन वित्तीय वर्ष के दौरान आयात की औसत मात्रा का 50 प्रतिशत, इनमें जो भी अधिक हो, तक हेजिंग।

सी. पिछली तिमाही से पहले की तिमाही में मात्राओं के 50 प्रतिशत तक की माल-सूची की हेजिंग।

डी. अंतर्निहित संविदाओं के आधार पर कच्चे तेल की घरेलू खरीद तथा पेट्रो उत्पादों की बिक्री से उभरने वाले एक्सपोजर की हेजिंग।

ई. जेट ईंधन के आयात/ निर्यात तथा उपयोगकर्ताओं अर्थात घरेलू एयरलाइन कंपनियों द्वारा जेट ईंधन की घरेलू खरीद पर एक्सपोजर की हेजिंग।

3. किन कंपनियों को तेल की कीमत से जुड़े जोखिम को हेज करने की अनुमति है?

ए. घरेलू तेल परिष्करण तथा विपणन कंपनियों को समुद्रपारीय एक्स्चेंज/ बाज़ारों पर कीमत के प्रतिकूल उतार-चढ़ावों के प्रभाव को कम करने के लिए कच्चे तेल तथा पेट्रोलियम उत्पादों पर अपनी कीमत जोखिम को हेज करने की अनुमति है।

बी. एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ़) के घरेलू उपयोगकर्ताओं को भी एटीएफ़ से संबंधित अपने कीमत जोखिम को समुद्रपारीय एक्स्चेंज/ ओटीसी बाज़ारों में हेज करने की अनुमति है।

4. पैट्रोलियम तथा पैट्रोलियम उत्पादों को छोड़कर अन्य कौनसे पण्यों को अंतरराष्ट्रीय एक्स्चेंज पर हेज किया जा सकता है?

ए. रिज़र्व बैंक ने कंपनियों को किसी भी पण्य (स्वर्ण, चाँदी, प्लैटिनम को छोड़कर) के संबंध में आयात/ निर्यात कीमत जोखिम को प्रत्यायोजित मार्ग के तहत अंतरराष्ट्रीय समुद्रपारीय एक्स्चेंज/ बाज़ारों में हेज करने की अनुमति दी है। अपने आयात/ निर्यात के संबंध में कीमत जोखिम को हेज करने की इच्छुक पात्र कंपनियाँ किसी भी एडी श्रेणी-I बैंक को आवेदन कर सकती हैं।

बी. रिज़र्व बैंक ने मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्स्चेंज पर सूचीबद्ध कंपनियों को भी एल्युमिनियम, कॉपर, लीड, निकेल तथा ज़िंक की घरेलू खरीद और बिक्री से संबंधित कीमत जोखिम को प्रत्यायोजित मार्ग के तहत हेज करने की अनुमति दी है। उपर्युक्त पण्यों के संबंध में कीमत जोखिम को हेज करने की इच्छुक पात्र कंपनियाँ किसी भी एडी श्रेणी-I बैंक को आवेदन कर सकती हैं।

5. विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईज़ेड) में कार्यरत कंपनियों के लिए कौनसी हेजिंग सुविधाएं अनुमत हैं?

एडी श्रेणी-I बैंक विशेष आर्थिक क्षेत्रों में कार्यरत कंपनियों को आयात/ निर्यात में पण्य कीमत जोखिम को समुद्रपारीय पण्य एक्स्चेंज/ बाज़ारों में हेजिंग लेनदेन करने की अनुमति दे सकते हैं। इस प्रकार के लेनदेन करने की अनुमति केवल तब दी जाती है जब आयात/ निर्यात लेनदेन के संबंध में एसईज़ेड के यूनिट का मेनलैंड अथवा एसईज़ेड के भीतर अपनी मूल कंपनी अथवा अनुषंगी कंपनी के साथ वित्तीय संपर्क पूर्णतः नहीं है।

बी. मालभाड़ा (फ्रेट) डिरिवैटिव

1. फ्रेट डेरीवाटिव क्या है?

फ्रेट डेरीवाटिव एक ऐसा वित्तीय लिखत है जिसका मूल्य “ड्राइ बल्क” रखाव दर तथा ऑइल टैंकर दर जैसे फ्रेट दरों के भावी स्तरों से व्युत्पन्न किया जाता है। फ्रेट डिरिवैटिव्स को मुख्यतः जहाज मालिक तथा बड़े माल गोदामों, तेल परिष्करण तथा विपणन कंपनियों जैसे आपूर्तिकर्ताओं जैसे अंतिम उपयोगकर्ताओं द्वारा जोखिम प्रबंध तथा आपूर्ति शृंखला में कीमत अस्थिरता को हेज करने के लिए उपयोग में लाया जाता है।

2. आरबीआई द्वारा कौन-सी संस्थाओं को फ्रेट जोखिम को हेज करने की अनुमति दी गई है?

तेल परिष्करण तथा विपणन कंपनियां, पोत परिवहन कंपनियाँ तथा अन्य कंपनियाँ जिनके पास फ्रेट घटक के कारण पर्याप्त उपरिव्यय है, को अंतर्निहित एक्सपोजर के आधार पर अंतर्राष्ट्रीय एक्स्चेंज/ ओटीसी बाज़ारों में फ्रेट जोखिम को हेज करने की अनुमति दी गई है। तेल परिष्करण तथा विपणन कंपनियों को प्रत्यायोजित मार्ग अर्थात एडी श्रेणी –I बैंक के माध्यम से हेज करने की अनुमति है तथा फ्रेट एक्सपोजर वाले अन्य कॉर्पोरेट को रिज़र्व बैंक से पूर्वानुमोदन प्राप्त करने के बाद हेज करने की अनुमति दी जाती है।

 
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