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nesce >> FAQs - Display
Date: 07/05/2018
भारत में विदेशी निवेश

(07 मई 2018 की स्थिति के अनुसार अद्यतन)

“अक्सर पूछे जानेवाले प्रश्न’ नामक यह शृंखला इस विषय पर उपयोगकर्ताओं द्वारा समान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर सरल भाषा में देने का प्रयास है। तथापि कोई लेनदेन करने के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 (फेमा) तथा उसके अंतर्गत बनाए गए विनियमों/ नियमों अथवा निदेशों का संदर्भ लें। इससे संबंधित मूल विनियमावली 07 नवंबर 2017 को अधिसूचित एवं समय समय पर यथासंशोधित विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण अथवा निर्गम) विनियमावली, 2017 [जिसे समान्यतः फेमा 20(आर) नाम से जाना जाता है] के मार्फत जारी की गई है। प्राधिकृत व्यक्तियों द्वारा उसके ग्राहकों और घटकों के साथ विदेशी मुद्रा संबंधी कारोबार को कैसे संचालित किया जाएगा, ताकि संबन्धित विनियमों का अनुपालन हो सके, इसके संबंध में दिशानिर्देश भारत में विदेशी निवेश पर जारी मास्टर निदेश में दिये गए हैं।

प्रश्न 1: भारतीय कंपनी किस प्रकार विदेशी निवेश प्राप्त कर सकती है ?
प्रश्न 2: भारतीय कंपनी में विदेशी निवेश प्राप्त करने के लिए कौनसी पूंजीगत लिखतें अनुमत हैं ?
प्रश्न 3: क्या अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय अधिमानी शेयर (सीसीपीएस) अथवा अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय डिबैंचर के विस्तार के लिए भा.रि.बैं. का अनुमोदन आवश्यक है?
प्रश्न 4: परिवर्तनीय नोट क्या है?
प्रश्न 5: परिवर्तनीय नोट में कौन निवेश कर सकता है तथा इस संबंध में क्या अनुदेश हैं?
प्रश्न 6: विदेशी निवेश, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश तथा विदेशी पोर्टफोलियो निवेश का अर्थ क्या है?
प्रश्न 7: पूर्णतः डाइल्यूटेड आधार पर पूंजी का अर्थ क्या है?
प्रश्न 8: क्या विदेशी निवेश को जिस अनुसूची के अंतर्गत निवेश किया जा रहा है उसके आधार पर एफ़डीआई अथवा एफ़पीआई के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा?
प्रश्न 9: किसी एफ़पीआई निवेश के लिए एक बार यदि उक्त निवेश को एफ़डीआई(आधार-कुल धारिता)के रूप में वर्गीकृत किए जाने पर यदि धारिता 10% से कम हो जाती है, तो क्या उस धारिता को पुनः एफ़पीआई के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा?
प्रश्न 10: किसी संस्था ने स्वचालित मार्ग के अंतर्गत विदेशी निवेश प्राप्त किया है और बाद में उस क्षेत्र को अनुमोदन मार्ग के अंतर्गत लाया गया है, तो क्या उस संस्था को किसी प्रकार के अनुमोदन की आवश्यकता है?
प्रश्न 11: सरकारी अनुमोदन अथवा संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय/ विभाग के संबंध में अथवा किसी गतिविधि अथवा क्षेत्रीय मार्ग के वर्गिकरण के संबंध में कोई संदेह होने के मामले में किस से संपर्क किया जाए?
प्रश्न 12: क्या फेमा 20(आर) में दी गई भारतीय कंपनी की परिभाषा में कंपनी अधिनियम, 1956 तथा कंपनी अधिनियम, 2013 दोनों के अंतर्गत निगमित कंपनियाँ शामिल (कवर) की गई हैं?
प्रश्न 13: क्या विदेशी निवेश के प्रतिशत की गणना कर्मचारी स्टॉक ऑप्शन (ईएसओपी) के निर्गम अथवा अधिकार निधान (वेस्टिंग) चरण पर अथवा निष्पादन के चरण पर की जानी है?
प्रश्न 14: फेमा 20(R) की अनुसूची 5 के संबंध में यदि ओई स्पष्टीकरण अपेक्षित हो तो किसे संपर्क किया जाए ?
प्रश्न 15: क्या भारतीय कंपनी में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश करने के लिए नकद रूप से भुगतान करना अनुमत है?
प्रश्न 16: क्या भारत में अर्जित निवेश तथा लाभ प्रत्यावर्तनीय हैं?
प्रश्न 17: प्रत्यावर्तनीय आधार पर निवेश तथा अप्रत्यावर्तनीय आधार पर निवेश का अर्थ क्या है?
प्रश्न 18: पूंजीगत लिखतों के मूल्यांकन संबंधी दिशा-निर्देश क्या हैं?
प्रश्न 19: एफ़डीआई सम्बद्ध कार्यनिष्पादन की शर्तों का अर्थ क्या है?
प्रश्न 20: क्या कोई विदेशी व्यक्ति भारत में भागीदारी फ़र्म / स्वामित्व कंपनी स्थापित कर सकता है?
प्रश्न 21: क्या कोई विदेशी निवेशक भारतीय कंपनी द्वारा बट्टे पर जारी किए गए राइट शेयरों में निवेश कर सकता है?
प्रश्न 22: क्या राइट शेयरों के परित्याग के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक का अनुमोदन आवश्यक है?
प्रश्न 23: क्या कोई एडी बैंक अनिवासी निवेशक द्वारा धारित किसी भारतीय कंपनी के शेयरों को किसी भारतीय बैंक, अथवा किसी समुद्रपारीय बैंक अथवा किसी एनबीएफ़सी के पक्ष में गिरवी रखने की अनुमति दे सकता है?
प्रश्न 24: क्या भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति को स्टॉक एक्स्चेंज पर पूंजीगत लिखत अर्जित करने की अनुमति है?
प्रश्न 25: प्रतिफल की प्राप्ति की तारीख से कितने दिन के भीतर पूंजीगत लिखत का निर्गम किया जाना चाहिए?
प्रश्न 26: निर्धारित समायावधि के भीतर पूंजीगत लिखत का निर्गम नहीं करने पर क्या होगा?
प्रश्न 27: आस्थगित भुगतान के समक्ष शेयरों के अंतरण के संबंध में क्या अनुदेश हैं?
प्रश्न 28: भारत में निवास करने वाले व्यक्ति तथा भारत के बाहर निवास करने वाले व्यक्ति के बीच आस्थगित भुगतान आधार पर पूंजीगत लिखतों के अंतरण के मामले में किस चरण पर फॉर्म एफ़सी-टीआरएस भरना अपेक्षित है?
प्रश्न 29: डाउन स्ट्रीम निवेश तथा अप्रत्यक्ष विदेशी निवेश की संकल्पना क्या है?
प्रश्न 30: क्या कोई भारतीय कंपनी (जिसका स्वामित्व तथा नियंत्रण भारत के बाहर के निवासी व्यक्तियों के पास है अथवा जिसका स्वामित्व तथा नियंत्रण निवासी भारतीय नागरिकों के पास नहीं है{एफ़ओसीसी}) द्वारा किसी अन्य भारतीय कंपनी के पूंजीगत लिखतों से इतर लिखतों में किए गए निवेश को डाउन स्ट्रीम निवेश माना जाएगा?
प्रश्न 31: चूंकि डाउनस्ट्रीम निवेश के संबंध में अनुदेश रिज़र्व बैंक द्वारा 2013 में जारी किए गए, इसलिए अनुदेश जारी किए जाने से पूर्व किए गए निवेश की स्थिति क्या होगी?
प्रश्न 32: क्या एनआरआई अथवा किसी ओसीआई द्वारा अन्य किसी एनआरआई अथवा ओसीआई के अलावा किसी अनिवासी को शेयरों के अंतरण के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक का अनुमोदन आवश्यक है?
प्रश्न 33: क्या किसी भारतीय कंपनी द्वारा शेयरों की पुनः खरीद/ पूंजी को घटाने के लिए एनसीएलटी/ सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित भारतीय कंपनियों के विलयन/ विलगाव (De-merger)/ समामेलन की योजना के अंतर्गत शेयरों की पुनः खरीद के लिए भारतीय कंपनी पर मूल्यनिर्धारण दिशानिर्देश लागू होते हैं?
प्रश्न 34: शेयरों के अंतरण की रिपोर्टिंग के लिए दिशानिर्देश क्या हैं?
प्रश्न 35: भारत में स्टॉक एक्स्चेंज पर निवेश के संबंध में विनियम क्या हैं?
प्रश्न 36: क्या भारत के बाहर का निवासी कोई व्यक्ति सरकारी प्रतिभूतियों/ राजकोषीय बिलों/ कॉर्पोरेट ऋण/ अन्य प्रतिभूतियों में निवेश कर सकता है?
प्रश्न 37: विदेशी जोखिम पूंजी निवेशक (एफ़वीसीआई) कौन है?
प्रश्न 38: विदेशी जोखिम पूंजी निवेशक (एफ़वीसीआई) कहाँ निवेश कर सकता है?
प्रश्न 39: एफ़वीसीआई निवेश के लिए भुगतान कैसे करेंगे?
प्रश्न 40: एफ़सीवीआई बिक्रीगत/ परिपक्वतागत आगम राशि बाहर कैसे ले जा सकते हैं?
प्रश्न 41: निवेश माध्यम (इनवेस्टमेंट वेहिकल) क्या है?
प्रश्न 42: निवेश माध्यम द्वारा डाउन स्ट्रीम निवेश के संबंध में क्या प्रावधान हैं?
प्रश्न 43: एआईएफ़ द्वारा किए गए निवेशों पर कौनसे प्रतिबंध हैं?
प्रश्न 44: विलंबित प्रस्तुति शुल्क (एलएसएफ़) का अर्थ क्या है?
प्रश्न 45: क्या रिपोर्टिंग में हुए विलंब को नियमित करने के लिए कंपाउंडिंग का विकल्प उपलब्ध है?
प्रश्न 46: विदेशी निवेशों के लिए विभिन्न रिपोर्टिंग औपचारिकताएँ बताएं।
प्रश्न 47: क्या प्रेस नोट / एफ़डीआई नीति के आधार पर विदेशी निवेश किया जा सकता है?

प्रश्न 1: भारतीय कंपनी किस प्रकार विदेशी निवेश प्राप्त कर सकती है?

उत्तर: जिन मार्गों के अंतर्गत विदेशी निवेश किया जा सकता है, वे निम्नानुसार हैं:

ए. स्वचालित मार्ग: फेमा 20(आर) के विनियम-16 में विनिर्दिष्ट किए गए अनुसार सभी गतिविधियों/ क्षेत्रों में सरकार अथवा भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन के बिना स्वचालित मार्ग के अंतर्गत विदेशी निवेश अनुमत है।

बी. सरकारी अनुमोदन मार्ग: स्वचालित मार्ग के अंतर्गत कवर न की गई गतिविधियों में विदेशी निवेश के लिए सरकार का पूर्वानुमोदन आवश्यक है। सरकार के अनुमोदन के लिए आवेदन करने की विधि http://fifp.gov.in/Forms/SOP.pdf पर दी गई है।

प्रश्न 2: भारतीय कंपनी में विदेशी निवेश प्राप्त करने के लिए कौन से पूंजीगत लिखत अनुमत हैं?

उत्तर: "पूंजीगत लिखत" का तात्पर्य भारतीय कंपनी द्वारा जारी इक्विटी शेयर, डिबेंचर, अधिमनी शेयर तथा शेयर वारंटों से है।

इक्विटि शेयर: इक्विटि शेयर वे शेयर हैं जो कंपनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुसार जारी किए गए हैं तथा इनमें 8 जुलाई 2014 को अथवा उसके बाद जारी किए गए आंशिक रूप से प्रदत्त इक्विटि शेयर भी शामिल हैं ।

शेयर वारंट: 8 जुलाई 2014 को अथवा उसके बाद जारी किए गए शेयर वारंट को पूंजीगत लिखत माना जाएगा।

डिबैंचर : ‘डिबेंचर” शब्द का अर्थ पूर्ण रूप से, अनिवार्यतः एवं अधिदेशात्मक रूप से परिवर्तनीय डिबेंचर है।

अधिमानी शेयर: ‘अधिमानी शेयर” शब्द का अर्थ पूर्ण रूप से, अनिवार्यतः एवं अधिदेशात्मक रूप से परिवर्तनीय अधिमनी शेयर है।

दिनांक 30 अप्रैल 2007 की स्थिति के अनुसार तथा उस दिनांक तक जारी अपरिवर्तनीय/ वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय / आंशिक रूप से परिवर्तनीय अधिमनी शेयर तथा दिनांक 07 जून 2007 तक जारी एवं उनकी मूल परिपक्वता अवधि तक वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय / आंशिक रूप से परिवर्तनीय डिबेंचर को एफ़डीआई के लिए योग्य पूंजीगत लिखत माना जाएगा। दिनांक 30 अप्रैल 2007 के पश्चात जारी अ-परिवर्तनीय/ वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय / आंशिक रूप से परिवर्तनीय अधिमनी शेयरों तथा दिनांक 07 जून 2007 के पश्चात जारी वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय / आंशिक रूप से परिवर्तनीय डिबेंचरों को कर्ज़ (उधार) माना जाएगा और उन्हें विदेशी मुद्रा प्रबंध (विदेशी मुद्रा में उधार लेना एवं उधार देना) विनियमावली, 2000 के तहत जारी बाह्य वाणिज्यिक उधार संबंधी दिशा-निर्देशों का अनुपालन करना होगा।

प्रश्न 3: क्या अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय अधिमानी शेयर (सीसीपीएस) अथवा अनिवार्य रूप से परिवर्तनीय डिबैंचर के विस्तार के लिए भारिबैं का अनुमोदन आवश्यक है?

उत्तर: परिवर्तनीय लिखतों की अवधि कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत बनाए गए अनुदेशों तथा उसके तहत बनाए गए नियमों के अनुसार होगी। तथापि निवेश प्राप्तकर्ता कंपनी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि परिवर्तनीय पूंजीगत लिखतों की कीमत/ परिवर्तन का फॉर्मूला लिखतों के निर्गम के समय प्रारंभ में ही निर्धारित किया जाता है। परिवर्तन के समय की कीमत किसी भी स्थिति में ऐसे लिखतों के निर्गम के समय वर्तमान फेमा विनियमों के अनुसार अभिकलित उचित मूल्य से कम नहीं होनी चाहिए।

प्रश्न 4: परिवर्तनीय नोट क्या है?

किसी स्टार्टअप कंपनी द्वारा जारी एक ऐसी लिखत, जो प्रारम्भिक तौर पर कर्ज़ के रूप में प्राप्त धनराशि को इंगित करती है और वह उसके धारक को उसके विकल्प पर पुनर्भुगतान योग्य होगी अथवा इस नोट को जारी करने की तारीख से पाँच वर्षों से अनधिक अवधि के भीतर उस संख्या में स्टार्टअप कंपनी के इक्विटी शेयरों में परिवर्तनीय होगी, साथ ही यह उक्त लिखत में उल्लिखित और स्वीकार किए गए नियमों और शर्तों के अनुरूप विशिष्ट स्थितियों में परिवर्तनीय होगी।

प्रश्न 5: परिवर्तनीय नोट में कौन निवेश कर सकता है तथा इस संबंध में क्या अनुदेश हैं?

उत्तर: भारत के बाहर का निवासी व्यक्ति (ऐसे व्यक्ति को छोड़कर जो बांग्लादेश अथवा पाकिस्तान का नागरिक अथवा बांग्लादेश अथवा पाकिस्तान में पंजीकृत/ निगमित एंटीटी है) एक हिस्से में पचीस लाख अथवा उससे अधिक राशि के लिए भारतीय स्टार्ट-उप कंपनी द्वारा जारी किए गए परिवर्तनीय नोट खरीद सकता है। ऐसे क्षेत्र में लिप्त स्टार्टअप कंपनी जिसमें विदेशी निवेश के लिए सरकार का अनुमोदन आवश्यक है, केवल ऐसा अनुमोदन प्राप्त करके भारत के बाहर के निवासी व्यक्ति को इस प्रकार के परिवर्तनीय नोट जारी कर सकती है। प्रतिफल की राशि बैंकिंग चैनलों के माध्यम से आवक विप्रेषण द्वारा अथवा विदेशी मुद्रा प्रबंधन (जमा) विनियमावली, 2016 के अनुसार खोले गए संबंधित व्यक्ति के एनआरई/ एफ़सीएनआर(बी)/ एस्क्रो खाते में नामे डालकर प्राप्त होगी।

प्रश्न 6: विदेशी निवेश, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश तथा विदेशी पोर्टफोलियो निवेश का अर्थ क्या है?

उत्तर: “विदेशी निवेश” अर्थात भारत के बाहर के निवासी व्यक्तियों द्वारा भारतीय कंपनियों की पूंजीगत लिखतों में तथा किसी एलएलपी की पूंजी में प्रत्यावर्तनीय आधार पर किया गया निवेश ।

“प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ़डीआई)” अर्थात भारत के बाहर के निवासी व्यक्तियों द्वारा गैर-सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों की पूंजीगत लिखतों के माध्यम से किया गया निवेश; अथवा सूचीबद्ध भारतीय कंपनी की पूर्णतः डाइल्यूटेड आधार पर जारी प्रदत्त इक्विटि के 10 प्रतिशत तक अथवा उससे अधिक किया गया निवेश;

“विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI)” अर्थात भारत के बाहर के निवासी व्यक्तियों द्वारा सूचीबद्ध भारतीय कंपनियों की पूर्णतः डाइल्यूटेड आधार पर जारी प्रदत्त इक्विटि के जरिए पूंजीगत लिखतों में 10 प्रतिशत से अनधिक किया गया निवेश अथवा किसी सूचीबद्ध भारतीय कंपनी द्वारा जारी पूंजीगत लिखतों की प्रत्येक शृंखला में 10 प्रतिशत से अनधिक मात्रा तक किया गया निवेश ।

प्रश्न 7: पूर्णतः डाइल्यूटेड आधार पर पूंजी का अर्थ क्या है?

उत्तर: पूर्णतः डाइल्यूटेड आधार पर का अर्थ है परिवर्तन के सभी संभाव्य स्रोतों को निष्पादित करने की स्थिति में बकाया रहने वाले शेयरों की कुल संख्या।

प्रश्न 8: क्या विदेशी निवेश को जिस अनुसूची के अंतर्गत निवेश किया जा रहा है उसके आधार पर एफ़डीआई अथवा एफ़पीआई के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा?

उत्तर: एफ़डीआई तथा एफ़पीआई जिस अनुसूची के अंतर्गत निवेश किया गया है उसकी दृष्टि से agnostic है। निवेश प्रत्यक्ष है अथवा पोर्टफोलियो, को निवेश के प्रतिशत के अनुसार तय किया जाता है।

प्रश्न 9 किसी एफ़पीआई निवेश के लिए एक बार यदि उक्त निवेश को एफ़डीआई (आधार कुल धारिता) के रूप में वर्गीकृत किए जाने पर यदि धारिता 10% से कम हो जाती है तो क्या उस धारिता को पुनश्च एफ़पीआई के रूप में वर्गीकृत किया जाएगा?

उत्तर: एक बार एफ़डीआई बन जाने पर वह सदा के लिए एफ़डीआई बनी रहेगी।

प्रश्न 10: किसी संस्था ने स्वचालित मार्ग के अंतर्गत विदेशी निवेश प्राप्त किया है और बाद में उस क्षेत्र को अनुमोदन मार्ग के अंतर्गत लाया गया है, तो क्या उस संस्था को किसी प्रकार के अनुमोदन की आवश्यकता है?

उत्तर: जब तक कि संस्था में विदेशी शेयर धारिता उतनी ही रहती है और उक्त क्षेत्र को अनुमोदन मार्ग के अंतर्गत लाए जाने के बाद कोई कॉर्पोरेट कार्रवाई नहीं की गई है तब तक अनुमोदन आवश्यक नहीं है।

प्रश्न 11: सरकारी अनुमोदन अथवा संबंधित प्रशासनिक मंत्रालय/ विभाग के संबंध में अथवा किसी गतिविधि अथवा क्षेत्रीय मार्ग के वर्गिकरण के संबंध में कोई संदेह होने के मामले में किस से संपर्क किया जाए?

उत्तर: कृपया औद्योगिक नीति एवं संवर्धन विभाग, भारत सरकार द्वारा जारी किए गए “ एफ़डीआई प्रस्तावों पर कार्रवाई करने के लिए मानक परिचालन क्रियाविधि (एसओपी) देखें- http://fifp.gov.in/Forms/SOP.pdf

प्रश्न 12: क्या फेमा 20(आर) में दी गई भारतीय कंपनी की परिभाषा में कंपनी अधिनियम, 1956 तथा कंपनी अधिनियम, 2013 दोनों के अंतर्गत निगमित कंपनियाँ कवर की गई हैं?

उत्तर: भारतीय कंपनी में वे सभी संस्थाएं हैं जो कि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 1(4) के अंतर्गत कवर की गई हैं।

प्रश्न 13: क्या विदेशी निवेश के प्रतिशत की गणना कर्मचारी स्टॉक ऑप्शन (ईएसओपी) के निर्गम अथवा अधिकार निधान (वेस्टिंग) चरण पर अथवा निष्पादन के चरण पर की जाती है

उत्तर: विदेशी निवेश के प्रतिशत की गणना पूर्णतः डायल्यूटेड आधार पर अर्थात कर्मचारी स्टॉक ऑप्शन के निर्गम के समय की जानी चाहिए।.

प्रश्न 14: फेमा 20(R) की अनुसूची 5 के संबंध में यदि ओई स्पष्टीकरण अपेक्षित हो तो किसे संपर्क किया जाए ?

उत्तर: वित्तीय बाज़ार विनियमन विभाग, भारतीय रिज़र्व बैंक।

प्रश्न 15: क्या भारतीय कंपनी में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश करने के लिए नकद रूप से भुगतान करना अनुमत है?

उत्तर: नहीं, भारत में विदेशी निवेश पर मास्टर निदेश का पैरा संख्या 7.13 देखें।

प्रश्न 16: क्या भारत में अर्जित निवेश तथा लाभ प्रत्यावर्तनीय हैं?

उत्तर : सभी विदेशी निवेश प्रत्यावर्तनीय (यथालागू करों को घटाकर) हैं, केवल उन मामलों को छोड़कर जहां निवेश अप्रत्यावर्तनीय आधार पर किया अथवा धारित किया गया है।

प्रश्न 17: प्रत्यावर्तनीय आधार पर निवेश तथा अप्रत्यावर्तनीय आधार पर निवेश का अर्थ क्या है?

उत्तर: प्रत्यावर्तनीय आधार पर निवेश का अर्थ है कोई निवेश जिसकी बिक्री/ परिपक्वता पर प्राप्त आय, यथालागू करों को घटाकर भारत के बाहर प्रत्यावर्तित किए जाने के लिए पात्र है। अप्रत्यावर्तनीय आधार पर निवेश इस वाक्यांश का अर्थ तदनुसार लगाया जाए।

प्रश्न 18: पूंजीगत लिखतों के मूल्यन संबंधी दिशानिर्देश क्या हैं?

उत्तर: कृपया फेमा 20(आर) का विनियम 11 देखें।

विवरण सूचीबद्ध कंपनी गैर सूचीबद्ध कंपनी
भारतीय कंपनी द्वारा जारी अथवा निवासी द्वारा अनिवासी को अंतरित– कीमत निम्नलिखित से कम नहीं होनी चाहिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के संबंधित दिशानिर्देशों के अनुसार अभिकलित कीमत; आर्म्स लेंथ आधार पर किए गए मूल्यांकन के लिए किसी भी अंतर्राष्ट्रीय रूप से स्वीकृत मूल्य निर्धारण पद्धति के अनुसार पूंजीगत लिखतों का मूल्यांकन जिसे सनदी लेखाकर, अथवा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड में रैजिस्टर्ड मर्चंट बैंकर अथवा व्यावसायिक कॉस्ट अकाउंटेंट द्वारा विधिवत प्रमाणित किया गया है
अनिवासी से निवासी को अंतरण – कीमत निम्नलिखित से अधिक नहीं होनी चाहिए: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के संबंधित दिशानिर्देशों के अनुसार अभिकलित कीमत; आर्म्स लेंथ आधार पर किए गए मूल्यांकन के लिए किसी भी अंतर्राष्ट्रीय रूप से स्वीकृत मूल्य निर्धारण पद्धति के अनुसार पूंजीगत लिखतों का मूल्यांकन जिसे सनदी लेखाकर, अथवा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड में रैजिस्टर्ड मर्चंट बैंकर द्वारा विधिवत प्रमाणित किया गया है

मूल्यनिर्धारण संबंधी दिशानिर्देश भारत के बाहर के निवासी व्यक्ति द्वारा अप्रत्यावर्तनीय आधार पर किए गए निवेश पर लागू नहीं होंगे।

प्रश्न 19: एफ़डीआई सम्बद्ध कार्यनिष्पादन की शर्तों का अर्थ क्या है?

उत्तर: एफ़डीआई सम्बद्ध कार्यनिष्पादन की शर्तें, विदेशी निवेश प्राप्त करने वाली कंपनियों के लिए फेमा 20(आर) के विनियम 16 में किसी क्षेत्र विशेष के लिए निर्धारित की गई शर्तें हैं।

प्रश्न 20: क्या कोई विदेशी व्यक्ति भारत में भागीदारी/ स्वामित्व कंपनी स्थापित कर सकता है?

उत्तर: केवल अनिवासी/ प्रवासी भारतियों (एनआरआई/ ओसीआई) को भारत में अप्रत्यावर्तनीय आधार पर भागीदारी/ स्वामित्व कंपनी में निवेश करने की अनुमति है।

प्रश्न 21: क्या कोई विदेशी निवेशक भारतीय कंपनी द्वारा बट्टे पर जारी किए गए राइट शेयरों में निवेश कर सकता है?

उत्तर: भारतीय कंपनी द्वारा कंपनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अंतर्गत बट्टे पर जारी किए गए राइट शेयरों में निवेश करने के लिए फेमा के अंतर्गत कोई प्रतिबंध नहीं हैं। भारत के बाहर के निवासी व्यक्तियों के लिए प्रस्ताव निम्नानुसार होगा:

ए. भारत में मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्स्चेंज पर सूचीबद्ध कंपनी के शेयरों के मामले में कंपनी द्वारा निर्धारित कीमत पर ; तथा

बी. भारत में मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्स्चेंज पर सूचीबद्ध नहीं की गई कंपनी के शेयरों के मामले में उस कीमत पर जो कि निवासी शेयर धारकों को राइट आधार पर प्रस्ताव जिस कीमत पर किया गया है उस से कम नहीं है।

प्रश्न 22: क्या राइट शेयरों के परित्याग के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक का अनुमोदन आवश्यक है?

उत्तर: नहीं, राइट शेयरों का परित्याग फेमा 20 (आर) के विनियम 6 के साथ पठित दिनांक 4 जनवरी 2018 भारत में विदेशी निवेश पर मास्टर निदेश के पैरा 6.11 में निहित अनुदेशों के अनुसार किया जाएगा।

प्रश्न 23: क्या कोई एडी बैंक अनिवासी निवेशक द्वारा धारित किसी भारतीय कंपनी के शेयरों को किसी भारतीय बैंक, अथवा किसी समुद्रपारीय बैंक अथवा किसी एनबीएफ़सी के पक्ष में गिरवी रखने की अनुमति दे सकता है?

उत्तर: हां, भारत में विदेशी निवेश पर मास्टर निदेश के पैरा 7.11 में निर्धारित शर्तों के अधीन अनुमति दे सकता है।

प्रश्न 24: क्या भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति को स्टॉक एक्स्चेंज पर पूंजीगत लिखत अर्जित करने की अनुमति है?

उत्तर: निम्नलिखित व्यक्ति स्टॉक एक्स्चेंज पर पूंजीगत लिखत अर्जित कर सकते हैं:

ए. सेबी में पंजीकृत एफ़पीआई।

बी. अनिवासी भारतीय

सी. उपर्युक्त (ए) तथा (बी) को छोड़कर , भारत के बाहर का निवासी व्यक्ति स्टॉक एक्स्चेंज पर पूंजीगत लिखत इस शर्त के अधीन अर्जित कर सकता है कि उक्त निवेशक ने पहले ही सेबी (शेयरों का पर्याप्त अर्जन और अधिग्रहण) विनियमावली, 2011 के अनुसार ऐसी कंपनी का नियंत्रण हासिल कर लिया है और ऐसे नियंत्रण को बनाए रखा है; ऐसा करना भारत में विदेशी निवेश पर मास्टर निदेश के अनुबंध I में विनिर्दिष्ट शर्तों के अधीन भी होगा।

प्रश्न 25: प्रतिफल की प्राप्ति की तारीख से कितने दिन के भीतर पूंजीगत लिखत का निर्गम किया जाना चाहिए ?

उत्तर: भारतीय कंपनी द्वारा प्रतिफल की प्राप्ति की तारीख से साठ दिन के भीतर पूंजीगत लिखत का निर्गम किया जाना चाहिए।

प्रश्न 26: निर्धारित समायावधि के भीतर पूंजीगत लिखत का निर्गम नहीं करने पर क्या होगा?

उत्तर: यदि भारतीय कंपनी द्वारा प्रतिफल की प्राप्ति की तारीख से साठ दिन के भीतर पूंजीगत लिखत का निर्गम नहीं किया जाता है तो इस प्रकार से प्राप्त राशि को साठ दिन पूर्ण होने की तारीख से पंद्रह दिन के भीतर संबंधित व्यक्ति को बैंकिंग चैनल के माध्यम से बाहरी विप्रेषण द्वारा अथवा उसके एनआरई/ एफ़सीएनआर(बी) खाते, जैसी स्थिति हो, में जमा कर के वापस किया जाना चाहिए।

प्रश्न 27: आस्थगित भुगतान के समक्ष शेयरों के अंतरण के संबंध में क्या अनुदेश हैं?

उत्तर: किसी निवासी क्रेता तथा अनिवासी विक्रेता अथवा इसके विपरीत, के बीच शेयरों के अंतरण के मामले में क्रेता द्वारा अंतरण करार की तारीख से अठारह महीने से अनधिक अवधि के भीतर कुल प्रतिफल के पचीस प्रतिशत से अनधिक राशि का भुगतान आस्थगित आधार पर किया जा सकता है। आस्थगित राशि या तो हर्जाने अथवा एस्क्रो के स्वरूप की हो सकती है। सभी मामलों में मूल्यनिर्धारण दिशानिर्देशों का अनुपालन किया जाए।

प्रश्न 28: भारत में निवास करने वाले व्यक्ति तथा भारत के बाहर निवास करने वाले व्यक्ति के बीच आस्थगित भुगतान आधार पर पूंजीगत लिखतों के अंतरण के मामले में किस चरण पर फॉर्म एफ़सी-टीआरएस भरना अपेक्षित है?

उत्तर: भुगतान की प्रत्येक शृंखला की प्राप्ति पर एडी बैंक में फॉर्म एफ़सी-टीआरएस भरना है। रिपोर्टिंग का दायित्व निवासी अंतरंकर्ता/ अंतरिती का होगा।

प्रश्न 29: डाउन स्ट्रीम निवेश तथा अप्रत्यक्ष विदेशी निवेश की संकल्पना क्या है?

उत्तर: डाउन स्ट्रीम निवेश का अर्थ है किसी भारतीय कंपनी जिसमें पूर्ण विदेशी निवेश है अथवा किसी निवेश माध्यम द्वारा किसी अन्य भारतीय संस्था के पूंजीगत लिखतों अथवा पूंजी, जैसी स्थिति हो में किया गया निवेश।

यदि निवेशक कंपनी में कुल विदेशी निवेश है तथा निवासी भारतीय नागरिकों के पास जिसका स्वामित्व तथा नियंत्रण नहीं है अथवा उसका स्वामित्व तथा नियंत्रण भारत के बाहर निवास करने वाले व्यक्तियों के पास है तो, निवेश प्राप्तकर्ता कंपनी के लिए ऐसे निवेश “अप्रत्यक्ष विदेशी निवेश” होंगे।

प्रश्न 30: क्या कोई भारतीय कंपनी (जिसका स्वामित्व तथा नियंत्रण भारत के बाहर के निवासी व्यक्तियों के पास है अथवा जिसका स्वामित्व तथा नियंत्रण निवासी भारतीय नागरिकों के पास नहीं है{एफ़ओसीसी})द्वारा किसी अन्य भारतीय कंपनी के पूंजीगत लिखतों से इतर लिखतों में किए गए निवेश को डाउन स्ट्रीम निवेश माना जाएगा?

उत्तर: नहीं।

प्रश्न 31: चूंकि डाउन स्ट्रीम निवेश के संबंध में अनुदेश रिज़र्व बैंक द्वारा 2013 में जारी किए गए, इसलिए अनुदेश जारी किए जाने से पूर्व किए गए निवेश की स्थिति क्या होगी?

उत्तर: 13 फरवरी 2009 से पूर्व विद्यमान दिशानिर्देशों के अनुसार किए गए डाउन स्ट्रीम निवेश को इन विनियमों के अनुसार होने के लिए कोई आशोधन आवश्यक नहीं होगा। उक्त तारीख के बाद किए गए सभी अन्य निवेश फेमा 20(आर) की परिधि में आएंगे। 13 फरवरी 2009 तथा 21 जून 2013 के बीच किए गए डाउनस्ट्रीम निवेश जो इन विनियमों का अनुपालन नहीं करते हैं, को ऐसे मामलों को इन विनियमों के अनुसार समझने के लिए रिज़र्व बैंक को 3 अक्तूबर 2013 तक रिपोर्ट किए जाने चाहिए थे।

प्रश्न 32: क्या एनआरआई अथवा किसी ओसीआई द्वारा अन्य किसी एनआरआई अथवा ओसीआई के अलावा किसी अनिवासी को शेयरों के अंतरण के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक का अनुमोदन आवश्यक है?

उत्तर: नहीं

प्रश्न 33: क्या किसी भारतीय कंपनी द्वारा शेयरों की पुनः खरीद/ पूंजी को घटाने के लिए एनसीएलटी/ सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदित भारतीय कंपनियों के विलयन/ विलगाव (De-merger)/ समामेलन की योजना के अंतर्गत शेयरों की पुनः खरीद के लिए भारतीय कंपनी पर मूल्यनिर्धारण दिशानिर्देश लागू होते हैं

उत्तर: हां। भारतीय कंपनी के लिए एफ़सी-टीआरएस भी भरना आवश्यक है।

प्रश्न 34: शेयरों के अंतरण की रिपोर्टिंग के लिए दिशानिर्देश क्या हैं?

उत्तर: फॉर्म एफ़सीटीआरएस फेमा 20(आर) के अनुसार निम्नलिखित के बीच बिक्री के माध्यम से पूंजीगत लिखतों के अंतरण के लिए फ़ाइल किया जाएगा

i. भारत के बाहर निवास करने वाला व्यक्ति जिसने प्रत्यावर्तनीय आधार पर किसी भारतीय कंपनी में पूंजीगत लिखत धारण किए हैं, से भारत के बाहर निवास करने वाला व्यक्ति जिसने अप्रत्यावर्तनीय आधार पर पूंजीगत लिखत धारण किए हैं को;

ii. भारत के बाहर निवास करने वाला व्यक्ति जिसने अप्रत्यावर्तनीय आधार पर पूंजीगत लिखत धारण किए हैं से भारत के बाहर निवास करने वाला व्यक्ति जिसने प्रत्यावर्तनीय आधार पर किसी भारतीय कंपनी में पूंजीगत लिखत धारण किए हैं को;

iii. भारत के बाहर निवास करने वाला व्यक्ति जिसने प्रत्यावर्तनीय आधार पर किसी भारतीय कंपनी में पूंजीगत लिखत धारण किए हैं से भारत में निवास करने वाले व्यक्ति को;

iv. भारत में निवास करने वाला व्यक्ति जिसने किसी भारतीय कंपनी में पूंजीगत लिखत धारण किए हैं से भारत के बाहर निवास करने वाला व्यक्ति जिसने प्रत्यावर्तनीय आधार पर किसी भारतीय कंपनी में पूंजीगत लिखत धारण किए हैं को

फेमा 20(आर) के विनियम 10(3) में निर्धारित किए गए अनुसार भारत के बाहर के निवासी व्यक्ति द्वारा किसी मान्यताप्राप्त स्टॉक एक्स्चेंज पर पूंजीगत लिखतों की बिक्री को ऐसे व्यक्ति द्वारा फॉर्म एफ़सी-टीआरएस में रिपोर्ट किया जाना चाहिए।

एफ़सी-टीआरएस निम्नलिखित के लिए आवश्यक नहीं है:

i. अप्रत्यावर्तनीय आधार पर शेयर धारित करने वाले अनिवासी द्वारा भारतीय कंपनी के शेयरों का किसी निवासी को अंतरण तथा इसके विपरीत

ii. भारत के बाहर निवास करने वाला व्यक्ति जिसने प्रत्यावर्तनीय आधार पर किसी भारतीय कंपनी में पूंजीगत लिखत धारण किए हैं द्वारा भारत के बाहर निवास करने वाला व्यक्ति जिसने प्रत्यावर्तनीय आधार पर पूंजीगत लिखत धारण किए हैं।

iii. उपहार के रूप में शेयरों का अंतरण

रिपोर्टिंग का दायित्व निवासी (अंतरणकर्ता/ अंतरिती) अथवा अप्रत्यावर्तनीय आधार पर पूंजीगत लिखत धारण करने वाले भारत के बाहर निवास करने वाले व्यक्ति, जैसी स्थिति हो, का होगा। एडी बैंक के पास फॉर्म एफ़सी-टीआरएस निधियों की प्राप्ति/ विप्रेषण अथवा पूंजीगत लिखतों के अंतरण, इनमें से जो भी पहले हो, के साठ दिन के भीतर फ़ाइल किया जाना है।

II. विदेशी संविभाग (पोर्टफोलियो) निवेश

प्रश्न 35: भारत में स्टॉक एक्स्चेंज पर निवेश के संबंध में विनियम क्या हैं?

उत्तर: सेबी (एफ़पीआई) विनियमावली के अनुसार पंजीकृत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक तथा अनिवासी / प्रवासी भारतीय, फेमा 20(आर) की अनुसूची क्रमशः 2 तथा 3 में निर्धारित व्यक्तिगत तथा कुल सीमाओं के अधीन भारत में स्टॉक एक्स्चेंज पर निवेश कर सकते हैं।

III. अन्य प्रतिभूतियों में निवेश

प्रश्न 36: क्या भारत के बाहर का निवासी कोई व्यक्ति सरकारी प्रतिभूतियों/ राजकोषीय बिलों/ कॉर्पोरेट ऋण/ अन्य प्रतिभूतियों में निवेश कर सकता है?

उत्तर: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक(एफ़पीआई), अनिवासी भारतीय(एनआरआई), प्रवासी भारतीय(ओसीआई), विदेशी केंद्रीय बैंक,बहुदेशीय विकास बैंक दीर्घकालिक निवेशक, जैसे, सोवरिन वेल्थ फंड (एसडब्ल्यूएफ), बहुदेशीय एजंसियां, एन्डाउमन्ट फंड, इन्श्योरन्स फंड तथा पेंशन फंड, जो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड दीर्घकालिक निवेशक में पंजीकृत हैं, अधिसूचना सं. फेमा 20 की अनुसूची 5 में विनिर्दिष्ट किए गए अनुसार अन्य प्रतिभूतियों में निवेश कर सकते हैं।

प्रश्न 37: विदेशी जोखिम पूंजी निवेशक(एफ़वीसीआई) कौन है?

उत्तर: “विदेशी जोखिम पूंजी निवेशक (FVCI)” अर्थात ऐसा निवेशक जो भारत से बाहर स्थापित और निगमित है और वह भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (विदेशी जोखिम पूंजी निवेशक) विनियमावली, 2000 के तहत भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) में पंजीकृत है।

प्रश्न 38: विदेशी जोखिम पूंजी निवेशक(एफ़वीसीआई) कहाँ निवेश कर सकता है?

उत्तर: सेबी में पंजीकृत विदेशी जोखिम पूंजी निवेशक(एफ़वीसीआई) फेमा 20 (आर) की अनुसूची 7 में निर्धारित शर्तों के अनुसार निवेश कर सकते हैं।

प्रश्न 39: एफ़वीसीआई निवेश के लिए भुगतान कैसे करेंगे?

उत्तर: एफ़वीसीआई द्वारा किए गए सभी निवेश के लिए प्रतिफल राशि बैंकिंग चैनलों के जरिए विदेश से किए गए आवक विप्रेषण से प्राप्त अथवा एफ़सीवीआई द्वारा भारत में एडी बैंक में बनाए रखे गए विदेशी मुद्रा खाते और/ अथवा विशेष अनिवासी रुपया (एसएनआरआर) खाते में धारित निधियों में से अदा की जा सकेगी। विदेशी मुद्रा खाते और विशेष अनिवासी रुपया (एसएनआरआर) खाते का उपयोग केवल संबंधित अनुसूची के अंतर्गत लेनदेन के लिए ही किया जाएगा।

प्रश्न 40: एफ़सीवीआई बिक्रीगत/ परिपक्वतागत आगम राशि बाहर कैसे ले जा सकते हैं?

उत्तर: बिक्रीगत/ परिपक्वतागत आगम राशि (करों का निवल) का विप्रेषण भारत के बाहर किया जा सकता है अथवा विदेशी जोखिम पूंजी निवेशक के विदेशी मुद्रा खाते अथवा विशेष अनिवासी रुपया (एसएनआरआर) खाते में जमा किया जा सकता है।

प्रश्न 41: निवेश माध्यम(इनवेस्टमेंट वेहिकल) क्या है?

उत्तर: निवेश माध्यम’ का अर्थ है ऐसी एंटीटी से है जो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अथवा इस प्रयोजन के लिए नामित किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा निर्मित संबन्धित विनियमों के तहत पंजीकृत और विनियमित है। फेमा 20(आर) की अनुसूची 8 के प्रयोजन के लिए निवेश माध्यम भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (REITs) विनियमावली, 2014 द्वारा प्रशासित रियल इस्टेट निवेश ट्रस्ट (REITs), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (InvIts) विनियमावली, 2014 द्वारा प्रशासित इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्ट और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (AIFS) विनियमावली, 2012 द्वारा प्रशासित अल्टरनेटिव निवेश निधियाँ इसमें शामिल हैं । इसमें भूतपूर्व सेबी (उद्यम पूंजी निधि) विनियमावली, 1996 के अंतर्गत पंजीकृत उद्यम पूंजी निधि शामिल नहीं है।

प्रश्न 42: निवेश माध्यम द्वारा डाउन स्ट्रीम निवेश के संबंध में क्या प्रावधान हैं?

उत्तर: किसी निवेश माध्यम जिसका प्रयोजक अथवा प्रबंधक अथवा निवेश प्रबंधक का (i) निवासी भारतीय नागरिकों के पास स्वामित्व तथा नियंत्रण नहीं है अथवा (ii) उसका स्वामित्व तथा नियंत्रण भारत के बाहर निवास करने वाले व्यक्तियों के पास है द्वारा भारतीय कंपनी अथवा एलएलपी में किया गया निवेश निवेश प्राप्त कर्ता कंपनी अथवा एलएलपी, जैसी स्थिति हो, के लिए अप्रत्यक्ष विदेशी निवेश होगा।

प्रश्न 43: एआईएफ़ द्वारा किए गए निवेशों पर कौनसे प्रतिबंध हैं?

उत्तर: वैकल्पिक (अल्टरनेटिव) निवेश निधि श्रेणी III जिसे कोई विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है वो केवल उन सिक्युरिटीज अथवा लिखतों में ही पोर्टफोलियो निवेश कर सकती हैं जिनमें अधिनियम तथा उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों अथवा विनियमों के अधीन निवेश करने की अनुमति है।

IV. रिपोर्टिंग में विलंब

प्रश्न 44: विलंबित प्रस्तुति शुल्क (एलएसएफ़) का अर्थ क्या है?

उत्तर: 7 नवंबर 2017 को अथवा उसके बाद किए गए लेनदेन के मामलों में रिपोर्टिंग करने में विलंब होने पर रिपोर्टिंग पर मास्टर निदेश के भाग IV में दिए गए अनुसार रिपोर्टों को फ़ाइल करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति/ एंटीटी पर विलंब से प्रस्तुति के लिए लगाए गए शुल्क का भुगतान करने का दायित्व होगा। एलएसएफ़ का भुगतान करना कंपाउंडिंग क्रियाविधि से गुजरे बिना रिपोर्टिंग में हुए विलंब को नियमित करने का एक अतिरिक्त विकल्प है।

प्रश्न 45: क्या रिपोर्टिंग में हुए विलंब को नियमित करने के लिए कंपाउंडिंग का विकल्प उपलब्ध है?

उत्तर: एलएसएफ़ का भुगतान करना कंपाउंडिंग क्रियाविधि से गुजरे बिना रिपोर्टिंग में हुए विलंब को नियमित करने के लिए एक अतिरिक्त सुविधा है। तथापि इसका यह अर्थ नहीं है कि आवेदक कंपाउंडिंग के लिए आवेदन नहीं कर सकता है। 7 नवंबर 2017 को अथवा उसके बाद किए गए लेनदेन के लिए आवेदक को दोनों विकल्प उपलब्ध हैं।

प्रश्न 46: विदेशी निवेशों के लिए विभिन्न रिपोर्टिंग औपचारिकताएँ बताएं।

उत्तर: विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 के अंतर्गत रिपोर्टिंग संबंधी मास्टर निदेश में रिपोर्टिंग अपेक्षाओं को निर्धारित किया गया है।

प्रश्न 47: क्या प्रेस नोट/ एफ़डीआई नीति के आधार पर विदेशी निवेश किया जा सकता है?

उत्तर: फेमा, 1999 के तहत जारी की गई अधिसूचना के आधार पर विदेशी निवेश किया जा सकता है।

 
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