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nesce >> FAQs - Display
Date: 29/01/2018
फेमा, 1999 के तहत उल्लंघनों की कंपाउंडिंग

(29 जनवरी 2018 तक अद्यतन)

अक्सर पूछे जानेवाले प्रश्नो (FAQ’s) के इस समूह में उक्त विषय पर प्रयोगकर्ताओं के सामान्य प्रश्नों के उत्तर आसानी से समझ में आनेवाली भाषा में दिए गए हैं। तथापि, कम्पाउण्डिंग के प्रयोजन से विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम (फेमा), 1999, विदेशी मुद्रा [कम्पाउण्डिंग प्रोसीडिंग्स (क्रियाविधि)] नियमावली तथा मास्टर निदेश- फेमा, 1999 के अंतर्गत उल्लंघनों की कम्पाउण्डिंग (1 जनवरी 2016 का विमुवि के मास्टर निदेश सं.4/2015-16 तथा जिसे 22 दिसम्बर 2017 की स्थिति के अनुसार अद्यतन किया गया है) का ग्रहण संदर्भ करें।

प्रश्न 1. उल्लंघन और उल्लंघनों की कंपांउंडिंग का अर्थ क्या है?

उत्तर: उल्लंघन का अर्थ विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम (फेमा), 1999 और उसके तहत जारी किसी नियम/ विनियम/ अधिसूचना/ आदेश/ निर्देश/ परिपत्र के प्रावधानों को भंग करना है। कंपाउंडिंग का अर्थ उल्लंघन को स्वैच्छिक रूप से स्वीकार करना, दोष स्वीकार करना और उसके निवारण के लिए अनुरोध करना है। रिज़र्व बैंक को फेमा, 1999 की धारा 13 में यथा परिभाषित उल्लंघनों के अंतर्गत (उक्त अधिनियम की धारा 3(ए) के तहत हुए उल्लंघनों को छोड़कर) उक्त अधिनियम के संबंध में उल्लंघनकर्ता को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देने के बाद विनिर्दिष्ट राशि के लिए उल्लंघनों की कंपाउंडिंग करने का अधिकार है। यह एक स्वैच्छिक प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत कोई व्यक्ति अथवा कंपनी स्वीकार किए गए उल्लंघन की कंपाउंडिंग के लिए अनुरोध करता/करती है। फेमा,1999 के किसी उपबंध (धारा 3(ए) के अलावा) के उल्लंघन के संबंध में कंपाउंडिंग प्रणाली में लेनदेन की प्रक्रियागत लागत अपेक्षाकृत कम होती है, जिससे उल्लंघनकर्ता को अपने उल्लंघन की कंपाउंडिंग में सहूलियत मिलती है। तथापि, जान-बूझकर अथवा गलत इरादे से किए गए उल्लंघन और कपटपूर्ण लेनदेन आदि को गंभीरता से लिया जाता है, जिनकी कंपाउंडिंग रिज़र्व बैंक द्वारा नहीं की जाती है। इसके अलावा, भारत सरकार की दिनांक 16 फरवरी 2017 की अधिसूचना द्वारा विनिर्दिष्ट विदेशी मुद्रा(कम्पाउण्डिंग क्रियाविधि) नियमावली, 2000 के नियम 8(2) के परंतुक के अनुसार यदि प्रवर्तन निदेशालय की यह राय है कि कम्पाउण्डिंग क्रियाविधि धन-शोधन निवारण, आतंकवाद का वित्तपोषण अथवा राष्ट्र की सार्वभौमिकता एवं अखंडता को प्रभावित करने की आशंका वाले गंभीर उल्लंघनों से संबंधित है, तो रिज़र्व बैंक द्वारा ऐसे मामलों की कम्पाउण्डिंग नहीं की जाएगी।

प्रश्न 2. कंपाउंडिंग के लिए कौन आवेदन कर सकता है?

उत्तर: यदि कोई व्यक्ति फेमा, 1999 के किसी प्रावधान (धारा 3(ए) को छोड कर) का उल्लंघन करता है अथवा इस अधिनियम के तहत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए जारी किये गये किसी नियम, विनियम, अधिसूचना, निर्देश अथवा आदेश का उल्लंघन करता है अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा जिस शर्त के अधीन प्राधिकार जारी किया गया है उस शर्त का उल्लंघन करता है, तो वह रिज़र्व बैंक के पास कंपाउंडिंग के लिए आवेदन कर सकता है। फेमा, 1999 की धारा 3(ए) के तहत उल्लंघनों की कंपाउंडिंग के आवेदन प्रवर्तन निदेशालय को प्रस्तुत किए जाने चाहिए।

प्रश्न 3. किसी व्यक्ति को कंपाउंडिंग के लिए आवेदन कब करना चाहिए?

उत्तर: यदि किसी व्यक्ति को रिज़र्व बैंक अथवा अन्य किसी सांविधिक प्राधिकारी अथवा लेखा-परीक्षक से अथवा किसी अन्य प्रकार से फेमा, 1999 के प्रवधानों के उल्लंघन के बारे में ज्ञात होता है, तो वह कंपाउंडिंग के लिए आवेदन कर सकता/सकती है। कोई व्यक्ति उल्लंघन के बारे में ज्ञात होने पर अपने आप भी कंपाउंडिंग के लिए आवेदन कर सकता है।

प्रश्न 4. कंपाउंडिंग के लिए आवेदन की प्रक्रिया क्या है?

उत्तर: कंपाउंडिंग के लिए आवेदन करने हेतु दिनांक 1 जनवरी 2016 (24 जनवरी 2018 की स्थिति के अनुसार अद्यतन किया गया) के “मास्टर निदेश – विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 के अंतर्गत रिपोर्टिंग” में सूचीबद्ध रिपोर्टिंग तथा अन्य फॉर्मों का उपयोग किया जा सकता है। उक्त मास्टर निदेश रिज़र्व बैंक की वेबसाइट अर्थात http://www.rbi.org.in/Scripts/FS_Notification.aspx?fn=5&fnn=2764 लिंक पर क्लिक कर के उसे डाउनलोड किया जा सकता है तथा उसमें उल्लिखित यथा लागू दस्तावेज भी आवेदनपत्र के साथ संलग्न किए जाने चाहिए।

प्रश्न 5. क्या कंपाउंडिंग के लिए किसी शुल्क का भुगतान किया जाना आवश्यक है?

उत्तर: हाँ। कंपाउंडिंग के लिए अनुरोध करते समय आवश्यक दस्तावेजों के साथ विनिर्दिष्ट फार्मेट में आवेदन पत्र और "भारतीय रिज़र्व बैंक" के पक्ष में आहरित रु.5000/- (पांच हजार रुपए मात्र) का डिमांड ड्राफ्ट भारतीय रिज़र्व बैंक को प्रेषित किया जाना चाहिए।

प्रश्न 6. आवेदन पत्र-फार्म में कौन-सी जानकारी भरनी है?

उत्तर: फेमा, 1999 के तहत उल्लंघनों की कंपाउंडिंग के लिए आवेदन करते समय विनिर्दिष्ट फार्मेट में आवेदन पत्र के साथ, आवेदक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), बाह्य वाणिज्यिक उधार (ECB), समुद्रपारीय प्रत्यक्ष निवेश (ODI) तथा शाखा कार्यालय/संपर्क कार्यालय, यथा लागू, से संबंधित संलग्नकों (अनुलग्नक प्रश्न 4 के उत्तर में उल्लिखित विमुवि मास्टर निदेश सं. 18/2015-16 में उपलब्ध) के अनुसार ब्योरे भी प्रस्तुत करें, जिसके साथ इस आशय का एक वचनपत्र हो कि वे प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय जाँच ब्यूरो, आदि जैसी किसी एजेंसी की जाँच के अधीन नही हैं, साथ ही संस्था के बहिर्नियम तथा अद्यतन लेखापरीक्षित तुलन-पत्र की प्रतिलिपि भी संलग्न की जाए।

प्रश्न 7. कंपाउंडिंग के लिए किसे आवेदन किया जाएगा?

उत्तर: पूर्व में लागू 3 मई 2000 की अधिसूचना सं.फेमा. 20/ 2000-आरबी के निम्नलिखित उल्लंघनों की कंपाउंडिंग के अधिकार (शक्तियां) भारतीय रिज़र्व बैंक, विदेशी मुद्रा विभाग के क्षेत्रीय कार्यालयों को प्रत्यायोजित किए गए हैं:

क्र.सं. फेमा – विनियम उल्लंघन का संक्षिप्त ब्योरा
1. अनुसूची-। का पैराग्राफ 9(1)(A) शेयरों के निर्गम हेतु आवक विप्रेषण/णों की रिपोर्टिंग में विलंब।
2. अनुसूची-। का पैराग्राफ 9 (1)(B) शेयरों के निर्गम के बाद फार्म एफसी-जीपीआर फाइल करने में विलंब।
3. अनुसूची-। का पैराग्राफ 8 शेयरों को जारी करने/ शेयर आवेदन राशि को लौटाने में 180 दिनों से अधिक का विलंब, निधियों की प्राप्ति के तरीके, आदि।
4. अनुसूची-। का पैराग्राफ 5 शेयरों के निर्गम के लिए कीमत निर्धारण संबंधी दिशानिर्देशों का उल्लंघन।
5. विनियम 5(1) के साथ पठित विनियम 2(ii) अपरिवर्तनीय डिबेंचरों, अंशत: प्रदत्त शेयरों, आप्शनैलिटी उपबंध वाले शेयरों जैसे अपात्र लिखतों को जारी करना।
6. अनुसूची-। का पैराग्राफ 2 अथवा 3 भारतीय रिज़र्व बैंक अथवा विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड के अनुमोदन/मंजूरी, जहां कहीं आवश्यक हो, के बिना शेयर जारी करना।
7. अनुसूची-। के पैराग्राफ 10 के साथ पठित विनियम 10A (b)(i) निवासी से अनिवासी को शेयरों के अंतरण के मामले में फार्म FC-TRS के प्रस्तुतीकरण में विलंब।
8. पैराग्राफ 10 के साथ पठित विनियम 10B (2) अनिवासी से निवासी को शेयरों के अंतरण के मामले में फार्म FC-TRS के प्रस्तुतीकरण में विलंब।
9. विनियम 4 प्रमाणित फार्म FC-TRS के अभाव में, निवेश प्राप्तकर्ता कंपनी द्वारा शेयरों के अंतरण को रेकार्ड में लेना।

पूर्ववर्ती 3 मई 2000 की अधिसूचना सं.फेमा. 20/ 2000-आरबी के अधिक्रमण में रिज़र्व बैंक ने विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत के बाहर के निवासी किसी व्यक्ति द्वारा प्रतिभूति का अंतरण एवं निर्गम) विनियमावली, 2017 जिसे 7 नवम्बर 2017 की अधिसूचना सं. 20(R)/2017-RB द्वारा अधिसूचित किया गया है, जारी की है। तदनुसार फेमा 20(R)/2017-RB के निम्नलिखित उल्लंघनों को कम्पाउण्ड करने संबंधी कंपाउंडिंग के अधिकार (शक्तियां) भारतीय रिज़र्व बैंक के क्षेत्रीय कार्यालयों को प्रत्यायोजित किए गए हैं:

फेमा - विनियम उल्लंघन का संक्षिप्त ब्योरा
विनियम 13.1(1) शेयरों के निर्गम हेतु प्राप्त आवक विप्रेषण/णों की रिपोर्टिंग में विलंब।
विनियम 13.1(2) शेयरों के निर्गम के बाद फार्म एफसी-जीपीआर फाइल करने में विलंब।
विनियम 13.1(3) विदेशी देयताओं तथा आस्तियों संबंधी वार्षिक विवरणी फाइल करने में विलंब
अनुसूची I का पैरा 2 शेयरों को जारी करने/शेयर आवेदन राशि को लौटाने में 60 दिनों से अधिक का विलंब, निधियों की प्राप्ति के तरीके, आदि।
विनियम 11 शेयरों के निर्गम/ अंतरण के लिए कीमत निर्धारण संबंधी दिशानिर्देशों का उल्लंघन।
विनियम 5 के साथ पठित विनियम 2(v) अपात्र लिखतों को जारी करना।
विनियम 16.B भारतीय रिज़र्व बैंक अथवा भारत सरकार के अनुमोदन/ मंजूरी, जहां कहीं आवश्यक हो, के बिना शेयर जारी करना।
विनियम 13.1(4) निवासी से अनिवासी को शेयरों के अंतरण के मामले में फार्म FC-TRS के प्रस्तुतीकरण में विलंब।
विनियम 4 निवेश प्राप्तकर्ता कंपनी द्वारा अनिवासी से भारत में निवेश प्राप्त करना या शेयरों के अंतरण को रेकार्ड में लेना।

विदेशी निवेश प्रभाग(एफ़आईडी) के तीन प्रभागों अर्थात, संपर्क/ शाखा/ परियोजना कार्यालय (एलओ/ बीओ/ पीओ) प्रभाग, अनिवासी विदेशी खाता प्रभाग(एनएफ़आरएडी) तथा अचल संपत्ति (आईपी) प्रभाग का कार्य 15 जुलाई 2014 से विदेशी मुद्रा विभाग, केंद्रीय कार्यालय कक्ष, भारतीय रिज़र्व बैंक, 6, संसद मार्ग, नई दिल्ली -110001 को अंतरित किया गया है। तदनुसार विमुवि, केंद्रीय कार्यालय कक्ष, नई दिल्ली से सम्बद्ध अधिकारी अब निम्नलिखित उल्लंघनों को कम्पाउण्ड करने के लिए प्राधिकृत है:

क्र.सं. फेमा अधिसूचना उल्लंघन का संक्षिप्त वर्णन
1. फेमा 7/2000-आरबी, दिनांक 3.5.2000 भारत से बाहर अचल संपत्ति के अर्जन एवं अंतरण से संबंधित उल्लंघन
2. फेमा 21/2000-आरबी, दिनांक 3.5.2000 भारत में अचल संपत्ति के अर्जन एवं अंतरण से संबंधित उल्लंघन
3. फेमा 22/2000-आरबी, दिनांक 3.5.2000 भारत में शाखा कार्यालय, संपर्क कार्यालय अथवा परियोजना कार्यालय (LO/BO/ PO) की स्थापना से संबंधित उल्लंघन
4. फेमा 5/2000-आरबी, दिनांक 3.5.2000 विदेशी मुद्रा प्रबंध (जमा) विनियमावली, 2000 के अंतर्गत आने वाले उल्लंघन

ऊपर उल्लिखित उल्लंघनों की कंपाउंडिंग सभी क्षेत्रीय कार्यालयों (कोच्ची एवं पणजी क्षेत्रीय कार्यालयों को छोड़कर) द्वारा उल्लंघन राशि की सीमा पर विचार किए बिना की जा सकती है। पणजी और कोच्ची क्षेत्रीय कार्यालय एक सौ लाख रुपये (रु.1,00,00,000/-) से कम के उक्त उल्लंघनों की कंपाउंडिंग कर सकते हैं। पणजी और कोच्ची क्षेत्रीय कार्यालयों के अधिकार क्षेत्र के एक सौ लाख रुपये (रु.1,00,00,000/-) एवं उससे अधिक के उल्लंघनों तथा फेमा के तहत हुए सभी अन्य उल्लंघनों की कंपाउंडिंग फेमा के प्रभावी कार्यान्वयन कक्ष (CEFA/सेफा), मुंबई द्वारा अब तक की भांति की जाती रहेगी। तदनुसार, उपर्युक्त वर्णित उल्लंघनों से संबंधित कंपाउंडिंग के लिए आवेदन पत्र, संबंधित एंटिटियों द्वारा क्रमश: उन क्षेत्रीय कार्यालयों, जिनके अधिकार-क्षेत्र में वे आती हैं अथवा विदेशी मुद्रा विभाग, केन्द्रीय कार्यालय कक्ष, नई दिल्ली, यथा लागू, को प्रस्तुत किए जाएंगे। सभी अन्य उल्लंघनों के लिए, आवेदनपत्र CEFA, विदेशी मुद्रा विभाग, 11 वीं मंजिल, केंद्रीय कार्यालय भवन, शहीद भगत सिंह रोड, फोर्ट, मुंबई - 400001 को प्रस्तुत किए जाएंगे। रु.5000/- के निर्धारित शुल्क का भुगतान ''भारतीय रिज़र्व बैंक'' के पक्ष में आहरित डिमांड ड्राफ्ट के द्वारा किया जाए, जो आवेदन पत्र प्रस्तुत करने के स्थान अर्थात संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय के स्थान पर देय होगा और यदि आवेदन पत्र सेफा, मुंबई को प्रस्तुत किया जाता है, तो मुंबई में देय होना चाहिए।

प्रश्न 8. क्या कतिपय अनिवार्य प्रतिबद्धताओं को पूरा किए बिना कंपाउंडिंग आवेदन पत्र रिज़र्व बैंक को प्रस्तुत किया जा सकता है ?

उत्तर : नहीं। उल्लंघनों की कंपाउंडिंग के लिए अनुरोध करने से पहले सभी आवश्यक अनुमोदन प्राप्त करने चाहिए और अनुपालन पूर्ण किये जाने चाहिए। कार्योत्तर अनुमोदन प्राप्त करने के बाद अभिलेखों का परिशोधन (rectification) करने तथा जो मामले फेमा, 1999 के तहत अनुमत नहीं हैं, तत्संबंधी हुए लेनदेनों को वापस करने/रद्द करने के बाद ही कंपाउंडिंग की जा सकती है। अनुमोदनों तथा अन्य अनुपालनों की प्रतियाँ आवेदन पत्र के साथ संलग्न की जानी चाहिए।

प्रश्न 9. आवेदन पत्र की प्राप्ति पर रिज़र्व बैंक दवारा क्या कार्रवाई की जाती है?

उत्तर: रिज़र्व बैंक यह सत्यापित करने के लिए आवेदन पत्र की छान-बीन करता है कि आवेदक द्वारा प्रस्तुत किए गए ब्योरे और दस्तावेज प्रथम दृष्ट्या सही हैं। अपूर्ण ब्योरों वाले अथवा जहाँ उल्लंघन स्वीकार नहीं किया गया है, ऐसे आवेदनपत्र आवेदक को लौटा दिए जाते हैं। आवेदन पत्र स्वीकार किए जाने पर रिज़र्व बैंक उसकी जाँच करेगा और निर्णय लेगा कि उल्लंघन तकनीकी, मटीरियल अथवा संवेदनशील स्वरूप में से किस प्रकार का है? यदि तकनीकी उल्लंघन होगा तो आवेदक को सतर्क रहने की सूचना देने वाला पत्र जारी किया जाएगा। यदि उल्लंघन मटीरियल होगा तो उल्लंघनकर्ता को कंपाउंडिंग प्राधिकारी के समक्ष स्वयं सुनवाई का अवसर देने के बाद दंड लगाकर कंपाउंडिंग की जाएगी। यदि उल्लंघन संवेदनशील स्वरूप का होगा जिसमें आगे जाँच की आवश्यकता महसूस होगी तो उसे आगे की जाँच/कार्रवाई के लिए प्रवर्तन निदेशालय को संदर्भित कर दिया जाएगा।

प्रश्न 10. संवेदनशील उल्लंघन कौन-से हैं?

उत्तर: धन-शोधन निवारण, आतंकवाद का वित्तपोषण अथवा राष्ट्र की सत्ता तथा अखंडता को प्रभावित करने की आशंका वाले गंभीर उल्लंघनों को संवेदनशील उल्लंघन माना जाएगा।

प्रश्न 11. तकनीकी, मटीरियल और संवेदनशील उल्लंघनों का वर्गीकरण कौन करेगा?

उत्तर: विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम (फेमा) के अंतर्गत हुए तकनीकी और / अथवा छोटे अथवा गंभीर उल्लंघन को वर्गीकृत करने का निर्णय, मामले के गुण-दोषों के आधार पर, रिज़र्व बैंक द्वारा लिया जाएगा। इस संबंध में अधिसूचित प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए आवेदन पत्र का निपटान किया जाएगा। फेमा के उपबंधों का उल्लंघनकर्ता व्यक्ति अपने आप अथवा किसी बाहरी सलाह पर स्वयं इस बात का निर्णय न ले कि उल्लंघन विशेष/ तकनीकी अथवा छोटे स्वरूप का है और इसलिए उसे रिज़र्व बैंक के पास कंपाउंडिंग के लिए आवेदन नहीं करना चाहिए। यदि ऐसे आवेदनपत्र कंपाउंडिंग के लिए प्रस्तुत नहीं किए जाएंगे तो संबंधित व्यक्ति अपने को फेमा के उपबंधों के अंतर्गत उन कार्रवाईयों के लिए दायी बनायेगा जिन्हें प्राधिकारियों द्वारा उचित समझा जाएगा। इसलिए संबंधित व्यक्ति को चाहिए कि वह विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम के अंतर्गत हुए उल्लंघन/नों की कंपाउंडिंग के लिए आवेदन पत्र, स्वयं अपने हित में, यथाशीघ्र रिज़र्व बैंक को प्रस्तुत करे।

प्रश्न 12. किसी उल्लंघन को टेक्निकल कब वर्गीकृत किया जाएगा?

उत्तर: यह स्पष्ट किया जाता है कि जब कभी रिज़र्व बैंक द्वारा किसी उल्लंघन की पहचान की जाती है अथवा उल्लंघन में शामिल एंटिटी द्वारा कंपाउंडिंग के लिए आवेदन के बजाय किसी संदर्भ के मार्फत उसे जानकारी में लाया जाता है तो बैंक द्वारा निर्णय लिया जाएगा कि क्या वह (i) उल्लंघन टेक्निकल और/अथवा मामूली स्वरूप का है, यदि हां, तो उस पर प्रशासनिक/सचेतक सूचना के मार्फत कार्रवाई की जा सकती है; (ii) वह मामला मटीरियल स्वरूप का है और यदि हां तो उसकी कंपाउंडिंग अपेक्षित होगी और तत्संबंध में कंपाउंडिंग की अपेक्षित प्रक्रिया पूरी की जाएगी; अथवा (iii) क्या मामला संवदेनशील/गंभीर स्वरूप का है और उसे प्रवर्तन निदेशालय को संदर्भित करने की आवश्यकता हो सकती है। तथापि, संबंधित एंटिटी द्वारा उल्लंघन स्वीकार करते हुए स्वयं कंपाउंडिंग हेतु एक बार आवेदन करने पर, उसे टेक्निकल अथवा मामूली स्वरूप का नहीं माना जाएगा और विदेशी मुद्रा (कंपाउंडिंग) नियमावली, 2000 के साथ पठित विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 की धारा 15(1) के अनुसार कंपाउंडिंग की प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।

13. क्या वैयक्तिक सुनवाई के लिए उपस्थित होना अनिवार्य है?

उत्तर: वैयक्तिक सुनवाई के लिए उपस्थित रहना अनिवार्य नहीं है। यदि कोई व्यक्ति वैयक्तिक सुनवाई के लिए उपस्थित न रहने का विकल्प चुनता है तो वह अपनी इच्छा/ पसंद (preference) लिखित रूप में दे सकता है। कंपाउंडिंग प्राधिकारी को प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर आवेदन पत्र का निपटान किया जाएगा। यह नोट किया जाए कि मामले में स्वयं उपस्थित होने अथवा न आने का विकल्प देने से कंपाउंडिंग आदेश में लगाई गई दण्डात्मक राशि पर कोई असर नहीं पड़ता है।

प्रश्न 14. क्या आवेदक वैयक्तिक सुनवाई के लिए उपस्थित रहने हेतु किसी अन्य व्यक्ति को प्राधिकृत कर सकता है?

उत्तर: हाँ! आवेदक वैयक्तिक सुनवाई के लिए उपस्थित रहने हेतु अपनी ओर से किसी अन्य व्यक्ति को केवल उचित लिखित प्राधिकार के साथ प्राधिकृत कर सकता है। यह सुनिश्चित करना होगा कि आवेदक की ओर से उपस्थित होने वाला व्यक्ति उल्लंघन के स्वरूप और उससे संबंधित विषय से परिचित हो। हालांकि, रिज़र्व बैंक व्यक्तिगत सुनवाई के लिए आवेदक द्वारा किसी प्रतिनिधि को भेजने/विधि विशेषज्ञ/कंसल्टैंट, आदि को साथ लाने के बजाय उसे स्वयं उपस्थित होने के लिए प्रोत्साहित करता है क्योंकि कंपाउंडिंग प्रायः स्वयं द्वारा स्वीकृत उल्लंघन की ही होती है।

प्रश्न 15. कंपाउंडिंग प्रक्रिया का निष्कर्ष किस तरह निकाला जाता है?

उत्तर: कंपाउंडिंग प्राधिकारी उल्लंघन तथा फेमा, 1999 के उस/उन प्रावधानों, जिसका/जिनका उल्लंघन किया गया है, के ब्योरे दर्शाते हुए एक आदेश पारित करते हैं। उल्लंघन की कंपाउंडिंग के लिए देय राशि कंपाउंडिंग आदेश में दर्शायी जाती है। लगाये गये दण्ड के भुगतान पर उल्लंघन की कंपाउंडिंग की जाती है।

प्रश्न 16. क्या कंपाउंडिंग आदेश सार्वजनिक किए जाते हैं?

1 जून 2016 को अथवा उसके बाद पारित कंपाउंडिंग आदेश भारतीय रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर प्रकाशित किए जाते हैं। वेबसाइट के आंकड़ों को निम्नलिखित फ़ारमैट*** में मासिक अंतरालों पर अद्यतन किया जाता है :

क्र.सं. आवेदक का नाम दंड की राशि भुगतान किया/ नहीं किया गया आदेश को डाउन्लोड करें

प्रश्न 17. कंपाउंडिंग की राशि की गणना के मानदंड क्या हैं?

दंड की राशि की गणना करने के लिए मार्गदर्शी ढांचा नीचे दिए गए अनुसार है:

उल्लंघन का प्रकार प्रचलित सिद्धान्त

1] रिपोर्टिंग संबंधी उल्लंघन
ए) फेमा 20
पैरा 9(1)(ए), 9(1)(बी), FCTRS (Reg. 10) तथा FCTRS (Reg. 4) के रेकॉर्ड संबंधी मामले

बी) फेमा 3
ECB विवरणियों को प्रस्तुत न करना

C) फेमा 120
यूआईएन को प्राप्त किए बिना किए गए दूसरे/ अनुवर्ती विप्रेषण नीचे मद.5 के अंतर्गत आएगा। सहायक कंपनियों/ उप-अनुषंगी सहायक कंपनियों की स्थापना/ अधिग्रहण / शेयरधारिता के पैटर्न में परिवर्तन संबंधी रिपोर्टिंग न करना / रेपोर्टिंग में विलंब करना

डी) अन्य कोई उल्लंघन (पंक्ति-2 में नीचे दिये गए को छोडकर)

निश्चित राशि : रुपये 10000/- (कम्पाउंडिंग आवेदन में प्रत्येक उल्लंघन पर एक बार लागू) +

निम्नलिखित परिवर्ती राशि :

रुपये 10 लाख तक : 1000 प्रतिवर्ष

रुपये 10-40 लाख तक : 2500 प्रतिवर्ष

रुपये 40-100 लाख तक : 7000 प्रतिवर्ष

रुपये 1-10 करोड़ तक : 50000 प्रतिवर्ष

रुपये 10-100 करोड़ तक : 100000 प्रतिवर्ष

रुपये 100 करोड़ से अधिक : 200000 प्रतिवर्ष

ई) LO/BO/PO द्वारा रिपोर्टिंग संबंधी उल्लंघन

उपर्युक्त के अनुसार, 2 लाख रुपये की अधिकतम सीमा के अधीन। परियोजना कार्यालय के मामले में, कम्पाउंडिंग की राशि परियोजना की कुल कीमत के 10% पर आकलित की जाएगी।

2] AAC/ APR/ शेयर प्रमाणपत्र जारी करने में विलंब
APR/शेयर प्रमाणपत्र (फेमा-120) अथवा AAC (फेमा-22) अथवा FCGPR (B) विवरणियाँ (फेमा-20)/ अथवा एफ़एलए विवरणियाँ (फेमा 20(आर)) को प्रस्तुत न करना / विलंब से प्रस्तुत करना

- AAC/APR/FCGPR (B) की विलंबित विवरणी हेतु रुपये 10000/- प्रति विवरणी ।
- शेयर प्रमाणपत्रों का विलंब से प्राप्त होना – रुपये 10000/- प्रतिवर्ष, यह राशि कुल निवेश राशि के 300% की अधिकतम सीमा के अधीन होगी ।

3]
ए] आबंटन / रिफ़ंड

फेमा-20/2000-आरबी का पैरा-8 (शेयरों को आबंटित न करना अथवा निर्धारित 180 दिनों की अवधि के पश्चात शेयर आबंटित करना / रिफ़ंड करना)

B] LO/BO/PO
(रिपोर्टिंग उल्लंघनों के अलावा अन्य उल्लंघन)

रुपये 30000/- + निम्नलिखित प्रतिशत:
1ला वर्ष : 0.30%
1-2 वर्ष : 0.35%
2-3 वर्ष : 0.40%
3-4 वर्ष : 0.45%
4-5 वर्ष : 0.50%
> 5 वर्ष : 0.75%
(परियोजना कार्यालय के मामले में, उल्लंघन की राशि परियोजना की कुल कीमत के 10% पर आकलित की जाएगी।)

4] कॉर्पोरेट गारंटियों को छोडकर अन्य सभी उल्लंघन लेकिन इनमें एफ़एलए विवरणियों को छोड़कर 17 नवंबर 2017 के फेमा 20 (आर)/ 2017-आरबी के सभी उल्लंघन शामिल होंगे।

रुपये 50000/- + निम्नलिखित प्रतिशत :
1ला वर्ष : 0.50%
1-2 वर्ष : 0.55%
2-3 वर्ष : 0.60%
3-4 वर्ष : 0.65%
4-5 वर्ष : 0.70%
> 5 वर्ष : 0.75%

5] UIN के बिना कॉर्पोरेट गारंटियाँ जारी करना /
जहां अनुमति ली जानी जरूरी है वहाँ अनुमति के बिना गारंटी जारी करना / खुली गारंटियाँ अथवा कॉर्पोरेट गारंटी संबंधी अन्य कोई उल्लंघन।

रुपये 500000/- + निम्नलिखित प्रतिशत :
1ला वर्ष : 0.050%
1-2 वर्ष : 0.055%
2-3 वर्ष : 0.060%
3-4 वर्ष : 0.065%
4-5 वर्ष : 0.070%
> 5 वर्ष: 0.075%
इन उल्लंघनों में यदि ऐसे ऋण जिन्हें भारत में पुनः निवेशित किया गया हो, को जुटाने के लिए गारंटियाँ जारी करना, शामिल हैं तो ऐसे मामलों में कम्पाउंडिंग राशि को तिगुना किया जाएगा।

दिनांक 7 नवंबर 2017 (अर्थात 7 नवंबर 2017 के पूर्व के उल्लंघनों के प्रारंभ की तारीख) को फेमा 20 के विद्यमान तथा जारी उल्लंघनों (एफ़एलएआर को छोड़कर) की कंपाउंडिंग उपर्युक्त 1(ए) के अनुसार की जाएगी।

उपर्युक्त राशियाँ निम्नलिखित परंतुको (proviso) के अधीन हैं, यथा:-

(i) कंपाउंडिंग की राशि उल्लंघन राशि के 300% से अधिक न हों।

(ii) रिपोर्टिंग संबंधी उल्लंघनों के मामलों में यदि उल्लंघन की राशि 1 लाख रुपये से कम हो, तो ऐसे मामलों में कंपाउंडिंग की राशि उल्लंघन की वास्तविक राशि और उल्लंघन अवधि के 5% प्रतिवर्ष की दर से आकलित सामान्य ब्याज की राशि से अधिक न हों, अन्य सभी उल्लंघनों के मामलों में ये राशि 10% प्रतिवर्ष की दर पर होगी।

(iii) फेमा 20/2000-आरबी की अनुसूची-I के पैराग्राफ 8 संबंधी उल्लंघनों के मामलों में, दण्ड की राशि को निम्नप्रकार श्रेणीबद्ध किया गया है :

  1. भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन के बिना यदि 180 दिनों के बाद शेयर आबंटित किए जाए, तो उपर्युक्त टेबल में आकलित की गई राशि के अनुसार दण्ड की राशि 1.25 गुना होगी (उपर्युक्त परंतुक (i) और (ii) के प्रावधानों के अधीन)।

  2. यदि शेयर आबंटित न किए जाए और रिज़र्व बैंक की अनुमति से 180 दिनों के पश्चात राशि लौटाई जाए, तो उपर्युक्त टेबल में आकलित की गई राशि के अनुसार दण्ड की राशि 1.50 गुना होगी (उपर्युक्त परंतुक (i) और (ii) के प्रावधानों के अधीन)।

  3. यदि शेयर आबंटित न किए जाए और रिज़र्व बैंक की अनुमति के बिना 180 दिनों के पश्चात राशि लौटाई जाए, तो उपर्युक्त टेबल में आकलित की गई राशि के अनुसार दण्ड की राशि 1.75 गुना होगी (उपर्युक्त परंतुक (i) और (ii) के प्रावधानों के अधीन)।

(iv) उन मामलों में, जहां यह स्पष्ट हो जाता है कि उल्लंघनकर्ता द्वारा अनुचित लाभ प्राप्त किया गया है, ऐसे मामलों में उपर्युक्त सारणी (चार्ट) के अनुसार आकलित की गई कम्पाउंडिंग राशि में उस राशि को यथोचित सीमा तक जोड़कर उसे न्यूट्रलाइज किया जा सकता है।

उपर्युक्त पैरा- 1 (रिपोर्टिंग संबंधी उल्लंघनों) के तहत कम्पाउंडिंग राशि के आकलन हेतु उल्लंघन की अवधि को समानुपातिक दर से {(लगभग अगले उच्चतम माह में पूर्णांकित÷12) x एक वर्ष अवधि की राशि} आकलित किया जाएगा। दिनों की कुल संख्या में रविवार /अवकाश के दिनों को भी शामिल किया जाएगा।

तथापि यह नोट किया जाए की उपर्युक्त के अनुसार मार्गदर्शी ढांचा केवल विभिन्न कार्यालयों में कंपाउंडिंग प्राधिकारियों द्वारा लगाई जानेवाली दंड की राशि को मोटे तौर पर मानकीकृत करने के प्रयोजन के लिए है तथा दंड की वास्तविक राशि मेँ फेमा, 1999 के अंतर्गत उल्लंघनों की कम्पाउंडिंग पर मास्टर निदेश (दिनांक 1 जनवरी 2016 का मास्टर निदेश सं. 4/ 2015-16 जिसे 22 दिसंबर 2017 तक अद्यतन किया गया है) के पैराग्राफ सं. 7.3 में दिए गए तथ्यों को ध्यान में लेते हुए मामले की परिस्थितियों के आधार पर परिवर्तन हो सकता है।

प्रश्न 18. आदेश में दी गयी राशि कब अदा की जाएगी?

उत्तर: दण्ड की राशि कंपाउंडिंग आदेश की तारीख से 15 दिनों के भीतर "भारतीय रिज़र्व बैंक" के पक्ष में आहरित डिमांड ड्राफ्ट से अदा की जानी चाहिए जो कंपाउंडिंग आदेश जारी करने वाले क्षेत्रीय कार्यालय पर देय हो और यदि आदेश सेफा, मुंबई द्वारा जारी किया गया हो तो मुंबई में देय होनी चाहिए।

प्रश्न 19. कंपाउंडिंग आवेदन पत्र अंत में किस प्रकार निपटाया जाता है?

उत्तर: जिस उल्लंघन के लिए कंपाउंडिंग की जाती है, उसके लिए दण्डात्मक राशि की प्राप्ति पर रिज़र्व बैंक द्वारा एक प्रमाणपत्र जारी किया जाता है जिसमें लिखा होता है कि आवेदक ने कंपाउंडिंग प्राधिकारी द्वारा पारित आदेश का अनुपालन कर दिया है।

कंपाउंड किए गए उल्लंघन के बाबत किसी भी अन्य प्राधिकारी द्वारा द्वितीय न्याय निर्णय नहीं किया जा सकता है। फेमा, 1999 के अनुसार जहां किसी धारा के तहत किसी उल्लंघनकर्ता पर उल्लंघन के लिए एक बार कंपाउंडिंग हो जाती है, उसके तहत वहां कोई कार्रवाई अथवा आगे और कोई कार्रवाई, जैसा भी मामला हो, न तो प्रारंभ की जाएगी, न जारी रखी जाएगी क्योंकि संबंधित व्यक्ति पर तत्संबंध में कंपाउंडिंग हो चुकी है।

प्रश्न 20. यदि आदेश की तारीख से 15 दिनों के भीतर रकम अदा नहीं की जाती है तो क्या होता है?

उत्तर: यदि आदेश की तारीख से 15 दिनों के भीतर रकम अदा नहीं की जाती है तो यह समझा जाएगा कि आवेदक ने रिज़र्व बैंक को कंपाउंडिंग के लिए कभी भी आवदेन नहीं किया था और उल्लंघन के संबंध में फेमा, 1999 के अन्य उपबंधों लागू होंगे। ऐसे मामले आवश्यक कार्रवाई के लिए प्रवर्तन निदेशालय को संदर्भित किए जाएंगे।

प्रश्न 21. क्या कंपाउंडिंग प्राधिकारी के आदेश के विरुद्ध कोई अपील की जा सकती है?

उत्तर: चूँकि स्वैच्छिक रूप से स्वीकार और प्रकट किए गए मामलों के आधार पर कंपाउंडिंग होती है, इसलिए कंपाउंडिंग नियमावली के अंतर्गत कंपाउंडिंग प्राधिकारी के आदेश के विरुद्ध किसी अपील, दण्ड को कम करने अथवा दण्ड को भरने के लिए मोहलत देने हेतु उपबंध नहीं है।

प्रश्न 22. कंपाउंडिंग प्रक्रिया को पूरा करने की समय-सीमा क्या है?

उत्तर: रिज़र्व बैंक को सभी प्रकार से पूर्ण आवेदन पत्र की प्राप्ति की तारीख से 180 दिनों के भीतर सामान्यत: कंपाउंडिंग प्रक्रिया पूरी की जाती है।

प्रश्न 23. कंपाउंडिंग के संबंध में और ब्योरे कहाँ मिल सकते हैं?

उत्तर: कोई भी व्यक्ति रिज़र्व बैंक की वेबसाइट पर उपलब्ध कंपाउंडिंग संबंधी मास्टर निदेश देख सकता है ।

 
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